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बेला

साहित्य और संस्कृति की घड़ी

शनिवारेर चिट्ठी : ये जो देस है तेरा

 

जन  क्या तुम विस्मय करोगी अगर कहूँ कि 15 अगस्त के दिन-विशेष के बारे में सोचूँ तो उल्लास से मेरे लौटने की अकेली मुकम्मल जगह मेरे बचपन में मिलती है! माँ सामने आती हैं। उन्होंने सुफ़ेद-सी सूती साड़ी पहन

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15 अगस्त 2026

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