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इतिहास पर बेला

09 जून 2026

ब्लैक होल्स की द्विअर्थी दुनिया

ब्लैक होल्स की द्विअर्थी दुनिया

स्टीफ़न हॉकिंग के ब्लैक होल पर दिए इस लेक्चर (2016 BBC Reith Lectures on black holes) को पढ़ते-पढ़ते एक शहर से दूसरी सहर में आ गए। ‘नव भारत’ की ट्रेनों में मिलने वाले रोटीनुमा या परांठानुमा या रोटी औ

29 मई 2026

जगह-जगह 2.0 : न मैं हिंदी शहर नगौरी

जगह-जगह 2.0 : न मैं हिंदी शहर नगौरी

भाषा-विज्ञान में व्युत्पत्ति-भ्रांति का अर्थ है कि किसी शब्द के प्राचीनतम अर्थ को ही उसका ‘सही’ अर्थ मानने पर ज़ोर दिया जाए और उसके वर्तमान इस्तेमाल को रद्द करके उसे उसके मूल प्रयोग, प्राचीन अर्थ और स

25 मई 2026

सुनील दत्त की मानवीय विरासत

सुनील दत्त की मानवीय विरासत

20 अक्तूबर 2001 को दत्त साहब (सुनील दत्त) से उनके ऑफ़िस में मिलने का मौक़ा मिला। शुरुआत में हमारी मुलाक़ात का वक़्त केवल 20 मिनट तय हुआ था, लेकिन जब उन्हें पता चला कि मैं पश्चिमी पंजाब से आया हूँ, तो

19 मार्च 2026

पथेर पांचाली : हाशिए पर खड़े जीवन की कथा

पथेर पांचाली : हाशिए पर खड़े जीवन की कथा

मैंने हाल में ‘पथेर पांचाली’ उपन्यास पढ़ा। यह मेरा क़ुबूलनामा है कि इससे पहले बंगाली साहित्य के नाम पर मैंने केवल रवींद्रनाथ ठाकुर की ‘गीतांजलि’ का हिंदी अनुवाद पढ़ा था। यहाँ आपका अंदाज़ा सही है कि बं

16 फरवरी 2026

छोटी नदियों का बड़ा शोक

छोटी नदियों का बड़ा शोक

यदि कविता, साहित्य की प्राचीनतम विधा है तो यह भी सही है कि शायद ही ऐसा कोई कवि होगा जो अपने साहित्यिक जीवन में नदी पर कविता न लिखे। ऋग्वेद तो कविता की सबसे प्राचीनतम किताब है और उसमें नदियों के विवरण

30 जनवरी 2026

एक हिंदू द्वारा गांधी की हत्या; भारत स्तब्ध, विश्व शोकमग्न

एक हिंदू द्वारा गांधी की हत्या; भारत स्तब्ध, विश्व शोकमग्न

महात्मा गांधी की हत्या पर ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ की रिपोर्ट नई दिल्ली, 30 जनवरी 1948 : मोहनदास के. गांधी आज एक हत्यारे की गोली से मारे गए। हत्यारा एक हिंदू व्यक्ति था, जिसने तीन फ़ीट की दूरी से पिस्

26 जनवरी 2026

असहमति की परंपरा और भारत का विचार

असहमति की परंपरा और भारत का विचार

सर-ज़मीन-ए-हिंद पर अक़्वाम-ए-आलम के ‘फ़िराक़’ क़ाफ़िले बसते गए हिन्दोस्ताँ बनता गया रघुपति सहाय ‘फ़िराक़’ का यह शेर वर्षों से पढ़ा जा रहा है। शायद इससे बेहतर भारत होने की यात्रा इतने कम शब्दों मे

26 नवम्बर 2025

एशेज : क्रिकेट का इतिहास गढ़ने वाली सीरीज़

एशेज : क्रिकेट का इतिहास गढ़ने वाली सीरीज़

ऑपरेशन सिंदूर का समय था, भारत के आर्म्ड फ़ोर्सेस की तरफ़ से शाम को रोज़ प्रेस कांफ़्रेंस हो रही थी। इसी प्रेस कांफ़्रेंस के क्रम में एक दिन मीडिया से मुख़ातिब होने एयर फोर्स के बी.आर. घई आए। उन्होंने

09 नवम्बर 2025

इक़बाल : विरोधाभासों से भरा एक राजनीतिज्ञ

इक़बाल : विरोधाभासों से भरा एक राजनीतिज्ञ

इक़बाल एक महान् कवि थे, इक़बाल एक महान् दार्शनिक थे, इक़बाल एक महान् चिंतक थे, इक़बाल एक महान् मुस्लिम थे आदि-आदि। इक़बाल के बारे में हम ज़्यादातर यही सुनते आए हैं। इक़बाल जो भी हैं महान् हैं। महान्

21 सितम्बर 2025

माइथोलॉजी : देवदत्त पटनायक और उनका रचना संसार

माइथोलॉजी : देवदत्त पटनायक और उनका रचना संसार

पटनायक ग्रीक मिथकों को भारतीय परिप्रेक्ष्य में देखना जानते हैं, और उनकी सबसे बड़ी ख़ूबसूरती यह है कि वह बहुत सरल ढंग से कहते हैं। तब यह बात और दिलचस्प हो जाती है, जब ये सब कहते हुए वह अपना भारतीय होन

17 सितम्बर 2025

चंद्रशेखर आज़ाद की डायरी

चंद्रशेखर आज़ाद की डायरी

[1925-26 का दौर था। काकोरी कांड के बाद हुई धड़-पकड़ में, अधिकांश क्रांतिकारी अँग्रेज़ों की गिरफ़्त में आ चुके थे। चंद्रशेखर परंतु ‘आज़ाद’ थे। पुलिस उनको न पकड़ सकी थी। काकोरी ट्रेन एक्शन जब अपने सौंवें वर्

27 जून 2025

आचार्य शुक्ल के इतिहास के बहाने : आदिकाल के अप्रासंगिक होने पर सवाल?

आचार्य शुक्ल के इतिहास के बहाने : आदिकाल के अप्रासंगिक होने पर सवाल?

सास्त्र सुचिंतित पुनि पुनि देखिअ। —३६, अरण्यकाण्ड, श्रीरामचरितमानस तुलसी की इस पंक्ति का शीर्षक रूप में प्रयोग करते हुए ‘नागरीप्रचारिणी सभा’ द्वारा आचार्य रामचंद्र शुक्ल के पुनर्संस्कारित इतिहास

21 जून 2025

नेहरू के पहले अफ़सर : स्वतंत्र भारत की विदेश नीति के निर्माता राजनयिक

नेहरू के पहले अफ़सर : स्वतंत्र भारत की विदेश नीति के निर्माता राजनयिक

यदि सरदार पटेल को भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) का संरक्षक माना जाए, तो राजनयिक दल के संदर्भ में वही उपाधि नेहरू पर भी लागू होती है। तथ्य यह है कि जहाँ IAS के पहले बैच की भर्ती स्वतंत्रता से पहले ही हो

16 जून 2025

औरंगज़ेब का घरेलू नाम नवरंग बिहारी था

औरंगज़ेब का घरेलू नाम नवरंग बिहारी था

लेख से पहले चंद शब्द कुछ दिन पहले अपने पुराने काग़ज़ात उलट-पलट रही थी कि एक विलक्षण लेख हाथ आया। पंडित वाहिद काज़मी का लिखा—हेडलाइन प्लस, जुलाई 2003 में प्रकाशित। शीर्षक पढ़कर ही झुरझुरी आ गई। एक स

30 मई 2025

मास्टर की अरथी नहीं थी, आशिक़ का जनाज़ा था

मास्टर की अरथी नहीं थी, आशिक़ का जनाज़ा था

जीवन मुश्किल चीज़ है—तिस पर हिंदी-लेखक की ज़िंदगी—जिसके माथे पर रचना की राह चलकर शहीद हुए पुरखे लेखक की चिता की राख लगी हुई है। यों, आने वाले लेखक का मस्तक राख से साँवला है। पानी, पसीने या ख़ून से धुलकर

02 मई 2025

उर्दू में हिंदू-धर्म का प्रचार-प्रसार : कुछ उदाहरण

उर्दू में हिंदू-धर्म का प्रचार-प्रसार : कुछ उदाहरण

ये लेख मूलतः एक किताब पर आधारित है। उस किताब में दी गई जानकारियों को यहाँ संक्षेप में प्रस्तुत किया जा रहा है। ऐसा दो-तीन कारणों से किया जा रहा है। एक तो ये कि वो किताब उर्दू में है, इसलिए हिंदी-पाठक

06 जनवरी 2025

सिंधियों की पीड़ा का बयान

सिंधियों की पीड़ा का बयान

चलना जीवन है और चलते जाना इंसान होने की नियति है। समाजशास्त्र की मूल स्थापना है कि मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। ‘सिमसिम’ के मुख्य पात्र के जीवन की कोख कहानी और उससे निर्मित स्वचेतना से लेखक पाता है क

26 दिसम्बर 2024

जातिगत गर्व और समानता का संघर्ष

जातिगत गर्व और समानता का संघर्ष

पत्रकार और अध्येता मनोज मिट्टा की तीसरी किताब ‘कास्ट प्राइड : बैटल फ़ॉर इक्वलिटी इन हिंदू इंडिया’ अप्रैल 2023 में प्रकाशित हुई है। इससे पहले उन्होंने 1984 के सिख विरोधी जनसंहार पर ‘When A Tree Shook D

15 दिसम्बर 2024

व्यक्ति से प्रकाश-स्तंभ बनने की यात्रा

व्यक्ति से प्रकाश-स्तंभ बनने की यात्रा

विचारहीनता ने आज जिस प्रकार तमाम राजनीतिक-सांस्कृतिक-साहित्यिक परिदृश्य को अपनी गिरफ़्त में ले लिया है, और भावनाओं के उकसावे को ही वैचारिक ताक़त का नाम दिया जाने लगा है, उससे यह बात और ज़्यादा पुष्ट होत

14 दिसम्बर 2024

नागरीप्रचारिणी सभा की मनोरंजन पुस्तकमाला

नागरीप्रचारिणी सभा की मनोरंजन पुस्तकमाला

अँग्रेज़ी की प्रसिद्ध पुस्तक के इस शीर्षक ने हिंदी में उस महान् मुहावरे को जन्म दिया; जिसके शब्द हैं : सादा जीवन उच्च विचार। यह किताब सन् 1897 में पहली बार प्रकाशित हुई थी और अँग्रेज़ी-साहित्य में इस

13 दिसम्बर 2024

जो बचा है वह है बस शब्दों का एक नगर

जो बचा है वह है बस शब्दों का एक नगर

मैं, पम्पा कम्पाना, हूँ इस कृति की रचयिता/ मैंने एक साम्राज्य का उत्थान और पतन देखा है/ अब उन्हें कैसे याद करता है कोई, उन राजाओं और उन रानियों को?/ अब वे बचे हैं बस शब्दों में/ वे थे तो थे विजेता या

25 नवम्बर 2024

दिल्ली के धड़कते दिल से गुज़रते हुए

दिल्ली के धड़कते दिल से गुज़रते हुए

किसी शहर का मुस्लिम इलाक़ा उस शहर की धड़कती हुई जगहों में से एक होता है, जहाँ आला दर्ज़े के शायरों, बावरचियों, हकीमों, दानिशमंदों, इबादतगुज़ारों से लेकर हर तरह के काम-धंधे वाले लोग मिलेंगे। चावड़ी बा

22 नवम्बर 2024

जीम अब्बासी के उपन्यास ‘सिंधु’ के बारे में

जीम अब्बासी के उपन्यास ‘सिंधु’ के बारे में

जीम अब्बासी सिंध (पाकिस्तान) के समकालीन लेखक हैं, जिन्होंने कुछ वर्ष पहले ही उर्दू में लिखना शुरू किया है। एक कहानी संग्रह ‘ज़र्द हथेली और दूसरी कहानियाँ’(2020), और दो उपन्यास ‘रक़्स-नामा’ (2023) और

10 नवम्बर 2024

कवि बनने के लिए ज़रूरी नहीं है कि आप लिखें

कवि बनने के लिए ज़रूरी नहीं है कि आप लिखें

‘बीटनिक’, ‘भूखी पीढ़ी’ और ‘अकविता’ क्या है, यह पहचानता हूँ, और क्यों है, यह समझता हूँ। इससे आगे उनपर विचार करना आवश्यक नहीं है। — अज्ञेय बीट कविता ने अमेरिकी साहित्य की भाषा को एक नया संस्कार दि

27 अक्तूबर 2024

मोहब्बत की फ़ेहरिस्त से ग़ायब मुमताज़-शाहजहाँ

मोहब्बत की फ़ेहरिस्त से ग़ायब मुमताज़-शाहजहाँ

ताजमहल के दीदार की मेरी कभी ख़्वाहिश ही नहीं हुई। इसमें ताजमहल की कोई ख़ता भी नहीं, बस हालात ज़रा ज़ालिम बनते गए और जब भी ताज का ज़िक्र आया तो मुँह का ज़ायक़ा कसैला हो गया। ज़िंदगी की पहली पारी का शुरुआती

02 अक्तूबर 2024

हे राम : दास्तान-ए-क़त्ल-ए-गांधी

हे राम : दास्तान-ए-क़त्ल-ए-गांधी

जिससे उम्मीदें-ज़ीस्त थी बाँधी ले उड़ी उसको मौत की आँधी गालियाँ खाके गोलियाँ खाके मर गए उफ़्फ़! महात्मा गांधी! — रईस अमरोहवी  एक दिल्ली में वह मावठ का दिन था। 30 जनवरी 1948 को दुपहर तीन बज

27 सितम्बर 2024

दारा शुकोह, मैनेजर पांडेय और कुछ झूठ

दारा शुकोह, मैनेजर पांडेय और कुछ झूठ

विश्वविद्यालयों में एक जुमला ख़ूब चलता है—“और भाई एमे, एम्फ़िल, जॉरगंस से निकल गए या वहीं फँसे हो।’’ मतलब यह कि नया विद्यार्थी ख़ूब भारी-भारी शब्द उछालना सीख जाता है। आजकल किसी भी किताब पर होने वाली च

20 सितम्बर 2024

महाभारत : वीरता के आवरण में

महाभारत : वीरता के आवरण में

उपनिवेशित समाजों पर अपनी क़ब्ज़ेदारी को न्यायोचित ठहराने के लिए उपनिवेशकों ने यह बहाना गढ़ा था कि इन समाजों में वैयक्तिक उत्कर्ष की लालसा नहीं है। न ही वे एक समुदाय के रूप में ख़ुद को गठित कर पाने में स

24 जून 2024

सूफ़ी आंदोलन के कुछ अनछुए पहलू

सूफ़ी आंदोलन के कुछ अनछुए पहलू

सन्यासी फ़क़ीर विद्रोह के नायक बाबा मजनू शाह आज़ादी के लिए देश में कई लड़ाईयाँ लड़ी गई हैं और कई स्वतंत्रता सेनानियों ने अपना बलिदान दिया है। इतिहास में दर्ज पहला स्वाधीनता संग्राम फ़क़ीर-सन्यासी वि

01 जून 2024

रिचर्ड एटनबरो की ‘गांधी’ और दूसरे प्रसंग

रिचर्ड एटनबरो की ‘गांधी’ और दूसरे प्रसंग

‘‘महानतम कृत्य अपनी चमक खो देते हैं, अगर उन्हें शब्दों में न बाँधा जाए। क्या तुम स्वयं को ऐसा उद्यम करने के योग्य समझते हो, जो हम दोनों को अमर बना दे।’’ संसारप्रसिद्ध कहानीकार होर्हे लुई बोर्हेस की इ

29 मई 2024

सआदत हसन मंटो के नाम

सआदत हसन मंटो के नाम

सरहद, भारत-पाकिस्तान 2024 मंटो, पहले अज़ीज़ लिखूँ या आदाब, यहीं मात खा गया। ज़ाहिर है प्रोज़ में आपका मुक़ाबला कर पाना, मेरे बस के और बस के कंडक्टर के—दोनों के बाहर है। आज आपकी सालगिरह है। आपको जा