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मैक्सिम गोर्की

1868 - 1936 | निज़हनी नोवगोरोड

समादृत सोवियत लेखक, नाटककार और राजनीतिक विचारक। समाजवादी यथार्थवाद के प्रवर्तक।

समादृत सोवियत लेखक, नाटककार और राजनीतिक विचारक। समाजवादी यथार्थवाद के प्रवर्तक।

मैक्सिम गोर्की की संपूर्ण रचनाएँ

उद्धरण 28

पृथ्वी स्वयं इस नए जीवन को जन्म दे रही है और सारे प्राणी इस आनेवाले जीवन की विजय चाह रहे हैं। अब चाहे रक्त की नदियाँ बहें या रक्त के सागर भर जाएँ, परंतु इस नई ज्योति को कोई बुझा नहीं सकता।

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मनुष्य को अपने आप में विश्वास होना चाहिए—कानूनों पर नहीं। मनुष्य की आत्मा में ईश्वर का अस्तित्व होता है। यह मनुष्य पृथ्वी पर पुलिस कप्तान अथवा गुलाम के स्वरूप में नहीं आता है। क़ानून मनुष्य से नीचा होता है।

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धन में बल है सत्य नहीं।

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नवयुग की ज्योति को जो एक बार देख लेता है, उसी को वह पवित्र बनाती हुई जलाने लगती हैं।

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एक सी सूझ वाले लोग प्रत्येक वस्तु को समान उपहासजनक, सौंदर्यपूर्ण अथवा घृणोत्पादक दृष्टिकोण से देखते हैं। सूझ की इस एकता को सुगम बनाने के लिए किसी विशेष मंडल या परिवार के लोगों के बीच अपनी विशिष्ट भाषा, अपने विशिष्ट मुहावरे, यहाँ तक कि अपने विशिष्ट शब्द पैदा हो जाते हैं जिनके विशिष्ट अर्थ अन्य लोग अन्य नहीं समझ सकते।

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