27 जनवरी 2026
नए साल की रात, 'पहल' की विरासत और अजित पुष्कल की स्मृतियाँ
शाम के सात बज चुके थे और अब इस समय पर लखनऊ के लिए बस पकड़ने का आशय यह होता कि रात के लगभग बारह बजे के आस-पास या उससे थोड़ा ज़्यादा समय पर ही लखनऊ पहुँच पाता। ऐसे में सिविल लाइंस से वापस लौटना ही सबसे
23 जनवरी 2026
ज्ञानरंजन के मनोहर का ‘बहिर्गमन’ उर्फ़ ‘पिता’ को रुमाल की ज़रुरत है...
नौ दशक का एक सुदीर्घ और शानदार जीवन जीकर ज्ञानरंजन हमें छोड़ कर चले गए। वह मनोहर की तरह प्रस्थान करते हुए रुमाल हिला रहे हैं। अपना रुमाल उमस में सोये उस ‘पिता’ को देना चाहते हैं, जो खटिया के दाएँ पाटी
22 जनवरी 2026
फिर भी : कमलेश्वर की लिखी एक दुर्लभ फ़िल्म
पापा, क्यों सब लोग मिलकर; मुझे तुमसे अलग करना चाहते हैं? मुझे और पुरुषों से कुछ भी लेना-देना नहीं है। अगर तुम मेरे साथ नहीं रह सकते तो मुझे यहाँ से इन सब लोगों से दूर कहीं और ले चलो। अब तो मम्मी अकेल
19 जनवरी 2026
शंखनाद : बुक फ़ेयर की रपटीली रपट और कवि का मेलोत्तर काल
दिल्ली के भारत मंडपम में किताबों का सालाना जलसा—विश्व पुस्तक मेला गुलज़ार रहा। भाँति-भाँति के लोग भाँति-भाँति की हरकतें करते हुए भाँति-भाँति के लोगों के साथ भाँति-भाँति की घोषणाएँ कार्यान्वित करते/स्
16 जनवरी 2026
विष्णु खरे के इर्द-गिर्द
समादृत कवि-आलोचक और कला-प्रशासक अशोक वाजपेयी आज 86वें वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं। उन्हें शुभकामनाएँ देते हुए यहाँ प्रस्तुत है—उनके द्वारा समादृत कवि-आलोचक-अनुवादक विष्णु खरे के लिए लिखा गया संस्मरणात
16 जनवरी 2026
छंद-छंद पर कुमकुम : समकालीन छंदबद्ध कविता का विशेष आयोजन
समकालीन कविता के परिदृश्य में जहाँ मुक्तछंद की उपस्थिति व्यापक है; वहीं छंदबद्ध कविता आज भी अपनी लय, अनुशासन और संगीतात्मकता के कारण पाठकों और श्रोताओं के बीच एक विशिष्ट स्थान बनाए हुए है। इसी परंपरा
15 जनवरी 2026
रघुवर प्रसाद और सोनसी की दुनिया का रचयिता
1 जनवरी 2026 को विनोद कुमार शुक्ल 89 वर्ष के हो जाते लेकिन उसके नौ दिन पहले ही वह इस दुनिया से चले गए। हिंदी साहित्य में संभवतः अज्ञेय के बाद वह गिनती के ऐसे साहित्यकारों में थे जो गद्य और पद्य दोनों
15 जनवरी 2026
गोपेश्वर सिंह की आलोचना-पद्धति के कुछ पक्ष
गोपेश्वर सिंह की आलोचना-पद्धति के बारे में बात करने का यह अर्थ नहीं है कि वह शास्त्रीय या सैद्धांतिक आलोचना लिखते हैं। उन्होंने व्यावहारिक आलोचना ही लिखी है। वह किसी साहित्य-सिद्धांत की बहस में भी प्
14 जनवरी 2026
घर में है नायाब
एक मृदुला गर्ग समकालीन हिंदी रचना-जगत् की सर्वाधिक समादृत लेखिका होने के साथ सर्वाधिक वरिष्ठ और हमारे सौभाग्य से सर्वाधिक सक्रिय रचनाकारों में से हैं—वह उन विरले लेखकों में से हैं जिन्होंने मिर्ज़
05 जनवरी 2026
शंखनाद : बुक फ़ेयर के लिए मुखौटे...
जनवरी में होने वाली बुक फ़ेयर की आहट के बीच कई-कई यूनीसेक्स सैलूनों, ब्यूटीपार्लरों और स्पाओं में बुक फ़ेयर के लिए स्पेशल ऑफ़र देख, पढ़ और सुनकर चकित रह गया। साथ ही अपने मानसिक पिछड़ेपन पर रोना आया।
17 नवम्बर 2025
नई कविता और संवाद का दूसरा पड़ाव
‘नई कविता’ के अनेक आयामों पर विभिन्न दृष्टिकोणों से बहस होने के बाद भी इसमें लगातार कुछ नए की तलाश बनी रहती है। इसके केंद्र में ‘मुक्तिबोध’ या ‘अज्ञेय’ की बाइनरी को भी प्रश्नांकित किया जाता रहेगा। इस
13 नवम्बर 2025
इस बार शांतिनिकेतन में होगा ‘संगमन’
वर्ष 1993 में कानपुर से शुरू हुआ रचनात्मक व बौद्धिक हस्तक्षेप के सहकारी उपक्रम ‘संगमन’ का 26वाँ आयोजन देश के विभिन्न राज्यों से गुज़रता हुआ इस बार शांतिनिकेतन (पश्चिम बंगाल) में हो रहा है। तारीख़ें हैं
13 नवम्बर 2025
जन्मतिथि विशेष : मुक्तिबोध : आत्मा के मित्र को स्नेहांजलि
यह सभा एक बंधु के निधन पर एक कवि के अपने रचना-क्षेत्र हो उठ जाने पर, दुःख प्रकट करने और शोक-संतप्त परिवार को हम सबकी संवेदना पहुँचाने के लिए एकत्र हुई है। बंधु की स्मृति से अभिभूत हो जाना स्वाभाविक ह
02 नवम्बर 2025
कवियों के क़िस्से वाया AI
भरतपुर की वह दुपहर साहित्य की ऊष्मा से भरी हुई थी। हवा में हल्की गर्मी थी, लेकिन सभा-गृह के भीतर विचारों की शीतल छाया पसरी हुई थी। देश का स्वतंत्रता-संग्राम अपने चरम पर था और साहित्यकार इस संघर्ष के
23 अक्तूबर 2025
सिनेमा में प्रेमचंद : साहित्य, बाज़ार और प्रतिरोध
“जिन हाथों में फ़िल्म की क़िस्मत है, वे बदक़िस्मती से इसे इंडस्ट्री समझ बैठे हैं। इंडस्ट्री को ‘मज़ाक़’ और इसलाह से क्या निस्बत? वह तो एक्सप्लायट करना जानती है और यहाँ इंसान के मुक़द्दसतरीन (पवित्रतम
06 अक्तूबर 2025
अगम बहै दरियाव, पाँड़े! सुगम अहै मरि जाव
एक पहलवान कुछ न समझते हुए भी पाँड़े बाबा का मुँह ताकने लगे तो उन्होंने समझाया : अपने धर्म की व्यवस्था के अनुसार मरने के तेरह दिन बाद तक, जब तक तेरही नहीं हो जाती, जीव मुक्त रहता है। फिर कहीं न
04 अक्तूबर 2025
रामचंद्र शुक्ल, हिंदी शब्दसागर और नागरीप्रचारिणी सभा
आज हिंदी के शीर्षस्थ आलोचक और साहित्य के इतिहासकार आचार्य रामचंद्र शुक्ल की जयंती है। काशी नागरीप्रचारिणी सभा शुक्लजी की आलोचना की जन्मभूमि है। 1908 से 1930—लगातार 28 वर्षों तक वह ‘सभा’ की ऐतिहासिक प
23 सितम्बर 2025
विनोद कुमार शुक्ल : 30 लाख क्या चीज़ है!
जनवरी, 2024 में मैंने भोपाल छोड़ दिया था। यानी मैंने अपना कमरा छोड़ दिया था। फिर आतंरिक परीक्षा और सेमेस्टर की परीक्षाओं के लिए जाना भी होता तो कुछ दोस्तों के घर रुकता। मैं उनके यहाँ जब पहुँचा तो पाया
13 सितम्बर 2025
हिंदी दिवस पर जागरण कनेक्ट और ‘हिन्दवी’ का विशेष आयोजन : ‘उत्सव हिन्दी का’
हिंदी दिवस केवल एक तारीख़ नहीं है, बल्कि यह दिन हमें हमारी भाषा के महत्त्व और गरिमा की याद दिलाता है। यह दिन हमें यह सोचने का अवसर देता है कि हमारी मातृभाषा न केवल संचार का माध्यम है, बल्कि हमारी संव
13 अगस्त 2025
ज्ञानरंजन और उनकी ‘संगत’ के बहाने
मैं ‘हिन्दवी’ का पुराना पाठक-दर्शक हूँ। ‘संगत’ का जब पहला एपिसोड आया, तब मैं बहुत ख़ुश हुआ था। ‘संगत’ के उस एपिसोड के माध्यम से, कवि आलोकधन्वा को मैं पहली बार सुन रहा था। उनका कविता-संग्रह ‘दुनिया रो
01 अगस्त 2025
प्रेमचंद-जयंती पर इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में प्रेमचंद की कहानियों की नाट्य-प्रस्तुति
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा विभाग ने प्रेमचंद-जयंती के अवसर पर 31 जुलाई 2025 को एक विशेष नाट्य कार्यक्रम ‘नाट्य पाठ 5.0’ का आयोजन किया। यह आयोजन विश्वविद्यालय के यूनिवर्सिट
28 जुलाई 2025
तमाशे के पार : हिंदी साहित्य की नई पीढ़ी और एक लेखक की आश्वस्ति
इन दिनों साहित्य की दुनिया किसी मेले की तरह लगती है—शब्दों का मेला नहीं, विवादों और आक्षेपों का मेला। सोशल मीडिया की स्क्रॉलिंग करते हुए रोज़ किसी न किसी ‘साहित्यिक’ विवाद से साबका पड़ता है। लोग द
25 जुलाई 2025
मृदुला गर्ग : सादगी, गहराई और ईमानदारी
मेरी औरतों ने कभी अपराधबोध नहीं महसूस किया। इससे लोगों को ठेस पहुँची। मेरा स्त्रीवाद यह नहीं कहता कि सब एक जैसी हों—मेरा विश्वास है कि हर औरत का अलग होना ही उसकी अस्ल पहचान है। —मृदुला गर्ग, ‘द हि
24 जुलाई 2025
राहगीर : हिंदी कविता-संगीत का रॉकस्टार
बीसवीं सदी के तीसरे और चौथे दशक में जब अमेरिका महामंदी और डस्ट बॉउल (धूलभरी आँधी) से जूझ रहा था, उस समय होबो (घुमक्कड़ मज़दूर)—रोज़गार की खोज में मालगाड़ियों में सवार होकर मुफ़्त में यात्रा करते थे। यात्र
23 जुलाई 2025
अशोक वाजपेयी : सच्चाई के रूपक
समादृत कवि-आलोचक और कला-प्रशासक अशोक वाजपेयी इस बार के ‘हिन्दवी उत्सव’ में कविता-पाठ के लिए आमंत्रित हैं। यहाँ प्रस्तुत है—उनके द्वारा बोले-लिखे जा रहे आत्म-वृत्तांत से कुछ अंश। ये अंश अशोक वाजपेयी औ
19 जुलाई 2025
‘संगत’ के सौ एपिसोड हुए पूरे, हो रही है ख़ूब चर्चा
हिंदी भाषा और साहित्य को समर्पित ‘हिन्दवी’ ने साहित्य-संस्कृति-संसार के समादृत-सम्मानित-सुपरिचित व्यक्तित्वों के वीडियो साक्षात्कार की सीरीज़—‘संगत’—की शुरुआत 30 दिसंबर 2022 को की थी। इस सीरीज़ के अंतर
18 जुलाई 2025
वोटिंग-विचार पर कुछ विचार
प्रतियोगिताएँ, पुरस्कार और सूचियाँ हमेशा से संदिग्ध रही हैं। प्रतियोगिताओं में कोई भी निर्णय अंतिम निर्णय नहीं होता, बावजूद इसके कोई भी काव्य-प्रतियोगिता इस अर्थ में कविता के हक़ में होती है कि कविता
17 जुलाई 2025
‘ऑल इंडिया कैंपस कविता’ के निर्णायक
‘हिन्दवी उत्सव’ [रविवार, 27 जुलाई 2025, सीरी फ़ोर्ट ऑडिटोरियम, नई दिल्ली] में आयोजित होने जा रही ‘ऑल इंडिया कैंपस कविता’ प्रतियोगिता अब अपने निर्णायक पड़ाव की ओर बढ़ रही है। यह प्रतियोगिता देश भर के
14 जुलाई 2025
हिन्दवी : ‘ऑल इंडिया कैंपस कविता’-2025 की लॉन्ग-लिस्ट
‘हिन्दवी’ ने अपने प्रयोगधर्मी व्यवहार के प्रकाश में—वर्ष 2022 के सिंतबर में—‘हिन्दवी कैंपस कविता’ की शुरुआत की थी। यह शुरुआत इलाहाबाद विश्वविद्यालय [हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा विभाग] के साथ हुई। इस
कवियों के क़िस्से वाया AI
साहित्य सम्मेलन का छोटा-सा हॉल खचाखच भरा हुआ था। मंच पर हिंदी साहित्य के दो दिग्गज विराजमान थे—सूर्यकांत त्रिपाठी निराला और तत्कालीन नई पीढ़ी के लेखक निर्मल वर्मा। सामने बैठे श्रोताओं की आँखों में चमक
27 जून 2025
आचार्य शुक्ल के इतिहास के बहाने : आदिकाल के अप्रासंगिक होने पर सवाल?
सास्त्र सुचिंतित पुनि पुनि देखिअ। —३६, अरण्यकाण्ड, श्रीरामचरितमानस तुलसी की इस पंक्ति का शीर्षक रूप में प्रयोग करते हुए ‘नागरीप्रचारिणी सभा’ द्वारा आचार्य रामचंद्र शुक्ल के पुनर्संस्कारित इतिहास
30 मई 2025
मास्टर की अरथी नहीं थी, आशिक़ का जनाज़ा था
जीवन मुश्किल चीज़ है—तिस पर हिंदी-लेखक की ज़िंदगी—जिसके माथे पर रचना की राह चलकर शहीद हुए पुरखे लेखक की चिता की राख लगी हुई है। यों, आने वाले लेखक का मस्तक राख से साँवला है। पानी, पसीने या ख़ून से धुलकर
13 अप्रैल 2025
रविवासरीय : 3.0 : ‘बुद्धि की आँखों में स्वार्थों के शीशे-सा!’
• गत बुधवार ‘बेला’ के एक वर्ष पूर्ण होने पर हमने अपने उद्देश्यों, सफलताओं और योजनाओं का एक शब्दचित्र प्रस्तुत किया। इस शब्दचित्र में आत्मप्रचार और आभार की सम्मिलित शैली में हमने लगभग अपना ही प्रशस्ति
09 अप्रैल 2025
आज ‘बेला’ का जन्मदिन है
आज ‘बेला’ का जन्मदिन है। गत वर्ष वे देवियों के दिन थे, जब हिन्दी और ‘हिन्दवी’ के व्यापक संसार में ‘बेला’ का प्राकट्य हुआ था। देवियों की उपस्थिति और कला—रूप और कथ्य दोनों ही स्तरों पर—अत्यंत समृद्ध
12 मार्च 2025
विशाल अनुभव-सागर की एक झलक
हिंदी में लेखकों का अलग-अलग व्यक्तियों द्वारा लिया गया साक्षात्कार संकलित होकर पुस्तक के रूप में प्रकाशित होता रहा है और ऐसी पुस्तकों की संख्या भी अच्छी-ख़ासी (एक प्रकाशक ने तो ऐसे ‘साक्षात्कार’ की प
10 मार्च 2025
‘गुनाहों का देवता’ से ‘रेत की मछली’ तक
हुए कुछ रोज़ किसी मित्र ने एक फ़ेसबुक लिंक भेजा। किसने भेजा यह तक याद नहीं। लिंक खोलने पर एक लंबा आलेख था—‘गुनाहों का देवता’, धर्मवीर भारती के कालजयी उपन्यास की धज्जियाँ उड़ाता हुआ, चन्दर और उसके चरित
09 फरवरी 2025
रविवासरीय : 3.0 : ‘इन्हें कोई काश ये बता दे मकाम ऊँचा है सादगी का...’
• एक प्रकाशक को देखकर मेरे मन में सबसे पहला ख़याल यही आता है कि उससे किताब ले लूँ। यहाँ ‘किताब ले लेने’ का अर्थ एकायामी नहीं है। • हिंदी के साहित्यिक प्रकाशकों के विषय में जो बात सबसे ज़्यादा परेशा
02 फरवरी 2025
रविवासरीय : 3.0 : हम आपके डिजिटल डिटॉक्स की कामना करते हैं
• 1 फ़रवरी से 9 फ़रवरी के बीच नई दिल्ली के प्रगति मैदान [भारत मंडपम] में आयोजित विश्व पुस्तक मेले की स्थिति जानने की उत्कंठा जैसे आप सबको है, वैसे ही धृतराष्ट्र को भी है। वह अपनी इस आकांक्षा की पूर्ति
19 जनवरी 2025
रविवासरीय : 3.0 : पुष्पा-समय में एक अन्य पुष्पा की याद
• कार्ल मार्क्स अगर आज जीवित होते तो पुष्पा से संवाद छीन लेते, प्रधानसेवकों से आवाज़, रवीश कुमार से साहित्यिक समझ, हिंदी के सारे साहित्यकारों से फ़ेसबुक और मार्क ज़ुकरबर्ग से मस्तिष्क... • मुझे याद आ
12 जनवरी 2025
रविवासरीय : 3.0 : गद्यरक्षाविषयक
• गद्य की रक्षा करना एक गद्यकार का प्राथमिक दायित्व है। गद्यरत के गद्य की रक्षा कैसे होती है? आइए जानते हैं : गद्यरत जब प्रकाश पर रचे; तब चाहे कि प्रकाश के जितने भी संभव-असंभव आयाम हैं, वे सब व्यक
11 दिसम्बर 2024
'ऐसे भी तो संभव है मृत्यु'
‘वनिका’ एक कमज़ोर उपन्यास है, जब मैं कमज़ोर कह रहा हूँ तो इसका यह मतलब नहीं कि यह एक ख़राब या सतही क़िस्म का कोई उपन्यास है। इसे इस तरह देखना चाहिए कि लवली गोस्वामी जो मेरी नज़र में बुनियादी तौर पर एक कवि
14 सितम्बर 2024
हिंदी दिवस पर जानिए हिंदी साहित्य कहाँ से शुरू करें
हिंदी साहित्य कहाँ से शुरू करें? यह प्रश्न कोई भी कर सकता है, बशर्ते वह हिंदी भाषा और उसके साहित्य में दिलचस्पी रखता हो; लेकिन प्राय: यह प्रश्न किशोरों और नवयुवकों की तरफ़ से ही आता है। यहाँ इस प्रश्न