आज का उद्धरण

कवि कह गया है

भाषा के पर्यावरण में कविता की मौजूदगी का तर्क जीवन-सापेक्ष है : उसके प्रेमी और प्रशंसक हमेशा रहेंगे—बहुत ज़्यादा नहीं, लेकिन बहुत समर्पित!

आज का रचनाकार

रचनाकार का समय और समय का रचनाकार

पारुल पुखराज

इस सदी में सामने आईं हिंदी कवयित्री और गद्यकार। कहन में संक्षिप्तता के लिए उल्लेखनीय।

और जानिए

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