आँख पर अनुवाद

आँखें पाँच ज्ञानेंद्रियों

में से एक हैं। दृश्य में संसार व्याप्त है। इस विपुल व्याप्ति में अपने विविध पर्यायों—लोचन, अक्षि, नैन, अम्बक, नयन, नेत्र, चक्षु, दृग, विलोचन, दृष्टि, अक्षि, दीदा, चख और अपने कृत्यों की अदाओं-अदावतों के साथ आँखें हर युग में कवियों को अपनी ओर आकर्षित करती रही हैं। नज़र, निगाह और दृष्टि के अभिप्राय में उनकी व्याप्ति और विराट हो उठती है।

सपने

पाश

आवाज़ें-152

अंतोनियो पोर्चिया

आवाज़ें-162

अंतोनियो पोर्चिया

आवाज़ें-127

अंतोनियो पोर्चिया

आवाज़ें-14

अंतोनियो पोर्चिया

आवाज़ें-135

अंतोनियो पोर्चिया

आवाज़ें-229

अंतोनियो पोर्चिया

बावन साल पुरानी आँखें

राही मासूम रज़ा