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बेला

साहित्य और संस्कृति की घड़ी

क्रेज़ी किया रे : AI के अतिक्रमण में मौलिकता का अस्तित्व

 

वह फ़रवरी का नौवाँ दिन था और विभाग में वैसी ही चहल-पहल थी, जैसी अन्य कार्यक्रमों के दिनों में होती है। विभाग में कथाकार रणेन्द्र आए हुए थे। ख़ैर, ऐसा तो अक्सर होता है; विभाग में कोई-न-कोई आता ही रहता ह

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25 फरवरी 2026

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