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रोग पर उद्धरण

रोग-पीड़ा-मृत्यु मानव

के स्थायी विषाद के कारण रहे हैं और काव्य में अभिव्यक्ति पाते रहे हैं। इस चयन में रोग के विषय पर अभिव्यक्त कविताओं का संकलन किया गया है।

नेत्रों से प्रेम-रोग को अभिव्यक्त करके (पृथक होने की) याचना करने में स्त्री का स्त्रीत्व-विशेष माना जाता है। ढिढोरा पीटने वाले मेरे जैसे नेत्र जिनके हों, उनके हृदय की गुप्त बातों को समझना दूसरों के लिए कठिन नहीं है।

तिरुवल्लुवर

बीमारी, दीवानगी और तबाही फ़रिश्तों की तरह मेरे पालने को घेरे रहते थे और जिन्होंने ज़िंदगी भर मेरा पीछा किया।

एडवर्ड मुंक

समाज में कानून-व्यवस्था की गड़बड़ी से अव्यवस्था और सामूहिक भुखमरी फैल सकते हैं, यहाँ तक कि पूरे शहरों और सभ्यताओं का विनाश हो सकता है। अशांत परिस्थितियों में, सबसे बुरे आपराधिक तत्त्व अक्सर फ़ायदा उठा लेते हैं। ताक़त छीन लेते हैं और बाकी सभी लोगों के लिए जीना मुश्किल कर देते हैं। इसी प्रकार, जीव-विज्ञान में नियंत्रण खो देना, विनाश और मृत्यु की ओर ले जा सकता है। साथ ही, यह कई बीमारियों को भी न्योता दे सकता है। अगर कोशिकाएँ सही से काम करें, तो इसके परिणामों का सबसे बुरा उदाहरण कैंसर है। इसमें गड़बड़ी वाली कोशिकाओं को पड़ोसी कोशिकाएँ रोकती नहीं हैं, बल्कि इसके बजाए वे बिना नियंत्रण के कई गुना बढ़ती हैं और सारे ऊतकों और अंगों को अपने कब्ज़े में लेकर, उनके काम-काज में दख़ल देने लगती हैं। इस संदर्भ में कैंसर और उम्र बढ़ने का आपस में गहरा संबंध है : वे दोनों ही जैविक अनियंत्रण से पैदा होते हैं, और उनका अंतिम स्रोत आमतौर पर हमारे जींस में होने वाले उत्परिवर्तन हैं, जिनका कारण हमारे डीएनए में होने वाले बदलाव होते हैं।

वेंकी रामकृष्णन

चिंता और बीमारी के बग़ैर मैं बिना पतवार वाली कश्ती की तरह होता।

एडवर्ड मुंक

वह सब कुछ जो आज मेरे पास है, डर और बीमारी के बग़ैर मैं उस सबमें निपुणता हासिल नहीं कर सकता था।

एडवर्ड मुंक
  • संबंधित विषय : डर

धरती पर वायरस मनुष्य से कहीं पहले से मौजूद रहे हैं, परिस्थितियों के अनुसार ख़ुद को बहुत तेज़ी से ढाल लेते हैं और हमारे जाने के बाद भी लंबे समय तक यहाँ रहेंगे।

वेंकी रामकृष्णन

रोगों के आगार शरीर में किरायेदार के समान उपस्थित प्राण के लिए, मानो अभी तक कोई शाश्वत स्थान ही प्राप्त नहीं हुआ।

तिरुवल्लुवर
  • संबंधित विषय : देह

शास्त्र कटु औषधि के समान अविद्यारूप व्याधि का नाश करता है। काव्य आनंददायक अमृत के समान अज्ञान रूप रोग का नाश करता है।

कुंतक

कोई कवि सहज और स्वस्थ रहे तो समझ लीजिए, कुछ क़सर है।

त्रिलोचन
  • संबंधित विषय : कवि

हम संक्रमण से लड़ने के लिए जिन एँटीबॉडीज का उपयोग करते हैं, वे प्रोटीन ही हैं।

वेंकी रामकृष्णन

पुरुष जब बिस्तर में बेकार हो जाए, बेरोज़गार हो जाए, बीमार हो जाए तो पत्नी को सारे सच्चे-झूठे झगड़े याद आने लगते हैं। तब वह आततायी बन जाती है। उसके सर्पीले दाँत बाहर निकल आते हैं।

स्वदेश दीपक

बुढ़ापा, रोग और मृत्यु इस संसार का महाभय है। ऐसा कोई देश नहीं है जहाँ लोगों को यह भय नहीं होता हो।

अश्वघोष

किसी कार्य को अच्छी तरह संपन्न किए बिना छोड़े और सदा सावधान रहे। शरीर में गड़ा हुआ काँटा भी यदि पूर्णरूप से निकाल दिया जाए तो चिरकाल तक विकार उत्पन्न करता है।

वेदव्यास

जैसे मनुष्यों की प्रार्थनाएँ उनकी इच्छा का रोग हैं, वैसे ही उनके मतवाद उनकी बुद्धि के रोग हैं।

राल्फ़ वाल्डो इमर्सन

मनुष्य दीनतारहित होकर और रोगरहित होकर पुरुष की पूर्ण आयु तक जिए।

भट्टनारायण

रोगानुसार ही औषधि होती है।

दिङ्नाग

'भावुकता' भी जीवन का एक अंग है। अतः साहित्य की किसी शाखा से हम उसे बिलकुल हटा तो सकते नहीं। हाँ, यदि वह व्याधि के रूप में—फ़ीलपाँव की तरह—बढ़ने लगे तो उसकी रोक-थाम आवश्यक है।

आचार्य रामचंद्र शुक्ल

आसक्तियाँ और रोग—ये दोनों वस्तुएँ आदमी को पराक्रमी और स्वाधीन करती हैं।

राजकमल चौधरी

शरीर के महत्त्व को, अपने देश के महत्त्व को समझने के लिए बीमार होना बेहद ज़रूरी बात है।

राजकमल चौधरी

इस दुनिया में सत्ता के पीछे लगा हुआ सबसे बड़ा रोग कोई हो सकता है, तो वह खु़ुशामद है।

सरदार वल्लभ भाई पटेल

बुख़ार की दुनिया भी बहुत अजीब है। वह यथार्थ से शुरू होती है और सीधे स्वप्न में चली जाती है।

मंगलेश डबराल

प्रायः हर डॉक्टर की कोई अपनी बीमारी होती है।

हेनरी फ़ील्डिंग

निश्चय ही, रोग को ठीक-ठीक जाने बिना उसकी चिकित्सा प्रारंभ नहीं की जा सकती।

कालिदास

रोग, अप्रिय घटनाओं की प्राप्ति, अधिक परिश्रम तथा प्रिय वस्तुओं का वियोग—इन चार कारणों से शारीरिक दुःख प्राप्त होता है।

वेदव्यास

सोचते रहो। उदास रहो और बीमार बने रहो।

राजकमल चौधरी

बीमारी और बुढ़ापा—एक भयानक जोड़ा।

कृष्ण बलदेव वैद

ज़रा से जीर्ण रूपों को, रोग से क्षीण शरीरों को और काल से ग्रस्त आयु को देखकर किसे अभिमान हो सकता है!

क्षेमेंद्र

अधिकार, विनाशकारी प्लेग के सदृश, जिसे छूता है उसे ही भ्रष्ट कर देता है।

पर्सी बिश शेली