स्त्री

स्त्री-विमर्श भारतीय समाज और साहित्य में उभरे सबसे महत्वपूर्ण विमर्शों में से एक है। स्त्री-जीवन, स्त्री-मुक्ति, स्त्री-अधिकार और मर्दवाद और पितृसत्ता से स्त्री-संघर्ष को हिंदी कविता ने एक अरसे से अपना आधार बनाया हुआ है। प्रस्तुत चयन हिंदी कविता में इस स्त्री-स्वर को ही समर्पित है, पुरुष भी जिसमें अपना स्वर प्राय: मिलाते रहते हैं।

पुरुष और स्त्री की आत्माएँ दो विभिन्न पदार्थों की बनी हैं।

भुवनेश्वर

स्त्री का हृदय प्रेम का रंगमंच है।

जयशंकर प्रसाद

पुरुष क्रूरता है तो स्त्री करुणा है।

जयशंकर प्रसाद

स्त्री के लिए प्रेम का अर्थ है कि कोई उसे प्रेम करे।

भुवनेश्वर

नारी की करुणा अंतर्जगत का उच्चतम विकास है, जिसके बल पर समस्त सदाचार ठहरे हुए हैं।

जयशंकर प्रसाद

पुरुष है कुतूहल प्रश्न और स्त्री है विश्लेषण, उत्तर और सब बातों का समाधान।

जयशंकर प्रसाद

स्त्री जिससे प्रेम करती है, उसी पर सर्वस्व वार देने को प्रस्तुत हो जाती है।

जयशंकर प्रसाद

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