डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय [सागर] में अगला ‘हिन्दवी कैंपस कविता’ आयोजन, कविता भेजने की अंतिम तिथि आज
हिन्दवी डेस्क
15 फरवरी 2026
हिन्दवी कैंपस कविता—‘हिन्दवी’ का एक विशेष आयोजन है। इस आयोजन के माध्यम से देश के विभिन्न शैक्षिक संस्थानों के साथ मिलकर वहाँ के छात्रों को साहित्य-सृजन के लिए प्रोत्साहित करने का प्रयास किया जाता है। दो सत्रों के इस कार्यक्रम में कैंपस के विद्यार्थियों को आमंत्रित कवियों से जुड़ने का अवसर एवं प्रतियोगिता के अंतर्गत कविता-पाठ करने का अवसर भी प्राप्त होता है। हिंदी-संसार की अभी-अभी की नई पीढ़ी को, हिंदी के श्रेष्ठ कवियों के मार्गदर्शन में रचनात्मकता से अवगत कराने में अत्यंत सहायक इस आयोजन का अगला कार्यक्रम हो रहा है—डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर, मध्य प्रदेश में। आयोजन में होने वाली प्रतियोगिता मध्य प्रदेश राज्य के विद्यालयों-महाविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों में पढ़ रहे विद्यार्थियों के लिए है। वे आज मध्यरात्रि तक अपनी कविताएँ भेज सकते हैं। प्रतियोगी अपनी कविताएँ दिए गए लिंक पर जाकर भेजें : हिन्दवी कैंपस कविता [डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर]
अब तक देश के ग्यारह राज्यों के बीस प्रतिष्ठित शिक्षण-संस्थानों में ‘हिन्दवी कैंपस कविता’ के सफल आयोजन किए जा चुके हैं। इस आयोजन की शुरुआत ‘हिन्दवी’ ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय (हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा विभाग) के साथ वर्ष 2022 में सितंबर महीने में की थी। इस सिलसिले में आगे—
• शहीद दुर्गा मल्ल राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय (देहरादून)
• पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय (बठिंडा)
• हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय (हैदराबाद)
• हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय (महेंद्रगढ़)
• बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय (लखनऊ)
• अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (अलीगढ़)
• क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान, एनसीईआरटी (भोपाल)
• राम लखन सिंह यादव कॉलेज (राँची)
• वी.एस.एस.डी. कॉलेज (कानपुर)
• देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (इंदौर)
• विश्व-भारती (शांतिनिकेतन)
• महादेवी वर्मा सृजनपीठ, कुमाऊँ विश्वविद्यालय (नैनीताल)
• जामिया मिल्लिया इस्लामिया, दिल्ली
• दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली
• अंतर सांस्कृतिक अध्ययन केंद्र, बी.एच.यू., वाराणसी
• गुजरात केंद्रीय विश्वविद्यालय, वडोदरा
• हिंदू कॉलेज, दिल्ली
• ए.एन. कॉलेज, पटना
• कैंपस कविता, हिन्द युग्म उत्सव, रायपुर
के साथ मिलकर अब तक हिन्दवी कैंपस कविता के आयोजन हो चुके हैं।
इस आयोजन का अखिल भारतीय स्वरूप ऑल इंडिया कैंपस कविता इस बार के 'हिन्दवी उत्सव' का एक प्रमुख आकर्षण था जिसे काफ़ी सराहा गया।
इस कड़ी में वर्ष 2026 में ‘हिन्दवी कैंपस कविता’ का अगला आयोजन डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर के सहयोग से हो रहा है। आयोजन में भारतभूषण अग्रवाल पुरस्कार से सम्मानित, सुपरिचित कवि-कथाकार और अनुवादक तेजी ग्रोवर, भारतभूषण अग्रवाल पुरस्कार से सम्मानित, सुपरिचित कवि-आलोचक और अनुवादक पंकज चतुर्वेदी और सुपरिचित कवि पवन करण कविता-पाठ के लिए आमंत्रित हैं। दो सत्रों के इस कार्यक्रम में कैंपस के विद्यार्थियों को आमंत्रित कवियों से जुड़ने और उनके सम्मुख अपनी कविताएँ सुनाने का अवसर प्राप्त होगा। आमंत्रित कवि बतौर निर्णायक न सिर्फ़ इन विद्यार्थी-कवियों की कविताओं पर बात करेंगें, बल्कि इनमें से श्रेष्ठ तीन कवियों को पुरस्कृत भी करेंगे।
कार्यक्रम की तिथि : बुधवार, 18 फ़रवरी 2026
कार्यक्रम-स्थल : अभिमंच सभागार, डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय , सागर, मध्यप्रदेश
प्रतियोगिता के लिए नियम-निर्देश :
• यह प्रतियोगिता मध्य प्रदेश राज्य के विद्यालयों-महाविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों में पढ़ रहे विद्यार्थियों के लिए है। कृपया अन्य राज्यों के विद्यार्थी कविताएँ न भेजें।
• प्रतियोगिता में शामिल होने के लिए विद्यार्थी दिए गए गूगल फ़ॉर्म को भरें।
• प्रतियोगिता के लिए अपनी पाँच मौलिक और अप्रकाशित-अप्रसारित कविताएँ भेजना अनिवार्य है।
• ‘हिन्दवी कैंपस कविता’ के पूर्व-आयोजनों में प्रतिभागी या विजेता रहे विद्यार्थी भी इस प्रतियोगिता में हिस्सा ले सकते हैं; बशर्ते वे अपनी वे कविताएँ पुन: न भेजें, जिनके आधार पर पहले उनका चयन ‘हिन्दवी कैंपस कविता’ के मंच के लिए हुआ था।
• कविताएँ भेजने की अंतिम तिथि 15 फ़रवरी 2026 है।
• कृपया कविताएँ नागरी लिपि में और पीडीएफ़ फ़ाइल में ही भेजें।
• प्रतियोगिता के लिए चयनित प्रतिभागियों की घोषणा 16 फ़रवरी 2026 को ‘हिन्दवी’ के सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स पर की जाएगी।
• प्रतियोगिता में चयनित होने पर विद्यार्थियों को अपने यात्रा-व्यय पर आयोजन में भागीदारी के लिए आना होगा।
• प्रतियोगिता के किसी भी चरण में अगर प्रतिभागी की कविताएँ अमौलिक, अनूदित या AI-निर्मित पाई गईं तो आपका आवेदन तत्काल प्रभाव से निरस्त माना जाएगा।
(हमारा अनुरोध है कि इस गूगल फ़ॉर्म को मध्य प्रदेश के विभिन्न शैक्षणिक-संस्थानों के विभिन्न विभागों के अध्यापक अपने कवि-विद्यार्थियों से भरवाएँ, ताकि राज्य में कैंपस-स्तर की कोई भी काव्य-प्रतिभा इस अवसर से अछूती न रह जाए। आग्रह है कि स्वयं भी कविताओं की जाँच कर लें ताकि कविताएँ मौलिक हों, यह सुनिश्चित हो सके।)
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