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भाषा पर बेला

भाषा मानव जाति द्वारा

प्रयुक्त वाचन और लेखन की प्रणाली है जिसका उपयोग वह अपने विचारों, कल्पनाओं और मनोभावों को व्यक्त करने के लिए करता है। किसी भाषा को उसका प्रयोग करने वाली संस्कृति का प्रतिबिंब कहा गया है। प्रस्तुत चयन में कविता में भाषा को एक महत्त्वपूर्ण इकाई के रूप में उपयोग करती कविताओं का संकलन किया गया है।

15 फरवरी 2026

डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय [सागर] में अगला ‘हिन्दवी कैंपस कविता’ आयोजन, कविता भेजने की अंतिम तिथि आज

डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय [सागर] में अगला ‘हिन्दवी कैंपस कविता’ आयोजन, कविता भेजने की अंतिम तिथि आज

हिन्दवी कैंपस कविता—‘हिन्दवी’ का एक विशेष आयोजन है। इस आयोजन के माध्यम से देश के विभिन्न शैक्षिक संस्थानों के साथ मिलकर वहाँ के छात्रों को साहित्य-सृजन के लिए प्रोत्साहित करने का प्रयास किया जाता है।

15 फरवरी 2026

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-10

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-10

नवीं कड़ी से आगे... दस अरुण कमल सत्तर साल से अधिक का जीवन देख चुके हैं और वरिष्ठ कवियों की सूची में भी आ चुके हैं। अरुण कमल हिंदी में प्रसिद्ध और लोकप्रिय कवि भी हैं। कभी रामचंद्र शुक्ल ने लिखा

15 फरवरी 2026

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-7

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-7

छठी कड़ी से आगे... सात अरुण कमल ‘कविता की राजनीति’ को उसी रिपोर्टर के निगाह से तौलते और फिर बोलते हैं जिसमें उन्हें फ़ायदा ज़्यादा दिखता है। काफ़ी गंभीरता से दिया गया वक़्तव्य है, जहाँ अपने को

15 फरवरी 2026

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-8

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-8

सातवीं कड़ी से आगे... आठ अरुण कमल ‘मैं’ अर्थात् अपनी आँखों से दुनिया को देखते हैं। इसलिए विस्तार उनके यहाँ कम है। इसलिए कभी राजेश जोशी ने अरुण कमल की कविता के लिए कहा था, ‘‘उनके यहाँ कल्पनाशीलत

15 फरवरी 2026

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-6

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-6

पाँचवीं कड़ी से आगे... छह कविता में निजी स्पेस का या घर-परिवार का कम होना, लगता है जानबूझकर है या फिर विचारधारा या किसी ख़ास मानसिकता का परिचायक। अरुण कमल के पास एक ख़ास तरह की काव्य-भाषा है जो

15 फरवरी 2026

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-9

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-9

आठवीं कड़ी से आगे... नौ ‘अपनी केवल धार’ जो देखने में छोटी पर अरुण कमल की कीर्ति का आधार-स्तंभ है कि तरह मेरी एक और प्रिय छोटी-सी कविता है जिसका शीर्षक है—‘थूक’ : “जब वह ग़ुंडा प्राचार्य मान बहाद

03 फरवरी 2026

तेग़ अली : भोजपुरी ग़ज़ल के प्रथम पुरुष

तेग़ अली : भोजपुरी ग़ज़ल के प्रथम पुरुष

साहित्य ‘में’, या साहित्य ‘से’ किसी क़िस्म की कोई बदमाशी होती नहीं, या हो नहीं सकती—ऐसी कोई बात अगर कही जाती है, तो मैं तो कम से कम ठीक-ठीक नहीं ही कह सकता कि इस बात में किसकी तौहीन ज़्यादा है, बदमाश

29 जनवरी 2026

चेतना के दस द्वीप : प्रयागराज की साहित्यिक विरासत और प्रतिरोध की गूँज

चेतना के दस द्वीप : प्रयागराज की साहित्यिक विरासत और प्रतिरोध की गूँज

वरिष्ठ कवि हरिशचंद्र पांडे की अध्यक्षता में मंगलवार, 27 जनवरी को चौधरी महादेव प्रसाद महाविद्यालय (सीएमपी डिग्री कॉलेज), प्रयागराज के सभागार में कथाकार रणविजय सिंह ‘सत्यकेतु’ द्वारा संपादित काव्य-संकल

27 जनवरी 2026

अंचित से दस सवाल : मुझे दिल्ली बिल्कुल पसंद नहीं है

अंचित से दस सवाल : मुझे दिल्ली बिल्कुल पसंद नहीं है

अंचित (जन्म: 1990) नई पीढ़ी के चर्चित कवि, अनुवादक और संपादक हैं। वर्ष 2021 में उन्हें ‘कवि केदारनाथ सिंह कविता सम्मान’ से सम्मानित किया गया। वे इसक-2023 के कवि भी हैं। हाल ही में उनका नया कविता-संग्

16 जनवरी 2026

छंद-छंद पर कुमकुम : समकालीन छंदबद्ध कविता का विशेष आयोजन

छंद-छंद पर कुमकुम : समकालीन छंदबद्ध कविता का विशेष आयोजन

समकालीन कविता के परिदृश्य में जहाँ मुक्तछंद की उपस्थिति व्यापक है; वहीं छंदबद्ध कविता आज भी अपनी लय, अनुशासन और संगीतात्मकता के कारण पाठकों और श्रोताओं के बीच एक विशिष्ट स्थान बनाए हुए है। इसी परंपरा

25 दिसम्बर 2025

सामान्य जीवन-प्रसंगों का कहानीकार

सामान्य जीवन-प्रसंगों का कहानीकार

विनोद कुमार शुक्ल के उपन्यासों वाली अपेक्षाओं के साथ उनकी कहानियाँ पढ़ने पर किसी को भी कुछ निराशा हो सकती है। कहानियाँ वैसे भी उन्होंने अधिक नहीं लिखी हैं। जो लिखी हैं, उनमें न तो मध्यवर्गीय विडंबनाओ

24 दिसम्बर 2025

हिंदी का अपना पहला ‘नेटिव जीनियस’

हिंदी का अपना पहला ‘नेटिव जीनियस’

विनोद कुमार शुक्ल के मुझ सरीखे पुराने पाठक और उनके लगातार बढ़ते जा रहे नए पाठक; सबसे पहले तो यह समझ जाते हैं कि उनका यह कवि-गल्पकार सिर्फ़ ‘अच्छा’ नहीं है, बल्कि उसे ऐसा कहना और मानना उसका और अपना अप

23 दिसम्बर 2025

‘नहीं होने’ में क्या देखते हैं

‘नहीं होने’ में क्या देखते हैं

विनोद कुमार शुक्ल की एक कविता है—‘आदिम रंग’। पहली पंक्ति प्रश्नवाचक है—आदिम रंग आदिम मनुष्य ने क्या देखा था? (प्रश्नवाचक चिह्न कवि की पंक्ति में नहीं है) फिर वह अनुमान या कल्पना करते हैं—सूर्यादय या

12 दिसम्बर 2025

बकुला मरलें, बकुली रूसल जाली! : कथा और कथा की समझ

बकुला मरलें, बकुली रूसल जाली! : कथा और कथा की समझ

भोजपुरी में न जाने कितनी लोककथाएँ हैं। कुछ तो लोक में ख़ूब प्रचलित हैं और बहुतेरी कथाएँ लगभग विलुप्ति के कगार पर हैं। न जाने कितनी विलुप्त हो गई हैं। और इन सभी लोक कथाओं को एक जगह करना बहुत मुश्किल क

16 नवम्बर 2025

दिसंबर में होगा कोच्चि–मुज़िरिस बिएनाले का छठा संस्करण

दिसंबर में होगा कोच्चि–मुज़िरिस बिएनाले का छठा संस्करण

भारत की सर्वाधिक प्रतिष्ठित और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त समकालीन कला प्रदर्शनी कोच्चि–मुज़िरिस बिएनाले (Kochi-Muziris Biennale) का छठा संस्करण 12 दिसंबर, 2025 से केरल के ऐतिहासिक समुद्री

04 नवम्बर 2025

फ़ादर वालेस : साधु तो चलता भला

फ़ादर वालेस : साधु तो चलता भला

वर्ष 2025 गुजराती साहित्य के इतिहास में एक विशेष वर्ष है—इस वर्ष गुजराती भाषा और संस्कृति के एक विलक्षण साधक, फ़ादर वालेस (Father Carlos González Vallés) की जन्मशती मनाई जा रही है। फ़ादर वालेस का जन्

30 अक्तूबर 2025

भोजपुरी मेरी मातृभाषा

भोजपुरी मेरी मातृभाषा

मेरी मातृभाषा भोजपुरी है। मेरी पैदाइश, परवरिश और तरबियत सब भोजपुरी के भूगोल में हुई है। मैं सोचता भोजपुरी में हूँ; मुझे सपने भोजपुरी में आते हैं। सपने में जब बड़बड़ाता हूँ तो वह भी भोजपुरी में ही होत

07 अक्तूबर 2025

भाषा में पसरती जा रही मुर्दनी

भाषा में पसरती जा रही मुर्दनी

लेखक-पत्रकार प्रियदर्शन द्वारा अरुंधती राय की नई पुस्तक ‘मदर मेरी कम्स टु मी’ की भूमिका को संदर्भ में रखते हुए लिखा गया एक संक्षिप्त लेख पढ़ा, जिसमें यह बात कही गई कि हमारी भाषा अब स्थिर हो रही है। व

04 अक्तूबर 2025

रामचंद्र शुक्ल, हिंदी शब्दसागर और नागरीप्रचारिणी सभा

रामचंद्र शुक्ल, हिंदी शब्दसागर और नागरीप्रचारिणी सभा

आज हिंदी के शीर्षस्थ आलोचक और साहित्य के इतिहासकार आचार्य रामचंद्र शुक्ल की जयंती है। काशी नागरीप्रचारिणी सभा शुक्लजी की आलोचना की जन्मभूमि है। 1908 से 1930—लगातार 28 वर्षों तक वह ‘सभा’ की ऐतिहासिक प

16 सितम्बर 2025

20-21 सितंबर को रायपुर में होगा हिंद युग्म उत्सव 2025

20-21 सितंबर को रायपुर में होगा हिंद युग्म उत्सव 2025

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में साहित्य प्रेमियों के लिए 2 दिवसीय ‘हिंद युग्म उत्सव 2025’ आयोजित होने जा रहा है। इस आयोजन के माध्यम से छत्तीसगढ़ पहली बार इस अनोखे उत्सव का साक्षी बनेगा। आगामी 20 और 2

14 सितम्बर 2025

सोबती-वैद संवाद : सहमति और असहमति के बीच का आकाश

सोबती-वैद संवाद : सहमति और असहमति के बीच का आकाश

कृष्णा सोबती और कृष्ण बलदेव वैद के बीच भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, शिमला में एक सघन वार्ता और विचार-विमर्श हुआ। यह बातचीत राजकमल प्रकाशन से पुस्तक रूप में प्रकाशित हुई। यह संवाद साहित्य, समाज और राजन

13 सितम्बर 2025

हिंदी दिवस पर जागरण कनेक्ट और ‘हिन्दवी’ का विशेष आयोजन : ‘उत्सव हिन्दी का’

हिंदी दिवस पर जागरण कनेक्ट और ‘हिन्दवी’ का विशेष आयोजन : ‘उत्सव हिन्दी का’

हिंदी दिवस केवल एक तारीख़ नहीं है, बल्कि यह दिन हमें हमारी भाषा के महत्त्व और गरिमा की याद दिलाता है। यह दिन हमें यह सोचने का अवसर देता है कि हमारी मातृभाषा न केवल संचार का माध्यम है, बल्कि हमारी संव

18 अगस्त 2025

‘रेख़्ता वो भाषा है जो इस्तेमाल से बनती है’

‘रेख़्ता वो भाषा है जो इस्तेमाल से बनती है’

सालों पहले देश के मूर्द्धन्य शिक्षाविद् कृष्ण कुमार की एक पुस्तक पढ़ी थी—‘विचार का डर’। वैचारिक निबंधों की इस पुस्तक में शिक्षा, समाज और बौद्धिक स्वतंत्रता के परस्पर संबंधों पर गंभीर चिंतन है। शिक्षा

07 अगस्त 2025

अंतिम शय्या पर रवींद्रनाथ

अंतिम शय्या पर रवींद्रनाथ

श्रावण-मास! बारिश की झरझर में मानो मन का रुदन मिला हो। शाल-पत्तों के बीच से टपक रही हैं—आकाश-अश्रुओं की बूँदें। उनका मन उदास है। शरीर धीरे-धीरे कमज़ोर होता जा रहा है। शांतिनिकेतन का शांत वातावरण अशांत

25 जुलाई 2025

वाचिक : परंपरा का नवोन्मेष

वाचिक : परंपरा का नवोन्मेष

‘रेख़्ता फ़ाउंडेशन’ का उपक्रम ‘हिन्दवी’—हिंदी-साहित्य-संस्कृति-कला-संसार को समर्पित अपने वार्षिकोत्सव—‘हिन्दवी उत्सव’ के पाँचवें संस्करण का आयोजन करने जा रहा है। यह आयोजन 27 जुलाई 2025, रविवार को नई द

25 जुलाई 2025

उदय प्रकाश : समय, स्मृति और यथार्थ के अद्वितीय रचनाकार

उदय प्रकाश : समय, स्मृति और यथार्थ के अद्वितीय रचनाकार

“कोई भी रचनाकार-कथाकार समय, इतिहास स्मृति के स्तर पर, ख़ासकर टाइम एंड मेमोरी के स्तर पर लिखता है। …मेरा मानना है कि किसी भी रचनाकार को अपनी संवेदना लगातार बचा कर रखनी चाहिए। अपने आस-पास के परिवर्तन के

24 जुलाई 2025

स्वानंद किरकिरे : सिनेमा-संगीत की दुनिया का बावरा मन

स्वानंद किरकिरे : सिनेमा-संगीत की दुनिया का बावरा मन

कला की बहुरंगी दुनिया में कुछ कलाकार ऐसे होते हैं, जो अपनी प्रतिभा के दम पर एक साथ कई क्षेत्रों में अपनी अमिट छाप छोड़ते हैं। भारतीय सिनेमा और संगीत की दुनिया में स्वानंद किरकिरे भी ऐसे ही एक बहुआयाम

20 जुलाई 2025

हिन्दवी उत्सव : 27 जुलाई को बँधेगा समाँ

हिन्दवी उत्सव : 27 जुलाई को बँधेगा समाँ

प्रिय हिंदी-प्रेमियो,  हम आपको सहर्ष यह सूचित कर रहे हैं कि ‘रेख़्ता फ़ाउंडेशन’ का उपक्रम ‘हिन्दवी’—हिंदी-साहित्य-संस्कृति-कला-संसार को समर्पित अपने वार्षिकोत्सव—‘हिन्दवी उत्सव’ के पाँचवें संस्करण

14 जुलाई 2025

हिन्दवी : ‘ऑल इंडिया कैंपस कविता’-2025 की लॉन्ग-लिस्ट

हिन्दवी : ‘ऑल इंडिया कैंपस कविता’-2025 की लॉन्ग-लिस्ट

‘हिन्दवी’ ने अपने प्रयोगधर्मी व्यवहार के प्रकाश में—वर्ष 2022 के सिंतबर में—‘हिन्दवी कैंपस कविता’ की शुरुआत की थी। यह शुरुआत इलाहाबाद विश्वविद्यालय [हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा विभाग] के साथ हुई। इस

27 जून 2025

आचार्य शुक्ल के इतिहास के बहाने : आदिकाल के अप्रासंगिक होने पर सवाल?

आचार्य शुक्ल के इतिहास के बहाने : आदिकाल के अप्रासंगिक होने पर सवाल?

सास्त्र सुचिंतित पुनि पुनि देखिअ। —३६, अरण्यकाण्ड, श्रीरामचरितमानस तुलसी की इस पंक्ति का शीर्षक रूप में प्रयोग करते हुए ‘नागरीप्रचारिणी सभा’ द्वारा आचार्य रामचंद्र शुक्ल के पुनर्संस्कारित इतिहास

10 जून 2025

‘जब सोशल मीडिया नहीं था, हिंदी कविता अधिक ब्राह्मण थी’

‘जब सोशल मीडिया नहीं था, हिंदी कविता अधिक ब्राह्मण थी’

वर्ष 2018 में ‘सदानीरा’ पर आपकी कविता-पंक्ति पढ़ी थी—‘यह कवियों के काम पर लौटने का समय है’। इस बीच आप फ़्रांस से लौटकर आ गए। इस लौटने में काम पर कितना लौटे आप?  2018 में जब यह कविता-पंक्ति संभव हुई

02 जून 2025

'संगत'-प्रसंग : पक्ष और प्रमाण

'संगत'-प्रसंग : पक्ष और प्रमाण

‘संगत’—‘हिन्दवी’ का प्रमुख कार्यक्रम है। इसके अंतर्गत हिंदी साहित्य संसार के महत्त्वपूर्ण व्यक्तित्वों के वीडियो-साक्षात्कार ‘हिन्दवी’ के यूट्यूब चैनल पर प्रसारित किए जाते हैं। इस सिलसिले में 23 मई 2

28 मई 2025

विनोद कुमार शुक्ल का आश्चर्यलोक

विनोद कुमार शुक्ल का आश्चर्यलोक

बहुत पहले जब विनोद कुमार शुक्ल (विकुशु) नाम के एक कवि-लेखक का नाम सुना, और पहले-पहल उनकी ‘प्रतिनिधि कविताएँ’ हाथ लगी, तो उसकी भूमिका का शीर्षक था—विनोद कुमार शुक्ल का आश्चर्यलोक। आश्चर्यलोक—विकुशु के

21 मई 2025

बानू मुश्ताक़ की ‘हार्ट लैंप’ को अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार

बानू मुश्ताक़ की ‘हार्ट लैंप’ को अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार

इस वर्ष का अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार भारतीय लेखिका बानू मुश्ताक़ के कथा संकलन ‘हार्ट लैंप’ को मिला है। बानू मुश्ताक़ कन्नड़ भाषा की कथाकार हैं। उनके कथा-संकलन ‘हार्ट लैंप’ का अनुवाद दीपा भास्ती ने कि

04 मई 2025

बिंदुघाटी : कविताएँ अब ‘कुछ भी’ हो सकती हैं

बिंदुघाटी : कविताएँ अब ‘कुछ भी’ हो सकती हैं

यहाँ प्रस्तुत इन बिंदुओं को किसी गणना में न देखा जाए। न ही ये किसी उपदेश या वैशिष्ट्य-विधान के लिए प्रस्तुत हैं। ऐसे असंख्य बिंदु संसार में हर क्षण पैदा हो रहे हैं। उनमें से कम ही अवलोकन के वृत्त में

02 मई 2025

उर्दू में हिंदू-धर्म का प्रचार-प्रसार : कुछ उदाहरण

उर्दू में हिंदू-धर्म का प्रचार-प्रसार : कुछ उदाहरण

ये लेख मूलतः एक किताब पर आधारित है। उस किताब में दी गई जानकारियों को यहाँ संक्षेप में प्रस्तुत किया जा रहा है। ऐसा दो-तीन कारणों से किया जा रहा है। एक तो ये कि वो किताब उर्दू में है, इसलिए हिंदी-पाठक

09 अप्रैल 2025

आज ‘बेला’ का जन्मदिन है

आज ‘बेला’ का जन्मदिन है

आज ‘बेला’ का जन्मदिन है। गत वर्ष वे देवियों के दिन थे, जब हिन्दी और ‘हिन्दवी’ के व्यापक संसार में ‘बेला’ का प्राकट्य हुआ था। देवियों की उपस्थिति और कला—रूप और कथ्य दोनों ही स्तरों पर—अत्यंत समृद्ध

08 अप्रैल 2025

कथ्य-शिल्प : दो बिछड़े भाइयों की दास्तान

कथ्य-शिल्प : दो बिछड़े भाइयों की दास्तान

शिल्प और कथ्य जुड़वाँ भाई थे! शिल्प और कथ्य के माता-पिता कोरोना के क्रूर काल के ग्रास बन चुके थे। दोनों भाई बहुत प्रेम से रहते थे। एक झाड़ू लगाता था एक पोंछा। एक दाल बनाता था तो दूसरा रोटी। इसी तर

06 अप्रैल 2025

क्या एडम और ईव ब्लैक थे?

क्या एडम और ईव ब्लैक थे?

‘क्या एडम और ईव ब्लैक थे?’ इन सात शब्दों का गल्प और यथार्थ से गहरा संबंध है और इसे मैं वैसे ही साबित करूँगा जैसे नौंवी कक्षा में हमसे यह सिद्ध करवाया जाता था कि √2 (रूट टू) एक अपरिमेय (Irrational)

21 मार्च 2025

‘चलो अब शुरू करते हैं यह सांस्कृतिक कार्यक्रम’

‘चलो अब शुरू करते हैं यह सांस्कृतिक कार्यक्रम’

ओ मेरी कविता, कहाँ हैं तेरे श्रोता? कमरे में कुल बारह लोग और आठ ख़ाली कुर्सियाँ— चलो अब शुरू करते हैं यह सांस्कृतिक कार्यक्रम कुछ लोग और अंदर आ गए शायद बारिश पड़ने लगी है बाक़ी सभी कवि के सगे-सं

08 मार्च 2025

अनुभूति की शुद्धता का सवाल

अनुभूति की शुद्धता का सवाल

अभी कुछ दिन हुए एक साथी कहता था कि यार कुछ भी कहो कविताओं के जो अर्थ फ़लाँ आलोचक निकाल कर गए हैं, ऐसे कविता को समझना आज के पाठक के बूते के बाहर है। मैंने कहा कि पाठक ही क्यों ठीक उसी परिप्रेक्ष्य में

16 फरवरी 2025

रविवासरीय : 3.0 : ‘मेरा दुश्मन बनने में अब वह कितना वक़्त लेगा’

रविवासरीय : 3.0 : ‘मेरा दुश्मन बनने में अब वह कितना वक़्त लेगा’

• प्रशंसा का पहला वाक्य आत्मीय लगता है, लेकिन प्रशंसा के तीसरे वाक्य में प्रशंसा का तर्क भी हो; तब भी उससे बचने का मन करता है, क्योंकि प्रशंसा के दूसरे वाक्य से ही ऊब होने लगती है। • विष्णु खरे की

14 फरवरी 2025

भाषा के घर में क्या है!

भाषा के घर में क्या है!

भाषा पर बात करते हुए मुख्यतः चार रुझान या रवैये दिखाई देते हैं। • व्युत्पत्ति : शब्द की उत्पत्ति, विकास और परिवर्तन का इतिहास ढूँढ़ना। • विधानवाद (Prescriptivism) :  भाषा के ‘शुद्ध’ या ‘सही’ रू

16 जनवरी 2025

संभावना के संबोधन : अशोक वाजपेयी से पीयूष दईया की बातचीत

संभावना के संबोधन : अशोक वाजपेयी से पीयूष दईया की बातचीत

अत्यंत समादृत कवि-आलोचक और कला-प्रशासक अशोक वाजपेयी आज 85वें वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं। यहाँ उन्हें शुभकामनाएँ देते हुए प्रस्तुत है—उनके द्वारा बोले-लिखे जा रहे आत्म-वृत्तांत से कुछ अंश। ये अंश अशोक

28 दिसम्बर 2024

अंतहीन संभावना का आकार

अंतहीन संभावना का आकार

हिंदी भाषा की प्रकृति अपने आप में जितनी सरल है, उतनी ही जटिल भी है। बहुत सरल और सामान्य से लगने वाले कई शब्दों की अशुद्ध वर्तनी लेखन के स्तर पर प्रचलित है। अर्थ-प्रयोग के स्तर पर भी ग़लत शब्दों का प्र

24 नवम्बर 2024

भाषाई मुहावरे को मानवीय मुहावरे में बदलने का हुनर

भाषाई मुहावरे को मानवीय मुहावरे में बदलने का हुनर

दस साल बाद 2024 में प्रकाशित नया-नवेला कविता-संग्रह ‘नदी का मर्सिया तो पानी ही गाएगा’ (हिन्द युग्म प्रकाशन) केशव तिवारी का चौथा काव्य-संग्रह है। साहित्य की तमाम ख़ूबियों में से एक ख़ूबी यह भी है कि व

13 अक्तूबर 2024

‘कई चाँद थे सरे-आसमाँ’ को फिर से पढ़ते हुए

‘कई चाँद थे सरे-आसमाँ’ को फिर से पढ़ते हुए

शम्सुर्रहमान फ़ारूक़ी के उपन्यास 'कई चाँद थे सरे-आसमाँ' को पहली बार 2019 में पढ़ा। इसके हिंदी तथा अँग्रेज़ी, क्रमशः रूपांतरित तथा अनूदित संस्करणों के पाठ 2024 की तीसरी तिमाही में समाप्त किए। तब से अब

24 सितम्बर 2024

नए भारत का हिंदी पखवाड़ा और हिंदी-प्रोफ़ेसर-सेवकों के हवाले हिंदी

नए भारत का हिंदी पखवाड़ा और हिंदी-प्रोफ़ेसर-सेवकों के हवाले हिंदी

अगर आप हिंदी में लिखते-पढ़ते हैं तो सितंबर का महीना आपको ‘विद्वान’ कहलाने का पूरा मौक़ा देता है। अभी कुछ दिन पहले ही हिंदी दिवस बीता। हिंदी पखवाड़ा जिसे बक़ौल प्रोफ़ेसर विनोद तिवारी हिंदी का पितर-

16 सितम्बर 2024

जापान डायरी : एक शहर अपने आर्किटेक्चर से नहीं लोगों से बनता है

जापान डायरी : एक शहर अपने आर्किटेक्चर से नहीं लोगों से बनता है

पहली कड़ी से आगे... जनवरी 2020 यह मेरी सर्दी की छुट्टियों की पहली किश्त है। आशा है दूसरी किश्त को लिखने में इतना समय नहीं लूँगी। कल ओसाका की फ्लाइट है, हमें सुबह 8 बजे निकलना है। मैं खाने की

14 सितम्बर 2024

हिंदी दिवस पर जानिए हिंदी साहित्य कहाँ से शुरू करें

हिंदी दिवस पर जानिए हिंदी साहित्य कहाँ से शुरू करें

हिंदी साहित्य कहाँ से शुरू करें? यह प्रश्न कोई भी कर सकता है, बशर्ते वह हिंदी भाषा और उसके साहित्य में दिलचस्पी रखता हो; लेकिन प्राय: यह प्रश्न किशोरों और नवयुवकों की तरफ़ से ही आता है। यहाँ इस प्रश्न