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समकालीन पर बेला

वर्तमान दौर के लिए भी

प्रासंगिक रहे और आधुनिक इतिहास के नियत परिप्रेक्ष्य से संबंधित रचनाओं से एक चयन।

26 अक्तूबर 2026

पत्र : दिल्ली के लिए : तुम पहले जैसी हो जाओ

पत्र : दिल्ली के लिए : तुम पहले जैसी हो जाओ

प्यारी दिल्ली, कैसी हो? माफ़ करना महीनों बाद तुम्हें ख़त लिख रहा हूँ। आजकल ना चाहते हुए भी तुम्हारा नाम ज़बान पर आ जाता है। देश में क्या हो रहा है, यह तुमसे छिपा नहीं है; फिर भी संक्षेप में अगर

23 अक्तूबर 2026

हिंदी का आलोचक : पाँच कटाउज और एक कालजयी उपन्यास की तलाश

हिंदी का आलोचक : पाँच कटाउज और एक कालजयी उपन्यास की तलाश

अगर आप हिंदी में उपन्यास लिखने की गुस्ताख़ी कर चुके हैं (या करने की सोच रहे हैं), तो मेरी पहली सलाह होगी कि पहले अपना कवच (या इसके बदले कोई और उपयुक्त चीज़) मज़बूत कर लीजिए। डिजिटल युग के आगमन के

19 अक्तूबर 2026

‘अर्थात्’ की आठवीं कड़ी : उदय प्रकाश के साथ आत्मीय संवाद

‘अर्थात्’ की आठवीं कड़ी : उदय प्रकाश के साथ आत्मीय संवाद

‘अर्थात्’ के सत्रों को चलते हुए लगभग एक साल होने को आया है। नए वक्ताओं, नए विषयों और कुछ नए तो कुछ पुराने जिज्ञासु विद्यार्थियों के बीच ‘अर्थात्’ की ऊर्जा कभी कम नहीं हुई। इस ऊर्जा के केंद्र में रहे

09 अक्तूबर 2026

यह देश कैसे बच सकता है?

यह देश कैसे बच सकता है?

जब लोग मेरी और राहुल गांधी की मैच्योर न होने की समस्या को समस्या मानना बंद कर दें। झूठ बोलने के लिए सच याद रखना पड़े और व्यंजना की व्याख्या करने की ज़रूरत न पड़े। जब मैं कहूँ कि मेरी बात का बुरा मत म

25 सितम्बर 2026

सरसरी : जाना था जापान, पहुँच गए चीन... उर्फ़ प्रतिनिधित्व का प्रश्न

सरसरी : जाना था जापान, पहुँच गए चीन... उर्फ़ प्रतिनिधित्व का प्रश्न

दिल्ली साहित्यिक घटनाओं का एक सतही समुच्चय है। हालाँकि दिल्ली के बाहर भी ऐसी तमाम घटनाएँ होती ही रहती हैं; जिनसे साहित्य से सर्वथा जुदा लोग भी, जुदा न होने के भ्रम में जुड़े रहते हैं। हिंदी साहित्य मे

24 सितम्बर 2026

अनफ़्रेम्ड : 5G की स्पीड में 60 के दशक की ‘तड़प’

अनफ़्रेम्ड : 5G की स्पीड में 60 के दशक की ‘तड़प’

ऐसा मेरे साथ कभी पहले नहीं हुआ था, तो यह बात मेरे मन में बैठ गई। ऑफ़िस से घर लौटते समय स्पॉटिफ़ाई पर अचानक लता मंगेशकर का एक गीत लूप में बज उठा, जिसे पहले कभी नहीं सुना था। गीत था, ‘हम तेरे प्यार में स

01 अगस्त 2026

शनिवारेर चिट्ठी : गाली बयान नहीं चीख़ है

शनिवारेर चिट्ठी : गाली बयान नहीं चीख़ है

सिनेमा  शासकों को यह भ्रम प्रिय होता है कि वे इतिहास लिखते हैं। वे यह नहीं समझते कि एक पोस्टर, एक भंगिमा, एक नारे, एक मीम से उनके इस कथित इतिहास को चुनौती दी जा सकती है। इन दिनों मुझे एक फ़िल्म याद

19 जुलाई 2026

बिंदुघाटी 2.0 : बहुत फूँक-फूँककर सिर्फ़ साँप चलते हैं

बिंदुघाटी 2.0 : बहुत फूँक-फूँककर सिर्फ़ साँप चलते हैं

• इन दिनों पॉपुलर स्पेस में कहीं-कहीं और बहुत सारी बातों के साथ-साथ लोग यह भी कह रहे हैं कि भूख-हड़ताल भारतीय संस्कृति नहीं है। ये कमाल के लोग हैं और कमाल की ही हैं इनकी सांस्कृतिक व्याख्याएँ! इनके इस

21 मई 2026

कॉमनवेल्थ शॉर्ट स्टोरी विजेता कहानी पर AI की परछाईं!

कॉमनवेल्थ शॉर्ट स्टोरी विजेता कहानी पर AI की परछाईं!

कॉमनवेल्थ शॉर्ट स्टोरी प्राइज़, 2026 की कैरेबियाई क्षेत्रीय विजेता कहानी, ‘द सर्पेंट इन द ग्रोव’ (उपवन में सर्प) चर्चा में है। चर्चा का कारण है, आरोप : कहानी का आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (AI) के प्रयोग

04 मई 2026

वे बंगाली लड़कियाँ आततायी नहीं थीं!

वे बंगाली लड़कियाँ आततायी नहीं थीं!

वे अनपेक्षित बाढ़ की तरह आती रहीं। उनका पानी मैला नहीं था, न ही उतना साफ़। वे मेरे भीतर बने घर को—जो पहले से खंडहर था और खंडहर करती चली गईं। वे खुला मैदान चाहती थीं, जिसमें वे अपने मुताबिक़ खेलना और

09 जनवरी 2026

‘घंटा’ फ़र्क़ नहीं पड़ता किसी कहानीकार के रहने या जाने से!

‘घंटा’ फ़र्क़ नहीं पड़ता किसी कहानीकार के रहने या जाने से!

कल के दिन की शुरुआत हुई कथाकार एवं ‘पहल’ पत्रिका के संपादक के रूप में समादृत ज्ञानरंजन के जाने की ख़बर से। 7 जनवरी की रात, जबलपुर में उनका निधन हो गया था। फिर पता चला कि गुरु घासीदास विश्वविद्यालय और

06 नवम्बर 2025

कमल जीत चौधरी की दस कथाएँ

कमल जीत चौधरी की दस कथाएँ

कहानी उसने प्यार किया था। उसे अपने पुराने प्रेमी की याद सताती थी। पति की ग़ैरमौजूदगी में एक रात उसने अपने प्रेमी को घर बुलाया। घर के सभी बल्ब बंद करके, वह उसे पिछले दरवाज़े से अंदर ले आई। अंदर पहु

07 अक्तूबर 2025

भाषा में पसरती जा रही मुर्दनी

भाषा में पसरती जा रही मुर्दनी

लेखक-पत्रकार प्रियदर्शन द्वारा अरुंधती राय की नई पुस्तक ‘मदर मेरी कम्स टु मी’ की भूमिका को संदर्भ में रखते हुए लिखा गया एक संक्षिप्त लेख पढ़ा, जिसमें यह बात कही गई कि हमारी भाषा अब स्थिर हो रही है। व

07 सितम्बर 2025

बिंदुघाटी : गुदरिया गले में डारे भरथरी

बिंदुघाटी : गुदरिया गले में डारे भरथरी

• किंवदंतियों, जनश्रुतियों और विद्वानों के विवरणों में विशद उपस्थिति रखने वाले भर्तृहरि राजा थे या ऋषि! कवि थे या वैयाकरण! योगी थे या भोगजीवी सांसारिक... या फिर इन सबको समाहित किए पूरी भारतीय मनीषा म

28 अगस्त 2025

हम चुटकुलों से ख़फ़ा हैं

हम चुटकुलों से ख़फ़ा हैं

आमतौर पर तो भारतीय प्रथा यह है कि ज़रूरी मुद्दों को चुटकुला बना दिया जाए। लेकिन कभी-कभी जब किसी सुहाने दिन मंद-मंद-सी बयार बह रही हो, फ़िज़ा तनिक महकी-महकी-सी होने लगे, तो सोने पर सुहागा यह कि संडे ट

17 अगस्त 2025

बिंदुघाटी : ‘सून मंदिर मोर...’ यह टीस अर्थ-बाधा से ही निकलती है

बिंदुघाटी : ‘सून मंदिर मोर...’ यह टीस अर्थ-बाधा से ही निकलती है

• विद्यापति तमाम अलंकरणों से विभूषित होने के साथ ही, तमाम विवादों का विषय भी रहे हैं। उनका प्रभाव और प्रसार है ही इतना बड़ा कि अपने समय से लेकर आज तक वे कई कला-विधाओं के माध्यम से जनमानस के बीच रहे है

03 अगस्त 2025

बिंदुघाटी : अब घंटे चतुर्दिक बज रहे हैं

बिंदुघाटी : अब घंटे चतुर्दिक बज रहे हैं

• नशे की वजह से कभी-कभार थोड़ा बहुत ग़ुस्सा बन जाता है और आपसी चिल्प-पों के बाद ऊपर आसमान में गुम हो जाता है। इस नशे की स्थिति में ऐसा भी लगता है कि हम सजग हो गए हैं। साहित्य के सन्वीक्षा-संसार में

13 जुलाई 2025

बिंदुघाटी : वाचालता एक भयानक बीमारी बन चुकी है

बिंदुघाटी : वाचालता एक भयानक बीमारी बन चुकी है

• संभवतः संसार की सारी परंपराओं के रूपक-संसार में नाविक और चरवाहे की व्याप्ति बहुत अधिक है। गीति-काव्यों, नाटकों और दार्शनिक चर्चाओं में इन्हें महत्त्वपूर्ण स्थान प्राप्त है।  आधुनिक समाज-विज्ञान

29 जून 2025

‘बिंदुघाटी’ पढ़ते तो पूछते न फिरते : कौन, क्यों, कहाँ?

‘बिंदुघाटी’ पढ़ते तो पूछते न फिरते : कौन, क्यों, कहाँ?

• उस लड़की की छवि हमेशा के लिए स्टीफ़न की आत्मा में बस गई, और फिर उस आनंद में डूबा हुआ पवित्र मौन किसी भी शब्द से नहीं टूटा...  आप सोच रहे होंगे कि यहाँ किसी आशिक़ की किसी माशूक़ के लिए मक़बूलियत की बा

26 जून 2025

नायक खोजते अ-नायक हो तुम

नायक खोजते अ-नायक हो तुम

उल्टी धार के लिए शुक्रगुज़ार होना चाहिए। परेशानियों का शुक्रिया कहना चाहिए। अधम मनुष्यों से दूर रहना चाहिए। कविता में सूक्तियों के बारे में जो सोचते हो, गद्य में अगर सूक्तियाँ बन जाती हों, तो उनको बन

16 जून 2025

औरंगज़ेब का घरेलू नाम नवरंग बिहारी था

औरंगज़ेब का घरेलू नाम नवरंग बिहारी था

लेख से पहले चंद शब्द कुछ दिन पहले अपने पुराने काग़ज़ात उलट-पलट रही थी कि एक विलक्षण लेख हाथ आया। पंडित वाहिद काज़मी का लिखा—हेडलाइन प्लस, जुलाई 2003 में प्रकाशित। शीर्षक पढ़कर ही झुरझुरी आ गई। एक स

15 जून 2025

बिंदुघाटी : करिए-करिए, अपने प्लॉट में कुछ नया करिए!

बिंदुघाटी : करिए-करिए, अपने प्लॉट में कुछ नया करिए!

• अवसर कोई भी हो सबसे केंद्रीय महत्व केक का होता है। वह बिल्कुल बीचोबीच होता हुआ, फूला हुआ, चमकता हुआ, अकड़ा हुआ, आकर्षित करता हुआ रखा होता है।  वह एक विचारहीन प्रविष्टि के रूप में हर जगह आवश्यक बन

01 जून 2025

बिंदुघाटी : ‘ठीक-ठीक लगा लो’ कहना मना है

बिंदुघाटी : ‘ठीक-ठीक लगा लो’ कहना मना है

• मैं भ्रम की चपेट में था कि फ़ेसबुक और वहाँ के विमर्शों की दुनिया ही अब एकमात्र रह गई है। इसमें जो कुछ छूट गया है—वह भी धीरे-धीरे इसका ही हिस्सा हो जाएगा। जब गत चार साल से मेरे फ़ेसबुकिया संक्रमण में

19 मार्च 2025

व्यंग्य : अश्लील है समय! समय है अश्लील!

व्यंग्य : अश्लील है समय! समय है अश्लील!

कुछ रोज़ पूर्व एक सज्जन व्यक्ति को मैंने कहते सुना, “रणवीर अल्लाहबादिया और समय रैना अश्लील हैं, क्योंकि वे दोनों अगम्यगमन (इन्सेस्ट) अथवा कौटुंबिक व्यभिचार पर मज़ाक़ करते हैं।” यह कहने वाले व्यक्ति का

23 फरवरी 2025

रविवासरीय : 3.0 : ‘जो पेड़ सड़कों पर हैं, वे कभी भी कट सकते हैं’

रविवासरीय : 3.0 : ‘जो पेड़ सड़कों पर हैं, वे कभी भी कट सकते हैं’

• मैंने Meta AI से पूछा : भगदड़ क्या है? मुझे उत्तर प्राप्त हुआ :  भगदड़ एक ऐसी स्थिति है, जब एक समूह में लोग अचानक और अनियंत्रित तरीक़े से भागने लगते हैं—अक्सर किसी ख़तरे या डर के कारण। यह अक्सर

29 जनवरी 2025

जीवन को धुआँ-धुआँ करतीं रील्स

जीवन को धुआँ-धुआँ करतीं रील्स

मैं बहुत लंबे समय से इस बात पर चिंतन कर रहा हूँ और यह कितना सही और ग़लत है—यह तो खोजना होगा; पर मैं मान कर चल रहा हूँ कि रोमांस मर चुका है। उसके साथ ही मर चुका है साहित्य। कला दम तोड़ रही है। अगर यह क

01 दिसम्बर 2024

हिंदुस्तान आपको नींद की ज़रूरत है

हिंदुस्तान आपको नींद की ज़रूरत है

मेरे प्यारे दोस्तो, हिंदुस्तान कभी सुबह जल्दी उठने वालों का देश हुआ करता था। यह हमारे डीएनए में था। सुबह उठकर आप बिना किसी रुकावट के दस क़दम भी नहीं चलते कि एक आत्ममुग्ध चाचा जी मिल जाते, जो सुबह 4 ब

19 अक्तूबर 2024

CTRL :  एक बेमेल दुनिया की सच्चाई, जहाँ से बचना लगभग असंभव है

CTRL : एक बेमेल दुनिया की सच्चाई, जहाँ से बचना लगभग असंभव है

कभी-कभी सोचती हूँ कि यह आभासी दुनिया भी कितनी उकताऊ हो चुकी है। कुछ भी आभासी देखने या सुनने का मन नहीं होता। जब मैंने नेटफ़्लिक्स पर ‘CTRL’ देखनी शुरू की, तो मुझे लगा कि यह एआई और डेटा-प्राइवेसी पर आ

25 जुलाई 2024

भूलना दुनिया का सबसे बुरा मर्ज़ है

भूलना दुनिया का सबसे बुरा मर्ज़ है

“नदी इतनी पतली थी कि उसमें अब बस धूप से सनी थोड़ी नींद बहती थी।” पहली कहानी के पहले पन्ने पर ऐसी काव्यात्मक भाषा मिल जाए तो पठनीयता की भी ट्यूनिंग हो जाती है। नदी का पेट के मुहाने में बदल जाने की