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बेला

साहित्य और संस्कृति की घड़ी

कहानी : गश्ती

 

चाईं उर्फ निशू भाई के पास कमाल का गुण था—वह सड़क पर चलती, खड़ी, इठलाती, इतराती, मुस्काती लड़की को देखकर बता देता था, ‘यह गश्ती है, चल भाई लपक लिया जाए...’ अपने जादुई अनुमान पर वह कभी फ़ेल नहीं हुआ।

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16 सितम्बर 2026

आज का रचनाकार

रचनाकार का समय और समय का रचनाकार

आलोकधन्वा

समादृत कवि। ‘गोली दाग़ो पोस्टर’, ‘भागी हुई लड़कियाँ’ और ‘सफ़ेद रात’ सरीखी कविताओं के लिए लोकप्रिय।

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