जीवन पर उद्धरण

जहाँ जीवन को स्वयं कविता

कहा गया हो, कविता में जीवन का उतरना अस्वाभाविक प्रतीति नहीं है। प्रस्तुत चयन में जीवन, जीवनानुभव, जीवन-संबंधी धारणाओं, जीवन की जय-पराजय आदि की अभिव्यक्ति देती कविताओं का संकलन किया गया है।

नितांत अव्यावहारिक होना नितांत ईमानदारी और अक़्लमंदी का लक्षण है।

विजय देव नारायण साही

जीवन विश्व की संपत्ति है। प्रमाद से, क्षणिक आवेश से, या दुःख की कठिनाइयों से उसे नष्ट करना ठीक तो नहीं।

जयशंकर प्रसाद

क्या ज़िंदगी प्रेम का लंबा इंतज़ार है?

गोरख पांडेय

हम तो सारा का सारा लेंगे जीवन, ‘कम से कम’ वाली बात हमसे कहिए।

रघुवीर सहाय

लिखना चाहे जितने विशिष्ट ढंग से, लेकिन जीना एक अति सामान्य मनुष्य की तरह।

धर्मवीर भारती

अच्छे आदमी बनो—रोज़ मैं सोचता हूँ। क्या सोचकर अच्छा आदमी हुआ जा सकता है? अच्छा आदमी क्या होता है? कैसा होता है? किसकी तरह?

मंगलेश डबराल

वस्तुतः यह सारा जीवन रसमय अनुभूतियों की सार्थक शृंखला होकर—असंबद्ध क्षणों की भँवर है, जिसकी कोई दिशा नहीं।

धर्मवीर भारती

अधिक हर्ष और उन्नति के बाद ही अधिक दुःख और पतन की बारी आती है।

जयशंकर प्रसाद

अपने भूले रहने की याद में जीवन अच्छा लगता है।

नवीन सागर

ऐसा जीवन तो विडंबना है, जिसके लिए रात-दिन लड़ना पड़े!

जयशंकर प्रसाद

ज़िंदगी को फूलों से तोलकर, फूलों से मापकर फेंक देने में कितना सुख है।

धर्मवीर भारती
  • संबंधित विषय : फूल

सुंदरता! कितना बड़ा कारण है—हम बचेंगे अगर!

नवीन सागर

जीवन लालसाओं से बना हुआ सुंदर चित्र है। उसका रंग छीनकर उसे रेखा-चित्र बना देने से मुझे संतोष नहीं होगा।

जयशंकर प्रसाद

मेरा संपूर्ण जीवन इच्छा का मात्र एक क्षण है।

राजकमल चौधरी

मृतकों का अपना जीवन है जो शायद हम जीवितों से कहीं ज़्यादा सुंदर, उद्दात और मानवीय है।

मंगलेश डबराल

अकेली एक लहर पूरे समुद्र की जगह बचती है, जब हम भूल जाते हैं जीना।

नवीन सागर

जी से जहान है। जब आबरू ही रही, तो जीने पर धिक्कार है।

प्रेमचंद

जीवन निर्णय नहीं निरंतर भय है।

राजकमल चौधरी
  • संबंधित विषय : डर

बाह्य जीवन का सूक्ष्म रूप ही हमारा अंतर्जीवन है।

सुमित्रानंदन पंत

जीवन मेरी दृष्टि में एक अविजेय एवं अपरिमेय सत्य तथा शक्ति है—देह, मन और प्राण जिसके अंग एवं उपादान हैं, आत्मा जिसकी आधारशिला अथवा आधारभूत तत्त्व है और ज्ञान-विज्ञान जिसकी अंतर्मुखी-बहिर्मुखी नियामक गतियाँ हैं।

सुमित्रानंदन पंत

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