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बेला

साहित्य और संस्कृति की घड़ी

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’

 

एक मुक्तिबोध मेरे प्रिय कवि हैं। उनकी कविता-पंक्तियाँ मुझे बूस्ट करती हैं, मतलब प्रेरणा प्रदान करती हैं। यहाँ प्रस्तुत आलेख का शीर्षक उनकी एक कविता का शीर्षक है। मुक्तिबोध की ‘अँधेरे में’ शीर्षक से

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15 फरवरी 2026

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