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बेला

साहित्य और संस्कृति की घड़ी

‘अर्थात्’ की तीसरी गोष्ठी में खुले छायावाद के बंध

 

प्रसाद-निराला-महादेवी-पंत के चतुष्टय पर आधारित छायावाद की कविताओं, उसकी भाषा, प्रवृत्तियों, संवेदना और सहमतियों-असहमतियों पर संवाद के उद्देश्य से 22 फ़रवरी की बीती दुपहर ‘छायावाद : खुल गए छंद के बंध’

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24 फरवरी 2026

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