जायसी भारत के उन कवियों में से हैं; जो विधिनिषेधों को तोड़कर मानवीय पीड़ा को सहानुभूति देते हैं, जिनके यहाँ धार्मिक मताग्रह परदुःखकातरता को कहीं भी बाधित नहीं करता।
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व्यंजना का आधार लौकिक, स्थूल यथार्थ न हो तो वह अशक्त होगी।
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