चीज़ें पर बेला
कविता के भाव में कहें
तो चीज़ें वे हैं जिनसे हमारी दुनिया बनती है और बर्बाद भी होती है। यहाँ प्रस्तुत है चीज़ों की उपस्थिति-अनुपस्थिति को दर्ज करती कविताओं का यह व्यापक चयन।
ओपेनहाइमर से ओडिसियस तक : साम्राज्यवादी महानायकों का खोखलापन
क्रिस्टोफ़र नोलन की ‘द ओडिसी’ की सनसनीख़ेज़ समीक्षाओं की होड़ में कश्मकश करने से पहले सबसे ज़रूरी है कि इस होड़ के पीछे क
इंडियन रेलवे : एक चलता-फिरता समाज
दुनिया और ज़िंदगी को ठहरकर नहीं, घर से निकलकर ही देखा जा सकता है। ज़िंदगी को जानने और समझने के लिए ठहराव ज़रूरी है, लेकि
सतलुज : बहता हुआ इतिहास
कुछ फ़िल्में शहीद होने के लिए ही बनती हैं। इस तरह देखें तो ‘सतलुज’ भी एक शहीद फ़िल्म है। यह फ़िल्म जब वर्ष 2023 में रिली
सतलुज : एक धारा को रोकने की कोशिश
तीन साल की लंबी क़ानूनी और सेंसर संबंधी लड़ाई के बाद रिलीज़ हुई फिल्म ‘सतलुज’ मात्र दो दिन के भीतर ही भारत में ओटीटी प्ले
सतलुज : ‘मैं हनेरे नूं चैलेंज करदां’
“हिंसा को केवल झूठ के द्वारा छिपाया जा सकता है और झूठ को केवल हिंसा के द्वारा ही क़ायम रखा जा सकता है।” — लेव तोल्स्त
‘चींटी की अर्थी’ पर कुछ बातें
इस पुस्तक का शीर्षक उसकी अंतर्वस्तु का कोई सिरा हाथ नहीं लगने देता, लेकिन उसके प्रति जिज्ञासा को लाकर एक जगह संकेंद्रित
शनिवारेर चिट्ठी : घर की जगह
डेरा मनुष्य अपने घर के बारे में सबसे कम तब सोचता है, जब वह अपने घर का निवासी होता है। तब घर की उपस्थिति इतनी स्वाभावि
जगह-जगह 2.0 : चौरंगी, होटल कैलिफ़ोर्निया और गॉडफ़ादर
जगहें कैसे बनती हैं? तुम्हारे और मेरे बैठने से पहले, समंदर किनारे पड़े उन पत्थरों को क्या ‘जगह’ कहा जाए? फ़िल्म ‘रंगीला’
क्लचर : बालों से निकलकर
वैशाख की इस अलस-दुपहरी में जहाँ मैं नहीं हूँ; सोचता हूँ, दाँवरि के बाद वहाँ अलसाने के दिन आ गए होंगे। परदेशियों की याद म
म्यूज़ियम ऑफ़ इनोसेंस : अधूरे प्रेम का अभिज्ञान
वेब सीरीज़ ‘म्यूज़ियम ऑफ़ इनोसेंस’ [Museum of Innocence] ओरहान पामुक के इसी नाम से प्रकाशित नॉवेल पर आधारित है। इस सीरीज़ के
बिल्लियों के नौ जीवन पाप से भरे हैं
पश्चिमी लेखकों, कलाकारों, विचारकों के कारण बिल्लियों पर मेरा विशेष ध्यान गया। डॉग फ़ॉर सोल्ज़र्स, कैट्स फॉर आर्टिस्ट्स। कु
मैं वीगन क्यों नहीं हूँ!
सड़क पर भीख माँगते किसी व्यक्ति से कभी पूछियेगा कि गाली सुनने के बाद उसे कैसा लगता है? फिर यही ख़ुद से पूछियेगा। दोनों सवा
किताब एक स्त्री की आत्मा का घर है
चमत्कार घटित होते हैं। एक दिन अप्रत्याशित ढंग से उसके काँधे पर एक कोमल और प्रेमिल स्पर्श इस क़दर हल्का आकर उतरता है क
ड्रैगन फ़्रूट, कीवी के ज़माने में सिंघाड़ों का सुख
शीत की साग-सब्ज़ियों से अटी पड़ी सब्ज़ी मंडियों के बाहर अत्यक्त भाव से बिकते सिंघाड़ों को देखकर जी करुणा से भर आया। ऐसे
29 दिसम्बर 2024
बिल्लियों की बेपरवाही पर आप क्या सोचते हैं!
न जाने कितनी सदियों से अब तक आदमी कुत्तों, बैलों, घोड़ों, मुर्ग़ों और अन्य जानवरों से घिरा रहा; लेकिन बिल्लियाँ इस पूरे इत
बेहतर गद्य लिखने के 30 ज़रूरी और जानदार नुस्ख़े
• जल्दी-जल्दी में लिखी गईं गोपनीय नोटबुक्स और तीव्र भावनाओं में टाइप किए गए पन्ने, जो ख़ुद की ख़ुशी के लिए हों। • हर
13 नवम्बर 2024
बुकर विजेता किताब 'ऑर्बिटल' के बारे में
अंतरिक्ष शब्द सुनते ही मैं आतंकित महसूस करता हूँ। मैं जिस शहर में बढ़ा हुआ वह करनाल के बहुत नज़दीक था—जहाँ चाँद पर क़दम
अजंता देव की ताँत के धागों से खींची कविताएँ
अगर कोई कहे कि अपने लिए बस एक ही फ़ेब्रिक चुनो तो मैं चुनूँगी सूती। सूती में भी किसी एक जगह की बुनाई को ही लेने को मजबूर
हिंदी के चर्चित घड़ी-प्रसंग की घड़ी बंद होने के बाद...
घड़ी तो सब ही पहनते हैं। कई सौ सालों पहले जब पीटर हेनलेन ने पहली घड़ी ईजाद की होगी, तो उसके बाप ने भी नहीं सोचा होगा
इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रावास के दिन
इलाहाबाद विश्वविद्यालय में पढ़ने आना एक मुश्किल भरा सफ़र रहा। इलाहाबाद आने के बाद, रहने के लिए कमरा मिलना एक बड़ी समस्या
मैं जब चाहे बाल नहीं धो सकती
“आज बाल नहीं धोने हैं।” “क्यों?” “आज एकादशी है।” “पर बाबा तो अभी-अभी शैंपू करके निकले हैं।” “तुमसे तो बात ही
सुशील दोशी की पुस्तक ‘द आर्ट एंड साइंस ऑफ़ क्रिकेट कमेंट्री’ का विमोचन
23 जुलाई 2024 को शिक्षाविद् और राष्ट्रीय पुस्तक न्यास (National Book Trust), भारत के अध्यक्ष प्रोफ़ेसर मिलिंद सुधाकर मरा
इंडिया फ़ेलो अपने 17वें बैच के लिए ले रहा है आवेदन
इंडिया फ़ेलो युवा भारतीयों के लिए सामाजिक नेतृत्व हासिल करने का कार्यक्रम है। यह भारतीय परिवेश में ज़मीनी स्तर से जुड़कर,
ख़ुशियों का एरोडायनामिक्स : काग़ज़ के हवाई जहाज़
हर साल 26 मई को पार्कों, खेत-खलिहानों और कक्षाओं में एक अजीब-ओ-ग़रीब लेकिन बेहद रोमांचक दृश्य देखने को मिलता है : आसमान र
किताबों के बीच मस्ती, रोमांच और बहुत कुछ नया सीखने का अवसर
सोमवार, 20 मई को वसंत कुंज स्थित नेशनल बुक ट्रस्ट, इंडिया के मुख्यालय में बच्चों के लिए समर कैंप की शुरुआत हुई। 20 मई से
सलमान रश्दी की नई किताब में चाक़ू की कुछ बातें
उन सुनसान निद्राविहीन रातों में मैंने एक विचार के रूप में चाक़ू के बारे में बहुत सोचा। चाक़ू एक औज़ार था, और उसके प्रयोग से
सोडा, बन-मस्का और वाल्टर बेन्यामिन
सोडा और बन-मस्का पुणे के कैंप इलाक़े में साशापीर रोड पर एक कम प्रचलित शरबतवाला चौक है। शरबत अरबी शब्द है, शराब भी इसी
जिसका अपना कोई रहस्य नहीं होता, उसे दूसरों के रहस्यों में बहुत रुचि होती है
सावधानी का केवल एक क्षण होता है, जहाँ आप रुक सकते हैं। ~~~ अगर मैं आपसे कहूँ कि मानव दौड़ की भाषा ही औसत दर्जे का
शुद्ध भाषा किस चिड़िया का नाम है?
कुछ मित्र अक्सर हिंदी में प्रूफ़ रीडिंग की दुर्गति पर विचार करते रहते हैं। ऐसे में अचानक थोड़ी पुरानी बात याद आ गई। मैं