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बहन पर बेला

अपनी उपस्थिति-अनुपस्थिति

में घर में हमेशा दर्ज रहती बहनें हिंदी कविता का आर्द्र विषय रही हैं। यहाँ प्रस्तुत है—बहन विषयक कविताओं से एक चयन।

26 अप्रैल 2026

रविवासरीय 4.0 : मेरी बहन की कविताएँ, एक प्लेलिस्ट की याद और थोड़ा-सा कानपुर

रविवासरीय 4.0 : मेरी बहन की कविताएँ, एक प्लेलिस्ट की याद और थोड़ा-सा कानपुर

• एक बंद घर में प्रतीक्षा भरी होती है। एक प्रतीक्षा जिसमें इच्छा नहीं होती। डोरबेल बजती और बजती और बजती ही रहती है। इस पर वस्तुएँ कैसे प्रतिक्रिया करती हैं, इस पर गंध कहाँ तक जा सकती है, इस पर मनुष्य

11 अक्तूबर 2024

रसोई के ज़रिए संघर्ष, मुक्ति और प्रेम का वितान रचता उपन्यास

रसोई के ज़रिए संघर्ष, मुक्ति और प्रेम का वितान रचता उपन्यास

किताबें पढ़ने की यात्रा, मुझे उन्हें लिखने से कम रोमांचक नहीं लगती। ख़ासकर किताब अगर ऐसी हो कि तीन बजे देर रात भी—जब तक कि वह पूरी नहीं हो जाए—जगाए रखे, इस तरह की किताब से जुड़ी हर चीज़ स्मृति में अटक ज

19 अगस्त 2024

जो रेखाएँ न कह सकेंगी

जो रेखाएँ न कह सकेंगी

एक युग बीत जाने पर भी मेरी स्मृति से एक घटा भरी अश्रुमुखी सावनी पूर्णिमा की रेखाएँ नहीं मिट सकी हैं। उन रेखाओं के उजले रंग न जाने किस व्यथा से गीले हैं कि अब तक सूख भी नहीं पाए—उड़ना तो दूर की बात है