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बेला

साहित्य और संस्कृति की घड़ी

जगह-जगह 2.0 : रूमी और उनकी सात नसीहतें

 

बाज़, चिड़िया और अनुवाद एक प्रसिद्ध तुर्की नाटक लैला व मजनूँ में ख़य्याम की एक रुबाई यूँ आती है : Her sabah yeni bir gün doğarken, Bir gün de eksilir ömürden; Her şafak bir hırsız gibidir Elind

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14 अगस्त 2026

आज का रचनाकार

रचनाकार का समय और समय का रचनाकार

मुकेश मानस

नई पीढ़ी के कवि-लेखक। दलित-संवेदना और सरोकारों के लिए उल्लेखनीय।

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