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जयशंकर प्रसाद

1889 - 1937 | वाराणसी, उत्तर प्रदेश

छायावादी दौर के चार स्तंभों में से एक। समादृत कवि-कथाकार और नाटककार।

छायावादी दौर के चार स्तंभों में से एक। समादृत कवि-कथाकार और नाटककार।

जयशंकर प्रसाद की संपूर्ण रचनाएँ

गीत 21

कहानी 5

 

काव्य खंड 4

 

उद्धरण 60

प्रेम महान है, प्रेम उदार है। प्रेमियों को भी वह उदार और महान बनाता है। प्रेम का मुख्य अर्थ है—‘आत्मत्याग’।

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इस भीषण संसार में एक प्रेम करने वाले हृदय को दबा देना सबसे बड़ी हानि है।

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असंभव कहकर किसी काम को करने से पहले, कर्मक्षेत्र में काँपकर लड़खड़ाओ मत।

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दो प्यार करने वाले हृदयों के बीच में स्वर्गीय ज्योति का निवास होता है।

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अधिक हर्ष और उन्नति के बाद ही अधिक दुःख और पतन की बारी आती है।

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पुस्तकें 1

 

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI