जीवन पर कहानियाँ
जहाँ जीवन को स्वयं कविता
कहा गया हो, कविता में जीवन का उतरना अस्वाभाविक प्रतीति नहीं है। प्रस्तुत चयन में जीवन, जीवनानुभव, जीवन-संबंधी धारणाओं, जीवन की जय-पराजय आदि की अभिव्यक्ति देती कविताओं का संकलन किया गया है।
पत्रकार बुद्धिराम @ पत्रकारिता डॉट कॉम
बुद्धिराम की निगाहें कंप्यूटर पर और ऊंगलियाँ की बोर्ड पर थीं मगर ख़बर थी कि बन ही न रही थी... वह कहीं और ख़यालों में विचर रहा था। सीट पर सिर्फ़ उसका तन था जबकि मन कहीं और। सोच रहा था कि जिनकी वह दिल से इज़्ज़त करता है, जिनके एक आदेश पर टाइलेट तक रोककर
अशोक मिश्र
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