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बेला

साहित्य और संस्कृति की घड़ी

शंखनाद : ...और कोई विवाद न हुआ

 

वह वरिष्ठ कवि हैं। कवि होने के बाद, वरिष्ठ होने के लिए कुछ ख़ास नहीं करना पड़ता। सिर्फ़ जीते रहना ही काफ़ी होता है। वैसे भी राजनीति की तरह ही साहित्य का उम्र बोध अलग है, जैसे साहित्य का सच अलग होता है।

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23 मार्च 2026

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