सूर्य पर कविताएँ

सूर्य धरती पर जीवन का

आधार है और प्राचीन समय से ही मानवीय आस्था का विषय रहा है। वेदों में सूर्य को जगत की आत्मा कहा गया और उसकी स्तुति में श्लोक रचे गए। इस चयन में सूर्य को विषय बनाती कविताओं को शामिल किया गया है।

सूर्यास्त

आलोकधन्वा

मेरे सूर्य

निलय उपाध्याय

न बुझी आग की गाँठ

केदारनाथ अग्रवाल

महाकुंभ

निधीश त्यागी

ज़िद मछली की

इला कुमार

माँ और सुरुज देव

दीपक जायसवाल

साँझ

शुभम् आमेटा

पहाड़ों के जलते शरीर

वंशी माहेश्वरी

पृथ्वी और सूर्य

नरेंद्र जैन

नदी की माँग भरकर

संदीप तिवारी

जड़ता

कीर्ति चौधरी

कोणार्क

नेमिचंद्र जैन

सूर्यमुखी

दिनेश कुमार शुक्ल

पश्चिमांचल

आदित्य शुक्ल

टूटा हुआ पुल

आलोक रंजन

पृथिवी एक अनिवार्यता की तरह है

संतोष कुमार चतुर्वेदी

सूरज

योगेंद्र गौतम

नया समय

उद्भ्रांत

सूरज

शंभु यादव

अनहोनी

गिरधर राठी

देखा सूरज को

संजीव मिश्र

फ़लक

लीना मल्होत्रा राव

सूरज

अनिल जनविजय

सूर्यग्रहण है आज

नीलेश रघुवंशी

सूर्य

केदारनाथ सिंह

सूरज

प्रेमशंकर शुक्ल