कविता पर उद्धरण

कविता के क्षेत्र में केवल एक आर्य-सत्य है : दुःख है। शेष तीन राजनीति के भीतर आते हैं।

विजय देव नारायण साही

मैं ऐसा नहीं मानता कि विश्व-बाज़ार कविता को निगल जाएगा और कविता हमेशा के लिए अपना प्रभाव खो देगी।

केदारनाथ सिंह

विश्व-बाज़ार विश्व-समाज की नई गतिविधि है और उसमें बहुत कुछ ऐसा हो सकता है जिससे नए ढंग की कविता जन्म ले।

केदारनाथ सिंह

सूरज नहीं चाँद तारे संगीत चित्र भी नहीं कविता से भी सुंदर लगता है मनुष्य।

नवीन सागर

मनुष्य मात्र को इतिहास और राजनीति नहीं एक कविता चाहिए।

श्रीनरेश मेहता

मेरी कविता की इच्छा और मेरी कविता की शब्दावली, मेरी अपनी इच्छा और मेरी अपनी शब्दावली है।

राजकमल चौधरी

कविता के रंग चित्रकला के प्रकृति-रंग नहीं होते।

राजकमल चौधरी

जिस किताब में अच्छी कविता होती है, उसके पास दीमकें नहीं फटकतीं।

सिद्धेश्वर सिंह

जिस प्रकार अनेक रंगों में हँसती हुई फूलों की वाटिका को देखकर दृष्टि सहसा आनंद-चकित रह जाती है, उसी प्रकार जब काव्य-चेतना का सौंदर्य हृदय में प्रस्फुटित होने लगता है, तो मन उल्लास से भर जाता है।

सुमित्रानंदन पंत

कितना अच्छा होता कि जिस संख्या में कवियों के संग्रह छपे बताए जाते हैं, लगभग उतनी ही संख्या में उन्होंने कविताएँ भी लिखी होतीं।

सिद्धेश्वर सिंह

कवि को लिखने के लिए कोरी स्लेट कभी नहीं मिलती है। जो स्लेट उसे मिलती है, उस पर पहले से बहुत कुछ लिखा होता है। वह सिर्फ़ बीच की ख़ाली जगह को भरता है। इस भरने की प्रक्रिया में ही रचना की संभावना छिपी हुई है।

केदारनाथ सिंह

भाषा के भीतर कविता की भाषा की अतिगामी प्रकृति कविता की भाषा को ज्ञान की भाषा से अलग करती है।

केदारनाथ सिंह

कविता भाषा का भाषा में स्वराज है।

अशोक वाजपेयी

कवि अपनी विचारधारा को बिना कलात्मक रूप दिए अवाम पर कोई भरपूर प्रभाव नहीं डाल सकता।

ऋतुराज
  • संबंधित विषय : कवि

कविता क्रांति ले आएगी, ऐसी ख़ुशफ़हमी मैंने कभी नहीं पाली, क्योंकि क्रांति एक संगठित प्रयास का परिणाम होती है, जो कविता के दायरे के बाहर की चीज़ है।

केदारनाथ सिंह

कविता अगर बनती जाएगी तो कवि नष्ट होता जाएगा।

त्रिलोचन
  • संबंधित विषय : कवि

कविता केवल उसी दिन निरस्त हो सकती है, जिस दिन किसी विस्फोटक से मानव-मन से भाषा को उड़ा दिया जाएगा।

केदारनाथ सिंह

जो लोग कविता से निरी कलात्मकता की अपेक्षा करते हैं, वे कविता के वस्तु-सत्य को गौण रखना चाहते हैं।

ऋतुराज
  • संबंधित विषय : सच

कविता के लिए मनुष्य की पक्षधरता के अतिरिक्त मैं किसी अन्य पक्षधरता को आवश्यक नहीं मानता।

केदारनाथ सिंह

कविता को राजनीति में नहीं घुसना चाहिए। क्योंकि इससे कविता का तो कुछ नहीं बिगड़ेगा, राजनीति के अनिष्ट की संभावना है।

विजय देव नारायण साही

अगर कविता एक ‘सामाजिक कार्य’ है (जो कि वह है) तो फिर उसका राजनीतिक-सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों से जुड़ना अनिवार्य ही है।

वेणु गोपाल

विचार, अनुभूति और संवेदना—सबका संबंध शब्द से होता है और कविता शब्द है। शब्द—जो कवि के लिए सबसे रहस्यमय वस्तु है।

केदारनाथ सिंह

कविता आदमी को मार देती है। और जिसमें आदमी बच गया है, वह अच्छा कवि नहीं है।

धूमिल
  • संबंधित विषय : कवि

मुझे अपनी कविताओं से भय होता है, जैसे मुझे घर जाते हुए भय होता है।

मंगलेश डबराल
  • संबंधित विषय : डर

अच्छा कवि बहुत ज़िद्दी होता है और कविता लिखते समय अपने विवेक और शक्ति के अलावा किसी और को नहीं मानता।

विष्णु खरे
  • संबंधित विषय : कवि

कविता की बुनियाद भाषा में है।

केदारनाथ सिंह

कभी भी व्यक्तिगत दुखबोध की कविता एक अच्छी कविता का मानदंड नहीं हो सकती, वही कविता प्रामाणिक होगी जिसके सरोकार राष्ट्रीय दुखों से जुड़े होंगे।

श्रीकांत वर्मा

कविता लिखते हुए मेरे हाथ सचमुच काँप रहे थे। तब मैंने कहानियाँ भी लिखनी आरंभ कीं। यह सोचकर कि रचना से रचना का यह कंपन कुछ कम होगा।

श्रीकांत वर्मा

कविता एकांत देती है।

अशोक वाजपेयी

भाषा का होना कविता के होने की गारंटी है।

केदारनाथ सिंह

विचार कविता का एक अंश है।

वेणु गोपाल

कविता में ‘मैं’ की व्याख्या केवल आत्मकेंद्रण या व्यक्तिवाद के अर्थ में करना

उसके बृहतर आशयों और संभावनाओं दोनों को संकुचित करना है।

कुँवर नारायण

कवि को कविता के बाहर और भीतर दोनों जगह एक साथ रहने का जोखिम उठाना होता है।

मंगलेश डबराल
  • संबंधित विषय : कवि

मैं कविता से ही सब कुछ क्यों चाहता हूँ, ख़ुद से क्यों नहीं?

मलयज
  • संबंधित विषय : कवि

कविता तो एक जीवन को तोड़कर सकल जीवन बनाती है। और जीवन टूटता है, वह कवि का है।

त्रिलोचन
  • संबंधित विषय : कवि

हत्यारों के क्या लेखक साझीदार हुए। जो कविता हम सबको लाचार बनाती है?

रघुवीर सहाय

कविता और प्रेम—दो ऐसी चीज़ें हैं, जहाँ मनुष्य होने का मुझे बोध होता है।

गोरख पांडेय

कविता के पास अपना विचार होना चाहिए और जीवन-जगत के बारे में उसका विचार जितना ही गहरा और पुख़्ता होगा, उसकी रचना उतनी ही मज़बूत होगी, इसमें मुझे कोई संशय नहीं।

केदारनाथ सिंह

कविता के लिए समाज की हर गतिविधि एक कच्चे माल की तरह होती है।

केदारनाथ सिंह

कविता के संसार में कोई बड़ा परिवर्तन समाज के संसार में उतने ही बड़े प्रयत्न के बिना संभव नहीं है।

रघुवीर सहाय

किसी भी आदमी को कविता की जाँच के लिए कविता में दी गई शर्तों के अलावा किन्ही शर्तों की इजाज़त नहीं दी जा सकती।

रघुवीर सहाय

उपभोक्ता-संस्कृति में कविता बेकार की चीज़ समझी जाने लगी है। मनोरंजन के अन्य साधन मनुष्य की स्वाद-वृत्ति को बहुत आसानी से संतुष्ट कर सकते हैं।

केदारनाथ सिंह

किसी भी भारतीय भाषा में छंद को इस तरह नहीं छोड़ा गया है जिस तरह हिंदी कविता में छोड़ा गया है। मुझे लगता है, नई शताब्दी में प्रवेश करते हुए कविता को जिन मूलभूत समस्याओं से दो-चार होना पड़ेगा, उनमें यह छंद की समस्या भी एक है।

केदारनाथ सिंह

भाषा के पर्यावरण में कविता की मौजूदगी का तर्क जीवन-सापेक्ष है : उसके प्रेमी और प्रशंसक हमेशा रहेंगे—बहुत ज़्यादा नहीं, लेकिन बहुत समर्पित!

कुँवर नारायण

कविता यदि सम्मूर्तन है तो वह बिंब के बिना संभव नहीं है।

केदारनाथ सिंह

कविता से वही माँग करें, जो वह दे सकती है।

केदारनाथ सिंह

कविता हमारे लिए भावनाओं का मायाजाल नहीं है। जिनके लिए कविता ऐसी थी, वे लोग बीत चुके हैं।

राजकमल चौधरी

अगर कविता होती तो राम और कृष्ण भी यथार्थ होते।

अशोक वाजपेयी

कविता में बिंब की घुलावट महत्त्वपूर्ण है, बिंब की प्रमुखता नहीं।

केदारनाथ सिंह

काव्य का सत्य सौंदर्य के माध्यम से अभिव्यक्त होता है। दूसरे शब्दों में, कविता की आत्मा सौंदर्य के पंखों में उड़कर ही सत्य के असीम छोर छूती है।

सुमित्रानंदन पंत