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कहानी पर बेला

17 सितम्बर 2026

कहानी : खिल्ली विनाशालय

कहानी : खिल्ली विनाशालय

मेरे देश का नाम है—घरघराहट! मेरा प्यारू देश है दुनिया का सबसे न्यारू देश और मेरे देश से बाहर जो भी हैं वे सब साले हैं झरझरालू देश। मेरा अपना पर्सनल नाम सुकुमार समस्या कुमार है। मेरे पैदा होने के ब

16 सितम्बर 2026

कहानी : गश्ती

कहानी : गश्ती

चाईं उर्फ निशू भाई के पास कमाल का गुण था—वह सड़क पर चलती, खड़ी, इठलाती, इतराती, मुस्काती लड़की को देखकर बता देता था, ‘यह गश्ती है, चल भाई लपक लिया जाए...’ अपने जादुई अनुमान पर वह कभी फ़ेल नहीं हुआ

15 सितम्बर 2026

कहानी : प्रोजेक्ट एक्रिडोथेरेस : डिफ़ॉल्ट सेटिंग हैपीनेस

कहानी : प्रोजेक्ट एक्रिडोथेरेस : डिफ़ॉल्ट सेटिंग हैपीनेस

इतनी रात को क्या कर रहे हो? इंतिज़ार... दोस्त का... दोस्त? हाँ, दोस्त ही तो... ट्रेन का इंतिज़ार करते, लास्ट मिनिट ब्लिंकइट ऑर्डर का इंतिज़ार करते, सेलरी का इंतिज़ार करते, किसी विशेष मैसे

14 सितम्बर 2026

कहानी : सॉरी, यू आर नॉट रजिस्टर्ड!

कहानी : सॉरी, यू आर नॉट रजिस्टर्ड!

यह दिसंबर की साँझ थी। पावर प्लांट की एक परिचित, ठंडी और गहराती साँझ।  प्रशासनिक भवन के भीतर अभी भी रोशनी थी... हल्की, दूधिया, स्थिर, अलसाई हुई-सी जैसे ऑफ़िस की ट्यूबलाइटें भी पूरे दिन की गहमा-गहमी

06 अगस्त 2026

कहानी : तय

कहानी : तय

‘तय’—हिंदी कहानी की स्थापित व्याख्या से परे जाती है। ‘तय’ के बारे में तय नहीं है कि यह एक परीकथा है या फ़ैंटेसी। इसमें अंतश्चेतना के प्रवाह की तकनीक का सूक्ष्म प्रयोग हुआ है। कहानी में नायक और नायिका

27 जुलाई 2026

शंखनाद : बनियान, बुल दुबे और बाक़ी असफलताएँ

शंखनाद : बनियान, बुल दुबे और बाक़ी असफलताएँ

पढ़ाई-लिखाई में डबल-बिलो औसत प्रदर्शन के बाद हमने यह स्वीकार कर लिया कि संप्रति यह हमारा क्षेत्र नहीं है और अपनी पहचान किसी दूसरे क्षेत्र में तलाशनी चाहिए। कुलदीप की राय थी कि हमें डॉक्टर बनने की

09 जुलाई 2026

कहानी : प्रेम और अपराध और दंड

कहानी : प्रेम और अपराध और दंड

इतनी बारिश!  इतनी बारिश कब हुई थी, याद नहीं आता। संभव है कभी हुई ही न हो... गाँव के दक्खिन की तरफ़ की बसावट जिसे कुछ लोग ‘हरिजन बस्ती’ भी कहते थे और उन कुछ में कुछ वे लोग थे जो एक मँझे हुए राजन

01 जुलाई 2026

कहानी : काजल की कोठरी

कहानी : काजल की कोठरी

दिन के सवा ग्यारह बज रहे हैं और कमरे में गहरा अँधेरा छाया हुआ है। पर्दे गिराए हुए, दो-दो खिड़कियाँ लेकिन दोनों बंद। फ़र्श एकदम चिकट, कमरे के बाहर एक सड़े हुए कपड़े को डोरमैट के रूप में बिछाया हुआ है। अल

29 जून 2026

कहानी : लौट आएँगे

कहानी : लौट आएँगे

विवाह के इन दस वर्षों के दरमियान घर के ख़र्चों के साथ अब शब्दों में भी कटौती होने लगी है। राहुल के आने की आहट होती है, पत्नी रसोई से केवल पलकें उठाती है और फिर तुरत ही अपने काम में व्यस्त हो जाती है।

05 जून 2026

‘बाघ का भाग्यफल और अन्य कहानियाँ’ : धर्म-सत्ता-प्रेम का त्रिकोण

‘बाघ का भाग्यफल और अन्य कहानियाँ’ : धर्म-सत्ता-प्रेम का त्रिकोण

लिखने की मोहलत के लिए मृत्यु को ही अपनी किताब सादर समर्पित करता लेखक मृत्यु से तो भिड़ ही रहा है, साथ ही उसकी वैचारिक मुठभेड़ अपने समय के अजीब, अप्रिय, भ्रामक, भ्रष्ट, कुव्यवस्था के सामाजिक, राजनीतिक,

04 जून 2026

कहानी : स्वस्थित

कहानी : स्वस्थित

Every word is like an unnecessary stain on silence and nothingness.  ~ Samuel Beckett  एक लगातार अशांत रह रही आत्‍मा विचित्र भाषाऍं सीख लेती हैं।  ~ स्‍वदेश दीपक  किचन में नंगे खड

20 मई 2026

रूपक-कथाएँ : स्वल्प-वासी

रूपक-कथाएँ : स्वल्प-वासी

मुज़म्मिल के लिए एक बग़ीची के पास पानी का नहीं, प्रतिध्वनियों का एक कुआँ था। जब स्वल्प-वासी उसमें झाँकता, तो उसे अपना चेहरा नहीं, अपनी आवाज़ दिखाई देती—धीरे-धीरे उतरती हुई, गहराई में। वह सुनता

12 मई 2026

कहानी : एक पापी की डायरी

कहानी : एक पापी की डायरी

इस तथ्य को बतौर ढाल के रूप में प्रयोग करते हुए, ताकि अपनी अंतरात्माओं के हमलों से हम स्वयं को बचा सकें कि इन शब्दों को लिखने वाला अब इस दुनिया में नहीं है, कि एक दशक पहले अगस्त महीने की एक बरसती शाम

08 मई 2026

कहानी : एक मर्मांतक चाहना

कहानी : एक मर्मांतक चाहना

बर्फ़ धीरे-धीरे गिर रही थी, जैसे नींद किसी उदास आदमी की पलकों से सरक जाती है; और बर्फ़ केवल बर्फ़ नहीं थी, यह रौशनी से ख़ाली स्मृतियों का एक साया था जो शहर पर मंडरा रहा था। शहर, जो वक़्त की क़ब्र का एक

08 अप्रैल 2026

शंखनाद : मिलन टॉकीज : एक झलक का इंतज़ार

शंखनाद : मिलन टॉकीज : एक झलक का इंतज़ार

पूर्वी उत्तर प्रदेश में गौना उर्फ़ द्विरागमन प्रथा तब तक विद्यमान थी, जिसके तहत शादी के बाद वर अकेले कुछ स्मृतियों और तमाम ‘अनजाने’ स्पर्शों कंपकंपाहटों, कपड़ों की सरसराहटों, हाथों के मेहंदी की गहन गंध

17 मार्च 2026

कहानी : मैं किसी के लिए कुछ नहीं हूँ

कहानी : मैं किसी के लिए कुछ नहीं हूँ

“अब भी क्या गले न मिलोगी? अभी तक वही हिचक... मिल लो यार, क्या पता अगली मुलाक़ात हो न हो।” उसकी पसीजी हुई हथेलियाँ छूट रही थीं मुझसे। वो गले लगने या लगाने को बेताब था। विदा की बेला में ये बातें मेर

12 मार्च 2026

कहानी : ऊँघ

कहानी : ऊँघ

उस दुपहर भी भृत्य शामलाल अपने निर्धारित स्थान—जो कि राज्य संचालनालय की पुरानी इमारत संख्या : ग, इकाई-7, छठवीं मंज़िल के कक्ष क्रमांक 337 में क़तारबद्ध अलमारियों के मकड़जालों के बीच ज़रा किनारे की ओर हट

11 मार्च 2026

रागदर्पण : क़िस्सागो अम्मा

रागदर्पण : क़िस्सागो अम्मा

एक उबाऊ शाम मोबाइल फ़ोन में उलझे हुए मैंने देखा कि फ़ोन इधर-उधर की तस्वीरों, बधाइयों और अनर्गल संदेशों से अटा पड़ा है। उन्हें डिलीट करते हुए मैंने ख़ुद को एक ज़ब्त न होने वाली झल्लाहट की गिरह में पाया।

05 मार्च 2026

कहानी : फ़्रीडम

कहानी : फ़्रीडम

यह बस लगभग 45 किलोमीटर के सीमित दायरे में चक्कर काटती है। दायरे के भीतर तमाम स्टॉप पड़ते हैं। अलग-अलग स्टॉपों पर अलग-अलग लोग चढ़ते-उतरते रहते हैं। बस उन सभी रास्तों को पहचानती है, लेकिन उन पर मिलने व

17 फरवरी 2026

पत्र : प्रकाश के साक्षी सेबास्टिओं सालगाडो के नाम

पत्र : प्रकाश के साक्षी सेबास्टिओं सालगाडो के नाम

प्रिय सेबास्टिओं, प्रेरणा के अमिट स्रोत शांति और सामंजस्य के दूत विविधता के उपासक, प्रकृति के अद्भुत सहचर आज से 12 साल पहले मेरे एक फ़ोटोग्राफ़र मित्र अमन ने मुझे तुम्हारे बारे में बताया था।

31 जनवरी 2026

जब इतिहास ने साहित्य के दरवाज़े से अपनी आत्मा खोजी

जब इतिहास ने साहित्य के दरवाज़े से अपनी आत्मा खोजी

हम बात नहीं करते 1947 की, क्योंकि उस साल की बातें करना आसान नहीं। उन रातों की बात करना, जब ट्रेनें लाश-गाड़ियाँ बन गई थीं। उन औरतों की, जिनके शरीर युद्ध के मैदान बने। उन बच्चों की जिन्होंने घर जलते द

23 जनवरी 2026

ज्ञानरंजन के मनोहर का ‘बहिर्गमन’ उर्फ़ ‘पिता’ को रुमाल की ज़रुरत है...

ज्ञानरंजन के मनोहर का ‘बहिर्गमन’ उर्फ़ ‘पिता’ को रुमाल की ज़रुरत है...

नौ दशक का एक सुदीर्घ और शानदार जीवन जीकर ज्ञानरंजन हमें छोड़ कर चले गए। वह मनोहर की तरह प्रस्थान करते हुए रुमाल हिला रहे हैं। अपना रुमाल उमस में सोये उस ‘पिता’ को देना चाहते हैं, जो खटिया के दाएँ पाटी

21 जनवरी 2026

कहानी : बावर की वनकन्या

कहानी : बावर की वनकन्या

प्रणाम दीदी कैसी हो आप? आज बहुत दिनों बाद फ़ोन आया आपका। सब ख़ैरियत से तो है! तू जानती ही है सुधा तेरे जीजाजी के गुज़र जाने के बाद ज़िंदगी काली चाय-सी हो गई है। अब जीवन में ना कोई स्वाद है और ना ह

07 जनवरी 2026

प्रेम की घर वापसी

प्रेम की घर वापसी

आज, अभी, इस दिन, इस क्षण की लंबान कितनी हो सकती है? इसका एक वाजिब जवाब है—विनोद कुमार शुक्ल के उपन्यास, ‘दीवार में एक खिड़की रहती थी’ जितनी! इस उपन्यास को पढ़ते हुए पहली ही बात जो ध्यान खींचती है, वह

06 जनवरी 2026

कहानी : पिस्तौल

कहानी : पिस्तौल

और इस तरह पिस्तौल का मेरे जीवन में पदार्पण हुआ... लगा कि आँगन के उस सिरे से धड़ाम से कोई कूदा। देखा तो अपना नरेन था। यानी अपना नरेंद्र यानी नरेनिया। मेरा ‘जिगरी दोस्त’! उन दिनों जब भी कोई उसे मेरा

23 दिसम्बर 2025

कहानी : दाहिना हाथ

कहानी : दाहिना हाथ

फ़रवरी का महीना बीते कुछ ही दिन हुए। अभी ठंड मौसम से गई नहीं। रात के अँधेरे में मोहल्ले के घरों की बत्तियाँ बूझा दी गईं। सभी अपने घरों में सोने जा चुके होंगे। ऐसे में भौ-भौ की आवाज़ होते ही शहबाज़ कम

13 दिसम्बर 2025

कहानी : आकांक्षा

कहानी : आकांक्षा

मेरे हाथ में संडे का अख़बार है। मेरे बाजू के स्टूल पर सुबह की पहली चाय का कप। स्मिता भी चाय पी रही है। बरसों पहले फ़्रेम करवायी गई रवींद्रनाथ ठाकुर की यह तस्वीर किताबों की रैक के नीचे टंगी है। रवी बा

29 नवम्बर 2025

भूख का भूगोल : अखिलेश सिंह की पहली कहानी ‘विकल्प’ पर कुछ अवलोकन

भूख का भूगोल : अखिलेश सिंह की पहली कहानी ‘विकल्प’ पर कुछ अवलोकन

हाल ही में नई पीढ़ी के कवि, गद्यकार और अनुवादक अखिलेश सिंह की पहली कहानी ‘विकल्प’—समालोचन पर प्रकाशित हुई है। बीते कुछ दिनों में इस कहानी के साथ लगातार रहने का अवसर मिला। अखिलेश सिंह के प्रभावशाली, ध

07 नवम्बर 2025

कहानी : रिपोर्टर

कहानी : रिपोर्टर

अक्टूबर आ गया। मौसम करवटें लेने लगा है। प्रभु अपना चश्मा खोज रहे हैं। रात में कहीं रखा गया था। चाय उबलकर देगची से बाहर निकलने लगी। प्रभु ने गैस बंद किया। सुबह-सुबह ही उनके मन में क्या-क्या आने लगा था

06 नवम्बर 2025

कमल जीत चौधरी की दस कथाएँ

कमल जीत चौधरी की दस कथाएँ

कहानी उसने प्यार किया था। उसे अपने पुराने प्रेमी की याद सताती थी। पति की ग़ैरमौजूदगी में एक रात उसने अपने प्रेमी को घर बुलाया। घर के सभी बल्ब बंद करके, वह उसे पिछले दरवाज़े से अंदर ले आई। अंदर पहु

13 अक्तूबर 2025

कथाएँ : चोर की माँ और आलू जी से मुलाक़ात

कथाएँ : चोर की माँ और आलू जी से मुलाक़ात

चोर की माँ पटना में ग़रीबों के एक मसीहा चिकित्सक थे। उनके पास प्रदेश के सुदूर इलाक़े के बहुत सारे ग़रीब रोग-व्याधि, दुख-संताप लेकर आते थे। ग़रीबी को सबसे बड़ी बीमारी मानने वाले मसीहा डॉक्टर के पास

16 सितम्बर 2025

कहानी : सेंटिनली : लहरों के पार एक दुनिया

कहानी : सेंटिनली : लहरों के पार एक दुनिया

सूरज अपनी पूरी ऊँचाई पर था और उत्तरी सेनटिनल द्वीप के सफेद रेत वाले तट चमक रहे थे। चारों ओर एक अनकही शांति फैली हुई थी, जिसे केवल लहरों की धीमी सरसराहट और तट पर खड़े नारियल के पेड़ों की हल्की सरसरगाह

09 सितम्बर 2025

कहानी : लील

कहानी : लील

‘लील’—एक प्रादेशिक हिंदू रिवाज है, जो अधिकतर गुजरात राज्य के सौराष्ट्र प्रदेश में देखने को मिलता है। इस रिवाज के अनुसार अगर किसी पुरुष का विवाह ना हुआ हो और उसकी मृत्यु हो जाए, तो उसकी वासनापूर्ति और

27 अगस्त 2025

कहानी : स्पंदन

कहानी : स्पंदन

अँधेरे से भरा हुआ बंद कमरा, जिसमें बाहर लगी स्ट्रीट लाइट से प्रकाश भीतर आने की कोशिश तो कर रहा था, पर बंद खिड़कियों को भेद पाना संभव न था। राकेश ने जैसे ही कमरे में प्रवेश किया बिस्तर पर जा पड़ा। वह

26 अगस्त 2025

आज भी सबसे बड़ी शक्ति हैं प्रेमचंद की कहानियाँ

आज भी सबसे बड़ी शक्ति हैं प्रेमचंद की कहानियाँ

उनासीवें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर प्रयागराज शहर आज़ादी का उत्सव मनाने की तैयारी कर रहा था। इसी उल्लास के बीच स्वराज विद्यापीठ में 9 से 16 अगस्त 2025 तक ‘स्वराज उत्सव’ के अंतर्गत इलाहाबाद वि

25 अगस्त 2025

कहानी : मसअला फूल का है

कहानी : मसअला फूल का है

भूख देखी है आपने? भूख वह भी किसी की आँखों में! भूख भरी आँखों को देख या तो सिहरन होती है या विस्मय... इस भूख को तृप्ति कैसे मिलेगी? यह जानने के प्रयास में, मैं उसके पीछे चली गई। पहले मुझे उस भूख की आख

12 जून 2025

भाषा, लोग और ‘बहुरूपिये’ वाया 2014

भाषा, लोग और ‘बहुरूपिये’ वाया 2014

आज़ादी के बाद के, हमारे देश का इतिहास जब भी लिखा जाएगा तो उसमें दो खंड लाज़िमी होंगे। पहला—आज़ादी से लेकर 2014 तक और दूसरा—2014 से बाद का। ऐसा नहीं है कि 2014 के बाद से हमारे समाज में धर्म के नाम पर

25 मई 2025

अतीत का अँधेरा और बचकानी ख़्वाहिशें

अतीत का अँधेरा और बचकानी ख़्वाहिशें

दिनेश श्रीनेत की कहानियों का संग्रह प्रकाशित होकर सामने आया है और मैं ख़ुशी के साथ एक अजीब से एहसास से भी सराबोर हूँ। मैं इस एहसास को कोई नाम देने में ख़ुद को लाचार समझता हूँ। मगर इस एहसास के केंद्र

10 मई 2025

सपना टॉकीज में हाउसफ़ुल

सपना टॉकीज में हाउसफ़ुल

उस आदमी की स्मृति में अभी बुर्राक सफ़ेद परदा टँगा हुआ है, जब वह चोरी-छिपे सपना टॉकीज में पिक्चर देखने जाया करता था और उनके नाम एक डायरी में लिख लेता था। उसकी स्मृति में सपना टॉकीज की टीन की छत के बीचो

16 अप्रैल 2025

कहानी : चोट

कहानी : चोट

बुधवार की बात है, अनिरुद्ध जाँच समिति के समक्ष उपस्थित होने का इंतज़ार कर रहा था। चौथी मंजिल पर जहाँ वह बैठा था, उसके ठीक सामने पारदर्शी शीशे की दीवार थी। दफ़्तर की यह दीवार इतनी साफ़-शफ़्फ़ाक थी कि

07 अप्रैल 2025

उसी के पास जाओ जिसके कुत्ते हैं

उसी के पास जाओ जिसके कुत्ते हैं

मुझे पता भी नहीं चला कि कब ये कुत्ते मेरे पीछे लग गए। जब पता चला तो मैं पसीने-पसीने हो गया। मैंने कहीं पढ़ा था कि अगर कुत्ते पीछे पड़ ही जाएँ तो एकदम से भागना ख़तरनाक होता है। आप कुत्तों से तेज़ कभी नह

02 अप्रैल 2025

कहानी यहाँ से शुरू होती है

कहानी यहाँ से शुरू होती है

‘‘सलाम करके गुज़रता था जिस मज़ार को मैं’’ उसने काग़ज़ पर ये मिसरा लिखा और शाइर का नाम सोचने लगा। कुछ देर बाद उसने ये वाक्य : ‘‘अंत ही आरंभ है…’’ लिखा और काट दिया। फिर एक लंबी बुत-नुमाई के बाद कुफ़्र

18 मार्च 2025

कहानी : स्मृतियों की गर्म भाप में सीझता मन

कहानी : स्मृतियों की गर्म भाप में सीझता मन

मुझे ऐसे गले लगाओ जैसे मैं कल मरने वाला हूँ, और कल मुझे ऐसे गले लगाओ जैसे मैं मृतकों में से वापस आया हूँ! —निज़ार क़ब्बानी “Who can forget the most amazing moment when we get face to face for t

13 फरवरी 2025

कहानी : लुटेरी तवायफ़ें

कहानी : लुटेरी तवायफ़ें

शादियों का सीज़न आते ही रेशमा तैयारी करना शुरू कर देती। मेकअप से थोड़ा घबराती थी, लेकिन उम्र छुपाने की जद्दोजहद रहती थी हमेशा। चेहरे को कैसे सवारें, क्या करें, क्या न करें—ये सब परपंच उसे समझ नहीं आते।

12 फरवरी 2025

स्त्रियों के संसार में ही घिरती है रात

स्त्रियों के संसार में ही घिरती है रात

ये उसकी सुबह थी पीठ पर धक्का मारते पुलकित के नन्हें पैर सुबह की अलसाई नींद के गवाह थे। इससे पहले वह इस आनंद में डूबती, भागते समय की हक़ीक़त एक कुशल ग़ोताख़ोर की तरह उसे अप्रतिम सुख की नदी से बाहर

08 फरवरी 2025

बहुत कुछ खोने के अँधेरे में किसी को बचाने की कहानियाँ

बहुत कुछ खोने के अँधेरे में किसी को बचाने की कहानियाँ

इस किताब को पढ़ते हुए यह महसूस होता है कि कवि-कथाकार-फ़िल्मकार देवी प्रसाद मिश्र की कहानियों के साथ चलना ख़ुद को विशद करना और उदात्त करना ही तो है। ‘कोई है जो’ खिड़की से भीतर गया, दरवाज़े से भीतर जात

01 फरवरी 2025

क़स्बाई ज़िंदगी की तिकड़मों का लुत्फ़

क़स्बाई ज़िंदगी की तिकड़मों का लुत्फ़

हिंदुस्तान क़स्बों और नगरों से भरा देश है। अगर हिंदुस्तान से क़स्बे निकाल दिए जाएँ, तो बस धूल-खाते, मिलों के शोर से भरे इलाक़े, बजबजाते हुए नाले, एक दूसरे से उलझने को तैयार गाड़ियाँ और आसमान की कोख म

20 जनवरी 2025

सीधे कहानी में ले जाने वाली कहानियाँ

सीधे कहानी में ले जाने वाली कहानियाँ

दामोदर मावज़ो ज्ञानपीठ और साहित्य अकादेमी—भारतीय साहित्य के दोनों बड़े सम्मानों से सम्मानित कथाकार हैं। देश में गिनती के लेखक-कथाकार ही इस तरह अलंकृत हुए होंगे। वह गोवा में पैदा हुए और कोंकणी में लिखते

10 जनवरी 2025

आत्म-तर्पण : कबहुँ न नाथ नींद भरि सोयो

आत्म-तर्पण : कबहुँ न नाथ नींद भरि सोयो

‘हिन्दवी’ के विशेष कार्यक्रम ‘संगत’ के 89वें एपिसोड में हिंदी कथा साहित्य के समादृत हस्ताक्षर चन्द्रकिशोर जायसवाल ने यहाँ प्रस्तुत संस्मरणात्मक कथ्य ‘आत्म-तर्पण’ का ज़िक्र किया था, जिसके बाद कई साहित

09 जनवरी 2025

ज़िंदगी की बे-अंत नैरंगियों का दीदार

ज़िंदगी की बे-अंत नैरंगियों का दीदार

कहानी एक ऐसा हुनर है जिसके बारे में जहाँ तक मैं समझा हूँ—एक बात पूरे यक़ीन से कही जा सकती है कि आप कहानी में किसी भी तरह से उसके कहानी-पन को ख़त्म नहीं कर सकते, उसकी अफ़सानवियत को कुचल नहीं सकते।  उद