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बेला

साहित्य और संस्कृति की घड़ी

अहमदाबाद : एक प्रवासी स्त्री की आँखों से

 

तीन वर्ष पहले जब मैं अहमदाबाद आई, तो लगा जैसे किसी अपरिचित भूमि पर क़दम रख रही हूँ। पर धीरे-धीरे यह शहर मेरे भीतर उतरने लगा। या शायद यूँ कहूँ कि यह कभी पराया लगा ही नहीं। अहमदाबाद में एक अद्भुत सहजता

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21 जनवरी 2026

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