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संबंध पर ग़ज़लें

कुछ कहल ना

अशोक द्विवेदी

सफर में गर

अशोक द्विवेदी

घर अन्हरिया के सुरूज

मिथिलेश ‘गहमरी’

बहुत घिना के ना, तनिको दुलार के देखीं

सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’

साँस पर राग

गहबर गोवर्द्धन

उमिर के सँवारत

कृष्णानन्द कृष्ण

तनी देख लीं ना

मिथिलेश ‘गहमरी’

कहे के रहत बानी

मिथिलेश ‘गहमरी’

ना जूटी मन टूट गइल बा

सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’

छोड़ दीं, चलके कहीं से कहीं ले आए दीं

सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’

हमरा जिनगी में भोर

नागेन्द्र प्रसाद सिंह

केहू न पास बा

ब्रजभूषण मिश्र

के बा आपन, कवन पराया

ब्रजभूषण मिश्र

पूछत बा लोग

जौहर शफियाबादी

प्यार जग के सार

सूर्यदेव पाठक ‘पराग’