Font by Mehr Nastaliq Web

आँख पर उद्धरण

आँखें पाँच ज्ञानेंद्रियों

में से एक हैं। दृश्य में संसार व्याप्त है। इस विपुल व्याप्ति में अपने विविध पर्यायों—लोचन, अक्षि, नैन, अम्बक, नयन, नेत्र, चक्षु, दृग, विलोचन, दृष्टि, अक्षि, दीदा, चख और अपने कृत्यों की अदाओं-अदावतों के साथ आँखें हर युग में कवियों को अपनी ओर आकर्षित करती रही हैं। नज़र, निगाह और दृष्टि के अभिप्राय में उनकी व्याप्ति और विराट हो उठती है।

एक निगाह से देखना कलाकार की निगाह से देखना नहीं है।

अज्ञेय

हमारी आँखें सामने हैं, पीछे नहीं। सामने बढ़ते रहो और जिसे तुम अपना धर्म कहकर गौरव का अनुभव करते हो, उसे कार्यरूप में परिणत करो।

स्वामी विवेकानन्द

आँख वाले प्रायः इस तरह सोचते हैं कि अंधों की, विशेषतः बहरे-अंधों की दुनिया, उनके सूर्य प्रकाश से चमचमाते और हँसते-खेलते संसार से बिलकुल अलग हैं और उनकी भावनाएँ और संवेदनाएँ भी बिलकुल अलग हैं और उनकी चेतना पर उनकी इस अशक्ति और अभाव का मूलभूत प्रभाव है।

हेलेन केलर

तत्त्वों के अनुसंधान की जगह कल्पना का प्रवेश निषेध होता है, किंतु जो सिर्फ़ आँखों से दिखाई देता है, वह हमें बहुत दूर नहीं ले जा सकता है।

अवनींद्रनाथ ठाकुर

हमारी आँखें हैं, इस कारण अंधों के प्रति हमारा कुछ कर्तव्य है। हम अपनी आँखें दिन में एक बार, सप्ताह में एक बार या महीने में एक बार कुछ देर के लिए उन्हें उधार दे दें।

लाला हरदयाल

आँखें एक जैसी होने पर भी देखने-देखने में फ़र्क़ होता है।

रघुवीर चौधरी

रुचि का चमकता केंद्र वह आँख है, जो आँख के भी भीतर है।

जैक केरुआक

पहली नज़र को प्रेम मानकर समर्पण कर देना भी पागलपन है।

रघुनाथ चौधरी

आँखें होते हुए अंधा बनने वाले को कोई रास्ते नहीं लगा सकता।

सरदार वल्लभ भाई पटेल

प्रकृति सिर्फ़ वह नहीं जो आँखों को नज़र आती है… आत्मा की अंदरूनी तस्वीर में भी यह मौजूद होती है।

एडवर्ड मुंक

पेंटिंग विचार का मौन और दृष्टि का संगीत है।

ओरहान पामुक

एक ज़िंदगी किनारे की भी होती है, जो बह जाने वाले को भीगी आँखों से देखती है।

रघुवीर चौधरी

नेत्रों से प्रेम-रोग को अभिव्यक्त करके (पृथक होने की) याचना करने में स्त्री का स्त्रीत्व-विशेष माना जाता है। ढिढोरा पीटने वाले मेरे जैसे नेत्र जिनके हों, उनके हृदय की गुप्त बातों को समझना दूसरों के लिए कठिन नहीं है।

तिरुवल्लुवर

संसार भर में कहाँ है नारी के नेत्र के समान सौंदर्य सिखाने वाला अन्य लेखक?

विलियम शेक्सपियर

हे भगवान! दार्शनिक को सभी व्यक्तियों की आँखों के सामने रखी वस्तुओं को देखने की अंतर्दृष्टि प्रदान कर।

लुडविग विट्गेन्स्टाइन

वह सोचती है कि काश किसी की आँखें दूसरों को दिखाई नहीं देतीं। काश कोई अपनी आँखों को दुनिया से छिपा पाता।

हान कांग

हर निर्णय मुक्ति प्रदान करता है, तब भी जब वह विनाश की ओर ले जाए। अन्यथा, क्यों इतने सारे लोग आँखें खोलकर सीधा चलते हुए अपने दुर्भाग्य में दाख़िल होते?

एलायस कनेटी

वे कभी इस बात पर ग़ौर नहीं करेंगे कि ये कलाकृतियाँ मुश्किल घड़ियों और बहुत नाज़ुक पलों में बनाई गईं, कि ये कलाकृतियाँ कोरी आँखों से बिताई गईं रातों का नतीजा हैं, कि इन कलाकृतियों ने मुझसे मेरे ख़ून की क़ीमत वसूली है और मेरी शिराओं को कमज़ोर किया है… हाँ, वे कभी इस बात पर ग़ौर नहीं करेंगे।

एडवर्ड मुंक

एक ज़िंदगी किनारे की भी होती है, जो बह जाने वाले को भीगी आँखों से देखती है।

रघुनाथ चौधरी

चाँद रात की आँख है।

हान कांग

आप जैसे ही अपनी आँखों से सौंदर्य का आनंद लेते हैं, आपका दिमाग़ आपको बताता है कि सुंदरता खोखली है और सौंदर्य ख़त्म हो जाता है।

वर्जीनिया वुल्फ़

मन आँख से छोटा होता है।

वॉलेस स्टीवंस

मक्कार आदमी को अपनी भावनाओं पर जो अधिकार होता है, वह किसी बड़े योगी के लिए भी कठिन है। उसका दिल रोता है मगर होंठ हँसते हैं, दिल ख़ुशियों से मज़े लेता है मगर आँखें रोती हैं, दिल डाह की आग से जलता है, मगर ज़ुबान से शहद और शक्कर की नदियाँ बहती हैं।

प्रेमचंद

रस भरे हृदय और रस भरी आँखों के लिए यह सारी सृष्टि रसमयी है।

आचार्य रामचंद्र शुक्ल
  • संबंधित विषय : दिल
    और 1 अन्य

जो सचमुच में रूपदक्ष होते हैं, उनके आनंद की कोई सीमा नहीं रहती है, आँख, मन सभी के द्वारा वे एक रूप चिरकाल तक नए-नए रूपों में अचरज भरे भाव से देखते जाते हैं।

अवनींद्रनाथ ठाकुर

प्रकृति के नाना रूपों को देखने के लिए कवि की आँखें खुली रहनी चाहिए, और सबका प्रभाव ग्रहण करने के लिए उसका हृदय खुला रहना चाहिए।

आचार्य रामचंद्र शुक्ल

दया से लालिमा आती है, निर्दयता से त्वरित एक ही प्रश्न, एक आँख से अनुसंधान जन्मता है, चयन से कष्टप्रद मवेशी।

गर्ट्रूड स्टाइन

मेरी अपनी आँखें मेरे लिए पर्याप्त नहीं हैं, मैं औरों की आँखों से देखूँगा।

सी. एस. लुईस

जो कुछ भी आता है, वह वापस चला जाता है। निकट के खिसकते ही दूर को आँख में समाया जा सकता है।

रघुवीर चौधरी

आँखें बंद करने के बाद कुछ भी नज़र आए ऐसा नहीं।

रघुवीर चौधरी

जो लोग दोनों आँखें खोले हुए देखते हैं, लेकिन वास्तव में देख नहीं पाते, उन्हीं के कारण सारी गड़बड़ी है। वे आप भी ठगे जाते हैं और दूसरों को भी ठगने से बाज़ नहीं आते।

शरत चंद्र चट्टोपाध्याय

जब हमारी आँखें देखने में प्रवृत्त रहती हैं, तब रूप हमारे बाहर प्रतीत होते हैं। जब हमारी वृत्ति अंतर्मुख होती है, तब रूप हमारे भीतर दिखाई पड़ते हैं।

आचार्य रामचंद्र शुक्ल

आँख हो मनुष्य हृदय से देख सकता है, पर हृदय होने से आँख बेकार है।

बालकृष्ण भट्ट

समुद्र के समान वह प्रतिक्षण मेरे नेत्रों को क्षण-क्षण में नया-नया-सा दिखाई पड़ रहा है।

कालिदास

देखने के साथ सोचना जुड़ा हुआ है। हम जो कुछ भी देखते हैं, उस पर किसी-न-किसी रूप में सोचते ज़रूर हैं।

प्रयाग शुक्ल

जिस प्रकार हमारी आँखों के सामने आए हुए कुछ रूपव्यापार हमें रसाात्मक भावों में मग्न करते हैं, उसी प्रकार भूतकाल में प्रत्यक्ष की हुई कुछ परोक्ष वस्तुओं का वास्तविक स्मरण भी कभी-कभी रसात्मक होता है।

आचार्य रामचंद्र शुक्ल

प्रेम की विशेष शिक्षा नेत्रों को प्रसन्न करना है।

जॉर्ज चैपमैन

मन के पवित्र या अपवित्र करने का द्वार नेत्र है।

बालकृष्ण भट्ट

जो द्रष्टा है, वह द्रष्टा ही रहता है—दृश्य कभी नहीं होता।

दयानंद सरस्वती

तुम्हारे इन अट्टहासों के कारण हज़ारों आँखें आँसुओं से भरी हुई हैं।

किशनचंद 'बेवस'
  • संबंधित विषय : धनी

सूर्य की प्रशंसा करना, अपनी आँखों की प्रशंसा करना है।

रूमी

हृदय में निर्गुण ब्रह्म का ध्यान, नेत्रों के सामने सगुण रूप की सुंदर झाँकी और जीभ से सुंदर राम नाम का जप करना। यह ऐसा है मानो सोने की सुंदर डिबिया में मनोहर रत्न सुशोभित हो।

तुलसीदास

खुली आँखें रास्ते के काँटों को देखती हैं, बंद आँखों से दूर का भी सत्य देखा जा सकता है।

रामधारी सिंह दिनकर

हे माँ! तुममें ही कामधेनु की सामर्थ्य है। तुम मंगलधाम हो, तपस्वियों का अद्वैत हो। तुममें सागर की गंभीरता है, पृथ्वी की उदारता है। तुम्हारे नेत्रों में शांत चंद्रमा का तेज़ है और हृदय में मेघमालाओं का सघन वात्सल्य। हे मां! इन सब गुणों का वास तुम में ही है

यशवंत दिनकर पेंढरकर

काम का अंदाज़ा यह है कि इस मुल्क में ऐसे कितने लोग हैं—जिनकी आँखों से आँसू बहते हैं, उनमें से कितने आँसू हमने पोंछे, कितने आँसू हमने कम किए। वह अंदाज़ा है इस मुल्क की तरक़्क़ी का, कि इमारतें जो हम बनाएँ, या कोई शानदार बात जो हम करें।

जवाहरलाल नेहरू

क्रोध से अंधा हुआ व्यक्ति ही परमांध होता है क्योंकि उसकी बुद्धि नष्ट हो जाती है। केवल नेत्र से अंधा हुआ मनुष्य अंधा नहीं होता।

कवि कर्णपूर

आँख से देखा रूप, कान से सुना रूप, मन से सोचा रूप— ये सब रूप इसके लिए अर्थहीन हैं, जिसके पास रूपांकन विद्या नहीं है।

अवनींद्रनाथ ठाकुर

आँख में आँसू उन्हीं अकुटिल सीधे सत्पुरुषों के आता है, जिनके सच्चे सरल चित्त में कपट और कुटिलाई ने स्थान नहीं पाया है।

बालकृष्ण भट्ट

वर्तमान हमें अंधा बनाए रहता है, अतीत बीच-बीच में हमारी आँखें खोलता रहता है।

आचार्य रामचंद्र शुक्ल

विफलता को लेकर ही इस जीवन-संगीत की मैंने रचना की है। दोनों आँखों से आँसू की बूंदें टपकती हैं। इस विशाल विश्व में केवल नयनाश्रुओं से ही मेरा सागर-तट भर गया।

नलिनीबाला देवी