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जीवन पर बेला

जहाँ जीवन को स्वयं कविता

कहा गया हो, कविता में जीवन का उतरना अस्वाभाविक प्रतीति नहीं है। प्रस्तुत चयन में जीवन, जीवनानुभव, जीवन-संबंधी धारणाओं, जीवन की जय-पराजय आदि की अभिव्यक्ति देती कविताओं का संकलन किया गया है।

04 जुलाई 2026

शनिवारेर चिट्ठी : डेंटिस्ट का पति और अन्य प्रकरण

शनिवारेर चिट्ठी : डेंटिस्ट का पति और अन्य प्रकरण

पहली सीटिंग अह, यह कैसी आपद-कथा रही! वहाँ जाना आसान था तो मैं गया। पड़ोस में ज़रूरी चीज़ों की उपस्थिति को हम एक क़िस्म का

14 जून 2026

होर्खे लुइस बोर्खेस का साक्षात्कार : ‘मैं दूसरी दुनिया में रहूँगा’

होर्खे लुइस बोर्खेस का साक्षात्कार : ‘मैं दूसरी दुनिया में रहूँगा’

होर्खे लुइस बोर्खेस (Jorge Luis Borges) बीसवीं शताब्दी के उन विरल साहित्यकारों में हैं जिन्होंने कविता, कहानी, निबंध और

08 जून 2026

फ़िक्शन एक ज़्यादा बड़ा सच है : ख़ालिद जावेद से पूजा भाटिया की बातचीत

फ़िक्शन एक ज़्यादा बड़ा सच है : ख़ालिद जावेद से पूजा भाटिया की बातचीत

तक़रीबन पाँच साल पहले मैंने पहली बार ख़ालिद जावेद का उपन्यास ‘मौत की किताब’ पढ़ा था। पाँच बरस बाद जब उसे दुबारा पढ़ा तो

04 जून 2026

कहानी : स्वस्थित

कहानी : स्वस्थित

Every word is like an unnecessary stain on silence and nothingness.  ~ Samuel Beckett  एक लगातार अशांत रह रही

28 मई 2026

रागदर्पण : उस जादुई शाम के नाम

रागदर्पण : उस जादुई शाम के नाम

अपने हालिया सफ़र के बाद, मैं पूरे यक़ीन के साथ कह सकती हूँ कि मैंने अपने अब तक के जीवन की सबसे करामाती शाम को देखा है। बुल

24 मई 2026

रविवासरीय 4.0 : दस सवालों के जवाब

रविवासरीय 4.0 : दस सवालों के जवाब

• इस तारीख़ पर अभी सवेरा नहीं उतरा है। पक्षियों के स्वर अभी दूर हैं। कुछ देर में दूर बीतेगा और वे चहचहाएँगे—अपने-अपने साथ

19 मई 2026

The Last Tenant : इरफ़ान की क़ब्र पर 25 साल पुराना फूल

The Last Tenant : इरफ़ान की क़ब्र पर 25 साल पुराना फूल

अब शादियों के एल्बम नहीं दिखते। आजकल नीले-नीले लिंक होते हैं जो सीधे हम-आपको तस्वीरों के समंदर में पटक देते हैं। लगाइए ग

25 अप्रैल 2026

शनिवारेर चिट्ठी : अनुशोचना और बाक़ी गल्प

शनिवारेर चिट्ठी : अनुशोचना और बाक़ी गल्प

स्फुलिंग कमरा-तर, कमरा-कम या अ-कमरा जैसे शब्द भी कहीं होते हैं, कहो तो! तो फिर बहुत से कमरों के बारे में अंतर की कुछ-

24 अप्रैल 2026

जगह-जगह 2.0 : पुणे के बहाने

जगह-जगह 2.0 : पुणे के बहाने

जाऊ नका कोणी तिथे जाऊ नका कोणी जे गेले, नाही आले परतोनी तुका पंढरीसी गेला पुन्हा जन्मा नाही आला पंढरीचे भूत मोठे

23 अप्रैल 2026

नशे से ‘नशा मुक्ति केंद्र’ तक का सफ़र

नशे से ‘नशा मुक्ति केंद्र’ तक का सफ़र

नशे से ‘नशा मुक्ति केंद्र’ तक का सफ़र सिर्फ़ दूरी का नहीं होता; यह एक ऐसे अँधेरे से गुज़रने जैसा होता है, जहाँ हर क़दम पर

18 अप्रैल 2026

शनिवारेर चिट्ठी : दिनानुदिन की चूलें बिठाते हुए

शनिवारेर चिट्ठी : दिनानुदिन की चूलें बिठाते हुए

सोमवार मैं लौटने की आख़री सड़क पर हूँ। यह सोमवार की तेज़ भागती सड़क है। इसकी रफ़्तार को दो दिनों के घर-आराम के बाद ‘काम पर

17 अप्रैल 2026

मेरी रचनात्मकता, मेरे द्वंद्व

मेरी रचनात्मकता, मेरे द्वंद्व

कहते हैं कला आत्मा का फूल होती है। हाँ होती है, पर यह फूल किसी सरोवर में नहीं, किसी दलदल में, किसी कीचड़ में ही खिलता है

15 अप्रैल 2026

आशा भोसले : गीतों में बसी ज़िंदगी

आशा भोसले : गीतों में बसी ज़िंदगी

आशा भोसले भारतीय संगीत जगत और भारतीय फ़िल्म जगत में पार्श्व गायन का एक विराट नाम हैं। उन्होंने एक साक्षात्कार में कहा था

03 अप्रैल 2026

कथा अनिल गुरव और सचिन तेंदुलकर की

कथा अनिल गुरव और सचिन तेंदुलकर की

दुनिया के नायक जितना मनोरंजन करते हैं, उतने बड़े होते हैं। बाक़ी सब जो अस्ल में दुनिया बनाते हैं और इसमें रहते हैं—वे मज

25 मार्च 2026

तू साडे नाऴ वरत के देख

तू साडे नाऴ वरत के देख

मेरे बारे में मेरे साथियों की राय बहुत हास्यास्पद है। यात्राओं की योजना पर तो और भी ज़्यादा। मैं जब भी आगे बढ़कर योजना ब

08 मार्च 2026

बॉम्बे जयश्री की संगीत यात्रा

बॉम्बे जयश्री की संगीत यात्रा

मनुष्य होने के नाते हमारी स्मृतियाँ ही हमारी सबसे बड़ी पूँजी हैं। इन्हीं स्मृतियों के सहारे हम अपने अतीत को अर्थ देते है

24 फरवरी 2026

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-10

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-10

नवीं कड़ी से आगे... दस अरुण कमल सत्तर साल से अधिक का जीवन देख चुके हैं और वरिष्ठ कवियों की सूची में भी आ चुके हैं।

23 फरवरी 2026

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-9

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-9

आठवीं कड़ी से आगे... नौ ‘अपनी केवल धार’ जो देखने में छोटी पर अरुण कमल की कीर्ति का आधार-स्तंभ है कि तरह मेरी एक और

22 फरवरी 2026

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-8

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-8

सातवीं कड़ी से आगे... आठ अरुण कमल ‘मैं’ अर्थात् अपनी आँखों से दुनिया को देखते हैं। इसलिए विस्तार उनके यहाँ कम है।

21 फरवरी 2026

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-7

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-7

छठी कड़ी से आगे... सात अरुण कमल ‘कविता की राजनीति’ को उसी रिपोर्टर के निगाह से तौलते और फिर बोलते हैं जिसमें उन्हे

20 फरवरी 2026

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-6

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-6

पाँचवीं कड़ी से आगे... छह कविता में निजी स्पेस का या घर-परिवार का कम होना, लगता है जानबूझकर है या फिर विचारधारा या

19 फरवरी 2026

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-5

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-5

चौथी कड़ी से आगे... पाँच अरुण कमल क़स्बे की मानसिकता वाले पटने के कवि हैं। एक ख़ास पटनिया आग्रह है उनकी कविता में।

18 फरवरी 2026

नवोदय विद्यालय के पच्चीस साल : स्मृतियों की यात्रा

नवोदय विद्यालय के पच्चीस साल : स्मृतियों की यात्रा

इस साल हमारे नवोदय विद्यालय [जवाहर नवोदय विद्यालय छिंदपाली, महासमुंद (छत्तीसगढ़)] को पच्चीस बरस पूरे हो रहे हैं। 1 नवंबर

18 फरवरी 2026

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-4

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-4

तीसरी कड़ी से आगे... चार 2019 में प्रकाशित अरुण कमल की एक कविता है—‘एक वृद्ध की रात’। एक बूढ़ा है जो जानता है कि ‘क

17 फरवरी 2026

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-3

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-3

दूसरी कड़ी से आगे... तीन मेरे लिए वे कविता का ककहरा सीखने के दिन थे। कवि-मित्र प्रकाश के सहारे यह संग्रह ‘अपनी केव

16 फरवरी 2026

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-2

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-2

पहली कड़ी से आगे... दो  कभी-कभी एक कहानी, एक उपन्यास और एक कविता भी आपको अमर कर सकती है। अरुण कमल की यह रोमांटिक,

15 फरवरी 2026

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’

एक मुक्तिबोध मेरे प्रिय कवि हैं। उनकी कविता-पंक्तियाँ मुझे बूस्ट करती हैं, मतलब प्रेरणा प्रदान करती हैं। यहाँ प्रस्तु

12 फरवरी 2026

अथ सुचित्रा कथा! जिसे कथाकार पूरा न कह सका...

अथ सुचित्रा कथा! जिसे कथाकार पूरा न कह सका...

‘‘अगर तुम किसी के लिए अच्छा नहीं कह सकते, तो कुछ भी मत कहना...’’ अज्ञात-काया में जाने किस तरह की रोशनी होती है। इन दि

08 फरवरी 2026

प्रोपेगेंडा फ़िल्मों के ‘परफ़ेक्ट डेज़’

प्रोपेगेंडा फ़िल्मों के ‘परफ़ेक्ट डेज़’

हाल बीच में एक फ़िल्म देखी—‘परफ़ेक्ट डेज़’। सन् तेईस [2023] में आई यह जापानी फ़िल्म, जापान और जर्मनी का संयुक्त निर्माण रही

02 जनवरी 2026

सुधांशु फ़िरदौस से दस सवाल : जीवन एक घर है, जिसमें बेघर हूँ मैं

सुधांशु फ़िरदौस से दस सवाल : जीवन एक घर है, जिसमें बेघर हूँ मैं

सुधांशु फ़िरदौस (जन्म : 1985) इस सदी में सामने आई हिंदी कविता के प्रमुख हस्ताक्षर हैं। वर्ष 2020 में उनकी कविताओं की पहल

14 दिसम्बर 2025

कथा : फ़ैंसी पैकेजिंग के युग में नैतिकता अक़्ल दाढ़ है

कथा : फ़ैंसी पैकेजिंग के युग में नैतिकता अक़्ल दाढ़ है

यह इमला और सुलेख लेखन का दौर था। इंद्रियों को चौकन्ना रखने और हिंदी को ख़ूबसूरत तरीक़े से बरतने पर ज़ोर रहता था। खुरदुरे

14 नवम्बर 2025

अँगूठा मेहनत कर रहा है, दिमाग़ आराम!

अँगूठा मेहनत कर रहा है, दिमाग़ आराम!

सड़क के किनारे फ़ुटपाथ पर लेटा बूढ़ा व्यक्ति लगातार खाँस रहा है। बग़ल में बैठा जवान बेटा हथेली पर खैनी ठोंकते हुए खाना ब

13 नवम्बर 2025

जन्मतिथि विशेष : मुक्तिबोध : आत्मा के मित्र को स्नेहांजलि

जन्मतिथि विशेष : मुक्तिबोध : आत्मा के मित्र को स्नेहांजलि

यह सभा एक बंधु के निधन पर एक कवि के अपने रचना-क्षेत्र हो उठ जाने पर, दुःख प्रकट करने और शोक-संतप्त परिवार को हम सबकी संव

12 नवम्बर 2025

केवल नाम के बूढ़े आदमी द्वारा बनाए गए ‘सत्तावन’ प्रसिद्ध बहाने

केवल नाम के बूढ़े आदमी द्वारा बनाए गए ‘सत्तावन’ प्रसिद्ध बहाने

जो लोग सफल नहीं होते हैं, उनमें आम तौर पर एक ख़ास विशेषता होती है। उन्हें विफलता के सभी कारणों का पता होता है और वे उपलब्

07 नवम्बर 2025

कामू-कमला-सिसिफ़स

कामू-कमला-सिसिफ़स

“The struggle itself toward the heights is enough to fill a man’s heart. One must imagine Sisyphus happy.” —अल्बैर का

21 अक्तूबर 2025

असमाप्य अनुष्ठान : रतन थियम का रंगकर्म

असमाप्य अनुष्ठान : रतन थियम का रंगकर्म

नाटक शुरू होने के पहले की थर्ड बेल बजती है। नाट्यशाला का अँधेरा गाढ़ा होते-होते किसी प्रागैतिहासिक, चंद्रमा विहीन रात्रि

18 अक्तूबर 2025

झाँसी-प्रशस्ति : जब थक जाओ तो आ जाना

झाँसी-प्रशस्ति : जब थक जाओ तो आ जाना

मेरा जन्म झाँसी में हुआ। लोग जन्मभूमि को बहुत मानते हैं। संस्कृति हमें यही सिखाती है। जननी और जन्मभूमि स्वर्ग से बढ़कर है

10 अक्तूबर 2025

बेदिल की दिल्ली

10 अक्तूबर 2025

बेदिल की दिल्ली

विगत कई दिनों से हमारा मन दिल्ली से बाहर कहीं दूर जाने को छटपटा रहा था। लगभग दो महीने से राजधानी के एक बंद 20×20 के किरा

29 सितम्बर 2025

इलाहाबाद मेरे लिए यूटोपिया में तब्दील होता जा रहा है

इलाहाबाद मेरे लिए यूटोपिया में तब्दील होता जा रहा है

14 सितंबर 2022 कल किसी ने व्हाट्सएप पर एक स्टेटस लगा रखा था। किसी की मृत्यु का। बहुत सुंदर चेहरा था। जवान था। मैंने प

24 सितम्बर 2025

भूले-भटके दिन : कुछ रूमानी टुकड़े

भूले-भटके दिन : कुछ रूमानी टुकड़े

मैंने अपने सबसे असुरक्षित क्षणों में जब-जब तुम्हें याद किया है, तब-तब यह सवाल आया कि बीतते समय के साथ मैं तुम्हारे लिए म

20 सितम्बर 2025

मृत्यु ही जीवन का सबसे विश्वसनीय वादा है

मृत्यु ही जीवन का सबसे विश्वसनीय वादा है

जिस क्षण हम जन्म लेते हैं, उसी क्षण मृत्यु हमारे साथ चल पड़ती है। हमारा हर क़दम अपनी मृत्यु की ओर उसकी छाया की तरह उठता

18 सितम्बर 2025

इलाहाबाद तुम बहुत याद आते हो-4

इलाहाबाद तुम बहुत याद आते हो-4

तीसरी कड़ी से आगे... आगे डायोसिस चर्च ऑफ़ लखनऊ के प्रभारी का आवास है। मैं जब छात्रावास में रहता था। तब एक बार ऐसा हुआ

13 सितम्बर 2025

त्याग नहीं, प्रेम को स्पर्श चाहिए

त्याग नहीं, प्रेम को स्पर्श चाहिए

‘लगी तुमसे मन की लगन’— यह गीत 2003 में आई फ़िल्म ‘पाप’ से है। इस गीत के बोल, संगीत और गायन तो हृदयस्पर्शी है ही, इन सबसे

02 सितम्बर 2025

समीक्षा : मृत्यु अंत है, लेकिन आश्वस्ति भी

समीक्षा : मृत्यु अंत है, लेकिन आश्वस्ति भी

मृत्यु ऐसी स्थिति है, जिसका प्रामाणिक अनुभव कभी कोई लिख ही नहीं सकता; लेकिन इस कष्टदायी अमूर्तता के स्वरूप, दृश्य और प्र

29 अगस्त 2025

वापसियों की यात्रा क्या त्रासदियों के अंत से शुरू होती है?

वापसियों की यात्रा क्या त्रासदियों के अंत से शुरू होती है?

अचानक ही तुम्हें अपनी भटक का उद्गम मिल गया है। वह इतना अस्ल है कि तुम उससे घबरा गए हो। तुम चाहते हो, तुम जितनी जल्दी हो

27 अगस्त 2025

कहानी : स्पंदन

कहानी : स्पंदन

अँधेरे से भरा हुआ बंद कमरा, जिसमें बाहर लगी स्ट्रीट लाइट से प्रकाश भीतर आने की कोशिश तो कर रहा था, पर बंद खिड़कियों को भ

11 जुलाई 2025

आज़ाद और खुले कैंपस में क़ैद लड़की

आज़ाद और खुले कैंपस में क़ैद लड़की

मेरा कैंपस (हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय) सुंदर है। यहाँ मन बहलाने और दिल लगाने को काफ़ी कुछ है—ऊँची-ऊँची इमारतें हैं

10 जुलाई 2025

8 A.M. Metro : अर्थ भरी अदायगी

8 A.M. Metro : अर्थ भरी अदायगी

गुलशन देवैया और सैयामी खेर अभिनीत फ़िल्म ‘8 A.M. Metro’ हाल-फ़िलहाल की प्रचलित व्यावसायिक फ़िल्मों से अलग श्रेणी में आती

01 जुलाई 2025

आम की बेला

आम की बेला

मिरा वक़्त मुझ से बिछड़ गया मिरा रंग-रूप बिगड़ गया जो ख़िज़ाँ से बाग़ उजड़ गया मैं उसी की फ़स्ल-ए-बहार हूँ मुज़्तर ख

26 जून 2025

नायक खोजते अ-नायक हो तुम

नायक खोजते अ-नायक हो तुम

उल्टी धार के लिए शुक्रगुज़ार होना चाहिए। परेशानियों का शुक्रिया कहना चाहिए। अधम मनुष्यों से दूर रहना चाहिए। कविता में सू