पत्र पर बेला
पत्र बातों और भावनाओं
को शब्दों में प्रकट कर संवाद करने का एक माध्यम है। प्रस्तुत चयन में उन कविताओं का संकलन किया गया है, जिनमें पत्र प्रमुख तत्त्व और प्रसंग की तरह कविता में उपस्थित हुए हैं।
पत्र : मैरी हैस्केल के लिए
जब ख़लील और मैरी मिले, तब ख़लील इक्कीस वर्ष के थे—एक संघर्षरत युवा कलाकार। मैरी उनसे दस वर्ष बड़ी थीं और बोस्टन के एक प्रतिष्ठित बालिका विद्यालय की प्रधानाध्यापिका थीं। ख़लील ने उनसे विवाह का प्रस्ता
01 नवम्बर 2026
पत्र : जेएनयू का जामिया के नाम
प्रिय जामिया, कितनी पवित्र तारीख़ थी वह, जब हम पहली बार मिले थे। 6 जनवरी की शाम। उस शाम के एक-एक पल, एक-एक घटनाएँ मुझे याद हैं। तुम मुख़ातिब भी हो क़रीब भी हो तुम को देखें कि तुम से बात करें
पत्र : वियोगिनी ठाकुर के लिए : ‘अश्लीलता’ के नए आयाम
प्रिय वियोगिनी ठाकुर जी, आपके लिखे ‘अश्लील स्थितियों में फँसना’ पढ़ते हुए कुछ बातें मन में आईं। लगा कि आपसे उन पर बात की जानी चाहिए। आपके लिखे प्रसंगों में अश्लीलता, स्त्री-देह, सामाजिक पूर्वाग्रह
पत्र : कल्पना शास्त्री के लिए : मुझसे नहीं होगा समीक्षा का काम
स्वस्ति श्री सर्वोपमायोग्य कल्पना शास्त्री जी, यहाँ से मनीष का राम-राम। चकित होऊ नका; मैं भी जानता हूँ कि चिट्ठी-पत्री की परंपरा तो अब बहुत पुरानी हो चुकी है। सो भी, मैं आपको चिट्ठी लिखने बैठ गया।
पत्र : सरस के लिए : आज तुम्हारा जन्मदिन है...
सरस, कैसी हो? आशा करता हूँ कि ठीक होगी। ये ख़त तुम्हारे जन्मदिन के लिए है। कुछ इच्छाएँ, यादें और हल्की-सी हिदायतें। हाँ, तुम्हें वो बिल्कुल भी पसंद नहीं, पर क्या करूँ? आदत से जो मजबूर ठहरा। हम भी
29 अक्तूबर 2026
जामिया मिल्लिया इस्लामिया के कुलपति को एक शोधार्थी का पत्र
आदरणीय कुलपति महोदय, सादर प्रणाम! आज जब आपकी झलक रील्स के माध्यम से देखने को मिली, तो बड़ा अचंभा हुआ। मुझे तो लग रहा था कि आप कहीं विदेश दौरे पर गए हैं! आज जब आप अपने हुजरे से निकले, तो लगा कि
पत्र : तुकाराम मुंढे के लिए : कार्रवाई के तमाशे का आकर्षण
आदरणीय तुकाराम मुंढे जी, अभिनेता अनिल कपूर की एक फ़िल्म है ‘नायक’। आपने भी देखी ही होगी। इसमें एक पत्रकार एक दिन के लिए मुख्यमंत्री बनने की चुनौती स्वीकार करता है और चौबीस घंटे में इतने काम करता ह
पत्र : दिल्ली के लिए : तुम पहले जैसी हो जाओ
प्यारी दिल्ली, कैसी हो? माफ़ करना महीनों बाद तुम्हें ख़त लिख रहा हूँ। आजकल ना चाहते हुए भी तुम्हारा नाम ज़बान पर आ जाता है। देश में क्या हो रहा है, यह तुमसे छिपा नहीं है; फिर भी संक्षेप में अगर
26 सितम्बर 2026
शनिवारेर चिट्ठी : ए बछरेर एटाइ शेष चिठि, मंजरी!
अह, शनिवार-शनिवार तुम्हें चिट्ठी भेजने का यह हाल का सिलसिला अब यहीं शेष हुआ चाहता है, मंज! यह चीज़ों को उसकी सुंदरता में रखने और सुंदरता में ही विश्राम सौंप देने की युक्ति न हुई तो और क्या, कहो! अधिक
चाहता तो बच सकता था... : ‘जेन-ज़ी का तोता’ वाले आनंद हर्षुल के नाम पत्र
दिनांक : 18 सितंबर 2026 प्रतिष्ठा में, ‘जेन-ज़ी का तोता’ के लेखक श्री आनंद हर्षुल, यह पत्र इस आग्रह के साथ शुरू कर रहा हूँ कि आप मेरे संबोधन को स्वयं को एक कहानी विशेष के लेखक में परिसीमित करने
ममता कालिया के नाम एक छात्र का खुला ख़त
आदरणीय ममता कालिया जी, नमस्कार! “रात-रात नींद नहीं आती। दिन ऐसे बीतते हैं, जैसे भूतों के सपनों की एक रील पर दूसरी रील चढ़ा दी गई हो और भूतों की आकृतियाँ और डरावनी हो गई हों।” विद्यानिवास मिश
खोटी सीख देने वाले, गोली मारने वालों से भी अधिक बुरे होते हैं
यह पत्र विजयदान देथा का चंद्रप्रकाश देवल (सी.पी. देवल) को लिखे एक सीख-रूपी पत्र का अनुवाद है। संयोग से सी.पी. देवल विजयदान देथा के जँवाई हैं। सो, इस पत्र में उनका ‘ससुर’ रूप भी सीख के बहाने बीच-बीच म
शशिभूषण द्विवेदी के नाम : बारह कथाकारों, दो कवियों और एक आलोचक के पत्र
आज शशिभूषण द्विवेदी [26 जुलाई 1975—7 मई 2020] की जन्मतिथि है। वह आज सदेह होते, तब आज उनका बावनवाँ वर्ष लग जाता। एक रचनाकार रचना के लिए एक कंदरा का निर्माण करता है। इस कंदरा में वह संसार से थक-भागकर छ
25 जुलाई 2026
शनिवारेर चिट्ठी : मुझे मुआफ़ करना प्रिय!
मुझे मुआफ़ करना प्रिय! इतना भर कह देने से क्या होता है कि मन इस पूरे हफ़्ते खिन्न रहा। यह कहने से कि चीज़ें देखता-सुनता रहा और आँखें भीगती रहीं। कभी निराशा से तो कभी बिजली की तरह कौंध आती आशा से। यह
शनिवारेर चिट्ठी : सबसे पहले तुम, शशि!
सबसे पहले तुम, शशि! इसलिए नहीं कि तुम जीवन में सबसे पहले आईं या कि तुम सबसे ताज़ा स्मृति हो। इसलिए कि मेरा होना अनिवार्य रूप से तुम्हारे होने को लेकर है... [शेखर : एक जीवनी, शेखर : उत्थान—प्रवेश
रविवासरीय 4.0 : कृष्णबलदेववैदविषयक
• नये काम करना मुश्किल नहीं, मुश्किल है पुराने काम नये ढंग से करना। • काम करने के लिए, काम न कर सकने वाली परिस्थितियाँ चाहिए। • रोना अकेले की चीज़ है। • वे जिनकी रचनाएँ ‘राजनीतिक’ नहीं, ऐसे अ
शनिवारेर चिट्ठी : घर की जगह
डेरा मनुष्य अपने घर के बारे में सबसे कम तब सोचता है, जब वह अपने घर का निवासी होता है। तब घर की उपस्थिति इतनी स्वाभाविक होती है कि वह लगभग अदृश्य हो जाता है। बचपन में “हमारा अपना दो-मंज़िला घर है”
शनिवारेर चिट्ठी : कल से रवैया फ़र्क़ होगा
अथ कोई अलसकथा नहीं! रविवार के उस दुपहर-उष्ण में ऊँघने के स्वाँग में तुम्हारी पीठ पर श्वासों की सुदीर्घ कविताओं का पाठ नहीं कर सका, खमा करो। मुझे एक नए आरंभ की पहली सीढ़ी पर पाँव धरने थे। अभी कितना
चुप्पी में सारे उत्तर छुपे होते हैं
20 जुलाई 2022 अदीब अचानक नींद से उठ बैठा। किसी ऊबड़-खाबड़ सपने की वजह से शायद। कुछ क्षण बाद ठीक से उसकी चेतना लौटी तो उसको लगा कि वह अकेला नहीं सो रहा है, कमरे में चैतन्या की यादें भी सो रही हैं। इस
प्रेम के पाँच पत्र और प्रलोभन की एक कथा
मेरानो, 15 जून 1920 मंगलवार इस अलस्सुबह मैंने फिर तुम्हें स्वप्न में देखा। हम साथ बैठे थे और तुम मुझे दूर कर रही थीं—ग़ुस्से से नहीं, सहज आत्मीयता से। मैं बेहद दुखी था। इसलिए नहीं कि तुम मुझे दूर
पत्र : प्रकाश के साक्षी सेबास्टिओं सालगाडो के नाम
प्रिय सेबास्टिओं, प्रेरणा के अमिट स्रोत शांति और सामंजस्य के दूत विविधता के उपासक, प्रकृति के अद्भुत सहचर आज से 12 साल पहले मेरे एक फ़ोटोग्राफ़र मित्र अमन ने मुझे तुम्हारे बारे में बताया था।
‘तेरे ख़त आज मैं गंगा में बहा आया हूँ’
दूर तक फैले कीकर और बबूल के पेड़ों के बीच कच्ची पगडंडी पर सीताफल के दो पेड़ थे। उसी कच्ची पगडंडी पर चलते हुए ज़रा पीछे की ओर गरदन मोड़ लो तो सरकारी स्कूल का फाटक दिखने लगता था। लड़का-लड़की छुट्टी के
चेख़व का पत्र निकोलाय के लिए : देखो, जीवन की अपनी शर्तें होती हैं...
मॉस्को, 1886 …तुम मुझसे अक्सर शिकायत करते रहे हो कि लोग तुम्हें “समझते” नहीं हैं! गेटे और न्यूटन ने कभी ऐसी शिकायत नहीं की थी... मसीह ने इसकी शिकायत की थी, लेकिन वह अपने सिद्धांत की बात कर रहे थे,
विकुशु के नाम एक पत्र
प्रिय विनोद कुमार शुक्ल जी, आपको मेरा सादर प्रणाम! मैंने जब ‘हिंद युग्म’ महोत्सव (रायपुर) में आपको पहली बार देखा और आपसे मिली तो मेरे मन में पहले जो भी भ्रांतियों के बादल घिरे थे, सब छँट गए। सो
प्रेत के पत्र
तुम्हारे जाने के सोलह दिन बाद... डियर जिता, हम कुछ भी हो सकते थे। हम स्कूल से साथ निकलकर अपने-अपने घर जाते हुए थोड़ा-सा बचे रह सकते थे—एक दूसरे के पास! हम उस पहले झगड़े के शब्द बन सकते थे जो हमार
'संगत'-प्रसंग : पक्ष और प्रमाण
‘संगत’—‘हिन्दवी’ का प्रमुख कार्यक्रम है। इसके अंतर्गत हिंदी साहित्य संसार के महत्त्वपूर्ण व्यक्तित्वों के वीडियो-साक्षात्कार ‘हिन्दवी’ के यूट्यूब चैनल पर प्रसारित किए जाते हैं। इस सिलसिले में 23 मई 2
चिट्ठीरसा : कुछ परंपराओं का होना, जीवन का होना होता है
डाकिया आया है। चिट्ठी लाया है। ये शब्द अम्मा को चुभते थे। कहतीं चिट्ठीरसा आए हैं, बड़ी फुर्ती से उस दिन ओसारे से दुआर तक पहुँचतीं, जैसे कोई किसी अपने का इंतिज़ार करते माला जप रहा हो, और ईश्वर ने उसकी
...इस साल का आख़िरी ख़त
एमजे के लिए इस साल का आख़िरी ख़त एक बीत गए में कुछ जोड़ना जितना मुश्किल है, उतना ही मुश्किल है उसे याद करना। एक ताख़े पर कुछ किताबें जुड़ जाती हैं, जैसे उनका कुछ ख़ुद से जुड़ जाता है। एक मन होत
क्या मिट्टी के आस-पास ‘मिट्टी न होने का’ कोई माध्यम नहीं हो सकता
प्रिय पांडू, तुम्हारे पत्र बहुत मज़ेदार होते हैं, लेकिन फ़ोन पर तुम्हारी भारी-भरकम गंभीर आवाज़ सुनकर मुझे लगता है जैसे अपने ग़ुस्सैल और असंतुष्ट अंकल से बात कर रहा हूँ। आवाज़ कानों को तो अच्छी लगत
12 अगस्त 2024
रवींद्रनाथ ठाकुर के लिए
रवींद्रनाथ ठाकुर के लिए कुछ लेखकों और चित्रकारों ने कविताएँ लिखी थीं। वे सारी कविताएँ और कुछ पत्र ‘द गोल्डन बुक ऑफ़ टैगोर’ में प्रकाशित की गई थीं। यह किताब 1931 में राममोहन पुस्तकालय, कलकत्ता से छपी
सआदत हसन मंटो के नाम
सरहद, भारत-पाकिस्तान 2024 मंटो, पहले अज़ीज़ लिखूँ या आदाब, यहीं मात खा गया। ज़ाहिर है प्रोज़ में आपका मुक़ाबला कर पाना, मेरे बस के और बस के कंडक्टर के—दोनों के बाहर है। आज आपकी सालगिरह है। आपको जा
वालिद के नाम एक ख़त
प्यारे अब्बा! मैं जानता हूँ कि मैं इस तहरीर के पहले लफ़्ज़ को आपको पुकारने के लिए इस्तेमाल करने के लायक़ नहीं हूँ। मैं यह भी जानता हूँ कि मैंने होश सँभालने से लेकर अब तक आपको सिर्फ़ दुख पहुँचाया ह