माँ

ब्रासु महारिसि एउ भणइ जइ सुइ-सत्थु पमाणु।

मायहँ चलण नवंताहं दिवि-दिवि गंगा-एहाणु॥

व्यास महर्षि कहते हैं कि यदि श्रुति-शास्त्र प्रमाण है तो माताओं के चरणों में नमन करने वालों का दिन-दिन गंगा-स्नान है।

हेमचंद्र

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