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संघर्ष पर बेला

03 अगस्त 2026

निम्स दाई! हिमाल आपको बुला रहे हैं...

निम्स दाई! हिमाल आपको बुला रहे हैं...

Giving up is not in the blood, Sir! Not in the blood. — Nirmal ‘Nimsdai’ Purja 30 जुलाई 2026 | दिल्ली/काराकोरम उस

29 जून 2026

कहानी : लौट आएँगे

कहानी : लौट आएँगे

विवाह के इन दस वर्षों के दरमियान घर के ख़र्चों के साथ अब शब्दों में भी कटौती होने लगी है। राहुल के आने की आहट होती है, प

18 मई 2026

देह की देहरी पर परिवार और समाज का पहरा

देह की देहरी पर परिवार और समाज का पहरा

जया जादवानी अत्यंत संवेदनशील कथाकार हैं। मानवीय रिश्तों की बारीकियों, जटिलताओं और गहराई को उन्होंने अपनी कहानियों में बह

15 मई 2026

एक मछली पकड़ने का काँटा, एक खुली आँख, स्त्रीवादी दृष्टि और लेखन

एक मछली पकड़ने का काँटा, एक खुली आँख, स्त्रीवादी दृष्टि और लेखन

तुम्हारा मेरा साथ  जैसे आँख में धँसा कोई काँटा  एक मछली पकड़ने का काँटा  एक खुली आँख कनाडियन कवि-लेखिका मारग्रेट एट

06 मई 2026

जीवन से हारते बच्चे : दबाव, डर और टूटती उम्मीदें

जीवन से हारते बच्चे : दबाव, डर और टूटती उम्मीदें

दसवीं, बारहवीं और प्रतियोगी परीक्षाओं के परिणाम घोषित हो चुके हैं। नतीजों का मौसम ख़ुशियों के बजाय अब डर पैदा करने लगा ह

23 अप्रैल 2026

नशे से ‘नशा मुक्ति केंद्र’ तक का सफ़र

नशे से ‘नशा मुक्ति केंद्र’ तक का सफ़र

नशे से ‘नशा मुक्ति केंद्र’ तक का सफ़र सिर्फ़ दूरी का नहीं होता; यह एक ऐसे अँधेरे से गुज़रने जैसा होता है, जहाँ हर क़दम पर

17 अप्रैल 2026

मेरी रचनात्मकता, मेरे द्वंद्व

मेरी रचनात्मकता, मेरे द्वंद्व

कहते हैं कला आत्मा का फूल होती है। हाँ होती है, पर यह फूल किसी सरोवर में नहीं, किसी दलदल में, किसी कीचड़ में ही खिलता है

06 अप्रैल 2026

मेरे रचनात्मक द्वंद्व

मेरे रचनात्मक द्वंद्व

मैं एक लेखक हूँ, यह कहने के लिए कितने उतार-चढ़ावों का सामना करना पड़ा है। बतौर लेखक यहाँ या कहीं भी, खड़े होने के लिए मै

03 अप्रैल 2026

मेरी रचनात्मकता और मेरे द्वंद्व

मेरी रचनात्मकता और मेरे द्वंद्व

बरसों पहले मैंने एक लेख लिखा था, लगभग इसी मामले में कुछ सोचा था कि रचनाकार की अनुभूति और जो  जीवन वह जीता है और जो कुछ भ

03 अप्रैल 2026

कथा अनिल गुरव और सचिन तेंदुलकर की

कथा अनिल गुरव और सचिन तेंदुलकर की

दुनिया के नायक जितना मनोरंजन करते हैं, उतने बड़े होते हैं। बाक़ी सब जो अस्ल में दुनिया बनाते हैं और इसमें रहते हैं—वे मज

28 मार्च 2026

आज है ‘हिन्दवी’ का विशेष आयोजन ‘अनंता’

आज है ‘हिन्दवी’ का विशेष आयोजन ‘अनंता’

हिंदी साहित्य की दुनिया में स्त्री-स्वर हमेशा से मौजूद रहा है, बस उसे पहचानने और सुनने की दृष्टि समय-समय पर बदलती रही है

27 मार्च 2026

भारतीय रंग-संस्थाओं पर मँडराता मौन संकट

भारतीय रंग-संस्थाओं पर मँडराता मौन संकट

इतिहास की कुछ घटनाएँ ऐसी होती हैं जिन्हें लोग उसी समय पहचान लेते हैं। वे स्पष्ट होती हैं और उनका असर तुरत दिखाई देने लगत

13 मार्च 2026

अस्सी : ‘तय करो, इसके नीचे हम नहीं फिसलेंगे’

अस्सी : ‘तय करो, इसके नीचे हम नहीं फिसलेंगे’

‘अस्सी’ आपको झकझोरती है, असहज करती है। वह ऐसे प्रश्न सामने रखती है, जिन्हें हम वर्षों से टालते आए हैं। वह हमें हमारे ही

04 फरवरी 2026

कहानी : बूढ़ा बच्चा

कहानी : बूढ़ा बच्चा

जाड़े में हैंडिल जितना चलाओ, नलके से उतना गरम पानी आता है। सितली फुआ दुकान जाने से पहले लोटा भरकर ताज़ा पानी सूर्य देवता

28 जनवरी 2026

पेड़ों पर चढ़ने वाली स्त्रियों का संसार

पेड़ों पर चढ़ने वाली स्त्रियों का संसार

विशाल हिमालय की गोद में बसे दो देश—भारत और नेपाल एक-दूसरे के पड़ोसी हैं और दोनों साथ में 1850 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्री

22 जनवरी 2026

नॉस्टेल्जिक दौर में माँ (स्त्री) की भूमिका

नॉस्टेल्जिक दौर में माँ (स्त्री) की भूमिका

प्रस्तुत लेख ‘हिन्दवी’ पर प्रकाशित ‘बेला’—‘सदी की आख़िरी माँएँ’, प्रणव मिश्र तेजस के लेख की प्रतिक्रिया में लिखा गया है।

11 जनवरी 2026

किरीस का गाना सुनेगा! ले बेटा...

किरीस का गाना सुनेगा! ले बेटा...

21वीं सदी का एक चौथाई हिस्सा समाप्त हो चुका है। सरकारी आँकड़ों की मानें तो हम आधुनिकता के आगे निकल चुके हैं। यानी उत्तरा

04 जनवरी 2026

स्त्री और माँ

स्त्री और माँ

प्रस्तुत लेख ‘हिन्दवी’ पर प्रकाशित ‘बेला’—‘सदी की आख़िरी माँएँ’, प्रणव मिश्र तेजस के लेख की प्रतिक्रिया में लिखा गया है। 

23 दिसम्बर 2025

कहानी : दाहिना हाथ

कहानी : दाहिना हाथ

फ़रवरी का महीना बीते कुछ ही दिन हुए। अभी ठंड मौसम से गई नहीं। रात के अँधेरे में मोहल्ले के घरों की बत्तियाँ बूझा दी गईं।

21 दिसम्बर 2025

कहानी : नदी का विद्रोह

कहानी : नदी का विद्रोह

चार पैंतालीस की पैसेंजर ट्रेन रवाना कर नदेरचाँद ने नए सहकारी को बुलाकर कहा—मैं चला जी!  नए सहकारी ने एक बार मेघ से ढँ

19 दिसम्बर 2025

बाग़ी मन की बातें : एक पुरुष की देह को लेकर

बाग़ी मन की बातें : एक पुरुष की देह को लेकर

बहुत याद करने पर भी और बहुत मूड़ मारने पर भी पिछले दिनों ठीक-ठीक यह याद नहीं आया कि उस दिन हमारे घर में कौन-सा आयोजन था।

16 दिसम्बर 2025

लॉकडाउन डायरी : सत्ता मेरे मज़े लेती है और मैं अपने से कमज़ोर लोगों के मज़े लेता हूँ...

लॉकडाउन डायरी : सत्ता मेरे मज़े लेती है और मैं अपने से कमज़ोर लोगों के मज़े लेता हूँ...

रात्रि की भयावहता में ही रात्रि का सौंदर्य है 25 मार्च 2020 पूर्व दिशा की ओर से खेरों की झाड़ियों में से उठती निशा

27 नवम्बर 2025

गाँव-गिराँव से विश्वविद्यालय की ओर

गाँव-गिराँव से विश्वविद्यालय की ओर

वैकल्पिक प्रश्न पत्र—हबीब तनवीर—की क्लास ख़त्म हुई। कैंटीन में जाकर खाना खाया और 7 नंबर गेट से बाहर आकर, सड़क पार करके 8

24 नवम्बर 2025

स्मरण मुक्तिबोध : एक अंतःकथा

स्मरण मुक्तिबोध : एक अंतःकथा

बीते 13 नवंबर मेरे प्रिय कवियों में से एक गजानन माधव मुक्तिबोध की जन्मतिथि थी। इसके उपलक्ष्य में ‘हिंदी एवं आधुनिक भारती

14 नवम्बर 2025

अँगूठा मेहनत कर रहा है, दिमाग़ आराम!

अँगूठा मेहनत कर रहा है, दिमाग़ आराम!

सड़क के किनारे फ़ुटपाथ पर लेटा बूढ़ा व्यक्ति लगातार खाँस रहा है। बग़ल में बैठा जवान बेटा हथेली पर खैनी ठोंकते हुए खाना ब

11 नवम्बर 2025

पाप से अछूती देवी नहीं, करुणा से पवित्र हुई पापिनी!

पाप से अछूती देवी नहीं, करुणा से पवित्र हुई पापिनी!

सोन्या! वह जैसे ‘क्राइम एंड पनिशमेंट’ के उजाड़ नैतिक दृश्य से एक विसंगति रखती है। वह किसी आदर्श प्रतिमा की तरह नहीं गढ़

07 नवम्बर 2025

कहानी : रिपोर्टर

कहानी : रिपोर्टर

अक्टूबर आ गया। मौसम करवटें लेने लगा है। प्रभु अपना चश्मा खोज रहे हैं। रात में कहीं रखा गया था। चाय उबलकर देगची से बाहर न

07 नवम्बर 2025

कामू-कमला-सिसिफ़स

कामू-कमला-सिसिफ़स

“The struggle itself toward the heights is enough to fill a man’s heart. One must imagine Sisyphus happy.” —अल्बैर का

19 अक्तूबर 2025

शरणार्थी शिविरों में समाए तिब्बती जीवन का दुख

शरणार्थी शिविरों में समाए तिब्बती जीवन का दुख

सेयरिंग यांगजोम लामा तिब्बती लेखक हैं। ‘वी मैज़र द अर्थ विथ ऑर बॉडिज़’ उनका पहला उपन्यास है। उनका जन्म और पालन-पोषण नेपा

10 अक्तूबर 2025

कहानी : सुरमेदानी

कहानी : सुरमेदानी

“माँ मरी नहीं थी। वो मेरी उन तमाम प्रेमिकाओं में ज़िंदा हुई, जिनसे मैंने प्रेम किया।” जानते हो बीकानेर में उस रात की

17 सितम्बर 2025

चंद्रशेखर आज़ाद की डायरी

चंद्रशेखर आज़ाद की डायरी

[1925-26 का दौर था। काकोरी कांड के बाद हुई धड़-पकड़ में, अधिकांश क्रांतिकारी अँग्रेज़ों की गिरफ़्त में आ चुके थे। चंद्रशेखर

11 सितम्बर 2025

भारत भवन और ‘अँधेरे में’ मुक्तिबोध की पांडुलिपियाँ

भारत भवन और ‘अँधेरे में’ मुक्तिबोध की पांडुलिपियाँ

जब हमने तय किया कि भारत भवन जाएँगे तो दिन शाम की कगार पर पहुँच चुका था। ऊँचे किनारे पर पहुँचकर सूरज को अब ताल में ढलना थ

11 सितम्बर 2025

‘मुक्तिबोध’ की परम अभिव्यक्ति ‘विद्रोही’

‘मुक्तिबोध’ की परम अभिव्यक्ति ‘विद्रोही’

मुक्तिबोध का रहस्यमय व्यक्ति जो उनके परिपूर्ण का आविर्भाव है, वह रमाशंकर यादव ‘विद्रोही’ है। मुक्तिबोध के काव्य में बड़ी

10 सितम्बर 2025

ज़ेन ज़ी का पॉलिटिकल एडवेंचर : नागरिक होने का स्वाद

ज़ेन ज़ी का पॉलिटिकल एडवेंचर : नागरिक होने का स्वाद

जय हो! जग में चले जहाँ भी, नमन पुनीत अनल को। जिस नर में भी बसे हमारा नाम, तेज को, बल को। —दिनकर, रश्मिरथी | प्रथम सर

04 सितम्बर 2025

कुत्ते आदमी की तरह नहीं रोते थे, आदमी ही कुत्तों की तरह रोते थे

कुत्ते आदमी की तरह नहीं रोते थे, आदमी ही कुत्तों की तरह रोते थे

मैं बस में बैठा देख रहा था कि सारे लोग धीरे-धीरे जाग रहे थे। बड़ी अदालत ने राजधानी की सड़कों पर से आवारा कुत्तों को शहर

25 अगस्त 2025

कहानी : मसअला फूल का है

कहानी : मसअला फूल का है

भूख देखी है आपने? भूख वह भी किसी की आँखों में! भूख भरी आँखों को देख या तो सिहरन होती है या विस्मय... इस भूख को तृप्ति कै

23 अगस्त 2025

एक स्त्री : माँ भी, पिता भी

एक स्त्री : माँ भी, पिता भी

पिता की अनुपस्थिति में पिता बनती एक स्त्री आज मैं अपने पिता के बारे में नहीं, अपने बच्चे के पिता के बारे में बात करना

14 अगस्त 2025

जिम जाने वाला लेखक

जिम जाने वाला लेखक

यह एक भटका हुआ निबंध है, इसको अपने रिस्क पर गंभीरता से लें, मुझे भी गंभीरता से अपने रिस्क पर लें। मैं बहुत दोग़ला हूँ!

08 जुलाई 2025

काँदनागीत : आँसुओं का गीत

काँदनागीत : आँसुओं का गीत

“स्त्रियों की बात सुनने का समय किसके पास है? स्त्रियाँ भी स्त्रियों की बात नहीं सुनना चाहतीं—ख़ासकर तब, जब वह उनके दुख-दर

30 जून 2025

यह ‘टेम्बा’ का साल है, यह उम्मीद का साल है

यह ‘टेम्बा’ का साल है, यह उम्मीद का साल है

साल 1999, एकदिवसीय (वनडे) क्रिकेट वर्ल्ड कप का सेमीफ़ाइनल मैच। फ़ॉर्म में चल रहे ऑस्ट्रेलियाई कप्तान स्टीव वॉ का कैच दक्षि

26 जून 2025

नायक खोजते अ-नायक हो तुम

नायक खोजते अ-नायक हो तुम

उल्टी धार के लिए शुक्रगुज़ार होना चाहिए। परेशानियों का शुक्रिया कहना चाहिए। अधम मनुष्यों से दूर रहना चाहिए। कविता में सू

10 जून 2025

‘जब सोशल मीडिया नहीं था, हिंदी कविता अधिक ब्राह्मण थी’

‘जब सोशल मीडिया नहीं था, हिंदी कविता अधिक ब्राह्मण थी’

वर्ष 2018 में ‘सदानीरा’ पर आपकी कविता-पंक्ति पढ़ी थी—‘यह कवियों के काम पर लौटने का समय है’। इस बीच आप फ़्रांस से लौटकर आ

05 जून 2025

माही मार रहा है

माही मार रहा है

आईपीएल ख़त्म हो गया। आख़िरकार ‘आरसीबी’ [रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु] ने अपना पहला खिताब जीत ही लिया। विराट कोहली का अठारह साल

31 मई 2025

बीएड वाली लड़कियाँ

बीएड वाली लड़कियाँ

ट्रेन की खिड़कियों से आ रही चीनी मिल की बदबू हमें रोमांचित कर रही थी। आधुनिक दुनिया की आधुनिक वनस्पतियों की कृत्रिम सुगंध

30 मई 2025

एक कमरे का सपना

एक कमरे का सपना

एक कमरे का सपना देखते हुए हमें कितना कुछ छोड़ना पड़ता है! मेरी दादी अक्सर उदास मन से ये बातें कहा करती थीं। मैं तब छो

21 मई 2025

बानू मुश्ताक़ की ‘हार्ट लैंप’ को अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार

बानू मुश्ताक़ की ‘हार्ट लैंप’ को अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार

इस वर्ष का अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार भारतीय लेखिका बानू मुश्ताक़ के कथा संकलन ‘हार्ट लैंप’ को मिला है। बानू मुश्ताक़ कन

01 मई 2025

यह ‘जल तू जलाल तू’ फ़िल्म की समीक्षा नहीं है

यह ‘जल तू जलाल तू’ फ़िल्म की समीक्षा नहीं है

‘‘एक ज़माने पहले की बात है’’, लेकिन वो कौन-सी बात है जिसके बदलने से ज़माना बदल जाता है? ज़माना, जब कॉटन के साथ पॉलिस्टर म

19 अप्रैल 2025

दो दीमकें लो, एक पंख दो

दो दीमकें लो, एक पंख दो

मैं आभार व्यक्त करना चाहता हूँ, इस कार्यक्रम के आयोजकों और नियामकों का जिन्होंने मुझे आपके रूबरू होने का, कुछ बातें कर प

05 अप्रैल 2025

शोक स्थायी है

शोक स्थायी है

मैं कितना अपढ़ और अहंकारी हुआ जाता हूँ, इसका भान भी पढ़ने और जीने से ही आता है। आजकल ऐसा लगता है कि मैं अपने आप को ही

26 मार्च 2025

प्रेम, लेखन, परिवार, मोह की 'एक कहानी यह भी'

प्रेम, लेखन, परिवार, मोह की 'एक कहानी यह भी'

साल 2006 में प्रकाशित ‘एक कहानी यह भी’ मन्नू भंडारी की प्रसिद्ध आत्मकथा है, लेकिन मन्नू भंडारी इसे आत्मकथा नहीं मानती थी

हिन्दवी उत्सव 2026

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