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उम्मीद पर बेला

02 अक्तूबर 2026

बल के बारे में

बल के बारे में

श्रम काग़ज़ है। कर्म हस्ताक्षर। व्यक्ति को अपना काम करना चाहिए। मेहनत से। ईमानदारी से। समर्पण से। सजगता के साथ और अद्यतन कर्मठता से। लेकिन कर्म करने से पहले चुनाव करना ही चाहिए कि कौन-सा काम करने योग्य

11 अगस्त 2026

साथ निभाने की कला

साथ निभाने की कला

संबंधों के बिना मानव जीवन कितना शांत और सरल है। लेकिन ऐसी शांति और सरलता किस काम की जिसमें मानव किसी से दो बातें न कह सके। किसी के ऊपर चिल्ला न सके। उससे झगड़ न सके। झापड़ न मार सके या बदले में उससे झा

25 फरवरी 2026

आख़िर कितना चक दे इंडिया!

आख़िर कितना चक दे इंडिया!

पिछले कुछ वर्षों से क्रिकेट नित्यकर्म की तरह हो चला है। हर रोज़ क्रिकेट खेला जा रहा है। हर रोज़ फेंकी जा रही है बॉल, हर रोज़ घुमाया जा रहा है बल्ला और हर रोज़ ही छूट रही हैं कैचें! इस रोज़मर्रा की क्

26 फरवरी 2025

हमें खिड़कियों की ज़रूरत है

हमें खिड़कियों की ज़रूरत है

खिड़कियों के बाहर कई तरह के रंग होते हैं, धरती के भी-आसमान के भी। पर खिड़कियाँ अपने रंगों से नहीं अपने हवादार होने से जानी जाती हैं। वे इतनी बड़ी नहीं होतीं कि दरवाज़ा हो जाएँ, न इतनी छोटी कि आप झरोखा य

23 जनवरी 2025

उम्मीद का चक्र जब पूरा होता है, तब ज़िंदगी कहाँ होती है!

उम्मीद का चक्र जब पूरा होता है, तब ज़िंदगी कहाँ होती है!

सुंदरता की अपने तहें होती हैं। बहुत मुलायम और क्रूर भी। मन हमेशा इतना ही अनजान रहता है कि वह परतों के इस जमावड़े को भूल जाए। कहाँ ध्यान रहता है कि सुख के किस क्षण ने हाल में फूटे दुखों के ज्वालामुखी