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बेला

साहित्य और संस्कृति की घड़ी

07 सितम्बर 2026

‘इस बार भोपाल में ‘संगमन’’

‘इस बार भोपाल में ‘संगमन’’

वर्ष 1993 में कानपुर से शुरू हुए रचनात्मक व बौद्धिक हस्तक्षेप के सहकारी उपक्रम ‘संगमन’ का 26वाँ आयोजन देश के विभिन्न राज्यों से गुज़रता हुआ इस बार भोपाल (मध्य प्रदेश) में हो रहा है। तारीख़ें हैं—2-3-4 अ

07 सितम्बर 2026

‘अर्थात्’ की सातवीं कड़ी : कुँवर नारायण की कविता में भारतीय आधुनिकता का वैकल्पिक आख्यान

‘अर्थात्’ की सातवीं कड़ी : कुँवर नारायण की कविता में भारतीय आधुनिकता का वैकल्पिक आख्यान

ध्यातव्य है कि यह वर्ष कुँवर नारायण की जन्मशताब्दी का वर्ष है। इसी उपलक्ष्य में ‘अर्थात्’ की सातवीं गोष्ठी आयोजित की गई, जिसके तहत कविता के बहाने मनुष्य को समझने का प्रयास शामिल था। इस कड़ी में कुँ

06 सितम्बर 2026

बिंदुघाटी 2.0 : मेहनत बहुत करनी है

बिंदुघाटी 2.0 : मेहनत बहुत करनी है

• भादों-विहार  भादों दूभर महीना माना गया है। सावन की झँकोर जवानी उसमें नहीं होती। भादों की बरखा से धरती के कोश भर जाते हैं।  सावन में धरती गल जाती है; ताल भरने लगते हैं, धान जड़ पकड़ लेते हैं, उन

05 सितम्बर 2026

शनिवारेर चिट्ठी : सिनेमा पर कैसे न लिखें

शनिवारेर चिट्ठी : सिनेमा पर कैसे न लिखें

देखना यह बड़ी फ़िल्म है। यह मेरा विचार नहीं; वह अवगतता है, जिसके साथ मैं इसे देखने बैठा हूँ। यहीं से देखने की एक बाधा शुरू हो गई है। अभी कुछ घटा भी नहीं कि उसके चारों ओर अर्थ जमा हो चुके हैं—आग्र

04 सितम्बर 2026

‘कनुप्रिया’ की भूमिका

‘कनुप्रिया’ की भूमिका

धर्मवीर भारती रचित ‘कनुप्रिया’ नई कविता की विशिष्ट रचना है। इस रचना में ‘राधा’ की वेदना को नए रूप में प्रस्तुत किया गया है। ‘कनुप्रिया’ दो शब्दों—‘कनु’ और ‘प्रिया’ से मिलकर बना है। धर्मवीर भारती ने इ

04 सितम्बर 2026

लगभग तीन दिन दो रातें

लगभग तीन दिन दो रातें

मुझे पता चल चुका था कि वहाँ वह मेरी प्रतीक्षा करने के लिए नहीं होगा… और जब यह पता चल चुका था तो यह कैसे न मालूम होता कि वहाँ मुझे उसका इंतिज़ार करना था। उसके स्कार्फ़ का... मेरे गले का फंदा बनने को आ

03 सितम्बर 2026

जौहर : कायरता नहीं, मध्यकालीन अस्मिता और स्वाधीनता-बोध का आख्यान

जौहर : कायरता नहीं, मध्यकालीन अस्मिता और स्वाधीनता-बोध का आख्यान

समकालीन नैतिक कसौटियों से मध्यकालीन जौहर को तौलकर उसे ‘कायरता’ की संज्ञा दे देना उस संपूर्ण सांस्कृतिक चेतना की उपेक्षा है, जिसमें अर्पण, तर्पण, समर्पण, पवित्रता, शुचिता, मर्यादा, आत्मसंयम, चरित्र, स

03 सितम्बर 2026

‘हिन्दवी उत्सव’ में प्रेम की संभावनाएँ

‘हिन्दवी उत्सव’ में प्रेम की संभावनाएँ

फ़्योदोर दोस्तोयेवस्की की ‘वाइट नाइट्स’ से एक पंक्ति पिछले दो दिन से ज़ेहन में घूम रही है, “यह एक अद्भुत रात थी—ऐसी रात, जो केवल तब संभव होती है, जब हम युवा होते हैं।” ऐसी ही एक अद्भुत रात से पहले का

02 सितम्बर 2026

‘हासिल’ से आगे का इलाहाबाद

‘हासिल’ से आगे का इलाहाबाद

बीते 23 अगस्त को उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र [NCZCC], प्रयागराज, उत्तर प्रदेश में ‘हिन्दवी उत्सव’ 2026 का आयोजन किया गया। मैं इस बात का आग़ाज़ इस तरह नहीं करूँगा कि मैं झूँसी से निकला तो बारि

01 सितम्बर 2026

धारावाहिक उपन्यास : जंकामंका गैंग : बंधन प्रेम के रास्ते का रोड़ा है

धारावाहिक उपन्यास : जंकामंका गैंग : बंधन प्रेम के रास्ते का रोड़ा है

गताध्याय से आगे... दस  बड़ी से बड़ी मुश्किलों में भी झंकार मिसिर को कभी इतना चुप और इतना उदास होते नहीं देखा था। चाहे जीवन में उसे कोई जीत न मिली हो, लेकिन उसे कभी हारते नहीं देखा था। उसे जब भी द