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बेला

साहित्य और संस्कृति की घड़ी

तुम्हें विदा करने में असमर्थ हूँ!

 

यह दिन पिछले दिनों से कितने भिन्न हैं, इन दिनों तुम्हें खोने के भय के सिवा मेरे पास और कुछ भी नहीं। प्रेम-प्रसंग के ये अंतिम दिन इतने अरुचिकर और अवसादमय भी हो सकते हैं, यह मैंने कभी नहीं सोचा था। सोचत

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24 फरवरी 2026

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