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बेला

साहित्य और संस्कृति की घड़ी

23 मई 2025

‘इलाहाबाद तुम बहुत याद आते हो-3’

‘इलाहाबाद तुम बहुत याद आते हो-3’

दूसरी कड़ी से आगे... हाँ तो मैं ऑटो में था। वह धड़धड़ाता हुआ बैरहना डाट पुल से सीएमपी कॉलेज से मेडिकल चौराहा होते हुए सिविल लाइंस, हनुमान मंदिर के पास पहुँचा। मैं वहाँ से सीधा पुस्तक मेला गया। मेला

22 मई 2025

दास्तान-ए-गुरुज्जीस-4

दास्तान-ए-गुरुज्जीस-4

तीसरी कड़ी से आगे... उन दिनों हॉस्टल के हर कमरे से ‘वो काग़ज़ की कश्ती, वो बारिश का पानी’ की आवाज़ें आती थी। हर कमरे से कोई एक नाक सुड़कता, सुबकता मिल जाता था। उन दिनों जब भारत ने विश्व कप जीता तो

21 मई 2025

नाम में जो रखा है

नाम में जो रखा है

मैं इस पर बिल्कुल विश्वास नहीं करता हूँ कि नाम में क्या रखा है? मेरे पूर्वजों ने बतलाया है कि अपने माँ-बाप का नाम रोशन करना। इसलिए नाम के प्रति मैं बहुत संजीदगी रखता हूँ। मेरे गाँव में भी लोग नाम के

21 मई 2025

बानू मुश्ताक़ की ‘हार्ट लैंप’ को अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार

बानू मुश्ताक़ की ‘हार्ट लैंप’ को अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार

इस वर्ष का अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार भारतीय लेखिका बानू मुश्ताक़ के कथा संकलन ‘हार्ट लैंप’ को मिला है। बानू मुश्ताक़ कन्नड़ भाषा की कथाकार हैं। उनके कथा-संकलन ‘हार्ट लैंप’ का अनुवाद दीपा भास्ती ने कि

20 मई 2025

क्योंकि कलाएँ लोकतांत्रिक हैं

20 मई 2025

क्योंकि कलाएँ लोकतांत्रिक हैं

चंद रोज़ पहले Cannes Film Festival में रॉबर्ट डी नीरो को लाइफ़टाइम अचीवमेंट पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इस पुरस्कार को स्वीकार करते हुए उन्होंने चार मिनट पच्चीस सेकेंड का एक वक्तव्य दिया। यहाँ प्रस्

19 मई 2025

ओ इरशाद, प्यारे इरशाद! अलविदा!

ओ इरशाद, प्यारे इरशाद! अलविदा!

ओ अज़ीज़ इरशाद खान सिकंदर! ओ बुजुर्गों की तमीज़ से भरे युवा इंसान और शाइर-कवि!  यह अचानक क्या!  तुम्हारी हमेशा-हमेशा की ख़ामोशी हमें बहुत सताएगी यार!  हमें फ़ख़्र है कि दिल्ली में दिल जीतने

18 मई 2025

बिंदुघाटी : क्या किसी का काम बंद है!

बिंदुघाटी : क्या किसी का काम बंद है!

• जाते-जाते चैत सारी ओस पी गया। फिर सुबह की धरणी में मद महे महुए मिलने लगे। फिर जाते वैशाख वे भी विदा हुए। पाकड़ हों या पीपर, उनके तले गूदों से पटे पड़े हैं। चिड़ियों को चहचहाने के लिए और क्या चाहिए! भर

17 मई 2025

चंदर से गलबहियाँ नहीं, सुधा पर लानत नहीं

चंदर से गलबहियाँ नहीं, सुधा पर लानत नहीं

धर्मवीर भारती के कालजयी उपन्यास ‘गुनाहों का देवता’ पर इन दिनों फिर से चर्चा हो रही है। यह भी कम अचरज भरी बात नहीं है। आज़ादी के दो साल बाद आए इस उपन्यास पर अगली सदी में इस तरह का डिस्कोर्स शायद इसके

16 मई 2025

क्राइम मास्टर गोगो, श्री निर्मल वर्मा और मैं

क्राइम मास्टर गोगो, श्री निर्मल वर्मा और मैं

हिंदी में एक ऐसे लेखक हुए, जिन्होंने लाखों भूले-भटके किशोरों-युवाओं का जीवन तबाह किया। इंटरनेट पर फैले इनके कोट्स नशीली उदासी का व्यापार करते हैं। हिंदी के ‘क्राइम मास्टर गोगो’—प्रचंड अवसाद और निराशा

15 मई 2025

ये day वो day और हाथी

ये day वो day और हाथी

वर्ल्ड अर्थ डे और हाथी का कोई सीधा संबंध नहीं है, पर पता नहीं क्यों मुझे ‘वर्ल्ड अर्थ डे’ पर हाथी याद आता है। हाथी का इतिहास संघर्षों की मिट्टी में दबा हुआ है। वह न पूरी तरह से जंगल का हुआ, न ही पूरी