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प्रगति पर उद्धरण

हमारी आँखें सामने हैं, पीछे नहीं। सामने बढ़ते रहो और जिसे तुम अपना धर्म कहकर गौरव का अनुभव करते हो, उसे कार्यरूप में परिणत करो।

स्वामी विवेकानन्द

प्रगतिशील जीवन-मूल्य, निम्न-मध्यवर्गीय श्रेणी के भावना-चित्रों में अधिक पाए जाते हैं।

गजानन माधव मुक्तिबोध

उन तमाम हानिकर प्रभुत्वों को हटा देना चाहिए, जो लोगों की न्यायोचित आकाँक्षाओं का दमन करते हैं और उनको बंधनों में जकड़ कर रखने में मदद देते हैं।

गणेश शंकर विद्यार्थी

जिस क्रम से मनुष्य सभ्यता के मार्ग पर अग्रसर होता गया, उसी क्रम से समाज के नियम अधिकाधिक परिष्कृत होते गए और पूर्ण विकसित तथा व्यवस्थित समाज में वे केवल व्यावहारिक सुविधा के साधनमात्र रह कर, सदस्यों के नैतिक तथा धार्मिक विकास के साधन भी हो गए।

महादेवी वर्मा

दुनिया की समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय विश्वास, प्रेम, प्रचुरता, शिक्षा और शांति पर ध्यान ऊर्जा लगाएँ।

रॉन्डा बर्न

जो शिक्षा हमें प्राचीन संस्थाओं तथा प्राचीन विचारों में ही फाँसे रखती हो, वह शिक्षा अर्वाचीन समय में शिक्षा कहलाने के योग्य नहीं है।

गणेश शंकर विद्यार्थी

प्रगति के समर्थक; प्रत्येक व्यक्ति के लिए यह अनिवार्य है कि वह पुराने विश्वास से जुड़ी हर बात की आलोचना करे, उस पर अविश्वास करे और उसे चुनौती दे।

भगत सिंह

असंतोष प्रगति का लक्षण माना जाता है; किंतु वह उसका वास्तविक लक्षण तो तब सिद्ध होगा, जब प्रगति वस्तुतः हो, होकर रहे।

गजानन माधव मुक्तिबोध

हर राष्ट्र के लिए और हर व्यक्ति के लिए जिसको बढ़ना है, काम-काज और सोच-विचार के उन सँकरे घेरों को—जिनमें ज़्यादातर लोग बहुत अरसे से रहते आए हैं—छोड़ना होगा और समन्वय पर ख़ास ध्यान देना होगा।

जवाहरलाल नेहरू

स्त्री की स्थिति समाज का विकास नापने का मापदंड कही जा सकती है।

महादेवी वर्मा

मेरा मूलमंत्र है—व्यक्तित्व का विकास। शिक्षा के द्वारा प्रत्येक व्यक्ति को उपयुक्त बनाने के सिवाए मेरी और कोई उच्चाकाँक्षा नहीं है।

स्वामी विवेकानन्द

प्रगति में समर्थक व्यक्ति के लिए यह अनिवार्य है कि वह पुराने विश्वास से संबंधित हर बात की आलोचना करे, उसमें अविश्वास करे और उसे चुनौती दे।

भगत सिंह

परंपरा को जड़ और विकास को गतिमान मानना, हमारी विचार प्रक्रिया में रूढ़ हो गया है।

श्यामाचरण दुबे

प्रत्येक युग का अपना संदेश होता है। संदेशों को वही सबसे पहले सुनते हैं, जो विश्व की उन्नति की ड्योढ़ी पर अपनी सबसे अधिक बहुमूल्य वस्तु की भेंट चढ़ाते हैं।

गणेश शंकर विद्यार्थी

प्रत्येक राष्ट्र के जीवन-निर्वाह के लिए; यह आवश्यक है कि देश की प्राकृतिक संपत्ति की रक्षा की जावे, तथा उस संपत्ति को उन्नति देने के पूरे-पूरे प्रयत्न किए जाएँ।

गणेश शंकर विद्यार्थी

जिस देश में सुधार की आवश्यकता नहीं, वह इस परिवर्तनशील संसार का भाग नहीं हो सकता।

गणेश शंकर विद्यार्थी

दीपशिखा का प्रकाश उसी का मार्गदर्शक होगा, जिसके नेत्र खुले हों।

गणेश शंकर विद्यार्थी

चरित्र पालन सभ्यता का प्रधान अंग है। कौम की सच्ची तरक्की तभी कहलावेगी, जब हर एक आदमी उस जाति या कौम के चरित्र-संपन्न और भलमनसाहत की कसौटी में कसे हुए अपने को प्रगट कर सकते हों।

बालकृष्ण भट्ट

स्मरण रहे, एकता, किसी भाव की भी एकता—राष्ट्रीय उन्नति का मूलमंत्र है।

गणेश शंकर विद्यार्थी

मार्ग में पड़ी हुई शिला से टकरा कर जल-प्रवाह में जो परिवर्तन होते हैं, वे विकास-मूलक हैं, परंतु किसी गड्ढे में भरे हुए गति-हीन जल के परिवर्तन में शोचनीय विकृति ही मिलेगी।

महादेवी वर्मा

मनुष्यों के अधूरे चरित्र और यथार्थ के रूपांतरणशील चरित्र के कारण ही यह आवश्यक होता है कि शिक्षा, सतत चलती रहने वाली एक गतिविधि हो।

पॉलो फ़्रेरा

जो चूहे के शब्द से भी शंकित होते हैं, जो अपनी साँस से चौंक उठते हैं, उनके लिए उन्नति का कंटकित मार्ग नहीं है। महत्त्वाकांक्षा का दुर्गम स्वर्ग उनके लिए स्वप्न है।

जयशंकर प्रसाद

आधुनिक भारत का विकास; घरों के ख़ाली हो जाने की, परिवार के सिकुड़कर सूख जाने की कहानी है।

कृष्ण कुमार

व्यक्तित्व के विशेष विकास से प्राप्त जो आभ्यंतर गुण हैं और गुण-धर्म हैं, वही प्रतिभा है।

गजानन माधव मुक्तिबोध

सत्तातंत्र द्वारा तथाकथित ‘सांस्कृतिक विकास’ के नाम पर संस्कृति को संरक्षण दिए जाने के ख़तरे स्पष्ट हैं।

श्रीलाल शुक्ल

कार्य की सफलता का मूल कारण है उत्तम उद्योग। उद्योग के बिना कोई भी सिद्धि नहीं होती है। उद्योग से ही सब समृद्धियों का उदय होता है और जहाँ उद्योग नहीं है, वहाँ पाप ही पाप है।

अश्वघोष

प्रगतिशीलता से मेरा तात्पर्य परिवेश के प्रति उस सचेतनता से है कि जो सचेतनता उसे वर्तमान व्यवस्था के विरुद्ध ले जाती है।

गजानन माधव मुक्तिबोध

भारत में आधुनिक सभ्यता की जो प्रगति हुई है, उसमें अच्छी और बुरी दोनों बातें शामिल हैं। बीते वक़्त में हमने जो कुछ खोया है, उसमें से एक है गीत-संगीत को अपनी ज़िंदगी में शामिल करने का जज़्बा, और हमारी उत्सवधर्मिता की क्षमता।

जवाहरलाल नेहरू

राष्ट्र की संस्कृति का विकास रोककर विश्व की संस्कृति का पूर्ण विकास नहीं किया जा सकता।

सुभाष चंद्र बोस

जिस समाज में व्यक्ति को पूर्ण विकास का अवसर मिलता है, वहाँ उसके अंतर्द्वन्द्व भी कम होते जाते हैं।

रांगेय राघव

भारत को एक ऐसी ताक़त का निर्माण करना होगा, जो सांप्रदायिकता जैसे उन तमाम ‘वादों’ से छुटकारा पा चुकी हो—जो उसकी तरक़्क़ी में रुकावट पैदा करते हैं और उसे बाँटते हैं।

जवाहरलाल नेहरू

यदि हम परंपरा का नकारात्मक मूल्यांकन भी करते हैं, तो भी यह स्वीकार करना कठिन है कि दृष्टिकोणों और मूल्यों को बदलने और संरचनात्मक बाधाओं को हटाने से, अपने आप ही पर्याप्त उन्नति तथा वृद्धि हो जाएगी।

श्यामाचरण दुबे

मनुष्य के बौद्धिक उपादान क्रमशः विकसित होते हैं, बदलते हैं किंतु के यथार्थ की गति के साथ ही बदलते रहेंगे, विकासमान होंगे—यह आवश्यक नहीं होता। यथार्थ बहुत आगे बढ़ जाता है विकास-क्रम में, बौद्धिक उपादान पीछे छूट जाते हैं—कभी-कभी।

गजानन माधव मुक्तिबोध

जीवन चाहे वह किसी व्यक्ति का हो, समूह का हो या फिर किसी राष्ट्र या समाज का हो—उसे आवश्यक रूप से गतिशील, परिवर्तनीय और सतत बढ़ते रहने वाले होना चाहिए।

जवाहरलाल नेहरू

जिस व्यक्ति की सर्वाङ्गीण उन्नति नहीं होती; उसके मन को शांति प्राप्त नहीं होती, वह भीतर से सुखी नहीं होता, उसके मन में एक शून्यता, एक अभाव—आख़िर तक रह जाता है।

सुभाष चंद्र बोस

आदमी बराबर एक साहसपूर्ण यात्रा में लगा हुआ है, उसके लिए कहीं दम लेना है और उसकी यात्रा का अंत है।

जवाहरलाल नेहरू

अगर आप लेखक या कलाकार हैं तो मुझे लगता है, आप प्रगति की अवधारणा पर गहरा संदेह करेंगे। आज प्रगति की अवधारणा एक ऐसी पवित्र अवधारणा हो गई है कि अगर आप किसी की प्रशंसा भी करना चाहते हैं तो आप कहेंगे कि वह बहुत प्रगतिशील व्यक्ति है।

यू. आर. अनंतमूर्ति

परस्पर विरोधिनी लक्ष्मी और सरस्वती का, एक ही स्थान पर कठिनता से पाया जाने वाला मेल सत्पुरुषों की उन्नति करने वाला हो।

कालिदास

वाल्मीकि की समाजदृष्टि के बारे में यह कहा जा सकता है कि वे सार्थक तथा रचनात्मक परिवर्तन के पक्षधर हैं, पर प्रचलित व्यवस्था के विध्वंस के नहीं।

राधावल्लभ त्रिपाठी

परंपरा बहुत बड़ा भंडार है। इसका प्रयोग परिवर्तन और विकास की विचारधारा के समर्थन में किया जा सकता है, साथ ही उसका प्रयोग परिवर्तन और विकास विरोधी विचारधारा के लिए भी हो सकता है।

श्यामाचरण दुबे

भारत का इतिहास, क्रमिक अनुकूलन का सबसे अच्छा नमूना है। कछुए या शतुरमुर्ग़ की तरह हमने ऐसे अवयव विकसित किए कि विपरीत से विपरीत आँधी भी हमारे ऊपर से गुज़र गई।

राजेंद्र माथुर

उन्नति का मूल आत्मसमर्पण है, उन्नति का अर्थ है आत्मज्ञान।

महात्मा गांधी

विरासत में मिले बहुत-से रीति-रिवाजों को हमें तोड़ देना है, जो हमें ज़ंजीरों की तरह बाँध देते और नीचे ढकेलते हैं।

जवाहरलाल नेहरू

काव्य का उन्नयन और विकास—निःसंदेह एक जटिल प्रक्रिया है।

गजानन माधव मुक्तिबोध

भारत दुनिया के सबसे पवित्र धर्मों के साथ इस घोषणा में एकमत है कि प्रगति, दृश्य से अदृश्य की ओर, अनेक से एक की ओर, निम्न से उच्च की ओर, रूप से निराकार की ओर होती है और कभी विपरीत दिशा में नहीं।

स्वामी विवेकानन्द

सामाजिक और राजनैतिक उन्नति प्रेम और लगन से पैदा होती है, कि उपदेशों और लेक्चरबाजी से।

लाला हरदयाल

वे कलाकृतियाँ जिनमें कलात्मक प्रतिभा का अभाव होता है, शक्तिहीन होती हैं, चाहे वे राजनीतिक दृष्टि से कितनी ही प्रगतिशील क्यों हों।

माओ ज़ेडॉन्ग
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विकास के कार्यक्रम भी एक तरह से संस्कृति के क्षेत्र में हस्तक्षेप होते हैं।

श्यामाचरण दुबे

अगर संस्कृति में कोई मूल्य है, तो निश्चित तौर पर इसमें गहराई भी होनी चाहिए। इसमें निश्चित तौर पर एक गतिशील कारक भी होना चाहिए।

जवाहरलाल नेहरू

जो अनुभव से कुछ नहीं सीखता; उसकी उम्र चाहे पाँच साल हो, चाहे पचास साल—वह ठूँठ का ठूँठ रहेगा।

हरिशंकर परसाई