माया पर बेला
‘ब्रह्म सत्यं, जगत मिथ्या’—भारतीय
दर्शन में संसार को मिथ्या या माया के रूप में देखा गया है। भक्ति में इसी भावना का प्रसार ‘कबीर माया पापणीं, हरि सूँ करे हराम’ के रूप में हुआ है। माया को अविद्या कहा गया है जो ब्रह्म और जीव को एकमेव नहीं होने देती। माया का सामान्य अर्थ धन-दौलत, भ्रम या इंद्रजाल है। इस चयन में माया और भ्रम के विभिन्न पाठ और प्रसंग देती अभिव्यक्तियों का संकलन किया गया है।
कला हमें मृत्यु के क़रीब ले जाती है!
मैं लाइब्रेरी में बैठी सामने लगे नोटिस बोर्ड को देख रही हूँ। बोर्ड के किनारे नारंगी रंग में रँगे चिनार के पत्तों से सजे
सरसरी : ‘हिंदी का उत्सव’ और अंधकार
विवादों, विनोदों, गर्वोक्तियों, सूक्तियों और सहकारिताओं से फ़ेसबुक ऊब चुका था। आम का टिकोरा वैशाख तक बीनने के बाद आलोचकों
भौकाली ज़लज़ले से लैस मास्टर, मास्टरी और कोचिंग्स की दुनिया
भौतिक प्रदर्शन का दबाव इतना बढ़ता जा रहा है कि शिक्षक समुदाय भी उसके चपेट में है। माना जाता है कि समाज में शिक्षक समुदाय
चे ग्वेरा : एक समर्पित क्रांतिकारी का एक पूँजीवादी चीज़ में बदलना
रजिस देब्रे ने बोलिविया की जेल में चे ग्वेरा का साक्षात्कार लिया था। बाद में उन्होंने लिखा, “चे आधुनिक युग के ईसा मसीह ह
सुमन कल्याणपुर : स्वर और स्वर-भ्रम
अँग्रेज़ी में एक कहन है : people who show you new music are important. मैं अक्सर अपने मित्रों और परिचितों को नए गीत भेजता
कहानी : ऊँघ
उस दुपहर भी भृत्य शामलाल अपने निर्धारित स्थान—जो कि राज्य संचालनालय की पुरानी इमारत संख्या : ग, इकाई-7, छठवीं मंज़िल के
किरीस का गाना सुनेगा! ले बेटा...
21वीं सदी का एक चौथाई हिस्सा समाप्त हो चुका है। सरकारी आँकड़ों की मानें तो हम आधुनिकता के आगे निकल चुके हैं। यानी उत्तरा
बिछिया, बिछोह और वह आख़िरी ख़ाली पन्ना
ठहरे हुए हैं, याद आ रही है यात्राओं की। अलग-अलग जगहों की, अलग-अलग समय पर की गई यात्रा की। अलग-अलग सामान पर लटके विभिन्न
क्रेज़ी किया रे : AI के दौर में मौलिकता की बात
21 नवंबर को मंचित नाटक ‘क्रेज़ी किया रे’ ने एक बार फिर यह सशक्त संदेश दिया कि जब व्यक्ति अपनी मौलिकता छोड़कर किसी और की
चौदहवीं तितली कहीं नहीं मिली
धूप इतनी तीखी थी कि मेरी गर्दन पर पसीने की बूँदें काँटों की तरह निकल आई थीं, लेकिन में उसकी आँखों से झरती ओस में राहत मह
न भेंट, न वार्ता... सिर्फ़ रायता
यह उस समय की बात है; जब मेरा स्नातक हो चुका था, लेकिन डिग्री अभी हाथ न लगी थी। मैं तब तक उदय प्रकाश की कहानियों का दीवान
बार्बी : सुंदरता के झूठे मानकों की गुड़िया!
बचपन किसी भी मनुष्य के जीवन की सबसे कोमल और संवेदनशील अवस्था होती है। इस अवस्था में जिन वस्तुओं से हम जुड़ते हैं, वे हमा
जिम जाने वाला लेखक
यह एक भटका हुआ निबंध है, इसको अपने रिस्क पर गंभीरता से लें, मुझे भी गंभीरता से अपने रिस्क पर लें। मैं बहुत दोग़ला हूँ!
आज़ादी मिथ है... हम किसके ग़ुलाम हैं !
तुम्हारी अधेड़ नादानियों को कैसे नज़रअंदाज़ किया जा सकता है? इस नुक़्ते पर सोचते हुए घृणा या नफ़रत नहीं होती। अगर मैं कह
एक आवाज़ के ख़याल में उलझा जीवन
मेरे ख़याल से उससे मेरी पहली मुलाक़ात किशोरावस्था के दौरान हुई थी। यह मुलाक़ात इतनी संक्षिप्त थी कि मुझे याद नहीं हमने उ
रूमानियत पर एक रूमानी बातचीत
एक रोज़ जब लगभग सन्नाटा पसरने को था, मैंने अपने साथ खड़े लेखक से पूछा, “आप इतनी रूमानियत अपनी रचनाओं में क्यों भरते हैं?
व्यक्तित्व-निर्माण की सीढ़ियाँ : प्लेज़र, कंफ़र्ट जोन, बिस्तरों और कुर्सियों में फँसे लोग
आज मानव जिस धरातल पर अपने जीवित होने के हस्ताक्षर—हर क्षण साँसों के द्वारा—जिस तरह कर रहा है, उसे मद्द-ए-नज़र रखते हुए य
CTRL : एक बेमेल दुनिया की सच्चाई, जहाँ से बचना लगभग असंभव है
कभी-कभी सोचती हूँ कि यह आभासी दुनिया भी कितनी उकताऊ हो चुकी है। कुछ भी आभासी देखने या सुनने का मन नहीं होता। जब मैंने ने
काफ़्का, नैयर मसूद और अब्सर्डिटी
कहानी में बंदूक़ नैयर मसूद की कहानियों से मेरा परिचय लगभग साल भर पहले हुआ। लखनऊ विश्वविद्यालय में फ़ारसी पढ़ाने वाले
मुझे यक़ीन है कि अब वह कभी लौटकर नहीं आएँगे
तड़के तीन से साढ़े तीन बजे के बीच वह मेरे कमरे पर दस्तक देते, जिसमें भीतर से सिटकनी लगी होती थी। वह मेरा नाम पुकारते, बल्क
न सुधा जैसी कोई नायिका हुई, न चंदर जैसा कोई नायक
तीसरी कड़ी से आगे... क्लबहाउस की दुनिया अब प्रौढ़ हो चुकी थी। अपने शुरुआती दिनों की तमाम स्थापनाओं के बाद यहाँ की सभ्यत
विपश्यना जहाँ आँखें बंद करते ही एक संसार खुलता है
एक Attention is the new Oil अरबों-करोड़ों रुपए इस बात पर ख़र्च किए जाते हैं कि हमारे ध्यान का कैसे एक टुकड़ा छीन लिया
कविता की कहानी सुनता कवि
कविता आती है और कवि को आत्मा से शब्द की अपनी यात्रा की दिलचस्प दास्ताँ सुनाने लगती है। कवि के पूछने पर कविता यह भी बताती