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बेला

साहित्य और संस्कृति की घड़ी

06 जून 2026

‘शनिवारेर चिट्ठी : अनुवाद का सप्ताह’

‘शनिवारेर चिट्ठी : अनुवाद का सप्ताह’

मं., यह सप्ताह अनुवाद का सप्ताह था। अभी यह बात जब तुम्हें लिख रहा हूँ तो लगता है कि मैंने इस सप्ताह के बारे में सबसे कम महत्त्वपूर्ण बात पहले ही वाक्य में कह दी है। यह श्लील नहीं है। यह ग्लानि, बेत

05 जून 2026

एकांत के कवि, आवारा कम्युनिस्ट दोस्त और बहन के प्रेमी

एकांत के कवि, आवारा कम्युनिस्ट दोस्त और बहन के प्रेमी

आज के दौर में साम्यवाद-समाजवाद का झंडा उठाने वाले लोग जो ख़ुद को सबसे बड़ा समतावादी दिखाने पर उतारू हैं; उन्हें देखकर कु

05 जून 2026

‘बाघ का भाग्यफल और अन्य कहानियाँ’ : धर्म-सत्ता-प्रेम का त्रिकोण

‘बाघ का भाग्यफल और अन्य कहानियाँ’ : धर्म-सत्ता-प्रेम का त्रिकोण

लिखने की मोहलत के लिए मृत्यु को ही अपनी किताब सादर समर्पित करता लेखक मृत्यु से तो भिड़ ही रहा है, साथ ही उसकी वैचारिक मुठ

04 जून 2026

कहानी : स्वस्थित

कहानी : स्वस्थित

Every word is like an unnecessary stain on silence and nothingness.  ~ Samuel Beckett  एक लगातार अशांत रह रही

02 जून 2026

सुमन कल्याणपुर : स्वर और स्वर-भ्रम

सुमन कल्याणपुर : स्वर और स्वर-भ्रम

अँग्रेज़ी में एक कहन है : people who show you new music are important. मैं अक्सर अपने मित्रों और परिचितों को नए गीत भेजता

01 जून 2026

नवोदित रचनाकारों के लिए सलाह

नवोदित रचनाकारों के लिए सलाह

1. आपको जिस विषय पर लिखने की अपनी इच्छा हो, उसी पर लिखें। यह देखकर न लिखें कि फ़लाँ पत्रिका आजकल किस विषय पर लेख छाप रही

01 जून 2026

प्रीति-प्रतीति की ध्यानावस्था में रची गई कविताएँ

प्रीति-प्रतीति की ध्यानावस्था में रची गई कविताएँ

रुस्तम के कविता-संग्रह ‘एक ख़ुशबू वहाँ फैली थी’ की कविताओं को पढ़ते हुए लगता है कि यह प्रीति-प्रतीति की ध्यानावस्था में र

31 मई 2026

रविवासरीय 4.0 : कृष्णबलदेववैदविषयक

रविवासरीय 4.0 : कृष्णबलदेववैदविषयक

• नये काम करना मुश्किल नहीं, मुश्किल है पुराने काम नये ढंग से करना। • काम करने के लिए, काम न कर सकने वाली परिस्थितिया

30 मई 2026

शनिवारेर चिट्ठी : अजाने देशों में

शनिवारेर चिट्ठी : अजाने देशों में

यात्रा-कल्पना-स्मृति तीन घंटे की एक बस-यात्रा किसी मनुष्य को क्या दे सकती है? वह कवि है तो अधैर्य। वह प्रेम में है तो

29 मई 2026

जगह-जगह 2.0 : न मैं हिंदी शहर नगौरी

जगह-जगह 2.0 : न मैं हिंदी शहर नगौरी

भाषा-विज्ञान में व्युत्पत्ति-भ्रांति का अर्थ है कि किसी शब्द के प्राचीनतम अर्थ को ही उसका ‘सही’ अर्थ मानने पर ज़ोर दिया ज