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बेला

साहित्य और संस्कृति की घड़ी

धुरंधर : दुख और जिन्न

 

दुख आदमी के जिस्म में दाख़िल होता है और फिर कभी नहीं निकलता। कोई मौलवी बताए, कोई हकीम समझाए, कोई फ़लसफ़ेबाज़ अपनी मोटी किताब खोलकर साबित करे—मगर दुख जाता नहीं। वो बदलता है। रीढ़ की हड्डी के इर्द-गिर्द

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23 मार्च 2026

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