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आत्मविश्वास पर उद्धरण

अपने में विश्वास और जिसको दुश्मन मानें उसका उद्धार करने में हमारी रक्षा होती है।

महात्मा गांधी

तो हमारे अंतःकरण से अधिक भयंकर कोई साक्षी हो सकता है और कोई दोषारोपण करने वाला इतना शक्तिशाली।

सोफोक्लीज़

तुम्हारे पास क्या है; उससे नहीं, वरन् तुम क्या हो उससे ही तुम्हारी पहचान है।

ओशो

इंसान ऐसा बना है कि अगर वह अपने बनाने वाले को समझ ले और यह समझ ले कि मैं उसी भगवान का प्रतिबिंब हूँ, तो दुनिया की कोई ताक़त उसके स्वमान को छीन ही नहीं सकती। उसके स्वमान का हनन कोई कर सकता है तो वह ख़ुद ही कर सकता है

महात्मा गांधी

यदि तुम मनुष्यों से प्रेम करते हो और वे मैत्री का व्यवहार नहीं करते, तो अपने प्रेम की समीक्षा करो। यदि तमु शाशन करते हो और लोग नियंत्रित नहीं होते, तो अपनी बुद्धि की जाँच करो। यदि तुम दूसरों के प्रति शिष्टता का व्यवहार करते हो और वे तुम्हारे प्रति नहीं करते तो, अपने आत्म-सम्मान की समीक्षा करो। यदि तुम्हारे कार्य निरर्थक होते हैं, तो उसके कारण को अपने अंदर ढूँढ़ो।

कन्फ्यूशियस

जगत् के सभी महान् पैग़ंबरों का प्राण पर अत्यंत अद्भुत संयम था, जिसके बल से वे प्रबल इच्छाशक्तिसम्पन्न हो गए थे।

स्वामी विवेकानन्द

यह सर्वविदित है कि जो लोग ख़ुद पर भरोसा नहीं करते हैं, वे कभी दूसरों पर भरोसा नहीं करते हैं।

अल्फ़्रेड एडलर

जो आत्मबल से युक्त है, मित्र संपत्ति से संपन्न है, जो नागरकवृत्ति से युक्त है, जो मनोभावों को समझने वाला है और देश-काल की परिस्थितियों का ज्ञाता है—वह नायक अनायास ही अलभ्या नायिका को प्राप्त कर लेता है।

वात्स्यायन

…मुझे एहसास हुआ है कि प्रकृति के महान नियमों का उल्लंघन प्राणनाशक पाप है। हमें ज़ल्दबाज़ी नहीं करनी चाहिए, हमें अधीर नहीं होना चाहिए, बल्कि हमें आत्मविश्वास के साथ शाश्वत लय की आज्ञा का पालन करना चाहिए।

निकोस कज़ानज़ाकिस

आत्मविश्वास रावण का सा नहीं होना चाहिए जो समझता था कि मेरी बराबरी का कोई है ही नहीं। आत्मविश्वास होना चाहिए विभीषण जैसा, प्रह्लाद जैसा। उनके जी में यह भाव था कि हम निर्बल हैं, मगर ईश्वर हमारे साथ है और इस कारण हमारी शक्ति अनंत है।

महात्मा गांधी

यह सत्य है—जगत् की अनंत शक्ति तुम्हारे भीतर है।

स्वामी विवेकानन्द

सबसे विकट आत्मविश्वास मूर्खता का होता है।

हरिशंकर परसाई

दबंग सभी एक जैसे होते हैं; चाहे वे स्कूल के परिसर में हों, कार्य स्थल पर हों, या आतंक के जरिए किसी देश पर शासन कर रहे हों। वे डराने-धमकाने के बल पर ही फलते-फूलते हैं। दबंग लोग डरपोक और कमज़ोर दिल वालों से अपनी ताक़त हासिल करते हैं। वे शार्क की तरह होते हैं, जो पानी में डर महसूस करती हैं। वे यह देखने के लिए चक्कर लगाती हैं कि क्या उनका शिकार जूझ रहा है। वे यह पड़ताल करती हैं कि उनका शिकार कमज़ोर है या नहीं। अगर आप अपने लिए खड़े होने का साहस नहीं पाते हैं, तो वे हमला कर देंगी। जीवन में, अपने लक्ष्य हासिल करने के लिए, रात की तैराकी पूरा करने के लिए, आपको बहुत हिम्मतवर पुरुष और महिला बनना होगा। ऐसा साहस हम सबके अंदर होता है। गहरा खोदने पर आप इसे बहुतायत में पाएँगे।

विलियम एच. मैकरेवन

जो वीर दुर्जय संग्राम में लाखों योद्धाओं को जीतता है, यदि वह एक अपनी आत्मा को जीत ले, तो यह उसकी सर्वश्रेष्ठ विजय है।

महावीर

छोटा मनुष्य समझता है कि भलाई के छोटे-छोटे कार्यों से कोई लाभ नहीं होता, और साधारण बुराई के कार्यों से कोई हानि नहीं होती। उसक फल यह होता है कि उसकी बुराई इतनी बढ़ जाती है कि छिप नहीं सकती, और उसका अपराध क्षम्य नही समझा जा सकता।

कन्फ्यूशियस

किसी पद को प्राप्त करने की चिंता के स्थान पर, अपने को उस पद के योग्य बनाने की चिंता करो। अपनी प्रसिद्धि होने के विषय में चिंता करने के बजाए, अपने को प्रसिद्धि प्राप्त करने के योग्य बनाओ।

कन्फ्यूशियस

भारतीय राजनीति आज अगर बिल्कुल भ्रष्ट और चरित्रहीन दिखाई दे रही है, तो उसके पीछे चीज़ों का अभाव नहीं; अभाव अगर है तो उस आत्मबल और आत्मसम्मान का, जो नैतिकता को दृढ़ आधार दे सके।

कुँवर नारायण

अपने हितों से जुड़े मामलों में अगर व्यक्ति ख़ुद निर्णय लेता है, तो उसके सही साबित होने की सबसे ज़्यादा संभावनाएँ रहती हैं।

जॉन स्टुअर्ट मिल

आत्मविश्वास कई तरह का होता है—धन का, बल का, विद्या का, पर सबसे ऊँचा आत्मविश्वास मूर्खता का होता है।

हरिशंकर परसाई

धारणा करने के लिए संयम चाहिए और मिथ्याचार के लिए असंयम।

रवींद्रनाथ टैगोर

मनुष्य को अपने आप में विश्वास होना चाहिए—कानूनों पर नहीं। मनुष्य की आत्मा में ईश्वर का अस्तित्व होता है। यह मनुष्य पृथ्वी पर पुलिस कप्तान अथवा गुलाम के स्वरूप में नहीं आता है। क़ानून मनुष्य से नीचा होता है।

मैक्सिम गोर्की

जो अपने कर्त्तव्यों का पालन नहीं करता, उसे 'स्वत्व' की दुहाई देने तक का कोई स्वत्व नहीं, और जो अपने कर्तव्य की ओर पूरी और पक्की दृष्टि रखेगा, उसके स्वत्व को कोई बड़ी से बड़ी निरंकुश शक्ति भी नहीं छीन सकती।

गणेश शंकर विद्यार्थी

अगर आप अपने समय को लेकर ख़ुद पर दया करते हैं, जिस तरह से आपके साथ व्यवहार किया गया है, उसके लिए दु:खी हैं, जीवन में अपनी तक़दीर पर रो रहे हैं, अपने हालात के लिए किसी और को दोष दे रहे हैं, तो आपका जीवन लंबा और कठिन हो जाएगा। दूसरी तरफ़, अगर आप अपने सपनों को छोड़ने से इनकार करते हैं, बाधाओं के ख़िलाफ़ मज़बूती से डटे रहते हैं, तो आपका जीवन आपके मुताबिक़ ही होगा और आप इसे महान बना सकते हैं।

विलियम एच. मैकरेवन

मैं अपना जीवन इस आधार पर नहीं जीता कि कौन मेरे काम को स्वीकार करता है और कौन नहीं।

ऋत्विक घटक

इतना छोटा होने का अभिनय करना बंद करो, तुम परमानंद में गतिमान ब्रह्मांड हो।

रूमी

सत्य की साधना में पराजित, आत्म-सम्मानहीन क्षुद्र प्राणों को कोई स्थान ही नहीं।

आचार्य क्षितिमोहन सेन
  • संबंधित विषय : सच

चाहे जीवन में कितनी भी मुश्किलें क्यों आएँ और आपके सामने कोई रास्ता हो, फिर भी आपको ख़ुद को टूटने से बचाना चाहिए।

शम्स तबरेज़ी

जैसे ही आप अपना पहला कदम उठाते हैं, उसके बाद जो होता है उसे होने दें। हमें बहाव के साथ नहीं बहना चाहिए, बल्कि हमें ख़ुद को बहाव के मुताबिक़ बनाना चाहिए।

शम्स तबरेज़ी

उद्देश्य पर दृष्टि रखते हुए, किसी की भृकुटि के तनाव से मत डरो और किसी की मुस्कराहट की भी परवाह मत करो।

गणेश शंकर विद्यार्थी
  • संबंधित विषय : डर

जब मनुष्य को अपने भीतर विद्यमान किसी अदृश्य वस्तु में विश्वास करना कठिन लगे, तब उसे किसी ऐसी वस्तु में विश्वास करना सरल हो जाता है, जिसे वह अपने से बाहर रूपाकृत कर सकता है।

श्री अरविंद

ब्रह्मांड में सब कुछ तुम्हारे भीतर है, सब कुछ अपने आप से माँग लो।

रूमी

दूसरे लोग जो स्वराज्य दिला दें वह स्वराज्य नहीं है, बल्कि परराज्य है।

महात्मा गांधी

एक सूफ़ी कभी किसी चीज़ के दायरे से बाहर नहीं जाता, बल्कि हमेशा दायरे में ही रहता है।

शम्स तबरेज़ी

जो कुछ भी आप देखते या महसूस करते हैं; जैसे कोई किताब, उसे उठाएँ। पहले उस पर मन को एकाग्र करें, फिर उस ज्ञान पर जो किताब के रूप में मौजूद है, फिर उस अहंकार पर जो किताब को देख रहा है और इसी तरह आगे बढ़ते रहें। इस अभ्यास से सभी इंद्रियों पर विजय प्राप्त हो जाएगी।

स्वामी विवेकानन्द

भीतर इतनी गहराई हो कि कोई तुम्हारी थाह ले सके। अथाह जिनकी गहराई है, अगोचर उनकी ऊँचाई हो जाती है।

ओशो

सच्चा आत्मस्वातंत्र्य प्राप्त करने के लिए सामूहिकता आवश्यक है। सामूहिकता की विशाल उर्वर भूमि मे ही व्यक्ति के वृक्ष और लताएँ फूलती और फलती हैं।

गजानन माधव मुक्तिबोध

हे अर्जुन! जिसने समत्व बुद्धि रूप योग द्वारा सब कर्मों का संन्यास कर दिया है, जिसने ज्ञान से सब संशय दूर किए हैं, और जो आत्मबल से युक्त है, उसको कर्म नहीं बाँधते हैं।

वेदव्यास

जो ख़ुद अपने पैरों पर खड़ा नहीं होना चाहता, उसे दूसरे कहाँ तक खड़ा करते रहेंगे।

श्रीलाल शुक्ल

जो अपने को सर्वव्यापी परमतत्त्व के रूप में जान जाता है, वह फिर काल और देश की सीमा में आबद्ध नहीं रहता। आबद्ध कर रखने वाली सीमाओं के सारे घेरे, अहं ब्रह्मास्मि के तेज़ में विलुप्त हो जाते हैं।

परमहंस योगानंद

विघ्न के भय से नीचजन कार्य को आरंभ ही नहीं करते, और मध्यजन पहले आरंभ करके; पुनः विघ्न को देख कार्य को छोड़ कर बैठ जाते हैं, और उत्तमजन बारंबार विघ्न के आने पर भी, कार्य आरंभ करके उसका परित्याग नहीं करते अर्थात् उसको पूरा ही करके छोड़ते हैं।

भर्तृहरि

अगर आप रोज़ सुबह अपना बिस्तर ठीक करते हैं, तो आपके दिन का पहला काम पूरा हो जाता है। इससे आपको गर्व की छोटी-सी भावना पैदा होगी और इससे आपको एक और काम करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा और फिर दूसरा और फिर एक और। दिन के अंत तक पूरा किया गया वह एक काम, कई कामों में बदल जाएगा। अपना बिस्तर ठीक करना इस तथ्य की भी पुष्टि करेगा कि जीवन में छोटी-छोटी चीज़ें भी मायने रखती हैं।

विलियम एच. मैकरेवन

जिसका आत्म-बल पर विश्वास है, उसकी हार नहीं होती, क्योंकि आत्म-बल की पराकाष्ठा का अर्थ है मरने की तैयारी।

महात्मा गांधी

हे अर्जुन! वेद तीन गुणों के विषयों से युक्त हैं। तू तीनों गुणों के परे (अर्थात् नित्य सत्त्वगुण में स्थित), द्वंद्वों से मुक्त, योग-क्षेम का विचार करने वाला और आत्मबल से युक्त हो।

वेदव्यास

स्वराज्य की सच्ची ख़ुमारी उसी को हो सकती है, जो आत्मबल अनुभव करके शरीर बल से नहीं दबेगा और निडर रहेगा तथा सपने में भी तोप बल का उपयोग करने की बात नहीं सोचेगा।

महात्मा गांधी

शक्ति की सर्वोच्च अभिव्यक्ति, स्वयं को शांत और अपने पैरों पर खड़ा रखना है।

स्वामी विवेकानन्द

रक्षा के उपाय को अपने बाहर ढूँढ़ना, दुर्बल आत्मा की मूढ़ता है—ध्रुव सत्य तो यही है : 'धर्मो रक्षति रक्षितः’।'

रवींद्रनाथ टैगोर

मुश्किल समय में ही इंसान को यह समझ आता है कि अपनी भावनाओं और विचारों का स्वामी बने रहना कितना कठिन है।

एंतोन चेख़व

आप बिना किसी पुस्तक को पढ़े या बिना साधु—संतों और विद्वानों को सुने अपने मन का अवलोकन कर सकते हैं।

जे. कृष्णमूर्ति

सही अर्थों में व्यक्ति वही है जो स्वयं में विभाजित और खंडित नहीं है। किंतु हम खंड-खंड टूटे हुए हैं, अतः हम व्यक्ति नहीं है। जो समाज है, वही हम भी हैं।

जे. कृष्णमूर्ति

आत्मविश्वास सफलता का प्रथम रहस्य है।

राल्फ़ वाल्डो इमर्सन