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साहित्य पर बेला

27 अप्रैल 2026

लंबी कविताओं पर खुलकर हुई बहस : ‘अर्थात्’ की पाँचवीं कड़ी रही ख़ास

लंबी कविताओं पर खुलकर हुई बहस : ‘अर्थात्’ की पाँचवीं कड़ी रही ख़ास

‘चेख़व के कथा-साहित्य का सौंदर्यशास्त्र’ पर केंद्रित रही ‘अर्थात्’ की चौथी कड़ी के बाद इस बार विवेचना का विषय रहा—‘हिंदी की लंबी कविताएँ और उनका पुनर्पाठ’। इस पाँचवें आयोजन में बतौर वक्ता कवि-द्वय—देव

23 अप्रैल 2026

विराम-चिह्नों की क्रांति और एम डैश की सत्ता का अंत

विराम-चिह्नों की क्रांति और एम डैश की सत्ता का अंत

हाल ही में मेरी मुलाक़ात एम डैश से हुई। बेहद परेशान, दुखी, चिंतित और बेचैन अवस्था में बैठा था। चेहरा भावप्रवण, अश्रु-भरे नयन, जगत के उलाहनों से क्षुब्ध। ख़ुद को भाषा और लेखन के प्रिय साथी से सिर्फ़ स

22 अप्रैल 2026

नई पदचापों की पहचान : ‘तीन कवि तीन किताबें’

नई पदचापों की पहचान : ‘तीन कवि तीन किताबें’

11 अप्रैल को दिल्ली के सुरजीत भवन में आयोजित साहित्यिक संगोष्ठी ‘तीन कवि तीन किताबें’ केवल एक सामान्य पुस्तक-परिचर्चा नहीं थी, बल्कि समकालीन हिंदी कविता की नई आवाज़ों, उनके सरोकारों और समय की बेचैनिय

20 अप्रैल 2026

सौरभ द्विवेदी की रिकमेंडेशन को श्रद्धा से नहीं, संदेह से पढ़ा जाना चाहिए

सौरभ द्विवेदी की रिकमेंडेशन को श्रद्धा से नहीं, संदेह से पढ़ा जाना चाहिए

रतन राजपुरोहित मेरा सहकर्मी है—युवा, उत्साही, पढ़ाकू और ज़बरदस्त लिक्खाड़। अगर लिखने से कैलोरी बर्न होती, तो वह देश का सबसे फिट आदमी होता। पिछले बुधवार की शाम को, शिफ़्ट ख़त्म होने के बाद उसने मुझसे स

19 अप्रैल 2026

रविवासरीय 4.0 : अविनाश मिश्र के ख़िलाफ़

रविवासरीय 4.0 : अविनाश मिश्र के ख़िलाफ़

• मैं कैसा था? अलमुस्तफ़ा से अलमित्रा ने पूछा कि अविनाश मिश्र कैसा था, जब दिल्ली आया था? अलमुस्तफ़ा ने कहा कि दिल्ली में अपना क्षरण पता नहीं चलता। दिल्ली में बहुत काम करने के लिए एक स्कॉलर ब

12 अप्रैल 2026

रविवासरीय 4.0 : पहला सीताराम सूर्यवंशी संस्कृति सम्मान

रविवासरीय 4.0 : पहला सीताराम सूर्यवंशी संस्कृति सम्मान

I said to one of my friends, “The reason I have chosen not to speak is that most of the time when one is talking, both good and bad things are said, and the eyes of one’s enemies fall only upon the b

10 अप्रैल 2026

जगह-जगह 2.0 : ईरान में भारत का ख़्वाब : शाहनामा में पंचतंत्र और शतरंज

जगह-जगह 2.0 : ईरान में भारत का ख़्वाब : शाहनामा में पंचतंत्र और शतरंज

فیلش یاد هندوستان کرده फ़ीलश याद-ए-हिन्दोस्तान करद : [उसके हाथी को हिंदुस्तान याद आ गया—एक फ़ारसी कहावत, जिसका आशय है किसी प्रिय जगह या अपने अतीत में लौटने की कसक या हूक उठना।] ~ ईरान को सा

09 अप्रैल 2026

आज ‘बेला’ का दूसरा जन्मदिन है

आज ‘बेला’ का दूसरा जन्मदिन है

आज से दो वर्ष पूर्व वे देवियों के दिन थे, जब हिन्दी और ‘हिन्दवी’ के व्यापक संसार में ‘बेला’ का प्राकट्य हुआ था। देवियों की उपस्थिति और कला—रूप और कथ्य दोनों ही स्तरों पर—अत्यंत समृद्ध होती है। यह समृ

05 अप्रैल 2026

रचनात्मकता और द्वंद्व

रचनात्मकता और द्वंद्व

पेड़-पौधों की ही तरह हर रचनाकार अपनी मिट्टी, अपने परिवेश की उत्पत्ति होता है । मेरा यह कहना बेहद सामान्य कथन है । यह तो कहा जाता ही रहा है । फिर मैं नया क्या कह रहा हूँ? मैं नया बिल्कुल नहीं कह रहा। 

04 अप्रैल 2026

आधुनिकतावाद से सामना : मेरी सृजनात्मकता और उसके समक्ष चुनौतियाँ

आधुनिकतावाद से सामना : मेरी सृजनात्मकता और उसके समक्ष चुनौतियाँ

एक ‘सृजनात्मकता’ शब्द से मेरे मन में प्राथमिक तौर पर दो चित्र उभरते हैं—एक, रोपाई के लिए बीज से पौध तैयार करने की अपनी क्यारी को सुबह की धुंध में निरखता हुआ एक अकेला किसान; और दूसरी, लालटेन की रोश

30 मार्च 2026

‘अर्थात्’ की चौथी कड़ी में जमकर हुई चेख़व-चर्चा

‘अर्थात्’ की चौथी कड़ी में जमकर हुई चेख़व-चर्चा

यौवन भोगते वसंत के बीच जब बोगनवेलिया के फूलों का रंग गाढ़ा हो रहा था और अलसायी हवा धूप के तीखेपन को सरकाकर लास्य बिखराने की कोशिश में थी—जब 29 मार्च को दोपहर दो बजे से शुरू हुई ‘अर्थात्’ की चौथी गोष्

28 मार्च 2026

आज है ‘हिन्दवी’ का विशेष आयोजन ‘अनंता’

आज है ‘हिन्दवी’ का विशेष आयोजन ‘अनंता’

हिंदी साहित्य की दुनिया में स्त्री-स्वर हमेशा से मौजूद रहा है, बस उसे पहचानने और सुनने की दृष्टि समय-समय पर बदलती रही है। इतिहास के लंबे गलियारों में स्त्रियों की रचनात्मकता अक्सर घर की चौखट, स्मृतिय

22 मार्च 2026

रविवासरीय 4.0 : साहित्य अकादेमी एक ऐसा पुरस्कार है

रविवासरीय 4.0 : साहित्य अकादेमी एक ऐसा पुरस्कार है

• “बताइए न बाबा कि साहित्य अकादेमी कैसा पुरस्कार है?” बाबा उस उम्र में थे कि किसी भी दिन साहित्य अकादेमी अवार्डी हो सकते थे। बशर्ते उस दिन साहित्य अकादेमी अवार्ड की घोषणा करने वाली प्रेस-कॉन्फ़्रे

21 मार्च 2026

रचना का प्रयोजन निर्माण है, नाश नहीं

रचना का प्रयोजन निर्माण है, नाश नहीं

मैंने साहित्य की किसी भी विधा में जब भी लिखा तब यह सोचकर नहीं लिखा कि मैं उक्त विधा की शर्तों को पूरा करने के लिए लिख रहा हूँ। …मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि मैं कभी गद्य भी लिखना चाहूँगा और आज ऐसा

20 मार्च 2026

सही नाम से पुकारने की कला

सही नाम से पुकारने की कला

क्या लिखते हुए हम चीज़ों को उनके सही नाम से पुकारते हैं? चाहे गद्य हो या कविता—यह प्रश्न आत्ममंथन की माँग करता है। साहित्य में शब्द की ‘सत्ता’ और उसकी ‘संज्ञा’ की बराबर भूमिका होती है। जब टॉमस मान ने

09 मार्च 2026

मेरे एकांत के प्रवेश द्वार

मेरे एकांत के प्रवेश द्वार

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की शाम हम सब ‘मेरे एकांत के प्रवेश द्वार’ के माध्यम से एक ऐसे साझा स्पेस में एकत्र हुए, जहाँ लोग अपने-अपने जीवन की व्यस्तताओं और बहुत कम मिलने वाले अवकाश से थोड़ा समय निकालकर

03 मार्च 2026

दैनिक भास्कर लेकर आया है कविता-प्रतियोगिता

दैनिक भास्कर लेकर आया है कविता-प्रतियोगिता

आगामी 21 मार्च को विश्व कविता दिवस के उपलक्ष्य में ‘दैनिक भास्कर’ एक विशेष पहल के रूप में ‘कविता उत्सव’ का आयोजन कर रहा है। यह काव्य-प्रतियोगिता देश भर के रचनात्मक मनों को एक मंच प्रदान करने का प्रया

24 फरवरी 2026

‘अर्थात्’ की तीसरी गोष्ठी में खुले छायावाद के बंध

‘अर्थात्’ की तीसरी गोष्ठी में खुले छायावाद के बंध

प्रसाद-निराला-महादेवी-पंत के चतुष्टय पर आधारित छायावाद की कविताओं, उसकी भाषा, प्रवृत्तियों, संवेदना और सहमतियों-असहमतियों पर संवाद के उद्देश्य से 22 फ़रवरी की बीती दुपहर ‘छायावाद : खुल गए छंद के बंध’

24 फरवरी 2026

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-10

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-10

नवीं कड़ी से आगे... दस अरुण कमल सत्तर साल से अधिक का जीवन देख चुके हैं और वरिष्ठ कवियों की सूची में भी आ चुके हैं। अरुण कमल हिंदी में प्रसिद्ध और लोकप्रिय कवि भी हैं। कभी रामचंद्र शुक्ल ने लिखा

23 फरवरी 2026

साहित्योत्सव : साहित्य कम, टाइमपास ज़्यादा

साहित्योत्सव : साहित्य कम, टाइमपास ज़्यादा

आजकल साहित्य-उत्सवों, सम्मेलनों और पुस्तक मेलों की धूम है। वैसे उत्सव और सम्मेलन हमेशा से समाज के बहुमूल्य अंग रहे हैं। हर जाति, धर्म और समुदाय अपने-अपने स्तर पर युवक-युवती परिचय सम्मेलन करवाते हैं,

23 फरवरी 2026

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-9

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-9

आठवीं कड़ी से आगे... नौ ‘अपनी केवल धार’ जो देखने में छोटी पर अरुण कमल की कीर्ति का आधार-स्तंभ है कि तरह मेरी एक और प्रिय छोटी-सी कविता है जिसका शीर्षक है—‘थूक’ : “जब वह ग़ुंडा प्राचार्य मान बहाद

19 फरवरी 2026

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-5

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-5

चौथी कड़ी से आगे... पाँच अरुण कमल क़स्बे की मानसिकता वाले पटने के कवि हैं। एक ख़ास पटनिया आग्रह है उनकी कविता में। अरुण कमल की कविता में एक पटना-टोन लगातार उपस्थित है, जैसे राजेश जोशी में भोपाल

18 फरवरी 2026

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-4

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-4

तीसरी कड़ी से आगे... चार 2019 में प्रकाशित अरुण कमल की एक कविता है—‘एक वृद्ध की रात’। एक बूढ़ा है जो जानता है कि ‘कुछ तो है जो मुझे खड़ा कर रहा इस उम्र में’। जिस उम्र में लोग तीर्थ पर निकल जाते ह

17 फरवरी 2026

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-3

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-3

दूसरी कड़ी से आगे... तीन मेरे लिए वे कविता का ककहरा सीखने के दिन थे। कवि-मित्र प्रकाश के सहारे यह संग्रह ‘अपनी केवल धार’ पढ़ गया। यह ‘धार’ कविता दिमाग़ में बैठ गई थी। मैंने उन दिनों अपने मित्रों

16 फरवरी 2026

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-2

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-2

पहली कड़ी से आगे... दो  कभी-कभी एक कहानी, एक उपन्यास और एक कविता भी आपको अमर कर सकती है। अरुण कमल की यह रोमांटिक, उधार वाली कविता इस श्रेणी की कविता है। कभी तुलसीदास ने लिखा था, “नहिं दरिद्र सम

15 फरवरी 2026

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’

एक मुक्तिबोध मेरे प्रिय कवि हैं। उनकी कविता-पंक्तियाँ मुझे बूस्ट करती हैं, मतलब प्रेरणा प्रदान करती हैं। यहाँ प्रस्तुत आलेख का शीर्षक उनकी एक कविता का शीर्षक है। मुक्तिबोध की ‘अँधेरे में’ शीर्षक स

15 फरवरी 2026

डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय [सागर] में अगला ‘हिन्दवी कैंपस कविता’ आयोजन, कविता भेजने की अंतिम तिथि आज

डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय [सागर] में अगला ‘हिन्दवी कैंपस कविता’ आयोजन, कविता भेजने की अंतिम तिथि आज

हिन्दवी कैंपस कविता—‘हिन्दवी’ का एक विशेष आयोजन है। इस आयोजन के माध्यम से देश के विभिन्न शैक्षिक संस्थानों के साथ मिलकर वहाँ के छात्रों को साहित्य-सृजन के लिए प्रोत्साहित करने का प्रयास किया जाता है।

30 जनवरी 2026

जगह-जगह 2.0 : मोबी-डिक : सनक, साहस और समुद्र की कथा

जगह-जगह 2.0 : मोबी-डिक : सनक, साहस और समुद्र की कथा

पानी ये पानी ख़ामुशी से बह रहा है इसे देखें कि इसमें डूब जाएँ —अहमद मुश्ताक़ समुद्र-साहित्य केवल साहसिक कथाओं से नहीं बना है। उसमें एक आदिम पुकार है कि पानी अपनी ओर खींचता है। उसमें मृत्यु औ

27 जनवरी 2026

अंचित से दस सवाल : मुझे दिल्ली बिल्कुल पसंद नहीं है

अंचित से दस सवाल : मुझे दिल्ली बिल्कुल पसंद नहीं है

अंचित (जन्म: 1990) नई पीढ़ी के चर्चित कवि, अनुवादक और संपादक हैं। वर्ष 2021 में उन्हें ‘कवि केदारनाथ सिंह कविता सम्मान’ से सम्मानित किया गया। वे इसक-2023 के कवि भी हैं। हाल ही में उनका नया कविता-संग्

03 जनवरी 2026

बिछिया, बिछोह और वह आख़िरी ख़ाली पन्ना

बिछिया, बिछोह और वह आख़िरी ख़ाली पन्ना

ठहरे हुए हैं, याद आ रही है यात्राओं की। अलग-अलग जगहों की, अलग-अलग समय पर की गई यात्रा की। अलग-अलग सामान पर लटके विभिन्न देशों के स्टीकर दृश्य में हैं, कि अचानक इन दृश्यों को परे धकेलता हुए सामने आ जा

02 जनवरी 2026

सुधांशु फ़िरदौस से दस सवाल : जीवन एक घर है, जिसमें बेघर हूँ मैं

सुधांशु फ़िरदौस से दस सवाल : जीवन एक घर है, जिसमें बेघर हूँ मैं

सुधांशु फ़िरदौस (जन्म : 1985) इस सदी में सामने आई हिंदी कविता के प्रमुख हस्ताक्षर हैं। वर्ष 2020 में उनकी कविताओं की पहली किताब ‘अधूरे स्वाँगों के दरमियान’ शीर्षक से प्रकाशित हुई। इस पुस्तक के लिए उन

31 दिसम्बर 2025

आज वर्षांत और कल होने वाले वर्षारंभ के बीच कोई विच्छेद नहीं है

आज वर्षांत और कल होने वाले वर्षारंभ के बीच कोई विच्छेद नहीं है

आने-जाने से ही मिलकर यह संसार बना है। इन दोनों के बीच कोई विच्छेद नहीं है। विच्छेद की कल्पना हम अपने मन में ही करते रहते हैं। सृष्टि, स्थिति और प्रलय ये तीनों एकमेव होकर रह रहे हैं। सदा एक साथ बने हु

23 दिसम्बर 2025

‘नहीं होने’ में क्या देखते हैं

‘नहीं होने’ में क्या देखते हैं

विनोद कुमार शुक्ल की एक कविता है—‘आदिम रंग’। पहली पंक्ति प्रश्नवाचक है—आदिम रंग आदिम मनुष्य ने क्या देखा था? (प्रश्नवाचक चिह्न कवि की पंक्ति में नहीं है) फिर वह अनुमान या कल्पना करते हैं—सूर्यादय या

18 दिसम्बर 2025

पटना पुस्तक मेला : भर्त्सना के शिल्प में

पटना पुस्तक मेला : भर्त्सना के शिल्प में

मूर्खताओं के उदाहरण से हमारी सदी पटी हुई है और अब मूर्खताएँ हिंसा में बदल गई हैं। यह कहते हुए कोई सुख नहीं होता और न ही कोई चुटकुला सूझता है। व्यंग्यों के आधिक्य के बीच कभी-कभी क्रूर अभिधात्मकता की ओ

17 दिसम्बर 2025

भाभी कॉम्प्लेक्स और कार्ल मार्क्स

भाभी कॉम्प्लेक्स और कार्ल मार्क्स

हिंदी साहित्य में भाभी जिस रूप में उतरी है, उसमें सत्य से अधिक सुहावनापन है। आज भी पुरुष की बहुपत्नीक और स्त्री की बहुपति प्रवृत्तियाँ, जो तहज़ीब के नीचे से अब भी रिसती रहती हैं और साहित्यदानों में द

17 दिसम्बर 2025

दृष्टि का निर्माण : लोक से हाइपर-रियलिटी तक

दृष्टि का निर्माण : लोक से हाइपर-रियलिटी तक

“हर शाम हम सूर्य को धीरे-धीरे क्षितिज के पीछे डूबते हुए देखते हैं। हम जानते हैं कि हमारी पृथ्वी सूर्य से दूर जा रही है। फिर भी हमारा यह ज्ञान और यह वैज्ञानिक व्याख्या, डूबते हुए सूरज को देखने के हमार

15 दिसम्बर 2025

ऑक्सफ़ोर्ड, इलाहाबाद विश्वविद्यालय : कैंपस की कहानियाँ, अँग्रेज़ी संस्कृति और सिनेमा

ऑक्सफ़ोर्ड, इलाहाबाद विश्वविद्यालय : कैंपस की कहानियाँ, अँग्रेज़ी संस्कृति और सिनेमा

“मैं हॉस्पिटल में वेंटिलेटर पर ऑक्सीजन मास्क पहने हुए नहीं मरना चाहता, बल्कि नेचुरल डेथ चाहता हूँ, अपनों के साथ रहते हुए। हॉस्पिटल में मरने से पहले जो थोड़ी-सी जीने की ख़्वाहिश बची है, वह भी मर जाती

11 दिसम्बर 2025

लिखने ने मुझे मेरी याददाशत दी

लिखने ने मुझे मेरी याददाशत दी

मेरे नाना लेखक बनना चाहते थे। वह दसवीं तक पढ़े और फिर बैलों की पूँछ उमेठने लगे। उन्होंने एक उपन्यास लिखा, जिसकी कहानी अब उन्हें भी याद नहीं। हमने मिलकर उसे खोजना चाहा, वह नहीं मिला। पता नहीं वह किसी

10 दिसम्बर 2025

अनुवाद का द्वंद्व : भक्ति-काव्य की सार्वभौमिक अनुगूँजें

अनुवाद का द्वंद्व : भक्ति-काव्य की सार्वभौमिक अनुगूँजें

दिलीप पुरुषोत्तम चित्रे (1938–2009) आधुनिक मराठी साहित्य के प्रमुख कवि, आलोचक, अनुवादक, चित्रकार और फ़िल्मकार थे; जिन्होंने मराठी और अँग्रेज़ी—दोनों भाषाओं में अपनी रचनात्मकता का विस्तार किया। बड़ौदा

04 दिसम्बर 2025

उद्भ्रांत की आत्मकथा : हिंदी साहित्य की अनमोल धरोहर

उद्भ्रांत की आत्मकथा : हिंदी साहित्य की अनमोल धरोहर

उद्भ्रांत हिंदी साहित्य की उस पीढ़ी के प्रतिनिधि कवि हैं, जिन्होंने ‘नई कविता’ के बाद सातवें दशक में छंद में हाथ आज़माते हुए, कविता के अन्य आंदोलनों के बीच अपनी जगह बनाई—यद्यपि बाद में उन्होंने अपने स

28 नवम्बर 2025

कविता के शब्द सत्य का पीछा करते रहते हैं

कविता के शब्द सत्य का पीछा करते रहते हैं

[एक] कवि हृदय का वकील होता है। उसकी वकालत तर्क की झूठी बैसाखियों के सहारे नहीं वरन् सच्चे मनुष्यत्व की नैतिकता और निष्ठा की अदृश्य बहनेवाली अंत:सलिला पर चलती है जिसके होंठों पर सदा इंसानपरस्ती का

22 नवम्बर 2025

लाख काम छोड़कर बिहार जाना चाहिए

लाख काम छोड़कर बिहार जाना चाहिए

(डिसक्लेमर : मैं जन्मना बिहारी, कर्म से झारखंडी, मन से भारतीय और असंभव विश्व नागरिकता प्राप्त करने का आकांक्षी हूँ। इतने पर भी कोई शंका करे तो तुलसीदास के शब्दों में वह मुझसे भी अधिक जड़मति रंका है।)

18 नवम्बर 2025

मार्गरेट एटवुड : मर्द डरते हैं कि औरतें उनका मज़ाक़ उड़ाएँगीं

मार्गरेट एटवुड : मर्द डरते हैं कि औरतें उनका मज़ाक़ उड़ाएँगीं

Men are afraid that women will laugh at them. Women are afraid that men will kill them. मार्गरेट एटवुड का मशहूर जुमला—मर्द डरते हैं कि औरतें उनका मज़ाक़ उड़ाएँगीं; औरतें डरती हैं कि मर्द उन्हें क़त्ल

16 नवम्बर 2025

दिसंबर में होगा कोच्चि–मुज़िरिस बिएनाले का छठा संस्करण

दिसंबर में होगा कोच्चि–मुज़िरिस बिएनाले का छठा संस्करण

भारत की सर्वाधिक प्रतिष्ठित और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त समकालीन कला प्रदर्शनी कोच्चि–मुज़िरिस बिएनाले (Kochi-Muziris Biennale) का छठा संस्करण 12 दिसंबर, 2025 से केरल के ऐतिहासिक समुद्री

13 नवम्बर 2025

इस बार शांतिनिकेतन में होगा ‘संगमन’

इस बार शांतिनिकेतन में होगा ‘संगमन’

वर्ष 1993 में कानपुर से शुरू हुआ रचनात्मक व बौद्धिक हस्तक्षेप के सहकारी उपक्रम ‘संगमन’ का 26वाँ आयोजन देश के विभिन्न राज्यों से गुज़रता हुआ इस बार शांतिनिकेतन (पश्चिम बंगाल) में हो रहा है। तारीख़ें हैं

04 नवम्बर 2025

फ़ादर वालेस : साधु तो चलता भला

फ़ादर वालेस : साधु तो चलता भला

वर्ष 2025 गुजराती साहित्य के इतिहास में एक विशेष वर्ष है—इस वर्ष गुजराती भाषा और संस्कृति के एक विलक्षण साधक, फ़ादर वालेस (Father Carlos González Vallés) की जन्मशती मनाई जा रही है। फ़ादर वालेस का जन्

01 नवम्बर 2025

साहित्यिक लेखन : जुनून या तिजारत

साहित्यिक लेखन : जुनून या तिजारत

कहा गया है कि इंसान दो दुनियाओं में जीता है-अंदरूनी और बाहरी। अंदरूनी दुनिया अध्यात्म की दुनिया होती है जिसे वो किसी तरह की कला जैसे कि साहित्यिक लेखन, नृत्य, संगीत, चित्रकारी, स्थापत्य या मुजस्समे आ

27 अक्तूबर 2025

लिखने का सही समय

लिखने का सही समय

लिखने का सही समय क्या होता है? शायद वही समय—जब भीतर कुछ बेचैन करता है, चुपचाप करवटें बदलता है और शब्द बनकर बाहर आना चाहता है। बचपन में जब पहली बार पेंसिल उठाई थी तो यह नहीं पता था कि उससे करना क्य

25 अक्तूबर 2025

लोलिता के लेखक नाबोकोव साहित्य-शिक्षक के रूप में

लोलिता के लेखक नाबोकोव साहित्य-शिक्षक के रूप में

हमारे यहाँ अनेक लेखक हैं, जो अध्यापन करते हैं। अनेक ऐसे छात्र होंगे, जिन्होंने क्लास में बैठकर उनके लेक्चरों के नोट्स लिए होंगे। परीक्षोपयोगी महत्त्व तो उनका अवश्य होगा—किंतु वह तो उन शिक्षकों का भी

18 अक्तूबर 2025

रपट : ‘अर्थात्’ की शुरुआत

रपट : ‘अर्थात्’ की शुरुआत

देश की राजधानी दिल्ली की हवा अपने पुराने ढर्रे पर लौट चुकी है। अब खाँसते-छींकते लोग अगर सड़क पर अधिक दिखें तो हैरान मत होइये। हैरान इस बात पर भी नहीं होइये कि सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में (अक्टूबर 202