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स्मृति पर बेला

स्मृति एक मानसिक क्रिया

है, जो अर्जित अनुभव को आधार बनाती है और आवश्यकतानुसार इसका पुनरुत्पादन करती है। इसे एक आदर्श पुनरावृत्ति कहा गया है। स्मृतियाँ मानव अस्मिता का आधार कही जाती हैं और नैसर्गिक रूप से हमारी अभिव्यक्तियों का अंग बनती हैं। प्रस्तुत चयन में स्मृति को विषय बनाती कविताओं को शामिल किया गया है।

07 जुलाई 2026

तीजनबाई और पंडवानी

तीजनबाई और पंडवानी

आज से बहुत साल पहले की बात है। एक छोटी-सी लड़की थी, सात-आठ बरस की। बारिश का मौसम उसको पसंद नहीं था, इसलिए बारिश के दिनों

07 जुलाई 2026

धारावाहिक उपन्यास : जंकामंका गैंग : हिंदी की दुनिया के सबसे पतित, निष्ठुर, क्रूर राक्षस

धारावाहिक उपन्यास : जंकामंका गैंग : हिंदी की दुनिया के सबसे पतित, निष्ठुर, क्रूर राक्षस

गताध्याय से आगे... दो गंज गोबरहवा के दो पैर, दो आँखें, दो हाथ, दो दिल हैं, एक इस तरफ़ धड़कता है, दूसरा उस तरफ़। असल म

06 जुलाई 2026

तीजनबाई : इकतारे पर महाभारत

तीजनबाई : इकतारे पर महाभारत

अवसर था दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ीमल कालेज के वार्षिकोत्सव पल्लव की सांस्कृतिक संध्या का। वहाँ उपस्थित थीं कलाकार प

03 जुलाई 2026

फूलचंद : जो लौटकर कभी नहीं आया

फूलचंद : जो लौटकर कभी नहीं आया

वह हमारी उम्र का था, मगर हट्टा-कट्टा बालक था। मुझे आज भी याद है—उसका बोलना, उसकी चमक से भरी आँखें! जो अनायास अपनी तरफ़ ख

01 जुलाई 2026

एक रात जो अब भी मेरे भीतर उजाला करती है

एक रात जो अब भी मेरे भीतर उजाला करती है

स्मृतियाँ सचमुच कभी नहीं मरतीं। वे हमारे भीतर किसी गहरे, अदृश्य तह में चुपचाप बैठी रहती हैं—कभी धुँध की तरह, कभी उजाले क

30 जून 2026

धारावाहिक उपन्यास : जंकामंका गैंग : आषाढ़ का पहला दिन और...

धारावाहिक उपन्यास : जंकामंका गैंग : आषाढ़ का पहला दिन और...

आज आषाढ़ का पहला दिन है। इस अवसर पर हम ‘हिन्दवी बेला’ पर वह कर रहे हैं, जो इससे पूर्व हमने कभी नहीं किया—एक उपन्यास का ध

26 जून 2026

दोस्तों को कभी न भेजी गई एक चिट्ठी

दोस्तों को कभी न भेजी गई एक चिट्ठी

क़रीब-क़रीब सात बजे शाम का समय रहा होगा। मैं यूँ ही फ़ोन हाथ में लिए घर की छत पर बैठा था। अचानक से फ़ोन बजा, वीडियो कॉल वह

25 जून 2026

रागदर्पण : मैं ढूँढ़ती हूँ शहतूत का वह दरख़्त

रागदर्पण : मैं ढूँढ़ती हूँ शहतूत का वह दरख़्त

स्कूल ने रुक्का भेजा—‘अबकी सालाना जलसे में आपको सम्मानित करते हमें गर्व होगा।’ जहाँ जीवन का सबसे बेफ़्रिक समय जिया, शऊर-

21 जून 2026

‘कल्पना’ जैसा भोजपुरी में होना अब कल्पना ही है

‘कल्पना’ जैसा भोजपुरी में होना अब कल्पना ही है

वह इक्कीसवीं सदी की शुरुआत थी और वह बहुत उदास होकर गा रही थी—घरे छुट्टी लेके अउरी कुछ दिन रही ए बलम जी... और ठीक उसी वक़्

15 जून 2026

हम ‘लगान’ देख रहे थे

हम ‘लगान’ देख रहे थे

साल 2001, जून का महीना। तारीख़ याद नहीं... गूगल बता सकता है, लेकिन क्या पूछना... मैं  नया-ताज़ा पटना पहुँचा था, दूसरी

13 जून 2026

शनिवारेर चिट्ठी : सबसे पहले तुम, शशि!

शनिवारेर चिट्ठी : सबसे पहले तुम, शशि!

सबसे पहले तुम, शशि! इसलिए नहीं कि तुम जीवन में सबसे पहले आईं या कि तुम सबसे ताज़ा स्मृति हो। इसलिए कि मेरा होना अनिवार

12 जून 2026

जगह-जगह 2.0 : क्या कर रही होगी जबलपुर में तुम

जगह-जगह 2.0 : क्या कर रही होगी जबलपुर में तुम

शहरज़ादे का शहरआशोब जबलपुर को खोजता हूँ तो पहले उन सूचियों से उलझता हूँ जिनमें 12 सड़कों और 13 जनों की, 5 मोहल्लों और 3

04 जून 2026

कहानी : स्वस्थित

कहानी : स्वस्थित

Every word is like an unnecessary stain on silence and nothingness.  ~ Samuel Beckett  एक लगातार अशांत रह रही

02 जून 2026

सुमन कल्याणपुर : स्वर और स्वर-भ्रम

सुमन कल्याणपुर : स्वर और स्वर-भ्रम

अँग्रेज़ी में एक कहन है : people who show you new music are important. मैं अक्सर अपने मित्रों और परिचितों को नए गीत भेजता

22 मई 2026

फ़ीफ़ा, मैकडॉनल्ड्स और बीस साल पहले का इलाहाबाद

फ़ीफ़ा, मैकडॉनल्ड्स और बीस साल पहले का इलाहाबाद

इस दफ़ा फ़ुटबॉल विश्वकप की मेज़बानी अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको संयुक्त रूप से कर रहे हैं और दबी-दबी-सी चर्चा है कि भारत

20 मई 2026

रूपक-कथाएँ : स्वल्प-वासी

रूपक-कथाएँ : स्वल्प-वासी

मुज़म्मिल के लिए एक बग़ीची के पास पानी का नहीं, प्रतिध्वनियों का एक कुआँ था। जब स्वल्प-वासी उसमें झाँकता, तो उसे अ

19 मई 2026

The Last Tenant : इरफ़ान की क़ब्र पर 25 साल पुराना फूल

The Last Tenant : इरफ़ान की क़ब्र पर 25 साल पुराना फूल

अब शादियों के एल्बम नहीं दिखते। आजकल नीले-नीले लिंक होते हैं जो सीधे हम-आपको तस्वीरों के समंदर में पटक देते हैं। लगाइए ग

16 मई 2026

शनिवारेर चिट्ठी : क्रिस्टोफ़र नोलन, अमृता शेर-गिल, मंगलेश डबराल और अन्य मुलाक़ातें

शनिवारेर चिट्ठी : क्रिस्टोफ़र नोलन, अमृता शेर-गिल, मंगलेश डबराल और अन्य मुलाक़ातें

समय वह किसी सीधी बहती हुई नदी की तरह नहीं। वह लौटता हुआ और मुड़ता हुआ। समय अपनी ही दिशा पर संदेह करता हुआ। समय बंद वृत

09 मई 2026

शनिवारेर चिट्ठी : वहाँ नहीं है अब कोई घर सुफ़ेद

शनिवारेर चिट्ठी : वहाँ नहीं है अब कोई घर सुफ़ेद

स्मृति के घर अँधेरा स्मृति के घर अँधेरा बहुत है। सिर्फ़ आँखें काम नहीं करतीं। नाक भी लगता है काज पर। शून्य को सुनना पड़

08 मई 2026

कहानी : एक मर्मांतक चाहना

कहानी : एक मर्मांतक चाहना

बर्फ़ धीरे-धीरे गिर रही थी, जैसे नींद किसी उदास आदमी की पलकों से सरक जाती है; और बर्फ़ केवल बर्फ़ नहीं थी, यह रौशनी से ख

05 मई 2026

स्मृतियों के सिवा कुछ भी नहीं

स्मृतियों के सिवा कुछ भी नहीं

यदि तुम बरसों बाद घर लौटकर आओ—तो वे एकदम पहचान लेते हैं, पर वे यह नहीं जानते, तुम कहाँ से लौटकर आए हो। वे कभी सोच नहीं स

26 अप्रैल 2026

रविवासरीय 4.0 : मेरी बहन की कविताएँ, एक प्लेलिस्ट की याद और थोड़ा-सा कानपुर

रविवासरीय 4.0 : मेरी बहन की कविताएँ, एक प्लेलिस्ट की याद और थोड़ा-सा कानपुर

• एक बंद घर में प्रतीक्षा भरी होती है। एक प्रतीक्षा जिसमें इच्छा नहीं होती। डोरबेल बजती और बजती और बजती ही रहती है। इस प

25 अप्रैल 2026

शनिवारेर चिट्ठी : अनुशोचना और बाक़ी गल्प

शनिवारेर चिट्ठी : अनुशोचना और बाक़ी गल्प

स्फुलिंग कमरा-तर, कमरा-कम या अ-कमरा जैसे शब्द भी कहीं होते हैं, कहो तो! तो फिर बहुत से कमरों के बारे में अंतर की कुछ-

24 अप्रैल 2026

जगह-जगह 2.0 : पुणे के बहाने

जगह-जगह 2.0 : पुणे के बहाने

जाऊ नका कोणी तिथे जाऊ नका कोणी जे गेले, नाही आले परतोनी तुका पंढरीसी गेला पुन्हा जन्मा नाही आला पंढरीचे भूत मोठे

15 अप्रैल 2026

आशा भोसले : स्वर, छवि और स्वर्णिम दौर की आख़िरी चमक

आशा भोसले : स्वर, छवि और स्वर्णिम दौर की आख़िरी चमक

आशा भोसले में एक चार्म है। वह छवि जो उनको सोचने से बनती है। वह जीवन के उस स्वरूप के अधिक निकट है जो इंसानी सुख-दुख, प्रे

08 अप्रैल 2026

राहुल सांकृत्यायन की विरासत और ज्ञान संरक्षण की चुनौतियाँ

राहुल सांकृत्यायन की विरासत और ज्ञान संरक्षण की चुनौतियाँ

ज्ञान केवल पुस्तकों, पांडुलिपियों और अभिलेखों में सीमित नहीं होता, बल्कि वह एक जीवंत परंपरा है। वह पीढ़ी-दर-पीढ़ी विचार,

07 अप्रैल 2026

रागदर्पण : वे कैसी मासूमियत के दिन थे...

रागदर्पण : वे कैसी मासूमियत के दिन थे...

वो कौन हैं जिन्हें तौबा की मिल गई फ़ुर्सत हमें  गुनाह भी  करने को  ज़िंदगी  कम  है — आनंद नारायण मुल्ला कल रात यह

06 अप्रैल 2026

शिवेन्द्र से 10 सवाल : मुंबई मुझे मज़दूरों का शहर लगता है

शिवेन्द्र से 10 सवाल : मुंबई मुझे मज़दूरों का शहर लगता है

शिवेन्द्र हिंदी की नई पीढ़ी के कथाकार हैं। वह मुंबई में रहते हैं। उनका एक उपन्यास (चंचला चोर) और दो कहानी-संग्रह (‘चॉकले

31 मार्च 2026

हिंदुस्तानी ज़ुबानों के मरकज़, भारतीय भाषा केंद्र जेएनयू के 50 साल

हिंदुस्तानी ज़ुबानों के मरकज़, भारतीय भाषा केंद्र जेएनयू के 50 साल

जश्न के बाद का सन्नाटा बहुत खलता है... वाऽऽह! किसका है? आपका?... ‘अरे महाराज, आप भी!’ ‘कितना मशहूर है...!!!’

30 मार्च 2026

हमारे राम कहाँ गए!

हमारे राम कहाँ गए!

ये वे दिन थे जब अँधेरा आकर हमारे आँगन के बीचोबीच बैठ जाता था और हम पाँचों भाई-बहन काँपते हुए संध्या-तारे से धूप की कहानि

17 मार्च 2026

कहानी : मैं किसी के लिए कुछ नहीं हूँ

कहानी : मैं किसी के लिए कुछ नहीं हूँ

“अब भी क्या गले न मिलोगी? अभी तक वही हिचक... मिल लो यार, क्या पता अगली मुलाक़ात हो न हो।” उसकी पसीजी हुई हथेलियाँ छूट

13 मार्च 2026

जो घुला नहीं

जो घुला नहीं

बचपन में जब मेरी माँ दुपहर के वक़्त आराम करते हुए सो जाया करती थी, तब मेरी बड़ी बहन और मैं किचन में जाकर खाना बनाने का खेल

11 मार्च 2026

रागदर्पण : क़िस्सागो अम्मा

रागदर्पण : क़िस्सागो अम्मा

एक उबाऊ शाम मोबाइल फ़ोन में उलझे हुए मैंने देखा कि फ़ोन इधर-उधर की तस्वीरों, बधाइयों और अनर्गल संदेशों से अटा पड़ा है। उन्ह

10 मार्च 2026

पिंजड़े में क़ैद ज़िंदगी

पिंजड़े में क़ैद ज़िंदगी

इस साल सारी आपदाएँ एक साथ आने को व्याकुल हों जैसे। अभी तो मानसून की आहट भी नहीं और बादल हैं कि रोज़ सावन-भादो हुए जाते ह

17 फरवरी 2026

पत्र : प्रकाश के साक्षी सेबास्टिओं सालगाडो के नाम

पत्र : प्रकाश के साक्षी सेबास्टिओं सालगाडो के नाम

प्रिय सेबास्टिओं, प्रेरणा के अमिट स्रोत शांति और सामंजस्य के दूत विविधता के उपासक, प्रकृति के अद्भुत सहचर आज से

12 फरवरी 2026

अथ सुचित्रा कथा! जिसे कथाकार पूरा न कह सका...

अथ सुचित्रा कथा! जिसे कथाकार पूरा न कह सका...

‘‘अगर तुम किसी के लिए अच्छा नहीं कह सकते, तो कुछ भी मत कहना...’’ अज्ञात-काया में जाने किस तरह की रोशनी होती है। इन दि

11 फरवरी 2026

नींद की प्रतीक्षा : निर्मल वर्मा की याद में

नींद की प्रतीक्षा : निर्मल वर्मा की याद में

कई अनुपस्थितियों से अन्य हाज़िरियों का पंचांग मज़बूत हो जाता है, कई रविवासरीय दर्ज करने के सुयोग बनते हैं। यह हाज़िरी कि

29 जनवरी 2026

हबीब तनवीर : साधारण में असाधारण की खोज

हबीब तनवीर : साधारण में असाधारण की खोज

नाट्य शास्त्र के पहले ही अध्याय में एक श्लोक है जो एक तरह से नाटक की परिभाषा है— योऽयम स्वभावां लोकस्य सुखदुखसमन्वितः

27 जनवरी 2026

नए साल की रात, 'पहल' की विरासत और अजित पुष्कल की स्मृतियाँ

नए साल की रात, 'पहल' की विरासत और अजित पुष्कल की स्मृतियाँ

शाम के सात बज चुके थे और अब इस समय पर लखनऊ के लिए बस पकड़ने का आशय यह होता कि रात के लगभग बारह बजे के आस-पास या उससे थोड

25 जनवरी 2026

पंडित छन्नूलाल मिश्र : तकलीफ़ में गाने से ही सिद्धि मिलती है

पंडित छन्नूलाल मिश्र : तकलीफ़ में गाने से ही सिद्धि मिलती है

अगर हम गा पाते तो गाकर आपका बखान करते महाराज! लेकिन हमारी ज़िंदगी में लय नहीं है उतनी, इसमें खरज ज़्यादा है, ज़िंदगी का रिय

21 जनवरी 2026

अहमदाबाद : एक प्रवासी स्त्री की आँखों से

अहमदाबाद : एक प्रवासी स्त्री की आँखों से

तीन वर्ष पहले जब मैं अहमदाबाद आई, तो लगा जैसे किसी अपरिचित भूमि पर क़दम रख रही हूँ। पर धीरे-धीरे यह शहर मेरे भीतर उतरने

16 जनवरी 2026

विष्णु खरे के इर्द-गिर्द

विष्णु खरे के इर्द-गिर्द

समादृत कवि-आलोचक और कला-प्रशासक अशोक वाजपेयी आज 86वें वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं। उन्हें शुभकामनाएँ देते हुए यहाँ प्रस्त

15 जनवरी 2026

रघुवर प्रसाद और सोनसी की दुनिया का रचयिता

रघुवर प्रसाद और सोनसी की दुनिया का रचयिता

1 जनवरी 2026 को विनोद कुमार शुक्ल 89 वर्ष के हो जाते लेकिन उसके नौ दिन पहले ही वह इस दुनिया से चले गए। हिंदी साहित्य में

03 जनवरी 2026

बिछिया, बिछोह और वह आख़िरी ख़ाली पन्ना

बिछिया, बिछोह और वह आख़िरी ख़ाली पन्ना

ठहरे हुए हैं, याद आ रही है यात्राओं की। अलग-अलग जगहों की, अलग-अलग समय पर की गई यात्रा की। अलग-अलग सामान पर लटके विभिन्न

01 जनवरी 2026

एक साधक रचनाकार

एक साधक रचनाकार

मैं विनोद कुमार शुक्ल के उपन्यासों का बहुत बड़ा प्रशंसक हूँ। उनके उपन्यासों ने जीवन को नए ढंग से देखना सिखाया है। यथार्थ

31 दिसम्बर 2025

आज वर्षांत और कल होने वाले वर्षारंभ के बीच कोई विच्छेद नहीं है

आज वर्षांत और कल होने वाले वर्षारंभ के बीच कोई विच्छेद नहीं है

आने-जाने से ही मिलकर यह संसार बना है। इन दोनों के बीच कोई विच्छेद नहीं है। विच्छेद की कल्पना हम अपने मन में ही करते रहते

31 दिसम्बर 2025

...फिर इस साल का आख़िरी ख़त

...फिर इस साल का आख़िरी ख़त

एमजे, परंपराएँ कवियों को कहीं का नहीं छोड़तीं। ऐसे ही दिनचर्या की आदत। यह चाहते हुए भी कि किसी तरह की आदत बुरी न बने,

16 दिसम्बर 2025

इरफ़ान एक नया सूरज था जो बहुत जल्द अस्त हो गया

इरफ़ान एक नया सूरज था जो बहुत जल्द अस्त हो गया

इरफ़ान ख़ान। शिद्दत। उस शिद्दत की ज़िम्मेदारी। इस ज़िम्मेदारी की ख़ामोश अच्छाई। उसकी ख़ामोश अच्छाई की बोलती निगाहें। अगर

15 दिसम्बर 2025

ऑक्सफ़ोर्ड, इलाहाबाद विश्वविद्यालय : कैंपस की कहानियाँ, अँग्रेज़ी संस्कृति और सिनेमा

ऑक्सफ़ोर्ड, इलाहाबाद विश्वविद्यालय : कैंपस की कहानियाँ, अँग्रेज़ी संस्कृति और सिनेमा

“मैं हॉस्पिटल में वेंटिलेटर पर ऑक्सीजन मास्क पहने हुए नहीं मरना चाहता, बल्कि नेचुरल डेथ चाहता हूँ, अपनों के साथ रहते हुए

13 दिसम्बर 2025

कहानी : आकांक्षा

कहानी : आकांक्षा

मेरे हाथ में संडे का अख़बार है। मेरे बाजू के स्टूल पर सुबह की पहली चाय का कप। स्मिता भी चाय पी रही है। बरसों पहले फ़्रेम