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स्मरण पर बेला

09 जुलाई 2026

मार्जान सतरापी : एक स्त्री और पैग़म्बर बनने का ख़्वाब

मार्जान सतरापी : एक स्त्री और पैग़म्बर बनने का ख़्वाब

एक बात हमेशा से खटकती रही है और शायद आने वाले समय में और भी खटकने लगे, आख़िर क्यों किसी लेखक को सर्वविदित होने के लिए अप

07 जुलाई 2026

तीजनबाई और पंडवानी

तीजनबाई और पंडवानी

आज से बहुत साल पहले की बात है। एक छोटी-सी लड़की थी, सात-आठ बरस की। बारिश का मौसम उसको पसंद नहीं था, इसलिए बारिश के दिनों

06 जुलाई 2026

तीजनबाई : इकतारे पर महाभारत

तीजनबाई : इकतारे पर महाभारत

अवसर था दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ीमल कालेज के वार्षिकोत्सव पल्लव की सांस्कृतिक संध्या का। वहाँ उपस्थित थीं कलाकार प

06 जुलाई 2026

मणि कौल की ‘बादल द्वार’ : कविता को पर्दे पर संभव करने का सलीक़ा

मणि कौल की ‘बादल द्वार’ : कविता को पर्दे पर संभव करने का सलीक़ा

मणि कौल की फ़िल्म ‘बादल द्वार’ उन क्लासिक अप्रतिम फ़िल्मों में से है, जिसे हिंदी सिनेमा के दायरे से बाहर भी अतीव प्रशंसा

25 मई 2026

सुनील दत्त की मानवीय विरासत

सुनील दत्त की मानवीय विरासत

20 अक्तूबर 2001 को दत्त साहब (सुनील दत्त) से उनके ऑफ़िस में मिलने का मौक़ा मिला। शुरुआत में हमारी मुलाक़ात का वक़्त केवल

19 मई 2026

The Last Tenant : इरफ़ान की क़ब्र पर 25 साल पुराना फूल

The Last Tenant : इरफ़ान की क़ब्र पर 25 साल पुराना फूल

अब शादियों के एल्बम नहीं दिखते। आजकल नीले-नीले लिंक होते हैं जो सीधे हम-आपको तस्वीरों के समंदर में पटक देते हैं। लगाइए ग

02 मई 2026

शनिवारेर चिट्ठी : छाया और छायेच्छाएँ

शनिवारेर चिट्ठी : छाया और छायेच्छाएँ

छायालीन यह दृश्य है या एक ठहरा हुआ उच्चारण! जैसे समय ने अपनी जीभ बाहर निकाल शब्द को अधूरा छोड़ दिया हो। क्षितिज पर शह

15 अप्रैल 2026

आशा भोसले : स्वर, छवि और स्वर्णिम दौर की आख़िरी चमक

आशा भोसले : स्वर, छवि और स्वर्णिम दौर की आख़िरी चमक

आशा भोसले में एक चार्म है। वह छवि जो उनको सोचने से बनती है। वह जीवन के उस स्वरूप के अधिक निकट है जो इंसानी सुख-दुख, प्रे

08 अप्रैल 2026

राहुल सांकृत्यायन की विरासत और ज्ञान संरक्षण की चुनौतियाँ

राहुल सांकृत्यायन की विरासत और ज्ञान संरक्षण की चुनौतियाँ

ज्ञान केवल पुस्तकों, पांडुलिपियों और अभिलेखों में सीमित नहीं होता, बल्कि वह एक जीवंत परंपरा है। वह पीढ़ी-दर-पीढ़ी विचार,

17 फरवरी 2026

पत्र : प्रकाश के साक्षी सेबास्टिओं सालगाडो के नाम

पत्र : प्रकाश के साक्षी सेबास्टिओं सालगाडो के नाम

प्रिय सेबास्टिओं, प्रेरणा के अमिट स्रोत शांति और सामंजस्य के दूत विविधता के उपासक, प्रकृति के अद्भुत सहचर आज से

29 जनवरी 2026

हबीब तनवीर : साधारण में असाधारण की खोज

हबीब तनवीर : साधारण में असाधारण की खोज

नाट्य शास्त्र के पहले ही अध्याय में एक श्लोक है जो एक तरह से नाटक की परिभाषा है— योऽयम स्वभावां लोकस्य सुखदुखसमन्वितः

27 जनवरी 2026

नए साल की रात, 'पहल' की विरासत और अजित पुष्कल की स्मृतियाँ

नए साल की रात, 'पहल' की विरासत और अजित पुष्कल की स्मृतियाँ

शाम के सात बज चुके थे और अब इस समय पर लखनऊ के लिए बस पकड़ने का आशय यह होता कि रात के लगभग बारह बजे के आस-पास या उससे थोड

25 जनवरी 2026

पंडित छन्नूलाल मिश्र : तकलीफ़ में गाने से ही सिद्धि मिलती है

पंडित छन्नूलाल मिश्र : तकलीफ़ में गाने से ही सिद्धि मिलती है

अगर हम गा पाते तो गाकर आपका बखान करते महाराज! लेकिन हमारी ज़िंदगी में लय नहीं है उतनी, इसमें खरज ज़्यादा है, ज़िंदगी का रिय

23 जनवरी 2026

ज्ञानरंजन के मनोहर का ‘बहिर्गमन’ उर्फ़ ‘पिता’ को रुमाल की ज़रुरत है...

ज्ञानरंजन के मनोहर का ‘बहिर्गमन’ उर्फ़ ‘पिता’ को रुमाल की ज़रुरत है...

नौ दशक का एक सुदीर्घ और शानदार जीवन जीकर ज्ञानरंजन हमें छोड़ कर चले गए। वह मनोहर की तरह प्रस्थान करते हुए रुमाल हिला रहे

16 जनवरी 2026

विष्णु खरे के इर्द-गिर्द

विष्णु खरे के इर्द-गिर्द

समादृत कवि-आलोचक और कला-प्रशासक अशोक वाजपेयी आज 86वें वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं। उन्हें शुभकामनाएँ देते हुए यहाँ प्रस्त

15 जनवरी 2026

रघुवर प्रसाद और सोनसी की दुनिया का रचयिता

रघुवर प्रसाद और सोनसी की दुनिया का रचयिता

1 जनवरी 2026 को विनोद कुमार शुक्ल 89 वर्ष के हो जाते लेकिन उसके नौ दिन पहले ही वह इस दुनिया से चले गए। हिंदी साहित्य में

12 जनवरी 2026

यह ख़ाली जगह नहीं भरेगी

यह ख़ाली जगह नहीं भरेगी

एक जनवरी को वह जब इस दुनिया में आया था, कड़ाके की ठंड थी। नए साल की सौगात लेकर वह आया था। तब देश आज़ाद भी नहीं था। किसे

07 जनवरी 2026

प्रेम की घर वापसी

प्रेम की घर वापसी

आज, अभी, इस दिन, इस क्षण की लंबान कितनी हो सकती है? इसका एक वाजिब जवाब है—विनोद कुमार शुक्ल के उपन्यास, ‘दीवार में एक खि

01 जनवरी 2026

एक साधक रचनाकार

एक साधक रचनाकार

मैं विनोद कुमार शुक्ल के उपन्यासों का बहुत बड़ा प्रशंसक हूँ। उनके उपन्यासों ने जीवन को नए ढंग से देखना सिखाया है। यथार्थ

31 दिसम्बर 2025

वाक्य-विनोद-विन्यास-शुक्ल

वाक्य-विनोद-विन्यास-शुक्ल

वाक्य-विनोद-विन्यास-शुक्ल—मतलब विनोद कुमार शुक्ल का वाक्य-विन्यास। हालाँकि विनोद कुमार शुक्ल ख़ुद शायद ही कभी इस तरह की

30 दिसम्बर 2025

वह भाषा के ईश्वर हैं

वह भाषा के ईश्वर हैं

विनोद कुमार शुक्ल ने जैसी कविता लिखी है, वैसी किसी और ने नहीं लिखी है। यहाँ मुक्तिबोध की बात करें तो उनकी नक़ल संभव नहीं

29 दिसम्बर 2025

प्रत्यक्ष पृथ्वी की चाहना

प्रत्यक्ष पृथ्वी की चाहना

जाते-जाते कुछ भी नहीं बचेगा जब तब सब कुछ पीछे बचा रहेगा और कुछ भी नहीं में सब कुछ होना बचा रहेगा विनोद कुमार शुक्ल

28 दिसम्बर 2025

विडंबना, विस्मय और वक्तव्य

विडंबना, विस्मय और वक्तव्य

विनोद कुमार शुक्ल के बारे में मुझे एक मर्मस्पर्शी बात यह लगती है कि वह हमेशा छोटी जगहों पर रहे। जो जगहें बड़ी, केंद्रीय

27 दिसम्बर 2025

कितना बहुत है पर...

कितना बहुत है पर...

कितना बहुत है परंतु अतिरिक्त एक भी नहीं एक पेड़ में कितनी सारी पत्तियाँ अतिरिक्त एक पत्ती नहीं एक कोंपल नहीं अतिरिक्

26 दिसम्बर 2025

इसे ‘विनोदकुमारशुक्लपन’ कहूँगा

इसे ‘विनोदकुमारशुक्लपन’ कहूँगा

यह एक विरल संयोग है कि विनोद कुमार शुक्ल जितने बड़े कवि हैं, उतने ही बड़े कथाकार भी हैं। यह बात हिंदी के बहुत कम लेखकों

25 दिसम्बर 2025

सामान्य जीवन-प्रसंगों का कहानीकार

सामान्य जीवन-प्रसंगों का कहानीकार

विनोद कुमार शुक्ल के उपन्यासों वाली अपेक्षाओं के साथ उनकी कहानियाँ पढ़ने पर किसी को भी कुछ निराशा हो सकती है। कहानियाँ व

23 दिसम्बर 2025

‘नहीं होने’ में क्या देखते हैं

‘नहीं होने’ में क्या देखते हैं

विनोद कुमार शुक्ल की एक कविता है—‘आदिम रंग’। पहली पंक्ति प्रश्नवाचक है—आदिम रंग आदिम मनुष्य ने क्या देखा था? (प्रश्नवाचक

20 दिसम्बर 2025

बालमुकुंद गुप्त के भूले-बिसरे साहित्यिक घराने की ओर

बालमुकुंद गुप्त के भूले-बिसरे साहित्यिक घराने की ओर

कल रात बारिश और आँधी आई थी तो मौसम ने भी प्रतिदिन की आदत को छोड़ते हुए हम पर रहम किया और सूर्य देवता काफ़ी देर तक ग़ायब

19 दिसम्बर 2025

चार नाम, एक इंक़लाब

चार नाम, एक इंक़लाब

रेल की पटरियाँ दूर तक फैली थीं। प्लेटफ़ॉर्म की उखड़ी हुई खपरैल समय की मार झेलती हुई-सी लगती थीं। आज से ठीक सौ साल पहले ल

16 दिसम्बर 2025

इरफ़ान एक नया सूरज था जो बहुत जल्द अस्त हो गया

इरफ़ान एक नया सूरज था जो बहुत जल्द अस्त हो गया

इरफ़ान ख़ान। शिद्दत। उस शिद्दत की ज़िम्मेदारी। इस ज़िम्मेदारी की ख़ामोश अच्छाई। उसकी ख़ामोश अच्छाई की बोलती निगाहें। अगर

10 दिसम्बर 2025

अनुवाद का द्वंद्व : भक्ति-काव्य की सार्वभौमिक अनुगूँजें

अनुवाद का द्वंद्व : भक्ति-काव्य की सार्वभौमिक अनुगूँजें

दिलीप पुरुषोत्तम चित्रे (1938–2009) आधुनिक मराठी साहित्य के प्रमुख कवि, आलोचक, अनुवादक, चित्रकार और फ़िल्मकार थे; जिन्हो

02 दिसम्बर 2025

हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत का शब्दकोश : पंडित अमरनाथ की विरासत को नया आयाम

हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत का शब्दकोश : पंडित अमरनाथ की विरासत को नया आयाम

26 नवंबर, 2025 को नई दिल्ली में शास्त्रीय संगीत गुरु पंडित अमरनाथ द्वारा रचित ‘हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत का शब्दकोश’

02 दिसम्बर 2025

धर्मेंद्र : सबसे सरल सिने-अध्याय

धर्मेंद्र : सबसे सरल सिने-अध्याय

धर्मेंद्र के निधन पर एक व्यापक सामूहिक क्षति का एहसास हमें न्यूज़ चैनल्स पर दिखाई गईं ख़बरों और सोशल मीडिया पर दी गईं श्

24 नवम्बर 2025

स्मरण मुक्तिबोध : एक अंतःकथा

स्मरण मुक्तिबोध : एक अंतःकथा

बीते 13 नवंबर मेरे प्रिय कवियों में से एक गजानन माधव मुक्तिबोध की जन्मतिथि थी। इसके उपलक्ष्य में ‘हिंदी एवं आधुनिक भारती

13 नवम्बर 2025

जन्मतिथि विशेष : मुक्तिबोध : आत्मा के मित्र को स्नेहांजलि

जन्मतिथि विशेष : मुक्तिबोध : आत्मा के मित्र को स्नेहांजलि

यह सभा एक बंधु के निधन पर एक कवि के अपने रचना-क्षेत्र हो उठ जाने पर, दुःख प्रकट करने और शोक-संतप्त परिवार को हम सबकी संव

04 नवम्बर 2025

फ़ादर वालेस : साधु तो चलता भला

फ़ादर वालेस : साधु तो चलता भला

वर्ष 2025 गुजराती साहित्य के इतिहास में एक विशेष वर्ष है—इस वर्ष गुजराती भाषा और संस्कृति के एक विलक्षण साधक, फ़ादर वाले

28 अक्तूबर 2025

शारदा सिन्हा स्मृति शेष नहीं, स्मृति अशेष हैं

शारदा सिन्हा स्मृति शेष नहीं, स्मृति अशेष हैं

सो रहो मौत के पहलू में ‘फ़राज़’ नींद किस वक़्त न जाने आए और फिर वह सो गईं—चिर निद्रा में। यह 5 नवंबर 2024 की रात थ

28 अक्तूबर 2025

भारतेंदु मिश्र : तरफराति पिंजरा है काठ कै चिरइया

भारतेंदु मिश्र : तरफराति पिंजरा है काठ कै चिरइया

कितना दारुण है यह लिखना—स्वर्गीय भारतेंदु मिश्र। मैं उन्हें दद्दा कहता रहा हूँ। अब दद्दा स्मृतियों में रहेंगे, उनकी आत्म

22 अक्तूबर 2025

असरानी के लिए दस कविताएँ

असरानी के लिए दस कविताएँ

असरानी एक असरानी के निधन पर हमें कितना ग़मगीन होना चाहिए राजेश खन्ना के निधन से ज़्यादा या राजेश खन्ना के निधन

21 अक्तूबर 2025

असमाप्य अनुष्ठान : रतन थियम का रंगकर्म

असमाप्य अनुष्ठान : रतन थियम का रंगकर्म

नाटक शुरू होने के पहले की थर्ड बेल बजती है। नाट्यशाला का अँधेरा गाढ़ा होते-होते किसी प्रागैतिहासिक, चंद्रमा विहीन रात्रि

07 अक्तूबर 2025

रविशंकर उपाध्याय स्मृति युवा कविता पुरस्कार-2026 के लिए प्रविष्टियाँ आमंत्रित

रविशंकर उपाध्याय स्मृति युवा कविता पुरस्कार-2026 के लिए प्रविष्टियाँ आमंत्रित

रविशंकर उपाध्याय स्मृति संस्थान ने कवि रविशंकर उपाध्याय की स्मृति में प्रत्येक वर्ष दिए जाने वाले पुरस्कार—‘रविशंकर उपाध

22 सितम्बर 2025

ज़ुबिन गार्ग : समय जब ठहर जाए...

ज़ुबिन गार्ग : समय जब ठहर जाए...

कोई मनुष्य कितना प्रिय हो सकता है, जीते जी इसका सही अंदाज़ा लगाना कठिन होता है। अपने जीवन काल में कई महानुभावों को इस संस

18 सितम्बर 2025

इलाहाबाद तुम बहुत याद आते हो-4

इलाहाबाद तुम बहुत याद आते हो-4

तीसरी कड़ी से आगे... आगे डायोसिस चर्च ऑफ़ लखनऊ के प्रभारी का आवास है। मैं जब छात्रावास में रहता था। तब एक बार ऐसा हुआ

12 सितम्बर 2025

विभूतिभूषण बंद्योपाध्याय : एक अद्वितीय साहित्यकार

विभूतिभूषण बंद्योपाध्याय : एक अद्वितीय साहित्यकार

बांग्ला साहित्य में प्रकृति, सौंदर्य, निसर्ग और ग्रामीण जीवन को यदि किसी ने सबसे पूर्ण रूप से उभारा है, तो वह विभूतिभूषण

11 सितम्बर 2025

भारत भवन और ‘अँधेरे में’ मुक्तिबोध की पांडुलिपियाँ

भारत भवन और ‘अँधेरे में’ मुक्तिबोध की पांडुलिपियाँ

जब हमने तय किया कि भारत भवन जाएँगे तो दिन शाम की कगार पर पहुँच चुका था। ऊँचे किनारे पर पहुँचकर सूरज को अब ताल में ढलना थ

11 सितम्बर 2025

‘मुक्तिबोध’ की परम अभिव्यक्ति ‘विद्रोही’

‘मुक्तिबोध’ की परम अभिव्यक्ति ‘विद्रोही’

मुक्तिबोध का रहस्यमय व्यक्ति जो उनके परिपूर्ण का आविर्भाव है, वह रमाशंकर यादव ‘विद्रोही’ है। मुक्तिबोध के काव्य में बड़ी

28 अगस्त 2025

30-31 अगस्त को दिल्ली में होगा ‘एक है अमृता’

30-31 अगस्त को दिल्ली में होगा ‘एक है अमृता’

कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता कहीं ज़मीन कहीं आसमाँ नहीं मिलता कहते हैं अगर प्यार इंसान की शक्ल लेता, तो उसका

25 अगस्त 2025

28 अगस्त को अजमेर में होगा ‘लहर’-संपादक प्रकाश जैन का जन्मशती-आयोजन

28 अगस्त को अजमेर में होगा ‘लहर’-संपादक प्रकाश जैन का जन्मशती-आयोजन

अजमेर की साहित्यिक धरती ने अनेक नामचीन हस्तियों को जन्म दिया है। इन्हीं में से एक हैं साहित्यकार और लघु पत्रिका लहर के स

21 अगस्त 2025

काग़ज़ी है पैरहन : इस्मत चुग़ताई के बनने की दास्तान

काग़ज़ी है पैरहन : इस्मत चुग़ताई के बनने की दास्तान

उर्दू गद्य साहित्य की बेहतरीन और बहुचर्चित हस्ताक्षर इस्मत चुग़ताई की आत्मकथा है—‘काग़ज़ी है पैरहन’। यह किताब इस्मत चुग़ताई

07 अगस्त 2025

अंतिम शय्या पर रवींद्रनाथ

अंतिम शय्या पर रवींद्रनाथ

श्रावण-मास! बारिश की झरझर में मानो मन का रुदन मिला हो। शाल-पत्तों के बीच से टपक रही हैं—आकाश-अश्रुओं की बूँदें। उनका मन