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बेला

साहित्य और संस्कृति की घड़ी

16 फरवरी 2026

‘छोटी नदियों का बड़ा शोक’

‘छोटी नदियों का बड़ा शोक’

यदि कविता, साहित्य की प्राचीनतम विधा है तो यह भी सही है कि शायद ही ऐसा कोई कवि होगा जो अपने साहित्यिक जीवन में नदी पर कविता न लिखे। ऋग्वेद तो कविता की सबसे प्राचीनतम किताब है और उसमें नदियों के विवरण

15 फरवरी 2026

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-6

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-6

पाँचवीं कड़ी से आगे... छह कविता में निजी स्पेस का या घर-परिवार का कम होना, लगता है जानबूझकर है या फिर विचारधारा या किसी ख़ास मानसिकता का परिचायक। अरुण कमल के पास एक ख़ास तरह की काव्य-भाषा है जो

15 फरवरी 2026

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’

एक मुक्तिबोध मेरे प्रिय कवि हैं। उनकी कविता-पंक्तियाँ मुझे बूस्ट करती हैं, मतलब प्रेरणा प्रदान करती हैं। यहाँ प्रस्तुत आलेख का शीर्षक उनकी एक कविता का शीर्षक है। मुक्तिबोध की ‘अँधेरे में’ शीर्षक स

15 फरवरी 2026

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-9

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-9

आठवीं कड़ी से आगे... नौ ‘अपनी केवल धार’ जो देखने में छोटी पर अरुण कमल की कीर्ति का आधार-स्तंभ है कि तरह मेरी एक और प्रिय छोटी-सी कविता है जिसका शीर्षक है—‘थूक’ : “जब वह ग़ुंडा प्राचार्य मान बहाद

15 फरवरी 2026

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-7

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-7

छठी कड़ी से आगे... सात अरुण कमल ‘कविता की राजनीति’ को उसी रिपोर्टर के निगाह से तौलते और फिर बोलते हैं जिसमें उन्हें फ़ायदा ज़्यादा दिखता है। काफ़ी गंभीरता से दिया गया वक़्तव्य है, जहाँ अपने को

15 फरवरी 2026

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-8

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-8

सातवीं कड़ी से आगे... आठ अरुण कमल ‘मैं’ अर्थात् अपनी आँखों से दुनिया को देखते हैं। इसलिए विस्तार उनके यहाँ कम है। इसलिए कभी राजेश जोशी ने अरुण कमल की कविता के लिए कहा था, ‘‘उनके यहाँ कल्पनाशीलत

15 फरवरी 2026

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-4

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-4

तीसरी कड़ी से आगे... चार 2019 में प्रकाशित अरुण कमल की एक कविता है—‘एक वृद्ध की रात’। एक बूढ़ा है जो जानता है कि ‘कुछ तो है जो मुझे खड़ा कर रहा इस उम्र में’। जिस उम्र में लोग तीर्थ पर निकल जाते ह

15 फरवरी 2026

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-3

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-3

दूसरी कड़ी से आगे... तीन मेरे लिए वे कविता का ककहरा सीखने के दिन थे। कवि-मित्र प्रकाश के सहारे यह संग्रह ‘अपनी केवल धार’ पढ़ गया। यह ‘धार’ कविता दिमाग़ में बैठ गई थी। मैंने उन दिनों अपने मित्रों

15 फरवरी 2026

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-2

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-2

पहली कड़ी से आगे... दो  कभी-कभी एक कहानी, एक उपन्यास और एक कविता भी आपको अमर कर सकती है। अरुण कमल की यह रोमांटिक, उधार वाली कविता इस श्रेणी की कविता है। कभी तुलसीदास ने लिखा था, “नहिं दरिद्र सम

15 फरवरी 2026

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-10

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-10

नवीं कड़ी से आगे... दस अरुण कमल सत्तर साल से अधिक का जीवन देख चुके हैं और वरिष्ठ कवियों की सूची में भी आ चुके हैं। अरुण कमल हिंदी में प्रसिद्ध और लोकप्रिय कवि भी हैं। कभी रामचंद्र शुक्ल ने लिखा