शिकायत पर उद्धरण

ख़राब किया जा रहा मनुष्य आज जगह-जगह दिखाई देता है।

मंगलेश डबराल

किसी का मूल्यांकन करते वक़्त हमें अपने दृष्टिकोण का भी मूल्यांकन करना चाहिए।

गोरख पांडेय

इस लज्जित और पराजित युग में कहीं से ले आओ वह दिमाग़ जो ख़ुशामद आदतन नहीं करता।

रघुवीर सहाय

दोहरी ज़िंदगी की सुविधाओं से मुझे प्रेम नहीं है।

राजकमल चौधरी

संबंधित विषय

बोलिए