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बेला

साहित्य और संस्कृति की घड़ी

‘अर्थात्’ की छठी कड़ी : प्रगतिवाद पर बात

 

चैत्र में बसंत के उनींदे से जागा ग्रीष्म वैशाख में अपना वैभव खोजता है। दुपहरें अपनी दीर्घता से ऊबकर अलसाती हैं और निस्पंद हो जाती हैं। अगर उमस न हो तो ऐसी दुपहर पढ़ने-लिखने को अनुकूल है। इसी समय में ‘

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06 मई 2026

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