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संबंध पर बेला

14 जुलाई 2026

मेरे अब्बा

मेरे अब्बा

उर्दू के मशहूर कहानीकार राजेंद्र सिंह बेदी ने अपनी एक कहानी ‘सिर्फ़ एक सिगरेट’ में लिखा है कि दुनिया के हर बेटे के दिल मे

01 जुलाई 2026

कहानी : काजल की कोठरी

कहानी : काजल की कोठरी

दिन के सवा ग्यारह बज रहे हैं और कमरे में गहरा अँधेरा छाया हुआ है। पर्दे गिराए हुए, दो-दो खिड़कियाँ लेकिन दोनों बंद। फ़र्श

29 जून 2026

कहानी : लौट आएँगे

कहानी : लौट आएँगे

विवाह के इन दस वर्षों के दरमियान घर के ख़र्चों के साथ अब शब्दों में भी कटौती होने लगी है। राहुल के आने की आहट होती है, प

27 मई 2026

शंखनाद : मूर्खताएँ प्रेम में होने की अनन्य कसौटी हैं

शंखनाद : मूर्खताएँ प्रेम में होने की अनन्य कसौटी हैं

कभी-कभी मैं विधाता की मनुष्य के रूप में कल्पना करता हूँ तो लगता है कि विधाता भी कोई परम मसख़रा ही होगा और यह भी कि विधात

13 अप्रैल 2026

नवोदय की नॉट सो गुड मेमोरीज!

नवोदय की नॉट सो गुड मेमोरीज!

अप्रैल की 13 तारीख़ को नवोदय स्थापना दिवस होता है। इस साल मेरे नवोदय को 25 साल हो गए। कितने शान से खड़ा है नवोदय और पिछल

14 मार्च 2026

पास्ट लाइव्स : जो था, जो है और जो रह जाएगा

पास्ट लाइव्स : जो था, जो है और जो रह जाएगा

साल 2023 में आई हुई एक दक्षिण कोरियाई फ़िल्म है—पास्ट लाइव्स। कोरियाई मूल की कनाडाई निर्देशक सेलीन सॉंग की इस फ़िल्म का बह

13 मार्च 2026

जो घुला नहीं

जो घुला नहीं

बचपन में जब मेरी माँ दुपहर के वक़्त आराम करते हुए सो जाया करती थी, तब मेरी बड़ी बहन और मैं किचन में जाकर खाना बनाने का खेल

22 जनवरी 2026

नॉस्टेल्जिक दौर में माँ (स्त्री) की भूमिका

नॉस्टेल्जिक दौर में माँ (स्त्री) की भूमिका

प्रस्तुत लेख ‘हिन्दवी’ पर प्रकाशित ‘बेला’—‘सदी की आख़िरी माँएँ’, प्रणव मिश्र तेजस के लेख की प्रतिक्रिया में लिखा गया है।

31 दिसम्बर 2025

...फिर इस साल का आख़िरी ख़त

...फिर इस साल का आख़िरी ख़त

एमजे, परंपराएँ कवियों को कहीं का नहीं छोड़तीं। ऐसे ही दिनचर्या की आदत। यह चाहते हुए भी कि किसी तरह की आदत बुरी न बने,

19 दिसम्बर 2025

बाग़ी मन की बातें : एक पुरुष की देह को लेकर

बाग़ी मन की बातें : एक पुरुष की देह को लेकर

बहुत याद करने पर भी और बहुत मूड़ मारने पर भी पिछले दिनों ठीक-ठीक यह याद नहीं आया कि उस दिन हमारे घर में कौन-सा आयोजन था।

17 दिसम्बर 2025

भाभी कॉम्प्लेक्स और कार्ल मार्क्स

भाभी कॉम्प्लेक्स और कार्ल मार्क्स

हिंदी साहित्य में भाभी जिस रूप में उतरी है, उसमें सत्य से अधिक सुहावनापन है। आज भी पुरुष की बहुपत्नीक और स्त्री की बहुपत

03 दिसम्बर 2025

मिसफ़िट होने की कला

मिसफ़िट होने की कला

एक मित्र और उनके मात्र ग्यारह साल के बेटे के बीच महीनों का अबोला पसरा है। अबोला अचानक नहीं आया है। कई-कई टकराव और असहमति

18 नवम्बर 2025

मार्गरेट एटवुड : मर्द डरते हैं कि औरतें उनका मज़ाक़ उड़ाएँगीं

मार्गरेट एटवुड : मर्द डरते हैं कि औरतें उनका मज़ाक़ उड़ाएँगीं

Men are afraid that women will laugh at them. Women are afraid that men will kill them. मार्गरेट एटवुड का मशहूर जुमला

03 नवम्बर 2025

मासूम : जहाँ बदले में सिर्फ़ आँसू हैं

मासूम : जहाँ बदले में सिर्फ़ आँसू हैं

अप्रत्याशित हमेशा भय के भार तले दबा रहता है। नहीं घटने की इच्छा के साथ अदृश्य, जिसे हमेशा दूर से ही न कह दिया जाए। रोकथा

23 अगस्त 2025

एक स्त्री : माँ भी, पिता भी

एक स्त्री : माँ भी, पिता भी

पिता की अनुपस्थिति में पिता बनती एक स्त्री आज मैं अपने पिता के बारे में नहीं, अपने बच्चे के पिता के बारे में बात करना

07 जुलाई 2025

हथेलियों में बारिश भरती माँ

हथेलियों में बारिश भरती माँ

इलाहाबाद उस दिन मेघों से आच्छादित रहा। कुछ देर तक मूसलाधार फिर रुक-रुक कर बारिश होती रही। मैं अपने कमरे में बैठा अमरूद क

18 जून 2025

पिन-कैप्चा-कोड की दुनिया में पिता के दस्तख़त

पिन-कैप्चा-कोड की दुनिया में पिता के दस्तख़त

लिखने वाले अपनी उँगलियों का हर क़लम के साथ तालमेल नहीं बिठा पाते। उनके भीतर एक आदर्श क़लम की कल्पना होती है।  हर क़लम

08 जून 2025

प्रेत के पत्र

प्रेत के पत्र

तुम्हारे जाने के सोलह दिन बाद... डियर जिता, हम कुछ भी हो सकते थे। हम स्कूल से साथ निकलकर अपने-अपने घर जाते हुए थोड़

21 मई 2025

नाम में जो रखा है

नाम में जो रखा है

मैं इस पर बिल्कुल विश्वास नहीं करता हूँ कि नाम में क्या रखा है? मेरे पूर्वजों ने बतलाया है कि अपने माँ-बाप का नाम रोशन क

17 मई 2025

चंदर से गलबहियाँ नहीं, सुधा पर लानत नहीं

चंदर से गलबहियाँ नहीं, सुधा पर लानत नहीं

धर्मवीर भारती के कालजयी उपन्यास ‘गुनाहों का देवता’ पर इन दिनों फिर से चर्चा हो रही है। यह भी कम अचरज भरी बात नहीं है। आज

05 मई 2025

स्पर्श : दुपहर में घर लौटने जितना सुख

स्पर्श : दुपहर में घर लौटने जितना सुख

सोमवार से बहाल हुई दिनचर्या शुक्रवार शाम की राह तकती है—दरमियान का सारा वक़्त अनजाने निगलते हुए। एक जानिब को कभी लगा ही

29 मार्च 2025

तेरह दिन की एक आत्मकथा

तेरह दिन की एक आत्मकथा

रहना यहीं था—इसी समाज में, घर के भीतर, घर के बाहर। घर भीतर ढूँढ़ते हुए अब, सब इधर-उधर था। कोई याद अपनी जगह पर नहीं मि

26 मार्च 2025

प्रेम, लेखन, परिवार, मोह की 'एक कहानी यह भी'

प्रेम, लेखन, परिवार, मोह की 'एक कहानी यह भी'

साल 2006 में प्रकाशित ‘एक कहानी यह भी’ मन्नू भंडारी की प्रसिद्ध आत्मकथा है, लेकिन मन्नू भंडारी इसे आत्मकथा नहीं मानती थी

10 मार्च 2025

‘गुनाहों का देवता’ से ‘रेत की मछली’ तक

‘गुनाहों का देवता’ से ‘रेत की मछली’ तक

हुए कुछ रोज़ किसी मित्र ने एक फ़ेसबुक लिंक भेजा। किसने भेजा यह तक याद नहीं। लिंक खोलने पर एक लंबा आलेख था—‘गुनाहों का दे

09 मार्च 2025

रविवासरीय : 3.0 : ‘चारों ओर अब फूल ही फूल हैं, क्या गिनते हो दाग़ों को...’

रविवासरीय : 3.0 : ‘चारों ओर अब फूल ही फूल हैं, क्या गिनते हो दाग़ों को...’

• इधर एक वक़्त बाद विनोद कुमार शुक्ल [विकुशु] की तरफ़ लौटना हुआ। उनकी कविताओं के नवीनतम संग्रह ‘केवल जड़ें हैं’ और उन पर एक

28 फरवरी 2025

यूट्यूब के 20 साल : कुंभ जाते दादा-पोता और मोनालिसा की आँखें

यूट्यूब के 20 साल : कुंभ जाते दादा-पोता और मोनालिसा की आँखें

मोबाइल में क्या आएगा, ये कौन तय कर रहा है? दुर्भाग्य से ये अब हमारी सरकारों के हाथ से भी बाहर निकल गया है। आप यूट्यूब पर

21 फरवरी 2025

स्मृति-कथाएँ : जो नहीं है, वो कहीं तो होगा

स्मृति-कथाएँ : जो नहीं है, वो कहीं तो होगा

जिल्द में बँधी पिता की याद दुनिया लुप्त हो रही थी। लोग भूल चुके थे—तितलियों के रंग, चिड़ियों की चहचहाहट। उनसे जब भी चि

07 फरवरी 2025

कभी न लौटने के लिए जाना

कभी न लौटने के लिए जाना

6 अगस्त 2017 की शाम थी। मैं एमए में एडमिशन लेने के बाद एक शाम आपसे मिलने आपके घर पहुँचा था। अस्ल में मैं और पापा, एक ममे

06 फरवरी 2025

यथार्थ का जादू और जादुई यथार्थवाद

यथार्थ का जादू और जादुई यथार्थवाद

‘अम्बर परियाँ’ बलजिंदर नसराली का तीसरा उपन्यास है। इससे पहले पंजाबी में उनके दो उपन्यास आ चुके हैं। उन्होंने कहानियाँ भी

25 जनवरी 2025

इहबास में सोलह दिन

इहबास में सोलह दिन

मेरे चार दशक के अनुभव ने जीवन में चार चाँद लगा दिए हैं। कुछ दशक तो मेरे लिए एक सदी लिए हुए आए थे, सूरज सरीखे चमकीले, दमक

10 दिसम्बर 2024

रूढ़ियों में झुलसती मजबूर स्त्रियाँ

रूढ़ियों में झुलसती मजबूर स्त्रियाँ

पश्चिमी राजस्थान का नाम सुनते ही लोगों के ज़ेहन में बग़ैर पानी रहने वाले लोगों के जीवन का बिंब बनता होगा, लेकिन पानी केव

28 नवम्बर 2024

'गंध ही के भारन बहत मंद-मंद पौन...'

'गंध ही के भारन बहत मंद-मंद पौन...'

वसंत इस कामकाजी शहर का मूड नहीं है। संभवतः जनवरी के बाद ही गर्मियों की तैयारी में यह शहर फ़रवरी के मूड को स्किप कर देता ह

08 नवम्बर 2024

छठ, शारदा सिन्हा और ये वैधव्य के नहीं विरह के दिन थे...

छठ, शारदा सिन्हा और ये वैधव्य के नहीं विरह के दिन थे...

मुझे ख़ूब याद है जब मेरी दादी गुज़र गई थीं! वह सुहागिन गुज़री थीं। उनकी मृत्यु के समय खींची गईं तस्वीरों में एक तस्वीर ऐ

08 नवम्बर 2024

गिफ़्टेड : एक जीनियस बच्ची के बचपन को बचाने की कहानी

गिफ़्टेड : एक जीनियस बच्ची के बचपन को बचाने की कहानी

अपनी माँ की भाषा में कहूँ तो गिफ़्टेड एक मामा और भांजी के एक आत्मीय रिश्ते पर आधारित एक फ़िल्म है। मामा यानी माँ का भाई,

07 अक्तूबर 2024

प्रयाग शुक्ल की चित्रकला : रंगों में बसी संवेदनाएँ

प्रयाग शुक्ल की चित्रकला : रंगों में बसी संवेदनाएँ

5 अक्टूबर को आर्ट स्पेस, भोपाल में प्रयाग शुक्ल की एकल चित्रकला प्रदर्शनी ‘Myriad Hues’ का स्नेहिल शुभारंभ हुआ। इस अवसर

19 अगस्त 2024

जो रेखाएँ न कह सकेंगी

जो रेखाएँ न कह सकेंगी

एक युग बीत जाने पर भी मेरी स्मृति से एक घटा भरी अश्रुमुखी सावनी पूर्णिमा की रेखाएँ नहीं मिट सकी हैं। उन रेखाओं के उजले र

12 अगस्त 2024

रवींद्रनाथ ठाकुर के लिए

रवींद्रनाथ ठाकुर के लिए

रवींद्रनाथ ठाकुर के लिए कुछ लेखकों और चित्रकारों ने कविताएँ लिखी थीं। वे सारी कविताएँ और कुछ पत्र ‘द गोल्डन बुक ऑफ़ टैगो

20 जुलाई 2024

‘द सेंस ऑफ़ एन एंडिंग’ : आशिक़ बना देने वाला नॉवेल

‘द सेंस ऑफ़ एन एंडिंग’ : आशिक़ बना देने वाला नॉवेल

इंसान शायद इसीलिए सबसे अकेला जानवर भी है, क्योंकि उसने अपने लिए जीवन के उसूल बनाए हैं। जूलियन बार्न्स के नॉवेल ‘द स

09 जुलाई 2024

कविता में नाटकीयता की खोज

कविता में नाटकीयता की खोज

नाटक केवल शब्दों नहीं, अभिनेता की भंगिमाओं, कार्य-व्यापार और दृश्यबंध की संरचना के सहारे हमारे मानस में बिंबों को उत्तेज

25 जून 2024

ओशो अपनी पुस्तकों के विषय में

ओशो अपनी पुस्तकों के विषय में

मेरे पिता वर्ष में कम से कम तीन या चार बार बंबई जाया करते थे और वह सभी बच्चों से पूछा करते थे, “तुम अपने लिए क्या पसंद क

21 मई 2024

हिंदू कॉलेज में मेरे अंतिम दिन

हिंदू कॉलेज में मेरे अंतिम दिन

समय गुज़रता है...ना जल्दी, ना देर से, बस अपनी ही रफ़्तार से। यह जानते हुए भी लग रहा है कि पिछले तीन साल कितनी जल्दी गुज़