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C/O बंगाल पर बेला

27 अक्तूबर 2026

C/O बंगाल : नोबेल, बांग्ला और विश्वयोग

C/O बंगाल : नोबेल, बांग्ला और विश्वयोग

विश्व के सर्वोच्च सम्मानों में शुमार नोबेल पुरस्कार के इतिहास में जब कोलकाता के पदचिह्न तलाशते हैं, तो इतिहास का एक दिलचस्प अध्याय खुलने लगता है। सर रोनाल्ड रॉस, रवींद्रनाथ ठाकुर, चंद्रशेखर वेंकट रमन

20 अक्तूबर 2026

C/O बंगाल : विजय का उत्सव, पराजय की स्मृति

C/O बंगाल : विजय का उत्सव, पराजय की स्मृति

कुछ ही देर में नीलकंठ पक्षी नीले पंख फैलाकर उड़ जाएगा। वह कैलाश में महादेव के पास जाएगा और संदेश पहुँचा देगा, “देवी दुर्गा लौट रही हैं।” ढाक की थाप तीव्र हो उठी है। हवा में सिंदूर उड़ रहा है। कहीं

13 अक्तूबर 2026

C/O बंगाल : देवी से बेटी तक : आगमनी-विजया गीतों में मानवीय दुर्गा का जन्म

C/O बंगाल : देवी से बेटी तक : आगमनी-विजया गीतों में मानवीय दुर्गा का जन्म

गिरि, इस बार मेरी उमा आए तो अब उमा को नहीं भेजूँगी, मुझे कहकर लोग चाहे बुरा कहें, किसी की बात नहीं सुनूँगी। यदि आकर भोला [शिव] उमा को ले जाने की बात कहे, इस बार माँ-बेटी मिलकर करूँगी झगड़ा,

06 अक्तूबर 2026

C/O बंगाल : गुरुदेव और महात्मा

C/O बंगाल : गुरुदेव और महात्मा

“लोग तुमसे तरह-तरह के अजीब सवाल करते हैं। कोई तुम्हें चिढ़ाता भी है। तुम भी उन सबके जवाब देते हो। संन्यासी की तरह रहते हो तुम। आख़िर इन सबको कैसे सँभाल लेते हो? ये सब अँग्रेज़ी शिक्षा का परिणाम है। तु

29 सितम्बर 2026

C/O बंगाल : नक्सल आंदोलन : बांग्ला-कविता जब सड़क पर उतर आई

C/O बंगाल : नक्सल आंदोलन : बांग्ला-कविता जब सड़क पर उतर आई

सन् 1971, 5 अगस्त... भोर की रोशनी अभी पूरी तरह फूटी नहीं थी। वह रात और सुबह के बीच का एक धुँधला समय था। इस आधे अँधेरे में ही बंगाल के महानायक उत्तम कुमार सुबह की सैर कर रहे थे। यह उनकी रोज़ की आदत

22 सितम्बर 2026

C/O बंगाल : केतकी कुशारी डायसन के रवींद्रनाथ

C/O बंगाल : केतकी कुशारी डायसन के रवींद्रनाथ

केतकी कुशारी डायसन [26 जून 1940 –11 सितंबर 2026] चली गईं। प्रस्थान विधिनिर्धारित है। इसे स्वीकार करने के अतिरिक्त हमारे पास कोई दूसरा उपाय नहीं। लेकिन एक बंगाली के रूप में हमें केतकी कुशारी डायसन जैस

15 सितम्बर 2026

C/O बंगाल : शरतचंद्र के दिन

C/O बंगाल : शरतचंद्र के दिन

“मेरी विद्या-बुद्धि कुछ भी नहीं थी। बहुत दरिद्रता में दिन कटे हैं। बीस रुपये के अभाव में मैं परीक्षा में बैठने तक से वंचित रह गया था। ऐसे दिन भी आए, जब भगवान् से प्रार्थना करता था—‘हे भगवान्, कुछ दिन