समय पर उद्धरण
समय अनुभव का सातत्य
है, जिसमें घटनाएँ भविष्य से वर्तमान में गुज़रती हुई भूत की ओर गमन करती हैं। धर्म, दर्शन और विज्ञान में समय प्रमुख अध्ययन का विषय रहा है। भारतीय दर्शन में ब्रह्मांड के लगातार सृजन, विनाश और पुनर्सृजन के कालचक्र से गुज़रते रहने की परिकल्पना की गई है। प्रस्तुत चयन में समय विषयक कविताओं का संकलन किया गया है।
फ़ुरसत निकालना भी एक कला है। गधे हैं जो फ़ुरसत नहीं निकाल पाते। फ़ुरसत के बिना साहित्य चिंतन नहीं हो सकता, फ़ुरसत के बिना दिन में सपने नहीं देखे जा सकते। फ़ुरसत के बिना अच्छी-अच्छी, बारीक-बारीक, महान बातें नहीं सूझतीं।
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बीती हुई घड़ियाँ ज्योतिषी भी नहीं देखता।
शत्रु में दोष देखकर बुद्धिमान झट वहीं क्रोध को व्यक्त नहीं करते हैं, अपितु समय को देखकर उस ज्वाला को मन में ही समाए रखते हैं।
प्यार और सम्मान : सम्मान के बिना प्यार लंबे समय तक नहीं चल सकता है।
जब पेंटिंग की बात आती है तो सबसे महत्त्वपूर्ण चीज़ों में से एक है—सही समय पर रुकने में सक्षम होना और यह जानना कि कोई तस्वीर क्या कह रही है, वह क्या कह सकती है। अगर आप बहुत लंबे समय तक लगे रहते हैं तो अक्सर तस्वीर बर्बाद हो जाएगी।
जो अवसर को पकड़ ले वह ठीक व्यक्ति है।
यह स्त्री शिष्टाचार में क्रांति लाने का समय है—उन्हें उनकी खोई गरिमा लौटाने का समय। यह अपरिवर्तनीय नैतिकता को स्थानीय शिष्टाचार से अलग करने का समय है।
आलस्य मनुष्य के द्वारा समय को बर्बाद करना है, लालच उसके द्वारा भोजन या धन को बर्बाद करना है, क्रोध उसके द्वारा शांति को बर्बाद करना है। लेकिन ईर्ष्या—ईर्ष्या उसके द्वारा साथी मनुष्य को बर्बाद करना है। दूसरे मनुष्यों की सांत्वना बर्बाद करना है।
उपन्यास भावनाओं को साँचा देते हैं, समय का ऐसा अनुमान देते हैं जिसे औपचारिक इतिहास नहीं दे सकता।
ऐसा बिंदु आता है, जब आप लिखना बंद कर देते हैं और अधिक सोचते हैं।
हवा ने बारिश को उड़ा दिया, उड़ा दिया आकाश को और सारे पत्तों को, और वृक्ष खड़े रहे। मेरे ख़याल से, मैं भी, पतझड़ को लंबे समय से जानता हूँ।
एकमात्र गुण जिस पर मुझे गर्व है, वह मेरा स्वयं पर संदेह करना है; जब कोई लेखक इसे खो देता है, तब उसके द्वारा लिखना बंद कर देने का समय आ जाता है।
असली संग्रहालय वे स्थान हैं, जहाँ समय स्थान में परिवर्तित हो जाता है।
दोस्ती का जन्म उस समय होता है, जब एक आदमी दूसरे से कहता है : ‘‘अरे! तुम भी? मैं सोचता था कि मेरे सिवाय कोई और नहीं है।’’
अगर आप जीवन से प्यार करते हैं तो समय बर्बाद न करें, क्योंकि समय ही जीवन है।
यह लेखन के बारे में रहस्य है : यह कष्टों से, उन समयों से निकलता है—जब दिल को चीर दिया जाता है।
मैं जब पढ़ती हूँ, तब मैं इतनी ख़ुशी और आज़ादी महसूस करती हूँ कि मुझे विश्वास हो जाता है कि अगर मेरे पास हर समय किताबें हों तो मैं अपने जीवन के प्रत्येक कष्ट को सह सकती हूँ।
दया और क्षमा भी मानव के धर्म हैं, तो शक्तिवान होना और उपयुक्त समय पर देश और धर्म की रक्षा के लिए शक्ति का प्रयोग करना भी धर्म है।
जब देश में कोई विशेष नियम प्रतिष्ठित होता है, तब वह एक ही दिन में नहीं, बल्कि बहुत धीरे-धीरे संपन्न हुआ करता है। उस समय वे लोग पिता नहीं होते, भाई नहीं होते, पति नहीं होते-होते हैं केवल पुरुष। जिन लोगों के संबंध में वे नियम बनाए जाते है, वे भी आत्मीया नहीं होती, बल्कि होती हैं केवल नारियाँ।
सपनों का एक समय में एक ही मालिक होता है। इसलिए सपने देखने वाले अकेले होते हैं।
कोई चीज़ आकर्षण के नियम से परे नहीं है। आपकी ज़िंदगी आपके प्रबल विचारों का आईना है।
आधुनिक स्त्री जितनी अकेली है; उतनी प्राचीन नहीं, क्योंकि उसके पास निर्माण के उपकरण मात्र हैं—कुछ भी निर्मित नहीं।
आपके वर्तमान विचार आपके भावी जीवन का निर्माण कर रहे हैं। आप जिसके बारे में सबसे ज़्यादा सोचते हैं या जिस पर सबसे ज़्यादा ध्यान केंद्रित करते हैं, वह आपकी ज़िंदगी में प्रकट हो जाएगा।
धर्म संपूर्ण जीवन की पद्धति है। धर्म जीवन का स्वभाव है। ऐसा नहीं हो सकता कि हम कुछ कार्य तो धर्म की मौजूदगी में करें और बाक़ी कामों के समय उसे भूल जाएँ।
रात के मध्य में समय विशेष तरीक़े से चलता है।
समय एक ऐसा कारक है जो बिना उत्तर के भी आगे जाकर किसी प्रश्न की तीव्रता को कम कर सकता है।
कठिन समय में प्रचंड नृत्य की आवश्यकता होती है। हममें से प्रत्येक व्यक्ति इसका प्रमाण है।
प्रेम वह समय और स्थान है : जहाँ ‘मैं’ अपने आपको असाधारण बनने का अधिकार देती हूँ।
अगर आप किसी चीज़ के बारे में सोचने में बहुत अधिक समय बिताते हैं, तो आप उसे कभी पूरा नहीं कर पाएँगे।
अगर आप लंबे समय तक यात्रा करते हैं, तो हर कहानी उपन्यास बन जाती है।
प्रूस्त की तरह समय का एक संयंमी चाय-प्रेमी बनो।
निश्चित रूप से मैं वह हूँ जो समय, परिस्थिति, इतिहास ने मुझे बना दिया है; लेकिन मैं उससे भी बढ़कर हूँ। इसी तरह हम सब हैं।
समय न तो माँगा जा सकता है और न ही दिया जा सकता है। यह निराकार, रंगहीन है। यह एक बिंदु से प्रारंभ होकर किसी बिंदु पर समाप्त नहीं हो सकता। वही अमरत्व है। इसे इस तरह बदलना हमारे हाथ में नहीं है। हम इससे तटस्थ रह सकते हैं और केवल वही विनिमय कर सकते हैं जो हमारे अधिकार में है
मैंने लंबे समय से स्वतंत्रता को जीवन का भव्य आशीर्वाद और हर गुण का आधार माना है; और मैं अपनी आवश्यकताओं को कम करके भी सदा स्वतंत्रता को सुरक्षित कर लूँगी, चाहे मुझे बंजर भूमि पर रहना पड़े।
‘तत्काल’ के सिवा और कोई काल चिंतनीय नहीं है।
लोग सिक्के की तरह हैं। उनके दो पहलू होते हैं—चित्त या पट्ट। एक पहलू वह दिखाते हैं और दूसरा हमें समय दिखाएगा।
पुरानी शैली को नई शैली में अनूदित किया जा सकता है, कहा जा सकता है कि इसे तो हम अपने देश-काल के अनुकूल नए सिरे से उत्पन्न कर सकते हैं। यह तो अनुकृति ही है। मेरा निर्माण-कार्य भी यही था।
जीनियस बनने में बहुत समय लगता है। बहुत देर तक बैठे रहना पड़ता है—बिना कुछ करते हुए, सच में बिना कुछ करते हुए।
जब सच्चाई पर नवीनता का रंग चढ़ता है, उस समय मानो सोने की अंगूठी में कोई हीरा जड़ देता है। कला वही है जो नमूने में नई गठन गढ़ दे, परंतु वाणी में भी प्राचीनता का पाठ पढ़ाए।
ख़ुशियाँ हमें मिल सकती हैं—बुरे से बुरे समय में भी, अगर थाम कर रखें रौशनी का दामन।
समय केवल एक विचार है। हमारे पास केवल सत्य है। आप जो सोचते हैं, वह प्रकट हो जाता है। अगर आप समय कहें, तो यह समय है।
जब आप विदेश में होते हैं तो जीवन को प्यार करना आसान होता है। जहाँ आपको कोई नहीं जानता और आपके जीवन पर सिर्फ़ आपका नियंत्रण होता है, आप किसी अन्य समय की तुलना में अपने ख़ुद के अधिक स्वामी होते हैं।
जैसे-जैसे समय बीतता जाएगा, तुम समझ जाओगे—जो बचा रहता है, रहता है; जो नहीं बचा रहता है, नहीं रहता है।
समय ज़्यादातर चीज़ों को हल कर देता है। और जो समय हल नहीं कर सकता, उसे तुम्हें ख़ुद हल करना होगा।
आपके भीतर एक शांति और आश्रय है जहाँ आप किसी भी समय वापस जा सकते हैं और स्वयं बन सकते हैं।
मुहावरे युगों के जातीय अनुभव से बनते हैं और व्यक्ति की ज़बान पर आ जाते हैं। युग बदलता है तो मुहावरा बना रहता है, पर अर्थ बदल जाता है।
समय-समय पर प्रत्येक धर्म में ऐसे सुधारक उत्पन्न हुए हैं; जो सब प्रकार के प्रतीकों और अनुष्ठानों का विरोध करते आए हैं, पर उनके प्रयत्न निष्फल रहे हैं।
यदि कोई अपने समय से आगे निकल जाता है, तो कभी न कभी समय उसे पकड़ ही लेगा।
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