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बेला

साहित्य और संस्कृति की घड़ी

अविश्वासी हो रहे हो प्रेम!

 

मैं अब किसी से प्रेम नहीं कर पाती हूँ। मैं इसे समझ पा रही हूँ कि मैं क्यों किसी से प्यार नहीं कर पा रही हूँ, लेकिन लोग इसे समझ नहीं पा रहे हैं। मेरी आँखों में अब किसी के लिए आँसू नहीं आते। सिर्फ़ एक अ

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14 फरवरी 2026

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