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प्रकाश पर उद्धरण

प्रकाश का संबंध हमारे

दृश्य संसार से है। प्रकाश अंधकार के प्रतिरोध की प्रतीति भी है। इस चयन में प्रकाश एवं उसके विभिन्न शब्द और अर्थ पर्यायों के साथ अभिव्यक्त कविताओं का संकलन किया गया है।

ईश्वर जीवन है, सत्य है, प्रकाश है। वह प्रेम है, वह सर्वोच्च शिव है—शुभ है।

महात्मा गांधी

मुल्ला और मशालची दोनों एक ही मत के हैं। औरों को तो ये प्रकाश देते हैं और स्वयं अंधकार में फँसे रहते हैं।

बुल्ले शाह

शब्दों के ब्रह्मांड में सोलह-सोलह सूर्य प्रज्वलित रहे हैं। वहाँ कुछ भी बाधित नहीं है, सब कुछ पूर्ण है, प्रचुर है।

रघुवीर चौधरी

भाषा की कितनी दयनीय दरिद्रता है! सितारों की तुलना हीरे से करना!

गुस्ताव फ़्लॉबेयर

मृत्यु के बीच जीवन अस्तित्व बना रहता है, असत्य के बीच सत्य टिका रहता है और अंधकार के बीच प्रकाश जीवित रहता है।

महात्मा गांधी

मौत तारकोल-सी स्याह है, पर रंग रोशनी से भरे होते हैं। एक चित्रकार होने के नाते हरेक को रोशनी की किरणों को साथ लेकर काम करना चाहिए।

एडवर्ड मुंक

हर चीज़ में एक दरार है। इसी तरह रोशनी अंदर आती है।

लियोनार्ड कोहेन

यदि समग्र भाव से समस्त नारी जाति के दुःख-सुख और मंगल-अमंगल की तह में देखा जाए, तो पिता, भाई और पति की सारी हीनताएँ और सारी धोखेबाज़ियाँ क्षण भर में ही सूर्य के प्रकाश के समान आप से आप सामने जाती हैं।

शरत चंद्र चट्टोपाध्याय

घोर अंधकार में जिस प्रकार दीपक का प्रकाश सुशोभित होता है उसी प्रकार दुःख का अनुभव कर लेने पर सुख का आगमन आनंदप्रद होता है किंतु जो मनुष्य सुख भोग लेने के पश्चात् निर्धन होता है वह शरीर धारण करते हुए भी मृतक के समान जीवित रहता है।

शूद्रक

जो लोग इस बात से अनजान हैं कि वे अंधकार में चल रहे हैं, वे कभी भी प्रकाश की तलाश नहीं करेंगे।

ब्रूस ली

स्पष्ट और शांत उसकी आवाज़ श्रोताओं के ऊपर तैरती रही, जैसे एक प्रकाश, जैसे एक तारा भरा आकाश।

हरमन हेस

इतनी चमकदार रौशनी में, अँधेरे में गुज़रे लंबे समय बाद, जो दिखता है वह सिर्फ़ स्याह और सफ़ेद है, सिर्फ़ रूपरेखाएँ जिनके ख़िलाफ़ पलक झपकाना चाहिए।

चक पैलनिक

और वह चाँद को देखता है—गतिहीन प्रकाश से भरे बर्फ़ के गोल टुकड़े की तरह।

गुस्ताव फ़्लॉबेयर

कलाकार का काम मानव हृदय में प्रकाश भेजना है।

जॉर्ज सैंड

अँधेरा प्रकाश की ओर आकर्षित होता है, लेकिन प्रकाश को यह पता नहीं होता; प्रकाश को अंधकार को अवशोषित करना चाहिए और इसलिए उसे स्वयं ही समाप्त हो जाना चाहिए।

एडना ओ’ब्रायन

अँधेरे में उजाला होता है, बस उसे ढूँढ़ना होता है।

बेल हुक्स

रोशनी और परिभाषाओं को फेंक दो, और वह बताओ जो तुम अँधेरे में देखते हो।

वॉलेस स्टीवंस

आलोक जो दृश्य दिखाता है, वह तो कोई छोटी-मोटी बात है नहीं।

रवींद्रनाथ टैगोर

प्यार सांत्वना नहीं है। यह प्रकाश है।

सिमोन वेल

दीपावली प्रकाश का पर्व है। इस दिन जिस लक्ष्मी की पूजा होती है। वह गरुड़वाहिनी है— शक्ति, सेवा और गतिशीलत उसके मुख्य गुण हैं।

हजारीप्रसाद द्विवेदी

आलोक प्रतिदिन हमसे केवल एक ही बात कह रहा है 'देखो।' बस और कोई बात नहीं। एक बार निहारकर देखो और कुछ करो।

रवींद्रनाथ टैगोर

वेदांत तुम्हारे कर्म-फल के लिए क्षुद्र देवताओं को उत्तरदायी नहीं बनाता; वह कहता है, तुम स्वयं ही अपने भाग्य के निर्माता हो। तुम अपने ही कर्म से अच्छे और बुरे दोनों प्रकार के फल भोग रहे हो, तुम अपने ही हाथों से अपनी आँखें मूँदकर कहते हो—अंधकार है। हाथ हटा लो—प्रकाश दीख पड़ेगा। तुम ज्योतिस्वरूप हो, तुम पहले से ही सिद्ध हो।

स्वामी विवेकानन्द

मन की शक्तियाँ इधर-उधर बिखरी हुई प्रकाश की किरणों के समान हैं। जब उन्हें केंद्रीभूत किया जाता है, तब वे सब कुछ आलोकित कर देती हैं।

स्वामी विवेकानन्द

नवयुग की ज्योति को जो एक बार देख लेता है, उसी को वह पवित्र बनाती हुई जलाने लगती हैं।

मैक्सिम गोर्की

प्रकाश और जिसका प्रकाश, इन दोनों में ही एक प्रतिकूलता रहती है, उस प्रतिकूलता के सामंजस्य द्वारा ही दोनों सार्थकता प्राप्त करते हैं। वास्तव में दो विरोधों के मिलाप के बिना प्रकाश हो ही नहीं सकता है।

रवींद्रनाथ टैगोर

"विचारों को छोड़ों और निर्विचार हो रहो, पक्षों को छोड़ो और निष्पक्ष हो जाओ—क्योंकि इसी भाँति

वह प्रकाश उपलब्ध होता है, जो कि सत्य को उद्घाटित करता है।’’

ओशो

सच्ची रोशनी भीतर से पैदा होती है।

महात्मा गांधी

आस्था तर्क से परे की चीज़ है। जब चारों ओर अँधेरा ही दिखाई पड़ता है और मनुष्य की बुद्धि काम करना बंद कर देती है उस समय आस्था की ज्योति प्रखर रूप से चमकती है और हमारी मदद को आती है।

महात्मा गांधी

अंधकार का आलोक से, असत् का सत् से जड़ का चेतन से और बाह्य जगत का अंतर्जगत से संबंध कौन कराती है? कविता ही न।

जयशंकर प्रसाद

उपवास करने से चित्त अंतर्मुख होता है, दृष्टि निर्मल होती है और देह हलकी बनी रहती है।

काका कालेलकर

जड़-चेतनमय, विष अमृतमय, अंधकार-प्रकाशमय जीवन में न्याय के लिए कर्म करना ही गति है। मुझे जीना ही होगा, कर्म करना ही होगा। यह बंधन ही मेरी मुक्ति भी है। इस अंधकार में ही प्रकाश पाने के लिए मुझे भी जीना है।

अमृतलाल नागर

अगर आपके दिल में रोशनी है, तो आपको अपने घर का रास्ता मिल जाएगा।

रूमी

जो प्रकाश स्वरूप है; अगर उसका प्रकाश हो तो वही तो उसकी बाधा है—प्रकाश ही उसकी मुक्ति है।

रवींद्रनाथ टैगोर

ईश्वर जीवन है, सत्य है, और प्रकाश है। वही प्रेम है; वही परम मंगल है।

महात्मा गांधी

जहाँ भी जीवनीशक्ति का प्रकाश देखो, वहाँ समझना कि उसके पीछे अनंत शक्ति का भंडार है।

स्वामी विवेकानन्द

रोशनी एक मुक्त तत्व है—सूर्य की गर्वीली संतान। जब वह अपने निखार पर आती है; वह दुनिया के किसी भी फूल से सुंदर होती है और सारी थकी हुई, मर चुकी और ग़लत चीज़ों का विनाश कर सकती है।

मैक्सिम गोर्की

आदर्श अंधकार से सूर्य की ओर उठने की आकांक्षा है। जो उस आकांक्षा से पीड़ित नहीं होता है, वह अंधकार में ही पड़ा रह जाता है।

ओशो

कृतज्ञ नेत्र! सुंदर, मनोहर और हृदयहारी! किसने बनाए? क्यों बनाए? आत्मा के गवाक्ष। पवित्रता के आकाश | प्रकाश के पुंज।

वृंदावनलाल वर्मा

ज्ञान, प्रेम और प्रकाश और दृष्टि है।

हेलेन केलर

कलाकार क्या है? वह अपने युग की स्फूर्ति के प्रकाश के रंग में डूबी भगवान की प्राणवान प्रेरक और कल्पक कूँची है।

माखनलाल चतुर्वेदी

आलोक से मंडित होने के कारण फूल को एक प्रकार का लावण्य मिल जाता है, और छाया से घिर जाने पर वह और प्रकार का लावण्य पा लेता है।

अवनींद्रनाथ ठाकुर

हे एकता के देवता! मैं तुम्हारा मंदिर कहाँ पाऊँ? वह हृदय कहाँ है जिसके अंदर एकता का प्रकाश है?

किशनचंद 'बेवस'

धर्म आध्यात्मिक परिवर्तन है, एक अंतर्मुखी रूपांतरण है। यह अंधकार से प्रकाश की ओर जाना है, आत्मोद्धारहीनता से आत्मोद्धार की स्थिति में पहुँचना है। यह एक जागरण है. एक प्रकार की पुनर्जन्मता है।

सर्वेपल्लि राधाकृष्णन

जिनकी विद्या विवाद के लिए, धन अभिमान के लिए, बुद्धि का प्रकर्ष ठगने के लिए तथा उन्नति संसार के तिरस्कार के लिए है, उनके लिए प्रकाश भी निश्चय ही अंधकार है।

क्षेमेंद्र

ऊपर देखने से रोशनी मिलती है, हालाँकि पहले तो आपको चक्कर आता है।

रूमी

यदि नए पल्लवों में श्वेत फूल रख दिया जाए या लाल वर्ण के मूँगे पर उज्ज्वल मोती रख दिया जाए तो उन (पार्वती) के अरुण अधरों पर कांति-वर्षा करने वाली मंद स्मिति की तुलना कर सकते हैं।

कालिदास

सूर्य-प्रकाश जब सीधे आता है तो धूप कहलाता है, जब चंद्र-ताल में नहाकर आता है तो चाँदनी कहलाता है।

अमृतलाल वेगड़

मन की शक्तियाँ बिखरी हुई प्रकाश की किरणों के समान हैं, जब वे केंद्रित होती हैं तो प्रकाशमान हो उठती हैं।

स्वामी विवेकानन्द

जिस प्रकार दीपक को प्रकाशित करने के लिए किसी अन्य दीपक की अपेक्षा नहीं होती, उसी प्रकार बोध आत्म-स्वरूप होने के कारण उसे किसी अन्य बोध की अपेक्षा नहीं होती।

आदि शंकराचार्य

बुद्धि उस मुख के प्रकाश को देखने की शक्ति नहीं रखती, इस कारण उस प्रकाश को देखने के लिए एक दूसरी ही आँख की खोज कर।

शम्स तबरेज़ी
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