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रोग पर बेला

रोग-पीड़ा-मृत्यु मानव

के स्थायी विषाद के कारण रहे हैं और काव्य में अभिव्यक्ति पाते रहे हैं। इस चयन में रोग के विषय पर अभिव्यक्त कविताओं का संकलन किया गया है।

06 मार्च 2026

जगह-जगह 2.0  : द मैजिक माउंटेन : मनुष्य-चेतना पर महामारी के चिह्न

जगह-जगह 2.0 : द मैजिक माउंटेन : मनुष्य-चेतना पर महामारी के चिह्न

एक …अगर वह फ़िलॉसॅफ़िकल है तो एक ऐसे अर्थ में जिसके लिए अक्सर हम ‘फ़िलॉसॅफ़ी’ जैसे शब्द का इस्तेमाल नहीं करते, पर जो अपनी अंत:प्रक्रिया में ही एक तरह का सोच, एक तरह का निश्चय, एक तरह की रिफ़्लेक्टिवने

13 दिसम्बर 2025

कहानी : आकांक्षा

कहानी : आकांक्षा

मेरे हाथ में संडे का अख़बार है। मेरे बाजू के स्टूल पर सुबह की पहली चाय का कप। स्मिता भी चाय पी रही है। बरसों पहले फ़्रेम करवायी गई रवींद्रनाथ ठाकुर की यह तस्वीर किताबों की रैक के नीचे टंगी है। रवी बा

31 अक्तूबर 2025

सिट्रीज़ीन : ज़िक्र उस परी-वश का और फिर बयाँ अपना

सिट्रीज़ीन : ज़िक्र उस परी-वश का और फिर बयाँ अपना

सिट्रीज़ीन—वह ज्ञान के युग में विचारों की तरह अराजक नहीं है, बल्कि वह विचारों को क्षीण करती है। वह उदास और अनमना कर राह भुला देती है। उसकी अंतर्वस्तु में आदमी को सुस्त और खिन्न करने तत्त्व हैं। उसके स

17 अक्तूबर 2025

फ़ैटी लिवर प्रतीक्षा की बीमारी है

17 अक्तूबर 2025

फ़ैटी लिवर प्रतीक्षा की बीमारी है

एक बड़ी घटना जिस समय घट रही थी, उस समय मैं बरौनी ग्वालियर एक्सप्रेस में थर्ड एसी के कोच में सामान चढ़ाकर हाँफ रहा था। साँस फेफड़ों के उस कोने में आसानी से नहीं पहुँच पा रही, जहाँ से ख़ून अपने हिस्से का ऑ

07 मार्च 2025

‘द फ़ॉल्ट इन आर स्टार्स’ : प्रेम के रास्ते मृत्यु की तैयारी

‘द फ़ॉल्ट इन आर स्टार्स’ : प्रेम के रास्ते मृत्यु की तैयारी

साल 2014 में रिलीज़ हुई अँग्रेज़ी भाषा की एक अद्भुत फ़िल्म है—‘The Fault In Our Stars’. साल 2020 में आई ‘दिल बेचारा’ इसी फ़िल्म का हिंदी रीमेक थी, लेकिन इसे देखते हुए यही दुख और मलाल रहा कि यह मूल फ़

25 जनवरी 2025

इहबास में सोलह दिन

इहबास में सोलह दिन

मेरे चार दशक के अनुभव ने जीवन में चार चाँद लगा दिए हैं। कुछ दशक तो मेरे लिए एक सदी लिए हुए आए थे, सूरज सरीखे चमकीले, दमकीले और झुलसा देने वाले। दिल्ली के हाइटेक कहे-समझे जाने वाले खस्ताहाल अस्पतालों

18 जुलाई 2024

एक कोरोजीवी का ख़ुद को ख़त

एक कोरोजीवी का ख़ुद को ख़त

प्रिय ‘मैं’ घड़ी के अश्रांत पाँव मुझे हमेशा रोचक लगे हैं। उनके आगे चलते जाने की प्रतिबद्धता मुझे हैरत और हिम्मत से सराबोर करती है। तुम्हें पता है कि मेरी हमेशा से यह अकारथ इच्छा रही है—जो कि संभवतः