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क्रांति पर उद्धरण

यह स्त्री शिष्टाचार में क्रांति लाने का समय है—उन्हें उनकी खोई गरिमा लौटाने का समय। यह अपरिवर्तनीय नैतिकता को स्थानीय शिष्टाचार से अलग करने का समय है।

मैरी वोलस्टोनक्राफ़्ट

कुछ उद्देश्य है कि लोग परिवर्तनकामी हों, वे सड़ी-गली व्यवस्था से विद्रोह करें। शोषक-वर्ग, सामान्य जन का बेखटके शोषण करता रहे। यह एक देशव्यापी षडयंत्र है—जिसमें राजनीतिज्ञ, सरमायेदार, बुद्धिजीवी आदि शामिल हैं।

हरिशंकर परसाई

शक्ति का प्रयोग अत्यंत आवश्यक होने पर ही उचित है, और आम जनता के तमाम आंदोलनों के लिए अहिंसा की नीति अपरिहार्य है।

भगत सिंह

वास्तव किसी क्रांति से सामान्य आदमी को आज़ादी नहीं मिलती, वह हमेशा ग़ुलाम रहता है। आज़ादी हमेशा शासक और शोषक वर्ग को मिलती है।

हरिशंकर परसाई

विज्ञापन क्रांति तक का अनुवाद अपनी भाषा में कर देता है।

जॉन बर्जर

क्रांति जीवन से प्रेम करती है और जीवन का सृजन करती है, और जीवन का सृजन करने के लिए उसे कुछ लोगों को—जो जीवन को सीमाबद्ध करते हैं—रोकना पड़ सकता है।

पॉलो फ़्रेरा

आज का भारतीय प्रगतिशील आंदोलन प्रतिक्रियावादी असबाब से लदा हुआ है, जो अंतर्विरोध पैदा करता है।

एम. एन. राय

उनका कहना था कि किसी भी सामाजिक क्रांति के लिए पहले एक दार्शनिक क्रांति का होना आवश्यक है।

एम. एन. राय

चुपचाप बैठने से अधिकार कभी नहीं मिलते। बिना सच्चे आंदोलन के किसी भी राजनीतिक कार्य में कभी भी सफलता प्राप्त नहीं हुई है।

गणेश शंकर विद्यार्थी

क्रांति दूसरों को बाँध कर नहीं होती, अपने को मुक्त करके होती है।

अज्ञेय

सरकार को समाप्त करने का सबसे अच्छा तरीक़ा, उससे अलग हो जाना है। मैं यह इसलिए नहीं कह रहा हूँ; क्योंकि यह टॉलस्टॉय का सिद्धांत था या गांधी जी इसका प्रचार करते थे, बल्कि इसलिए कह रहा हूँ, क्योंकि मैं इसमें विश्वास करने लगा हूँ।

सुभाष चंद्र बोस

कविता क्रांति ले आएगी, ऐसी ख़ुशफ़हमी मैंने कभी नहीं पाली, क्योंकि क्रांति एक संगठित प्रयास का परिणाम होती है, जो कविता के दायरे के बाहर की चीज़ है।

केदारनाथ सिंह

जो बड़ी-बड़ी क्रांतियाँ हुई; उसके पीछे विचारक और साहित्यिक थे, जिन्हें क्रांतदर्शन था।

विनोबा भावे

कविता क्रांति ले आएगी, ऐसी ख़ुशफ़हमी मैंने कभी नहीं पाली, क्योंकि क्रांति एक संगठित प्रयास का परिणाम होती है, जो कविता के दायरे के बाहर की चीज़ है।

केदारनाथ सिंह

वास्तव में हमारे देश के सभी राजनीतिक आंदोलनों में, जिन्होंने हमारे आधुनिक इतिहास में कोई महत्तवपूर्ण भूमिका निभाई है—उस आदर्श की कमी रही है, जिसकी प्राप्ति उसका लक्ष्य था।

भगत सिंह

सत्य बहुत ख़तरनाक है, क्योंकि वह हमारे अंदर क्रांति ले आता है।

जे. कृष्णमूर्ति
  • संबंधित विषय : सच

शासक वर्गों को साम्यवादी क्रांति होने पर काँपने दो। सर्वहाराओं पर अपनी बेड़ियों के अतिरिक्त अन्य कुछ है ही नहीं, जिसकी हानि होगी। जीतने के लिए उनके सामने एक संसार है। सभी देशों के श्रमिकों संगठित बनो।

कार्ल मार्क्स

प्रेम और जो कुछ उससे उत्पन्न होता है, क्रांति और जो कुछ वह रचती है और स्वतंत्रता और जो कुछ उससे पैदा होता है, ये परमात्मा के तीन रूप हैं और परमात्मा सीमित और चेतन संसार का अनंत मन है।

ख़लील जिब्रान

भारत में जब-जब कोई मानवीय विचारधारा; लोकप्रिय और व्यापक आंदोलन को जन्म देती है, तब-तब उससे प्रेरित साहित्य वर्णव्यवस्था और नारी पराधीनता पर प्रहार करता है।

विश्वनाथ त्रिपाठी

क्रांति आम जनता और व्यक्ति से शक्ति के संचय तथा संधान की माँग करती है।

व्लादिमीर लेनिन

मंगल पांडे ने सत्तावन के इस क्रांतियुद्ध के लिए अपना उष्ण रक्त प्रदान किया था। किंतु इसके साथ ही साथ उसने अपना नाम भी अमिट रहने वाले अक्षरों में कर दिया। स्वधर्म और स्वराज्य हेतु लड़े गए 1857 के स्वातंत्र्य-समर में भाग लेने वाले सभी क्रांतिकारियों को भी इस क्रांति के शत्रुओं ने 'पांडे' नाम से संबोधित किया। प्रत्येक माता का यह पावन दायित्व है कि अपने बालक को इस पवित्र नाम का स्वाभिमान सहित उच्चारण करना सिखला दे।

विनायक दामोदर सावरकर

क्रांति तो नेताओं द्वारा जनता के लिए होती है, जनता द्वारा नेताओं के लिए—वह तो दोनों की अटल एकजुटता में होती है

पॉलो फ़्रेरा

स्वच्छ क्रांति तो प्रेम न्याय के सिद्धांत से ही हो सकती है।

राल्फ़ वाल्डो इमर्सन

सच, कर्म और चरित्र को क्रांति के बाद की चीज़ नहीं समझना चाहिए। इन्हें तो क्रांति के साथ-साथ चलना चाहिए।

राममनोहर लोहिया

भक्ति-आंदोलन व्यापक सांस्कृतिक आंदोलन है; जिसकी अभिव्यक्ति दर्शन, धर्म, कला, साहित्य, भाषा और संस्कृति के दूसरे रूपों में दिखाई देती है।

मैनेजर पांडेय

इस आधुनिक (रूसी) क्रांति का अध्ययन बहुत रोचक है। जो रूप इसने अब ग्रहण किया है, वह मार्क्सवादी सिद्धांत मतांधताओं को रूस की अनिच्छुक प्रतिभा पर लादने के प्रयत्न के फलस्वरूप है। हिंसा पुनः असफल रहेगी। यदि मैंने परिस्थिति को ठीक समझा है, तो मुझे एक प्रतिक्रांति की आशा है। कार्ल मार्क्स के समाजवाद से अपनी स्वाधीनता के लिए रूस की आत्मा अवशय संघर्ष करेगी।

चितरंजन दास

जल विप्लव है।

गजानन माधव मुक्तिबोध

हे देशवासी, तू अपने आप को पहचान। अपने हृदय मस्तिष्क से काम लेकर तू परतंत्रता का दाग़ मिटा दे। तू क्रांति ला, क्रांति ला। तेरी मेहनत की कमाई से दूसरे धनवान बन रहे हैं। तू किन के सामने भटकता है और किन के भय से डरता है। अपने ख़ून-पसीने से तू जिनके लिए नींव बना रहा है, वही लोग तुझे हेय समझते हैं। हे पौरुषहीन! क्रांति ला, क्रांति ला।

अब्दुल अहद 'आज़ाद'

यदि तुम क्रांति का सिद्धांत और विधियों के जिज्ञासु हो तो तुम्हें क्रांति में भाग लेना चाहिए। समस्त प्रामाणिक ज्ञान प्रत्यक्ष अनुभव से उद्भूत होता है।

माओ ज़ेडॉन्ग

जो कोई भी अपने आपको मार्क्सवादी क्रांतिकारी लेखक कहता हो और ख़ासतौर से जो लेखक कम्युनिस्ट पार्टी का सदस्य हो—उसे मार्क्सवाद-लेनिनवाद का ज्ञान अवश्य होना चाहिए। लेकिन इस समय कुछ साथी मार्क्सवाद की बुनियादी धारणाओं से अनभिज्ञ हैं।

माओ ज़ेडॉन्ग

भक्ति-आंदोलन का आविर्भाव, एक ऐतिहासिक-सामाजिक शक्ति के रूप में जनता के दु:खों और कष्टों से हुआ, यह निर्विवाद है।

गजानन माधव मुक्तिबोध

जन्तंत्र में इस बात की आवश्यकता है कि जो क्रांति हो, वह केवल जनता के लिए हो, 'जनता की क्रांति', 'जनता के द्वारा' हो। आज क्रांति भी जनतांत्रिक होनी चाहिए, अन्यथा दुनिया में जनतंत्र की कुशल नहीं है। क्रांति की प्रक्रिया ही जनतांत्रिक होनी चाहिए।

दादा धर्माधिकारी

निर्बल व्यक्ति की आहें संगठित होकर समुदाय द्वारा जनित क्रांति का रूप धारण कर सकती हैं।

भगवती चरण वर्मा

क्रांति में मूल्य का परिवर्तन होगा। सबसे पहले हमें अपने जीवन में परिवर्तन करना होगा।

दादा धर्माधिकारी

क्रांतिकारी को गृहस्थी में पड़ कर अपनी शक्ति कम नहीं कर लेनी चाहिए अपितु सदैव अपनी शक्ति बढ़ाते रहने का प्रयत्न करना चाहिए, दिन पर दिन अपनी शक्ति को गहरा और विशाल बनाने का प्रयत्न करते रहना चहिए। इस काम के लिए पूरा समय चाहिए। क्रांतिकारियों को सदा दूसरों से आगे रहना चाहिए।

मैक्सिम गोर्की

सबको खाना, कपड़ा, मकान, मिल जाना क्रांति नहीं है। जितनी ज़रूरत हो, उतना खाना मिले, कपड़े की ज़रूरतें पूरी हो जाएँ, हर एक को रहने के लिए अच्छा मकान मिल जाए—यह मनुष्य को सुखी जानवर बना सकता है, लेकिन स्वतंत्र मानव नहीं बना सकता। इसलिए यह क्रांति नहीं है।

दादा धर्माधिकारी

क्रांति समाज को उसके दु:खों से मुक्त करेगी, जबकि विज्ञान व्यक्ति को उसके दु:खों से मुक्त करेगा।

मारियो वार्गास ल्योसा

अहिंसक प्रक्रिया में क्रांति का साध्य भी मनुष्य है और क्रांति का साधन भी मनुष्य है।

दादा धर्माधिकारी

जीविका की पद्धति में और प्रतिष्ठा में जब आमूलाग्र परिवर्तन हो तब वह क्रांति कहलाती है।

दादा धर्माधिकारी

क्रांतिकारी आचरण उस ऊलजलूल द्विभाजन को सहन नहीं कर सकता, जिसमें जनता के आचरण को महज नेताओं के निर्णयों का अनुसरण करने वाला बना दिया जाता है।

पॉलो फ़्रेरा

भक्ति जीवन के किसी एक क्षेत्र में सीमित आंदोलन था। यह एक मिश्रित अवधारणा और व्यापक आंदोलन था।

गणेश देवी

यदि क्रांति सफल हो पाए तो इतिहासकार उसे 'विप्लव' और 'विद्रोह' के संबोधन प्रदान कर देता है। वस्तुतः सफल विद्रोह ही क्रांति कहलाता है।

विनायक दामोदर सावरकर

अंधी प्रजा, ज्ञान से विहीन है और मृतक की भाँति चुपचाप अन्याय सहती है।

गुरु नानक

यदि क्रांति करनी हो, तो उसके लिए एक क्रांतिकारी संस्था का होना अनिवार्य है।

माओ ज़ेडॉन्ग

कला निरन्तर क्रांति का काम है और क्रांति की प्रेरणा चरित्र नहीं, व्यक्तित्व से आती है।

रामधारी सिंह दिनकर
  • संबंधित विषय : कला

भारत क्रांति की भाषा नहीं बोलता। यह हमेशा निरंतरता की बात करता है।

आशीष नंदी

प्रौढ़-वय का शासक अपने को वैसा ही क्रांतिकारी समझता रहता है, जैसा कभी युवावस्था में वह था।

त्रिलोचन

विचार कविता का एक अंश है।

वेणु गोपाल

क्रांतियाँ क्षुद्र बातों के लिए नहीं हैं किंतु क्षुद्र बातों से उद्भूत होती हैं।

अरस्तु

युद्ध क्रांति को जन्म देगा, और क्रांति युद्ध को ख़त्म कर देगी।

झुम्पा लाहिड़ी

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