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हिंदी साहित्य पर बेला

07 अगस्त 2026

वासुदेव शरण अग्रवाल : विंध्य से लेकर हिमालय तक का जनपद हमें पुकार रहा है

वासुदेव शरण अग्रवाल : विंध्य से लेकर हिमालय तक का जनपद हमें पुकार रहा है

कपिला वात्स्यायन ने कहा था कि शब्द उनकी लाठी थे। वह उसका एक सिरा पकड़कर ही भारतीय ज्ञान-परंपरा की गहराइयों में प्रवेश कर

01 अगस्त 2026

‘मसिजीवी होना तो भूखे मरना है’

‘मसिजीवी होना तो भूखे मरना है’

खिड़की के सीखचों पर फड़फड़ाते हुए कबूतर आकर बैठते हैं और फिर उड़ जाते हैं। यह जोधपुर में अप्रैल-2019 की एक दुपहर है—इ

31 जुलाई 2026

अपने-अपने झोले : अपने-अपने प्रेमचंद

अपने-अपने झोले : अपने-अपने प्रेमचंद

फिर इलाहाबाद। तारीख़ें 22, 23, 24 और 25 फ़रवरी। चुनी हुई जगह—हिंदुस्तानी अकादेमी का सभागार, सन् 1981 वे अपनी बलिष्ठ भ

31 जुलाई 2026

मास्टर की अरथी नहीं थी, आशिक़ का जनाज़ा था

मास्टर की अरथी नहीं थी, आशिक़ का जनाज़ा था

जीवन मुश्किल चीज़ है—तिस पर हिंदी-लेखक की ज़िंदगी—जिसके माथे पर रचना की राह चलकर शहीद हुए पुरखे लेखक की चिता की राख लगी हु

28 जुलाई 2026

नामवर सिंह की आलोचना-यात्रा : वैचारिक विकास और सैद्धांतिक हस्तक्षेप

नामवर सिंह की आलोचना-यात्रा : वैचारिक विकास और सैद्धांतिक हस्तक्षेप

हिंदी आलोचना के वृहत् परिदृश्य में नामवर सिंह की उपस्थिति एक ऐसे मील के पत्थर की तरह है, जिनका व्यक्तित्व और कृतित्व दोन

28 जुलाई 2026

धारावाहिक उपन्यास : जंकामंका गैंग : हिंदी में निर्लज्जता की परंपरा

धारावाहिक उपन्यास : जंकामंका गैंग : हिंदी में निर्लज्जता की परंपरा

गताध्याय से आगे... पाँच  दोस्ती के बारे में कई ज्योतिषियों ने दो बातें बताईं। पहली बात यह कि इस कलिकाल में सच्ची म

07 जून 2026

रविवासरीय 4.0 : एक हिंदी लेखक की ज़िंदगी

रविवासरीय 4.0 : एक हिंदी लेखक की ज़िंदगी

• एक हिंदी लेखक के जीवन की सुबह सूचनाओं से और रात उपन्यास से होती है। वह दुपहर से शाम तक ख़राब सिनेमा के असर में रहता है।

06 मई 2026

‘अर्थात्’ की छठी कड़ी : प्रगतिवाद पर बात

‘अर्थात्’ की छठी कड़ी : प्रगतिवाद पर बात

चैत्र में बसंत के उनींदे से जागा ग्रीष्म वैशाख में अपना वैभव खोजता है। दुपहरें अपनी दीर्घता से ऊबकर अलसाती हैं और निस्पं

02 अप्रैल 2026

गद्य होती कविता, थकता हुआ कवि

गद्य होती कविता, थकता हुआ कवि

जिस दौरान नवंबर बीत रहा था, उसी दौरान घर में एक नया जीवन उतर रहा था। मेरा मन हर घड़ी लगभग बैठा जाता था। लगभग घंटे दो घंटे

15 मार्च 2026

रविवासरीय 4.0 : सुरेन्द्र मोहन पाठक के ख़िलाफ़

रविवासरीय 4.0 : सुरेन्द्र मोहन पाठक के ख़िलाफ़

• एक ख़ाकसार मनुष्य के एक ख़ाकसार पुल पर एक ख़ाकसार उपन्यासकार से गए सोमवार टकराना हुआ। ख़ाकसार उपन्यासकार काफ़ी लोकप्रिय

07 मार्च 2026

‘नई सृष्टि नई स्त्री’ की छठी सूची

‘नई सृष्टि नई स्त्री’ की छठी सूची

वर्ष 2021 में हमने हिन्दवी पर नई सृष्टि नई स्त्री के अंतर्गत ऐसी 21 नई स्त्री-कवियों की कविताएँ प्रस्तुत कीं, जिन्होंने

03 मार्च 2026

दैनिक भास्कर लेकर आया है कविता-प्रतियोगिता

दैनिक भास्कर लेकर आया है कविता-प्रतियोगिता

आगामी 21 मार्च को विश्व कविता दिवस के उपलक्ष्य में ‘दैनिक भास्कर’ एक विशेष पहल के रूप में ‘कविता उत्सव’ का आयोजन कर रहा

29 जनवरी 2026

चेतना के दस द्वीप : प्रयागराज की साहित्यिक विरासत और प्रतिरोध की गूँज

चेतना के दस द्वीप : प्रयागराज की साहित्यिक विरासत और प्रतिरोध की गूँज

वरिष्ठ कवि हरिशचंद्र पांडे की अध्यक्षता में मंगलवार, 27 जनवरी को चौधरी महादेव प्रसाद महाविद्यालय (सीएमपी डिग्री कॉलेज),

27 जनवरी 2026

नए साल की रात, 'पहल' की विरासत और अजित पुष्कल की स्मृतियाँ

नए साल की रात, 'पहल' की विरासत और अजित पुष्कल की स्मृतियाँ

शाम के सात बज चुके थे और अब इस समय पर लखनऊ के लिए बस पकड़ने का आशय यह होता कि रात के लगभग बारह बजे के आस-पास या उससे थोड

23 जनवरी 2026

ज्ञानरंजन के मनोहर का ‘बहिर्गमन’ उर्फ़ ‘पिता’ को रुमाल की ज़रुरत है...

ज्ञानरंजन के मनोहर का ‘बहिर्गमन’ उर्फ़ ‘पिता’ को रुमाल की ज़रुरत है...

नौ दशक का एक सुदीर्घ और शानदार जीवन जीकर ज्ञानरंजन हमें छोड़ कर चले गए। वह मनोहर की तरह प्रस्थान करते हुए रुमाल हिला रहे

22 जनवरी 2026

फिर भी : कमलेश्वर की लिखी एक दुर्लभ फ़िल्म

फिर भी : कमलेश्वर की लिखी एक दुर्लभ फ़िल्म

पापा, क्यों सब लोग मिलकर; मुझे तुमसे अलग करना चाहते हैं? मुझे और पुरुषों से कुछ भी लेना-देना नहीं है। अगर तुम मेरे साथ न

16 जनवरी 2026

छंद-छंद पर कुमकुम : समकालीन छंदबद्ध कविता का विशेष आयोजन

छंद-छंद पर कुमकुम : समकालीन छंदबद्ध कविता का विशेष आयोजन

समकालीन कविता के परिदृश्य में जहाँ मुक्तछंद की उपस्थिति व्यापक है; वहीं छंदबद्ध कविता आज भी अपनी लय, अनुशासन और संगीतात्

16 जनवरी 2026

विष्णु खरे के इर्द-गिर्द

विष्णु खरे के इर्द-गिर्द

समादृत कवि-आलोचक और कला-प्रशासक अशोक वाजपेयी आज 86वें वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं। उन्हें शुभकामनाएँ देते हुए यहाँ प्रस्त

15 जनवरी 2026

रघुवर प्रसाद और सोनसी की दुनिया का रचयिता

रघुवर प्रसाद और सोनसी की दुनिया का रचयिता

1 जनवरी 2026 को विनोद कुमार शुक्ल 89 वर्ष के हो जाते लेकिन उसके नौ दिन पहले ही वह इस दुनिया से चले गए। हिंदी साहित्य में

15 जनवरी 2026

गोपेश्वर सिंह की आलोचना-पद्धति के कुछ पक्ष

गोपेश्वर सिंह की आलोचना-पद्धति के कुछ पक्ष

गोपेश्वर सिंह की आलोचना-पद्धति के बारे में बात करने का यह अर्थ नहीं है कि वह शास्त्रीय या सैद्धांतिक आलोचना लिखते हैं। उ

14 जनवरी 2026

घर में है नायाब

घर में है नायाब

एक मृदुला गर्ग समकालीन हिंदी रचना-जगत् की सर्वाधिक समादृत लेखिका होने के साथ सर्वाधिक वरिष्ठ और हमारे सौभाग्य से सर्व

17 नवम्बर 2025

नई कविता और संवाद का दूसरा पड़ाव

नई कविता और संवाद का दूसरा पड़ाव

‘नई कविता’ के अनेक आयामों पर विभिन्न दृष्टिकोणों से बहस होने के बाद भी इसमें लगातार कुछ नए की तलाश बनी रहती है। इसके कें

13 नवम्बर 2025

इस बार शांतिनिकेतन में होगा ‘संगमन’

इस बार शांतिनिकेतन में होगा ‘संगमन’

वर्ष 1993 में कानपुर से शुरू हुआ रचनात्मक व बौद्धिक हस्तक्षेप के सहकारी उपक्रम ‘संगमन’ का 26वाँ आयोजन देश के विभिन्न राज

13 नवम्बर 2025

जन्मतिथि विशेष : मुक्तिबोध : आत्मा के मित्र को स्नेहांजलि

जन्मतिथि विशेष : मुक्तिबोध : आत्मा के मित्र को स्नेहांजलि

यह सभा एक बंधु के निधन पर एक कवि के अपने रचना-क्षेत्र हो उठ जाने पर, दुःख प्रकट करने और शोक-संतप्त परिवार को हम सबकी संव

02 नवम्बर 2025

कवियों के क़िस्से वाया AI

कवियों के क़िस्से वाया AI

भरतपुर की वह दुपहर साहित्य की ऊष्मा से भरी हुई थी। हवा में हल्की गर्मी थी, लेकिन सभा-गृह के भीतर विचारों की शीतल छाया पस

23 अक्तूबर 2025

सिनेमा में प्रेमचंद : साहित्य, बाज़ार और प्रतिरोध

सिनेमा में प्रेमचंद : साहित्य, बाज़ार और प्रतिरोध

“जिन हाथों में फ़िल्म की क़िस्मत है, वे बदक़िस्मती से इसे इंडस्ट्री समझ बैठे हैं। इंडस्ट्री को ‘मज़ाक़’ और इसलाह से क्या

06 अक्तूबर 2025

अगम बहै दरियाव, पाँड़े! सुगम अहै मरि जाव

अगम बहै दरियाव, पाँड़े! सुगम अहै मरि जाव

एक पहलवान कुछ न समझते हुए भी पाँड़े बाबा का मुँह ताकने लगे तो उन्होंने समझाया : अपने धर्म की व्यवस्था के अनुसार मर

04 अक्तूबर 2025

रामचंद्र शुक्ल, हिंदी शब्दसागर और नागरीप्रचारिणी सभा

रामचंद्र शुक्ल, हिंदी शब्दसागर और नागरीप्रचारिणी सभा

आज हिंदी के शीर्षस्थ आलोचक और साहित्य के इतिहासकार आचार्य रामचंद्र शुक्ल की जयंती है। काशी नागरीप्रचारिणी सभा शुक्लजी की

23 सितम्बर 2025

विनोद कुमार शुक्ल : 30 लाख क्या चीज़ है!

विनोद कुमार शुक्ल : 30 लाख क्या चीज़ है!

जनवरी, 2024 में मैंने भोपाल छोड़ दिया था। यानी मैंने अपना कमरा छोड़ दिया था। फिर आतंरिक परीक्षा और सेमेस्टर की परीक्षाओं क

13 सितम्बर 2025

हिंदी दिवस पर जागरण कनेक्ट और ‘हिन्दवी’ का विशेष आयोजन : ‘उत्सव हिन्दी का’

हिंदी दिवस पर जागरण कनेक्ट और ‘हिन्दवी’ का विशेष आयोजन : ‘उत्सव हिन्दी का’

हिंदी दिवस केवल एक तारीख़ नहीं है, बल्कि यह दिन हमें हमारी भाषा के महत्त्व और गरिमा की याद दिलाता है। यह दिन हमें यह सोच

13 अगस्त 2025

ज्ञानरंजन और उनकी ‘संगत’ के बहाने

ज्ञानरंजन और उनकी ‘संगत’ के बहाने

मैं ‘हिन्दवी’ का पुराना पाठक-दर्शक हूँ। ‘संगत’ का जब पहला एपिसोड आया, तब मैं बहुत ख़ुश हुआ था। ‘संगत’ के उस एपिसोड के मा

01 अगस्त 2025

प्रेमचंद-जयंती पर इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में प्रेमचंद की कहानियों की नाट्य-प्रस्तुति

प्रेमचंद-जयंती पर इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में प्रेमचंद की कहानियों की नाट्य-प्रस्तुति

इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा विभाग ने प्रेमचंद-जयंती के अवसर पर 31 जुलाई 2025 को एक विशेष नाट्

28 जुलाई 2025

तमाशे के पार : हिंदी साहित्य की नई पीढ़ी और एक लेखक की आश्वस्ति

तमाशे के पार : हिंदी साहित्य की नई पीढ़ी और एक लेखक की आश्वस्ति

इन दिनों साहित्य की दुनिया किसी मेले की तरह लगती है—शब्दों का मेला नहीं, विवादों और आक्षेपों का मेला। सोशल मीडिया की स्क

25 जुलाई 2025

मृदुला गर्ग : सादगी, गहराई और ईमानदारी

मृदुला गर्ग : सादगी, गहराई और ईमानदारी

मेरी औरतों ने कभी अपराधबोध नहीं महसूस किया। इससे लोगों को ठेस पहुँची। मेरा स्त्रीवाद यह नहीं कहता कि सब एक जैसी हों—मेरा

24 जुलाई 2025

राहगीर : हिंदी कविता-संगीत का रॉकस्टार

राहगीर : हिंदी कविता-संगीत का रॉकस्टार

बीसवीं सदी के तीसरे और चौथे दशक में जब अमेरिका महामंदी और डस्ट बॉउल (धूलभरी आँधी) से जूझ रहा था, उस समय होबो (घुमक्कड़ मज़

23 जुलाई 2025

अशोक वाजपेयी : सच्चाई के रूपक

अशोक वाजपेयी : सच्चाई के रूपक

समादृत कवि-आलोचक और कला-प्रशासक अशोक वाजपेयी इस बार के ‘हिन्दवी उत्सव’ में कविता-पाठ के लिए आमंत्रित हैं। यहाँ प्रस्तुत

19 जुलाई 2025

‘संगत’ के सौ एपिसोड हुए पूरे, हो रही है ख़ूब चर्चा

‘संगत’ के सौ एपिसोड हुए पूरे, हो रही है ख़ूब चर्चा

हिंदी भाषा और साहित्य को समर्पित ‘हिन्दवी’ ने साहित्य-संस्कृति-संसार के समादृत-सम्मानित-सुपरिचित व्यक्तित्वों के वीडियो

18 जुलाई 2025

वोटिंग-विचार पर कुछ विचार

वोटिंग-विचार पर कुछ विचार

प्रतियोगिताएँ, पुरस्कार और सूचियाँ हमेशा से संदिग्ध रही हैं। प्रतियोगिताओं में कोई भी निर्णय अंतिम निर्णय नहीं होता, बाव

17 जुलाई 2025

‘ऑल इंडिया कैंपस कविता’ के निर्णायक

‘ऑल इंडिया कैंपस कविता’ के निर्णायक

‘हिन्दवी उत्सव’ [रविवार, 27 जुलाई 2025, सीरी फ़ोर्ट ऑडिटोरियम, नई दिल्ली] में आयोजित होने जा रही ‘ऑल इंडिया कैंपस कविता’

14 जुलाई 2025

हिन्दवी : ‘ऑल इंडिया कैंपस कविता’-2025 की लॉन्ग-लिस्ट

हिन्दवी : ‘ऑल इंडिया कैंपस कविता’-2025 की लॉन्ग-लिस्ट

‘हिन्दवी’ ने अपने प्रयोगधर्मी व्यवहार के प्रकाश में—वर्ष 2022 के सिंतबर में—‘हिन्दवी कैंपस कविता’ की शुरुआत की थी। यह शु

06 जुलाई 2025

कवियों के क़िस्से वाया AI

कवियों के क़िस्से वाया AI

साहित्य सम्मेलन का छोटा-सा हॉल खचाखच भरा हुआ था। मंच पर हिंदी साहित्य के दो दिग्गज विराजमान थे—सूर्यकांत त्रिपाठी निराला

27 जून 2025

आचार्य शुक्ल के इतिहास के बहाने : आदिकाल के अप्रासंगिक होने पर सवाल?

आचार्य शुक्ल के इतिहास के बहाने : आदिकाल के अप्रासंगिक होने पर सवाल?

सास्त्र सुचिंतित पुनि पुनि देखिअ। —३६, अरण्यकाण्ड, श्रीरामचरितमानस तुलसी की इस पंक्ति का शीर्षक रूप में प्रयोग करते

13 अप्रैल 2025

रविवासरीय : 3.0 : ‘बुद्धि की आँखों में स्वार्थों के शीशे-सा!’

रविवासरीय : 3.0 : ‘बुद्धि की आँखों में स्वार्थों के शीशे-सा!’

• गत बुधवार ‘बेला’ के एक वर्ष पूर्ण होने पर हमने अपने उद्देश्यों, सफलताओं और योजनाओं का एक शब्दचित्र प्रस्तुत किया। इस श

09 अप्रैल 2025

आज ‘बेला’ का जन्मदिन है

आज ‘बेला’ का जन्मदिन है

आज ‘बेला’ का जन्मदिन है। गत वर्ष वे देवियों के दिन थे, जब हिन्दी और ‘हिन्दवी’ के व्यापक संसार में ‘बेला’ का प्राकट्य

12 मार्च 2025

विशाल अनुभव-सागर की एक झलक

विशाल अनुभव-सागर की एक झलक

हिंदी में लेखकों का अलग-अलग व्यक्तियों द्वारा लिया गया साक्षात्कार संकलित होकर पुस्तक के रूप में प्रकाशित होता रहा है और

10 मार्च 2025

‘गुनाहों का देवता’ से ‘रेत की मछली’ तक

‘गुनाहों का देवता’ से ‘रेत की मछली’ तक

हुए कुछ रोज़ किसी मित्र ने एक फ़ेसबुक लिंक भेजा। किसने भेजा यह तक याद नहीं। लिंक खोलने पर एक लंबा आलेख था—‘गुनाहों का दे

09 फरवरी 2025

रविवासरीय : 3.0 : ‘इन्हें कोई काश ये बता दे मकाम ऊँचा है सादगी का...’

रविवासरीय : 3.0 : ‘इन्हें कोई काश ये बता दे मकाम ऊँचा है सादगी का...’

• एक प्रकाशक को देखकर मेरे मन में सबसे पहला ख़याल यही आता है कि उससे किताब ले लूँ। यहाँ ‘किताब ले लेने’ का अर्थ एकायामी न

02 फरवरी 2025

रविवासरीय : 3.0 : हम आपके डिजिटल डिटॉक्स की कामना करते हैं

रविवासरीय : 3.0 : हम आपके डिजिटल डिटॉक्स की कामना करते हैं

• 1 फ़रवरी से 9 फ़रवरी के बीच नई दिल्ली के प्रगति मैदान [भारत मंडपम] में आयोजित विश्व पुस्तक मेले की स्थिति जानने की उत्कं

19 जनवरी 2025

रविवासरीय : 3.0 : पुष्पा-समय में एक अन्य पुष्पा की याद

रविवासरीय : 3.0 : पुष्पा-समय में एक अन्य पुष्पा की याद

• कार्ल मार्क्स अगर आज जीवित होते तो पुष्पा से संवाद छीन लेते, प्रधानसेवकों से आवाज़, रवीश कुमार से साहित्यिक समझ, हिंदी

12 जनवरी 2025

रविवासरीय : 3.0 : गद्यरक्षाविषयक

रविवासरीय : 3.0 : गद्यरक्षाविषयक

• गद्य की रक्षा करना एक गद्यकार का प्राथमिक दायित्व है। गद्यरत के गद्य की रक्षा कैसे होती है? आइए जानते हैं : गद्यरत

हिन्दवी उत्सव 2026

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