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हिंदी साहित्य पर बेला

28 अगस्त 2026

हिन्दवी उत्सव : कविता, आलोचना और संगीत के बीच एक दिन

हिन्दवी उत्सव : कविता, आलोचना और संगीत के बीच एक दिन

मेरी इच्छा थी कि मैं ‘हिन्दवी उत्सव’ की रपट को किसी कविता से शुरू करूँ, लेकिन डर था कि कहीं रपट छोड़कर उस कविता को निशाने पर ना ले लिया जाए, इसीलिए थोड़ा लरजते और पाठकों की संख्या का अनुमान लगाते हुए म

25 अगस्त 2026

धारावाहिक उपन्यास : जंकामंका गैंग : यही सब आज का हिंदी साहित्य है

धारावाहिक उपन्यास : जंकामंका गैंग : यही सब आज का हिंदी साहित्य है

गताध्याय से आगे... नौ  उदय का दुख यह नहीं था कि वह ब्राह्मणों के बीच अछूत है, बल्कि यह है कि वह पिछड़े और एससी के बीच ब्राह्मण है। वह उनके लिए कुछ भी कर दे, जान की बाज़ी लगा दे, तो भी सवर्ण था, ऊ

23 अगस्त 2026

बिंदुघाटी 2.0 : ‘हिन्दवी’ अपना उत्सव लेकर इलाहाबाद आ तो गया, लेकिन यहाँ से जा नहीं पाएगा

बिंदुघाटी 2.0 : ‘हिन्दवी’ अपना उत्सव लेकर इलाहाबाद आ तो गया, लेकिन यहाँ से जा नहीं पाएगा

• ‘हिन्दवी’ अपना उत्सव लेकर इलाहाबाद आ तो गया, लेकिन यहाँ से पूरी तरह जा नहीं पाएगा। यह मज़ाक नहीं है, इसके मा’नी तक पहुँचने के लिए इससे गुज़रिए :  दरअस्ल, इलाहाबाद की हवा ही नॉस्टैल्जिक है। यहाँ रह

22 अगस्त 2026

हिन्दवी उत्सव : 23 अगस्त को इलाहाबाद के पथ पर

हिन्दवी उत्सव : 23 अगस्त को इलाहाबाद के पथ पर

प्रिय हिंदी-प्रेमियो, हम आपको सहर्ष यह सूचित कर रहे हैं कि ‘रेख़्ता फ़ाउंडेशन’ का उपक्रम ‘हिन्दवी’—हिंदी-साहित्य-संस्कृति-कला-संसार को समर्पित अपने वार्षिकोत्सव—‘हिन्दवी उत्सव’ के छठे संस्करण का आय

20 अगस्त 2026

ज्ञानेंद्रपति को पढ़ना : चीज़ों की बनी-बनाई शक्ल पर संदेह करना

ज्ञानेंद्रपति को पढ़ना : चीज़ों की बनी-बनाई शक्ल पर संदेह करना

मुझे चेतना पारीक याद रहती हैं। कैसी सहज उभरी शिष्टता में उनके लिए आदरसूचक ‘हैं’ लिख रहा हूँ। वह अलहदा और उतने ही मख़्सूस कवि ज्ञानेंद्रपति की चेतना पारीक हैं। जितना उन्हें जान पाता हूँ, वह कोई दूर खड

20 अगस्त 2026

गगन गिल से संवाद : स्त्री होने से कोई स्त्री लेखक थोड़े ही हो जाता है

गगन गिल से संवाद : स्त्री होने से कोई स्त्री लेखक थोड़े ही हो जाता है

गगन गिल हिंदी कविता का वह स्वर हैं, जिन्हें किसी एक वाद या विमर्श के दायरे में रखकर समझना संभव नहीं। अपनी ही सीमाओं को लगातार लाँघती उनकी कविता प्रचलित आलोचनात्मक मानकों से बाहर जाकर अपने लिए अर्थ और

19 अगस्त 2026

प्रियंवद का रचनालोक : जहाँ मनुष्य नैतिक नहीं, मनुष्य है

प्रियंवद का रचनालोक : जहाँ मनुष्य नैतिक नहीं, मनुष्य है

अधिमूल्यन से उत्पन्न बहुप्रशंसा और अतिव्याप्ति से उत्पन्न रुचिशीलता के इस समय में किसी के टेक्स्ट भर से आत्मीय होना, रचना और रचनाकार—दोनों के लिए—किसी पाठक को उदात्तता से भर देता है। देखने-सुनने-जानन

18 अगस्त 2026

धारावाहिक उपन्यास : जंकामंका गैंग : अब पद नहीं, कुपद चलता है

धारावाहिक उपन्यास : जंकामंका गैंग : अब पद नहीं, कुपद चलता है

गताध्याय से आगे... आठ  उदय के बड़े-बुज़ुर्गों ने उदय से कभी पूछा ही नहीं कि तुम्हें हुआ क्या है, तुम क्यों दुखी रहते हो, आओ मेरे पास बैठो, मुझे बताओ, क्यों तुम ज़माने से ख़फ़ा हो? साहित्य की दुनिया

18 अगस्त 2026

गद्य की स्वरलिपि का संधान

गद्य की स्वरलिपि का संधान

हिंदी के काव्य-पाठ को लेकर आम राय शायद यह है कि वह काफ़ी लद्धड़ होता है जो वह है; वह निष्प्रभ होता है, जो वह है, और वह किसी काव्य-परंपरा की आख़िरी साँस गोया दम-ए-रुख़सत की निरुपायता होता है। आख़िरी ब

07 अगस्त 2026

वासुदेव शरण अग्रवाल : विंध्य से लेकर हिमालय तक का जनपद हमें पुकार रहा है

वासुदेव शरण अग्रवाल : विंध्य से लेकर हिमालय तक का जनपद हमें पुकार रहा है

कपिला वात्स्यायन ने कहा था कि शब्द उनकी लाठी थे। वह उसका एक सिरा पकड़कर ही भारतीय ज्ञान-परंपरा की गहराइयों में प्रवेश कर गए। आज वासुदेव शरण अग्रवाल की जन्मतिथि है। उनकी स्मृति स्वतः इतिहास का तोरण-द्

01 अगस्त 2026

‘मसिजीवी होना तो भूखे मरना है’

‘मसिजीवी होना तो भूखे मरना है’

खिड़की के सीखचों पर फड़फड़ाते हुए कबूतर आकर बैठते हैं और फिर उड़ जाते हैं। यह जोधपुर में अप्रैल-2019 की एक दुपहर है—इतनी गर्म कि पीठ में काँटे चुभ रहे हों जैसे। मेरा एक दोस्त मुझे शहर की पतली गलिय

31 जुलाई 2026

मास्टर की अरथी नहीं थी, आशिक़ का जनाज़ा था

मास्टर की अरथी नहीं थी, आशिक़ का जनाज़ा था

जीवन मुश्किल चीज़ है—तिस पर हिंदी-लेखक की ज़िंदगी—जिसके माथे पर रचना की राह चलकर शहीद हुए पुरखे लेखक की चिता की राख लगी हुई है। यों, आने वाले लेखक का मस्तक राख से साँवला है। पानी, पसीने या ख़ून से धुलकर

31 जुलाई 2026

अपने-अपने झोले : अपने-अपने प्रेमचंद

अपने-अपने झोले : अपने-अपने प्रेमचंद

फिर इलाहाबाद। तारीख़ें 22, 23, 24 और 25 फ़रवरी। चुनी हुई जगह—हिंदुस्तानी अकादेमी का सभागार, सन् 1981 वे अपनी बलिष्ठ भुजाओं पर बल्ले उभारते, मूँछें मरोरते, ताल ठोंकते, शक्ति-प्रदर्शन के तमाशबीनों क

28 जुलाई 2026

नामवर सिंह की आलोचना-यात्रा : वैचारिक विकास और सैद्धांतिक हस्तक्षेप

नामवर सिंह की आलोचना-यात्रा : वैचारिक विकास और सैद्धांतिक हस्तक्षेप

हिंदी आलोचना के वृहत् परिदृश्य में नामवर सिंह की उपस्थिति एक ऐसे मील के पत्थर की तरह है, जिनका व्यक्तित्व और कृतित्व दोनों ही गहन बौद्धिक ऊर्जा और उतने ही गहरे विवादों से निर्मित और विकसित हुए। वह के

28 जुलाई 2026

धारावाहिक उपन्यास : जंकामंका गैंग : हिंदी में निर्लज्जता की परंपरा

धारावाहिक उपन्यास : जंकामंका गैंग : हिंदी में निर्लज्जता की परंपरा

गताध्याय से आगे... पाँच  दोस्ती के बारे में कई ज्योतिषियों ने दो बातें बताईं। पहली बात यह कि इस कलिकाल में सच्ची मित्रता के अकाल का योग है, हज़ार वाट का बल्ब लेकर ढूँढ़ते रह जाओगे; एक वाट का भी म

19 जून 2026

गीत चतुर्वेदी से दस सवाल : मुझे ‘एक सही ख़याल’ चाहिए

गीत चतुर्वेदी से दस सवाल : मुझे ‘एक सही ख़याल’ चाहिए

गीत चतुर्वेदी (जन्म : 1977) हिंदी के सर्वाधिक पढ़े जाने वाले समकालीन लेखकों में से एक हैं। कविताओं की तीन किताबों सहित उनकी दस से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हैं। उनकी कविता-पंक्तियों ने मौजूदा कविता-समय म

07 जून 2026

रविवासरीय 4.0 : एक हिंदी लेखक की ज़िंदगी

रविवासरीय 4.0 : एक हिंदी लेखक की ज़िंदगी

• एक हिंदी लेखक के जीवन की सुबह सूचनाओं से और रात उपन्यास से होती है। वह दुपहर से शाम तक ख़राब सिनेमा के असर में रहता है। इस असर में बाहर धूल और भीतर पन्ने उड़ते रहते हैं। यह उड़ान ही है कि महानगर जीवन

06 मई 2026

‘अर्थात्’ की छठी कड़ी : प्रगतिवाद पर बात

‘अर्थात्’ की छठी कड़ी : प्रगतिवाद पर बात

चैत्र में बसंत के उनींदे से जागा ग्रीष्म वैशाख में अपना वैभव खोजता है। दुपहरें अपनी दीर्घता से ऊबकर अलसाती हैं और निस्पंद हो जाती हैं। अगर उमस न हो तो ऐसी दुपहर पढ़ने-लिखने को अनुकूल है। इसी समय में

02 अप्रैल 2026

गद्य होती कविता, थकता हुआ कवि

गद्य होती कविता, थकता हुआ कवि

जिस दौरान नवंबर बीत रहा था, उसी दौरान घर में एक नया जीवन उतर रहा था। मेरा मन हर घड़ी लगभग बैठा जाता था। लगभग घंटे दो घंटे बाद लगता—अब निकले प्राण कि तब निकले, लेकिन निकले अभी तक नहीं। अब यह कहने की को

15 मार्च 2026

रविवासरीय 4.0 : सुरेन्द्र मोहन पाठक के ख़िलाफ़

रविवासरीय 4.0 : सुरेन्द्र मोहन पाठक के ख़िलाफ़

• एक ख़ाकसार मनुष्य के एक ख़ाकसार पुल पर एक ख़ाकसार उपन्यासकार से गए सोमवार टकराना हुआ। ख़ाकसार उपन्यासकार काफ़ी लोकप्रिय पुकारे जाते हैं। वह इतने ज़्यादा ख़ाकसार और लोकप्रिय हैं कि चेतन भगत और अमीश त्

07 मार्च 2026

‘नई सृष्टि नई स्त्री’ की छठी सूची

‘नई सृष्टि नई स्त्री’ की छठी सूची

वर्ष 2021 में हमने हिन्दवी पर नई सृष्टि नई स्त्री के अंतर्गत ऐसी 21 नई स्त्री-कवियों की कविताएँ प्रस्तुत कीं, जिन्होंने अपनी काव्यात्मक आभा से इस सदी की हिंदी-कविता-सृष्टि को एक नई चमक दी। यह सिलसिला

03 मार्च 2026

दैनिक भास्कर लेकर आया है कविता-प्रतियोगिता

दैनिक भास्कर लेकर आया है कविता-प्रतियोगिता

आगामी 21 मार्च को विश्व कविता दिवस के उपलक्ष्य में ‘दैनिक भास्कर’ एक विशेष पहल के रूप में ‘कविता उत्सव’ का आयोजन कर रहा है। यह काव्य-प्रतियोगिता देश भर के रचनात्मक मनों को एक मंच प्रदान करने का प्रया

19 फरवरी 2026

क्या हम परिवार को देश की तरह देख सकते हैं?

क्या हम परिवार को देश की तरह देख सकते हैं?

हमारे सामने एक विकट प्रश्न खड़ा हो गया है। क्या हमारे परिवार ख़त्म हो जाएंगे? इस मामले में नहीं कि हमारे परिवार के लोग एक-दूसरे से दूर रहने लगे हैं, दूर नौकरियाँ करने लगे हैं और कभी-कभी ही मिल पाते ह

29 जनवरी 2026

चेतना के दस द्वीप : प्रयागराज की साहित्यिक विरासत और प्रतिरोध की गूँज

चेतना के दस द्वीप : प्रयागराज की साहित्यिक विरासत और प्रतिरोध की गूँज

वरिष्ठ कवि हरिशचंद्र पांडे की अध्यक्षता में मंगलवार, 27 जनवरी को चौधरी महादेव प्रसाद महाविद्यालय (सीएमपी डिग्री कॉलेज), प्रयागराज के सभागार में कथाकार रणविजय सिंह ‘सत्यकेतु’ द्वारा संपादित काव्य-संकल

27 जनवरी 2026

नए साल की रात, 'पहल' की विरासत और अजित पुष्कल की स्मृतियाँ

नए साल की रात, 'पहल' की विरासत और अजित पुष्कल की स्मृतियाँ

शाम के सात बज चुके थे और अब इस समय पर लखनऊ के लिए बस पकड़ने का आशय यह होता कि रात के लगभग बारह बजे के आस-पास या उससे थोड़ा ज़्यादा समय पर ही लखनऊ पहुँच पाता। ऐसे में सिविल लाइंस से वापस लौटना ही सबसे

23 जनवरी 2026

ज्ञानरंजन के मनोहर का ‘बहिर्गमन’ उर्फ़ ‘पिता’ को रुमाल की ज़रुरत है...

ज्ञानरंजन के मनोहर का ‘बहिर्गमन’ उर्फ़ ‘पिता’ को रुमाल की ज़रुरत है...

नौ दशक का एक सुदीर्घ और शानदार जीवन जीकर ज्ञानरंजन हमें छोड़ कर चले गए। वह मनोहर की तरह प्रस्थान करते हुए रुमाल हिला रहे हैं। अपना रुमाल उमस में सोये उस ‘पिता’ को देना चाहते हैं, जो खटिया के दाएँ पाटी

22 जनवरी 2026

फिर भी : कमलेश्वर की लिखी एक दुर्लभ फ़िल्म

फिर भी : कमलेश्वर की लिखी एक दुर्लभ फ़िल्म

पापा, क्यों सब लोग मिलकर; मुझे तुमसे अलग करना चाहते हैं? मुझे और पुरुषों से कुछ भी लेना-देना नहीं है। अगर तुम मेरे साथ नहीं रह सकते तो मुझे यहाँ से इन सब लोगों से दूर कहीं और ले चलो। अब तो मम्मी अकेल

16 जनवरी 2026

छंद-छंद पर कुमकुम : समकालीन छंदबद्ध कविता का विशेष आयोजन

छंद-छंद पर कुमकुम : समकालीन छंदबद्ध कविता का विशेष आयोजन

समकालीन कविता के परिदृश्य में जहाँ मुक्तछंद की उपस्थिति व्यापक है; वहीं छंदबद्ध कविता आज भी अपनी लय, अनुशासन और संगीतात्मकता के कारण पाठकों और श्रोताओं के बीच एक विशिष्ट स्थान बनाए हुए है। इसी परंपरा

16 जनवरी 2026

विष्णु खरे के इर्द-गिर्द

विष्णु खरे के इर्द-गिर्द

समादृत कवि-आलोचक और कला-प्रशासक अशोक वाजपेयी आज 86वें वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं। उन्हें शुभकामनाएँ देते हुए यहाँ प्रस्तुत है—उनके द्वारा समादृत कवि-आलोचक-अनुवादक विष्णु खरे के लिए लिखा गया संस्मरणात

15 जनवरी 2026

रघुवर प्रसाद और सोनसी की दुनिया का रचयिता

रघुवर प्रसाद और सोनसी की दुनिया का रचयिता

1 जनवरी 2026 को विनोद कुमार शुक्ल 89 वर्ष के हो जाते लेकिन उसके नौ दिन पहले ही वह इस दुनिया से चले गए। हिंदी साहित्य में संभवतः अज्ञेय के बाद वह गिनती के ऐसे साहित्यकारों में थे जो गद्य और पद्य दोनों

15 जनवरी 2026

गोपेश्वर सिंह की आलोचना-पद्धति के कुछ पक्ष

गोपेश्वर सिंह की आलोचना-पद्धति के कुछ पक्ष

गोपेश्वर सिंह की आलोचना-पद्धति के बारे में बात करने का यह अर्थ नहीं है कि वह शास्त्रीय या सैद्धांतिक आलोचना लिखते हैं। उन्होंने व्यावहारिक आलोचना ही लिखी है। वह किसी साहित्य-सिद्धांत की बहस में भी प्

14 जनवरी 2026

घर में है नायाब

घर में है नायाब

एक मृदुला गर्ग समकालीन हिंदी रचना-जगत् की सर्वाधिक समादृत लेखिका होने के साथ सर्वाधिक वरिष्ठ और हमारे सौभाग्य से सर्वाधिक सक्रिय रचनाकारों में से हैं—वह उन विरले लेखकों में से हैं जिन्होंने मिर्ज़

17 नवम्बर 2025

नई कविता और संवाद का दूसरा पड़ाव

नई कविता और संवाद का दूसरा पड़ाव

‘नई कविता’ के अनेक आयामों पर विभिन्न दृष्टिकोणों से बहस होने के बाद भी इसमें लगातार कुछ नए की तलाश बनी रहती है। इसके केंद्र में ‘मुक्तिबोध’ या ‘अज्ञेय’ की बाइनरी को भी प्रश्नांकित किया जाता रहेगा। इस

13 नवम्बर 2025

इस बार शांतिनिकेतन में होगा ‘संगमन’

इस बार शांतिनिकेतन में होगा ‘संगमन’

वर्ष 1993 में कानपुर से शुरू हुआ रचनात्मक व बौद्धिक हस्तक्षेप के सहकारी उपक्रम ‘संगमन’ का 26वाँ आयोजन देश के विभिन्न राज्यों से गुज़रता हुआ इस बार शांतिनिकेतन (पश्चिम बंगाल) में हो रहा है। तारीख़ें हैं

13 नवम्बर 2025

जन्मतिथि विशेष : मुक्तिबोध : आत्मा के मित्र को स्नेहांजलि

जन्मतिथि विशेष : मुक्तिबोध : आत्मा के मित्र को स्नेहांजलि

यह सभा एक बंधु के निधन पर एक कवि के अपने रचना-क्षेत्र हो उठ जाने पर, दुःख प्रकट करने और शोक-संतप्त परिवार को हम सबकी संवेदना पहुँचाने के लिए एकत्र हुई है। बंधु की स्मृति से अभिभूत हो जाना स्वाभाविक ह

02 नवम्बर 2025

कवियों के क़िस्से वाया AI

कवियों के क़िस्से वाया AI

भरतपुर की वह दुपहर साहित्य की ऊष्मा से भरी हुई थी। हवा में हल्की गर्मी थी, लेकिन सभा-गृह के भीतर विचारों की शीतल छाया पसरी हुई थी। देश का स्वतंत्रता-संग्राम अपने चरम पर था और साहित्यकार इस संघर्ष के

23 अक्तूबर 2025

सिनेमा में प्रेमचंद : साहित्य, बाज़ार और प्रतिरोध

सिनेमा में प्रेमचंद : साहित्य, बाज़ार और प्रतिरोध

“जिन हाथों में फ़िल्म की क़िस्मत है, वे बदक़िस्मती से इसे इंडस्ट्री समझ बैठे हैं। इंडस्ट्री को ‘मज़ाक़’ और इसलाह से क्या निस्बत? वह तो एक्सप्लायट करना जानती है और यहाँ इंसान के मुक़द्दसतरीन (पवित्रतम

06 अक्तूबर 2025

अगम बहै दरियाव, पाँड़े! सुगम अहै मरि जाव

अगम बहै दरियाव, पाँड़े! सुगम अहै मरि जाव

एक पहलवान कुछ न समझते हुए भी पाँड़े बाबा का मुँह ताकने लगे तो उन्होंने समझाया : अपने धर्म की व्यवस्था के अनुसार मरने के तेरह दिन बाद तक, जब तक तेरही नहीं हो जाती, जीव मुक्त रहता है। फिर कहीं न

04 अक्तूबर 2025

रामचंद्र शुक्ल, हिंदी शब्दसागर और नागरीप्रचारिणी सभा

रामचंद्र शुक्ल, हिंदी शब्दसागर और नागरीप्रचारिणी सभा

आज हिंदी के शीर्षस्थ आलोचक और साहित्य के इतिहासकार आचार्य रामचंद्र शुक्ल की जयंती है। काशी नागरीप्रचारिणी सभा शुक्लजी की आलोचना की जन्मभूमि है। 1908 से 1930—लगातार 28 वर्षों तक वह ‘सभा’ की ऐतिहासिक प

23 सितम्बर 2025

विनोद कुमार शुक्ल : 30 लाख क्या चीज़ है!

विनोद कुमार शुक्ल : 30 लाख क्या चीज़ है!

जनवरी, 2024 में मैंने भोपाल छोड़ दिया था। यानी मैंने अपना कमरा छोड़ दिया था। फिर आतंरिक परीक्षा और सेमेस्टर की परीक्षाओं के लिए जाना भी होता तो कुछ दोस्तों के घर रुकता। मैं उनके यहाँ जब पहुँचा तो पाया

13 सितम्बर 2025

हिंदी दिवस पर जागरण कनेक्ट और ‘हिन्दवी’ का विशेष आयोजन : ‘उत्सव हिन्दी का’

हिंदी दिवस पर जागरण कनेक्ट और ‘हिन्दवी’ का विशेष आयोजन : ‘उत्सव हिन्दी का’

हिंदी दिवस केवल एक तारीख़ नहीं है, बल्कि यह दिन हमें हमारी भाषा के महत्त्व और गरिमा की याद दिलाता है। यह दिन हमें यह सोचने का अवसर देता है कि हमारी मातृभाषा न केवल संचार का माध्यम है, बल्कि हमारी संव

13 अगस्त 2025

ज्ञानरंजन और उनकी ‘संगत’ के बहाने

ज्ञानरंजन और उनकी ‘संगत’ के बहाने

मैं ‘हिन्दवी’ का पुराना पाठक-दर्शक हूँ। ‘संगत’ का जब पहला एपिसोड आया, तब मैं बहुत ख़ुश हुआ था। ‘संगत’ के उस एपिसोड के माध्यम से, कवि आलोकधन्वा को मैं पहली बार सुन रहा था। उनका कविता-संग्रह ‘दुनिया रो

01 अगस्त 2025

प्रेमचंद-जयंती पर इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में प्रेमचंद की कहानियों की नाट्य-प्रस्तुति

प्रेमचंद-जयंती पर इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में प्रेमचंद की कहानियों की नाट्य-प्रस्तुति

इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा विभाग ने प्रेमचंद-जयंती के अवसर पर 31 जुलाई 2025 को एक विशेष नाट्य कार्यक्रम ‘नाट्य पाठ 5.0’ का आयोजन किया। यह आयोजन विश्वविद्यालय के यूनिवर्सिट

28 जुलाई 2025

तमाशे के पार : हिंदी साहित्य की नई पीढ़ी और एक लेखक की आश्वस्ति

तमाशे के पार : हिंदी साहित्य की नई पीढ़ी और एक लेखक की आश्वस्ति

इन दिनों साहित्य की दुनिया किसी मेले की तरह लगती है—शब्दों का मेला नहीं, विवादों और आक्षेपों का मेला। सोशल मीडिया की स्क्रॉलिंग करते हुए रोज़ किसी न किसी ‘साहित्यिक’ विवाद से साबका पड़ता है। लोग द

25 जुलाई 2025

मृदुला गर्ग : सादगी, गहराई और ईमानदारी

मृदुला गर्ग : सादगी, गहराई और ईमानदारी

मेरी औरतों ने कभी अपराधबोध नहीं महसूस किया। इससे लोगों को ठेस पहुँची। मेरा स्त्रीवाद यह नहीं कहता कि सब एक जैसी हों—मेरा विश्वास है कि हर औरत का अलग होना ही उसकी अस्ल पहचान है। —मृदुला गर्ग, ‘द हि

24 जुलाई 2025

राहगीर : हिंदी कविता-संगीत का रॉकस्टार

राहगीर : हिंदी कविता-संगीत का रॉकस्टार

बीसवीं सदी के तीसरे और चौथे दशक में जब अमेरिका महामंदी और डस्ट बॉउल (धूलभरी आँधी) से जूझ रहा था, उस समय होबो (घुमक्कड़ मज़दूर)—रोज़गार की खोज में मालगाड़ियों में सवार होकर मुफ़्त में यात्रा करते थे। यात्र

23 जुलाई 2025

अशोक वाजपेयी : सच्चाई के रूपक

अशोक वाजपेयी : सच्चाई के रूपक

समादृत कवि-आलोचक और कला-प्रशासक अशोक वाजपेयी इस बार के ‘हिन्दवी उत्सव’ में कविता-पाठ के लिए आमंत्रित हैं। यहाँ प्रस्तुत है—उनके द्वारा बोले-लिखे जा रहे आत्म-वृत्तांत से कुछ अंश। ये अंश अशोक वाजपेयी औ

19 जुलाई 2025

‘संगत’ के सौ एपिसोड हुए पूरे, हो रही है ख़ूब चर्चा

‘संगत’ के सौ एपिसोड हुए पूरे, हो रही है ख़ूब चर्चा

हिंदी भाषा और साहित्य को समर्पित ‘हिन्दवी’ ने साहित्य-संस्कृति-संसार के समादृत-सम्मानित-सुपरिचित व्यक्तित्वों के वीडियो साक्षात्कार की सीरीज़—‘संगत’—की शुरुआत 30 दिसंबर 2022 को की थी। इस सीरीज़ के अंतर

18 जुलाई 2025

वोटिंग-विचार पर कुछ विचार

वोटिंग-विचार पर कुछ विचार

प्रतियोगिताएँ, पुरस्कार और सूचियाँ हमेशा से संदिग्ध रही हैं। प्रतियोगिताओं में कोई भी निर्णय अंतिम निर्णय नहीं होता, बावजूद इसके कोई भी काव्य-प्रतियोगिता इस अर्थ में कविता के हक़ में होती है कि कविता

17 जुलाई 2025

‘ऑल इंडिया कैंपस कविता’ के निर्णायक

‘ऑल इंडिया कैंपस कविता’ के निर्णायक

‘हिन्दवी उत्सव’ [रविवार, 27 जुलाई 2025, सीरी फ़ोर्ट ऑडिटोरियम, नई दिल्ली] में आयोजित होने जा रही ‘ऑल इंडिया कैंपस कविता’ प्रतियोगिता अब अपने निर्णायक पड़ाव की ओर बढ़ रही है। यह प्रतियोगिता देश भर के