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बेला

साहित्य और संस्कृति की घड़ी

21 फरवरी 2026

‘ओ रोमियो : क्राइम-रोमांस का थका हुआ प्रयोग’

‘ओ रोमियो : क्राइम-रोमांस का थका हुआ प्रयोग’

O Romeo, Romeo! wherefore art thou Romeo?—ओ रोमियो, रोमियो! तुम रोमियो क्यों हो? शुरुआत के पाँच मिनट उलझन में नहीं बीते। बहुत सीधा-सादा कथानक आदित्य धर या सिद्धार्थ आनंद सरीखे डायरेक्टरों की फ़िल्मो

18 फरवरी 2026

नवोदय विद्यालय के पच्चीस साल : स्मृतियों की यात्रा

नवोदय विद्यालय के पच्चीस साल : स्मृतियों की यात्रा

इस साल हमारे नवोदय विद्यालय [जवाहर नवोदय विद्यालय छिंदपाली, महासमुंद (छत्तीसगढ़)] को पच्चीस बरस पूरे हो रहे हैं। 1 नवंबर 2000 को दो बड़ी घटनाएँ इतिहास में घटी थीं। पहला यह कि इस दिन हिंदुस्तान का दिल

17 फरवरी 2026

पत्र : प्रकाश के साक्षी सेबास्टिओं सालगाडो के नाम

पत्र : प्रकाश के साक्षी सेबास्टिओं सालगाडो के नाम

प्रिय सेबास्टिओं, प्रेरणा के अमिट स्रोत शांति और सामंजस्य के दूत विविधता के उपासक, प्रकृति के अद्भुत सहचर आज से 12 साल पहले मेरे एक फ़ोटोग्राफ़र मित्र अमन ने मुझे तुम्हारे बारे में बताया था।

16 फरवरी 2026

छोटी नदियों का बड़ा शोक

छोटी नदियों का बड़ा शोक

यदि कविता, साहित्य की प्राचीनतम विधा है तो यह भी सही है कि शायद ही ऐसा कोई कवि होगा जो अपने साहित्यिक जीवन में नदी पर कविता न लिखे। ऋग्वेद तो कविता की सबसे प्राचीनतम किताब है और उसमें नदियों के विवरण

15 फरवरी 2026

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-7

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-7

छठी कड़ी से आगे... सात अरुण कमल ‘कविता की राजनीति’ को उसी रिपोर्टर के निगाह से तौलते और फिर बोलते हैं जिसमें उन्हें फ़ायदा ज़्यादा दिखता है। काफ़ी गंभीरता से दिया गया वक़्तव्य है, जहाँ अपने को

15 फरवरी 2026

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-4

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-4

तीसरी कड़ी से आगे... चार 2019 में प्रकाशित अरुण कमल की एक कविता है—‘एक वृद्ध की रात’। एक बूढ़ा है जो जानता है कि ‘कुछ तो है जो मुझे खड़ा कर रहा इस उम्र में’। जिस उम्र में लोग तीर्थ पर निकल जाते ह

15 फरवरी 2026

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-8

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-8

सातवीं कड़ी से आगे... आठ अरुण कमल ‘मैं’ अर्थात् अपनी आँखों से दुनिया को देखते हैं। इसलिए विस्तार उनके यहाँ कम है। इसलिए कभी राजेश जोशी ने अरुण कमल की कविता के लिए कहा था, ‘‘उनके यहाँ कल्पनाशीलत

15 फरवरी 2026

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-6

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-6

पाँचवीं कड़ी से आगे... छह कविता में निजी स्पेस का या घर-परिवार का कम होना, लगता है जानबूझकर है या फिर विचारधारा या किसी ख़ास मानसिकता का परिचायक। अरुण कमल के पास एक ख़ास तरह की काव्य-भाषा है जो

15 फरवरी 2026

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’

एक मुक्तिबोध मेरे प्रिय कवि हैं। उनकी कविता-पंक्तियाँ मुझे बूस्ट करती हैं, मतलब प्रेरणा प्रदान करती हैं। यहाँ प्रस्तुत आलेख का शीर्षक उनकी एक कविता का शीर्षक है। मुक्तिबोध की ‘अँधेरे में’ शीर्षक स

15 फरवरी 2026

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-9

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-9

आठवीं कड़ी से आगे... नौ ‘अपनी केवल धार’ जो देखने में छोटी पर अरुण कमल की कीर्ति का आधार-स्तंभ है कि तरह मेरी एक और प्रिय छोटी-सी कविता है जिसका शीर्षक है—‘थूक’ : “जब वह ग़ुंडा प्राचार्य मान बहाद