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बेला

साहित्य और संस्कृति की घड़ी

आवारा कुत्तों का मसीहा

 

उन दिनों की बात है, जब गाँव में थोड़ी अनबन चल रही थी। उन्हीं दिनों एक आदमी अफ़ीम बेचता था और पैसे कमाता था, लेकिन उन पैसों के बारे में किसी को पता नहीं चलने देता था। बहुत कम लोगों को पता था कि वह अफ़ी

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17 अक्तूबर 2026

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