Font by Mehr Nastaliq Web

मूर्ख पर उद्धरण

दो चार शब्द इधर-उधर से लेकर, कोई व्यक्ति किसी विद्वान से—जिसने संपूर्ण जीवन सरस्वती आराधना में बिताया हो—अगर प्रतिस्पर्धा करने चले, तो यह ऐसी ही अज्ञता होगी जैसे कि साँप, गज एवं सिंह के ललाट पर पैर रखने की मूर्खता, क्रमशः पक्षी, शश तथा सियार करें।

पण्डितराज जगन्नाथ

आतिथ्य का निर्वाह करने की मूढ़ता ही धनी की दरिद्रता है। यह बुद्धिहीनों में ही होती है।

तिरुवल्लुवर

अज्ञान सदैव ही आत्मप्रशंसा के लिए तैयार रहता है।

निकोलस बोइल्यू

जो शोर की जगह संगीत, आनंद की जगह ख़ुशी, आत्मा की जगह सोना, रचनात्मक कार्य की जगह व्यापार, और जुनून की जगह मूर्खता चाहता है, उसे इस साधारण दुनिया में कोई घर नहीं मिलता।

हरमन हेस

पहली बात जो मैंने स्कूल में सीखी वह यह थी कि कुछ लोग बेवक़ूफ़ होते हैं, दूसरी बात जो मैंने सीखी वह यह कि कुछ तो इससे भी बदतर हैं।

ओरहान पामुक

बहुत से बुद्धिमान लोगों के पास समझ की कमी होती है, बहुत से मूर्खों के पास दयालु स्वभाव होता है, ख़ुशी का अंत अक्सर आँसुओं में होता है, लेकिन मन के अंदर क्या है—यह कभी नहीं बताया जा सकता है।

अमोस ओज़

आँखें होते हुए अंधा बनने वाले को कोई रास्ते नहीं लगा सकता।

सरदार वल्लभ भाई पटेल
  • संबंधित विषय : आँख

बुद्धि से धन प्राप्त होता है और मूर्खता दरिद्रता का कारण है—ऐसा कोई नियम नहीं है। संसार चक्र के वृत्तांत को केवल विद्वान पुरुष ही जानते हैं, दूसरे लोग नहीं।

वेदव्यास

ग़ुस्से का स्वभाव आपको जल्द ही मूर्ख बना देगा।

ब्रूस ली

प्रत्येक जाति में मनुष्य को बाल्यकाल ही में एक धर्म-संघ का सदस्य बना देने की मूर्खतापूर्ण प्रथा चली रही है। जब उसमें जिज्ञासा नहीं, प्रेरणा नहीं, तब उसके धर्मग्रहण करने का क्या तात्पर्य हो सकता है?

जयशंकर प्रसाद

मुझे बताओ, प्यार किसी को मूर्ख बनाता है या केवल मूर्ख ही प्यार करते हैं?

ओरहान पामुक

अंधे की लाठी पकड़ने वाला अंधा हो तो दोनों ही गड्ढे में गिरते हैं।

संत तुकाराम

प्रत्येक व्यक्ति की अपनी मूर्खता है, लेकिन सबसे बड़ी मूर्खता है—मूर्खता का होना।

निकोस कज़ानज़ाकिस

मैं इसलिए पागल नहीं हूँ क्योंकि मैं औरत हूँ… मैं पागल हूँ क्योंकि तुम मूर्ख हो।

मार्गरेट एटवुड

अगर परिणामों को देख कर फ़ैसला किया जाए तो मूर्खता और बुराई समान है।

मार्गरेट एटवुड

इस दुनिया में दुख का बड़ा कारण मूल पाप नहीं; बल्कि एक तरह की मूल, अकल्पनीय और ज़िद्दी मूर्खता है।

जॉर्ज सैंड

खनखनाते हुए मणिमय मुक्ताहार, सोने के नूपुर, कुंकम के अंगराग, सुगंधित पुष्प, विचित्र मालाएँ, रंगबिरंगे वस्त्र—इन सब चीज़ों की मूर्खों ने नारी में कल्पना कर ली है किंतु भीतर-बाहर विचारने वालों के लिए तो स्त्रियाँ नरक ही हैं।

कृष्ण बिहारी मिश्र

…इस दुनिया में बहुत सारे बेवक़ूफ़ हैं।—यह कहने के बाद, मुझ पर इसे साबित करने का बोझ है।

फ्रांत्ज़ फ़ैनन

जिस प्रकार छायावाद के आरंभिक दिनों में कैशौर-भावुकता एक प्रकार की अलंकृति थी; और उसे कवि-कर्म का बीजमंत्र माना जाता था, उसी तरह प्रयोगवाद के आरंभकाल में भावुकता मूर्खता का पर्याय हो गई।

नामवर सिंह

मूर्खों के साथ कभी बहस मत करो। वे आपको अपने स्तर तक गिरा देंगे और आपको अनुभव से हरा देंगे।

मार्क ट्वेन

मूर्खतापूर्ण काम करें, लेकिन उन्हें उत्साह के साथ करें।

कोलेट

वानरों की सभा में वृक्षों की शाखाएँ कोमल आसन होती हैं, चीत्कार सुभाषित होता है, एवं दाँतों और नखों से फाड़ना स्वागत सत्कार होता है—यह ठीक ही है।

पण्डितराज जगन्नाथ

हर व्यक्ति को जो चीज़ हृदयंगम हो गई है, वह उसके लिए धर्म है। धर्म बुद्धिगम्य वस्तु नहीं, हृदयगम्य है। इस लिए धर्म मूर्ख लोगों के लिए भी है।

महात्मा गांधी

बात करो, बात करो, बात करो : शब्दों की निरी शोकाकुल करने वाली मूर्खता।

विलियम फॉकनर

मूर्ख, भूत को हाथों की क्या ज़रूरत है?

हान कांग

सबसे विकट आत्मविश्वास मूर्खता का होता है।

हरिशंकर परसाई

आत्मविश्वास कई तरह का होता है—धन का, बल का, विद्या का, पर सबसे ऊँचा आत्मविश्वास मूर्खता का होता है।

हरिशंकर परसाई

विश्वविद्यालय में आपको यह नहीं बताया जाता है कि क़ानून का बड़ा हिस्सा मूर्खों को बर्दाश्त करना सीखना है।

डोरिस लेसिंग

मूढ़ अवस्था तमोगुणात्मक है और इसमें मन की प्रवृति केवल औरों का अनिष्ट करने में होती है।

स्वामी विवेकानन्द

आप जो भी करना चाहते हैं, कर डालें… अपने आपको मूर्ख बनाना बेहद ज़रूरी है।

ग्लोरिया स्टाइनम

एडगर ने कहा है कि जब हम नहीं बोलते हैं, तब हम असहनीय हो जाते हैं; और जब हम बोलते हैं, तब हम ख़ुद को मूर्ख बना रहे होते हैं।

हेर्टा म्युलर

बेवक़ूफ़ी सारी दुनिया में एक-सी है।

जॉन स्टुअर्ट मिल

जैसे-जैसे हम ज्ञान पाते हैं, हम अपने पिताओं को मूर्ख समझते हैं। निस्संदेह हमारे अधिक बुद्धिमान पुत्र हमें भी ऐसा ही समझेंगे।

अलेक्ज़ेंडर पोप

बेचारा आदमी वह होता है; जो समझता है कि मेरे कारण तमाम हलचल हो रही है, पर वास्तव में उनके कारण कोई छिपकली भी कीड़ा नहीं पकड़ रही है। बेचारा आदमी वह होता है, जो समझता है कि मेरे सब दुश्मन हैं, पर सही यह है कि कोई उस पर ध्यान नहीं देता। बेचारा आदमी वह होता है, जो समझता है कि मैं वैचारिक क्रांति कर रहा हूँ और लोग उससे सिर्फ़ मनोरंजन करते हैं। वह आदमी सचमुच बड़ा दयनीय होता है, जो अपने को केंद्र बनाकर सोचता है।

हरिशंकर परसाई

जो व्यक्ति दुष्टों में साधुता लाने का कार्य करता है, वह मानो आकाश में घर बनाता है, जल में सुंदर चित्र बनाता है और वायु को जल से नहलाता है।

पण्डितराज जगन्नाथ

विद्वानों के विरोध से अविद्वानों में विरोध बढ़कर, अनेकविध दुःख की वृद्धि और सुख की हानि होती है। इस हानि ने; जो कि स्वार्थी मनुष्यों को प्रिय है, सब मनुष्यों को दुःख-सागर में डुबा दिया है।

दयानंद सरस्वती
  • संबंधित विषय : दुख

जो आपको मूर्खतापूर्ण कामों में भरोसा दिला सकते हैं, वे आपसे अत्याचार भी करवा सकते हैं।

वाल्तेयर

बेवक़ूफ़ी पर हँसने का रिवाज बहुत पुराना है। लोग बनाबनाया बेवक़ूफ़ पाकर हँसते भी हैं और हँसने के लिए बेवक़ूफ़ बनाते भी हैं।

आचार्य रामचंद्र शुक्ल

हिंदी का लेखक या तो वास्तव में बुद्धू होता ही है, या बुद्धू बनने के अवसर की ताक में रहता है और सरलता के गर्व के साथ बुद्धू बन जाता है।

हरिशंकर परसाई

मैं इससे इंकार नहीं कर रही हूँ कि स्त्रियाँ मूर्ख होती हैं, सर्वशक्तिमान परमात्मा ने उन्हें पुरुषों के जोड़ का ही बनाया है।

जॉर्ज इलियट

तुम्हारे विचार बहुत ऊँचें हैं पर कुल मिलाकर उससे यही साबित होता है कि तुम गधे हो।

श्रीलाल शुक्ल

बंदर किसी मूर्ख द्वारा गले में पहनाए गए हार को पहले चखता है, फिर सूँघता है और अंत में उसे बटोरकर, नीचे रखकर उसे अपना आसन बना लेता है।

पण्डितराज जगन्नाथ

वाचालों को वाचाल होने दो, वे इससे अधिक और कुछ नहीं जानते।

स्वामी विवेकानन्द

मूर्खता के भी दर्ज़े हैं। अपढ़ता मूर्खता नहीं है। सबसे बड़ी मूर्खता है यह विश्वास लबालब भरे रहना कि लोग हमें वही मान रहे हैं, जो हम उन्हें मनवाना चाहते हैं।

हरिशंकर परसाई

मूर्ख मनुष्य विद्वानों को गाली और निंदा से कष्ट पहुँचाते हैं। गाली देने वाला पाप का भागी होता है और क्षमा करने वाला पाप से मुक्त हो जाता है।

वेदव्यास

बिना पढ़े ही गर्व करने वाले, दरिद्र होकर भी बड़े-बड़े मनोरथ करने वाले और बिना कर्म किए ही धन पाने की इच्छा रखने वाले मनुष्य को पंडित लोग मूर्ख कहते हैं।

वेदव्यास

ज्ञान के अधिकारी वे ही हो सकते हैं, जिनमें बुद्धि का विकास अधिक हो, जिनकी ग्रहण शक्ति शास्त्रचिंतन आदि द्वारा परिष्कृत, व्यवस्थित और समुन्नत हो। पर भक्ति का अधिकार; गहरी से गहरी भक्ति का अधिकार, मूर्ख से मूर्ख को भी पूरा रहता है।

आचार्य रामचंद्र शुक्ल

महाभारत में पाँच प्रकार के व्यक्ति जीते हुए भी मरे के समान बताए गए हैं—दरिद्र, रोगी, मूर्ख प्रवासी तथा नित्य सेवा करने वाला।

विष्णु शर्मा

चूँकि अज्ञानता मनुष्य में एक प्रकार का मानसिक दिवालियापन ही है। वे लोग जो असहाय बच्चों या छोटे जीवों को प्रताड़ित करने में आनंद पाते हैं—असल में पागल हैं।

अकीरा कुरोसावा

ईश्वर की तो हमेशा कृपा ही होती है। हम उस कृपा को पहचान सकें, यह हमारी मूर्खता है।

महात्मा गांधी