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बेला

साहित्य और संस्कृति की घड़ी

23 अक्तूबर 2026

‘हिंदी का आलोचक : पाँच कटाउज और एक कालजयी उपन्यास की तलाश’

‘हिंदी का आलोचक : पाँच कटाउज और एक कालजयी उपन्यास की तलाश’

अगर आप हिंदी में उपन्यास लिखने की गुस्ताख़ी कर चुके हैं (या करने की सोच रहे हैं), तो मेरी पहली सलाह होगी कि पहले अपना कवच (या इसके बदले कोई और उपयुक्त चीज़) मज़बूत कर लीजिए। डिजिटल युग के आगमन के ब

23 अक्तूबर 2026

मेरी पहली जेल-यात्रा

मेरी पहली जेल-यात्रा

जीवन के पेच-ओ-ख़म इतने जटिल होते हैं कि हर बार कविता, कहानी या किरदार आपको बचा नहीं पाता है। ऐसे ही आप समाज के भीतर से हाशिए की ओर जाते हैं; हाशिए से भीतर आते हैं, ताकि अपनी ओर की यात्रा में उकताहट क

22 अक्तूबर 2026

हैदराबाद विश्वविद्यालय के बाद

हैदराबाद विश्वविद्यालय के बाद

हैदराबाद में मेरी पढ़ाई अब पूरी हो चुकी है। ज़िंदगी के एक पड़ाव को पीछे छोड़कर दूसरे की ओर बढ़ने से पहले मैं कुछ दिनों के लिए अपने गाँव लौट आई हूँ। शायद यह लौटना सिर्फ़ घर लौटना नहीं है; यह उन गलियों

18 अक्तूबर 2026

किराए का कमरा : विद्यार्थी बनाम मकान मालिक

किराए का कमरा : विद्यार्थी बनाम मकान मालिक

किसी यूनिवर्सिटी या कॉलेज में प्रवेश के लिए एंट्रेंस एग्ज़ाम पास करने के बाद दाख़िला लेने में उतनी समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ता, जितनी हॉस्टल न मिलने पर किराए का कमरा खोजने में करना पड़ता है। अस

17 अक्तूबर 2026

आवारा कुत्तों का मसीहा

आवारा कुत्तों का मसीहा

उन दिनों की बात है, जब गाँव में थोड़ी अनबन चल रही थी। उन्हीं दिनों एक आदमी अफ़ीम बेचता था और पैसे कमाता था, लेकिन उन पैसों के बारे में किसी को पता नहीं चलने देता था। बहुत कम लोगों को पता था कि वह अफ़

16 अक्तूबर 2026

दुनिया गोल ही है

दुनिया गोल ही है

हर गोल पूरी तरह गोल नहीं है। जैसे अपनी पृथ्वी जिसे हम गोल कहते हैं, लेकिन वह कहीं-कहीं उभरी हुई है और कहीं गहरी धँसी हुई। सूरज के चारों ओर घूमने वाली पृथ्वी की कक्षा भी तो पूरी तरह गोल नहीं, बल्कि अं

16 अक्तूबर 2026

‘कोर्ट मार्शल’ की सवर्ण सीमा : जब दलित बोलने लगे तो नाटक ख़त्म हो जाता है

‘कोर्ट मार्शल’ की सवर्ण सीमा : जब दलित बोलने लगे तो नाटक ख़त्म हो जाता है

चंडीगढ़ आने के कुछ साल बाद मेरी माँ की क़रीबी दोस्त वहाँ अपने ननिहाल आईं तो मुझे भी अपनी मौसी के घर ले गईं। बुज़ुर्ग मौसी ने बड़े स्टाइल से दोपहर का भोजन कराया। कई स्वादिष्ट सब्ज़ियाँ और अचार थे। नौक

15 अक्तूबर 2026

कमल-क्रंदन : एक प्रतीक से पुष्प की ओर…

कमल-क्रंदन : एक प्रतीक से पुष्प की ओर…

एक समय था जब मैं केवल एक फूल था किसी सरोवर का। मैं उस दिन सबसे अधिक प्रसन्न था, जिस दिन मेरा कोई नाम नहीं था। सूरज का प्रकाश मेरे ऊपर उतरता था, जल मुझे अपनी गोद में थामे रहता था और ओस की बूँदें आसमान

13 अक्तूबर 2026

कवि-छवि से कपि-छवि तक की यात्रा

कवि-छवि से कपि-छवि तक की यात्रा

प्यारेलाल जी पधारे। प्रसन्नता नहीं हुई, कोफ़्त हुई। तंगदिल नहीं हूँ, संगदिल भी नहीं। आगंतुक को समय-कुसमय का ख़याल रखना चाहिए। उनके जैसा कुँवारा तो नहीं हूँ; बाल-बच्चेदार हूँ, नागरिक ज़िम्मेदार हूँ। स

12 अक्तूबर 2026

बहुत नाइंसाफ़ी है गदहों के साथ

बहुत नाइंसाफ़ी है गदहों के साथ

गदहे को इंसानी समाज ने हमेशा से ही तुच्छ प्राणी समझा है। इसीलिए प्राणी संग्रहालय में गदहे को छोड़कर सब प्राणियों को रखा गया। क्या गदहों को इंसानों की इस हरकत का बुरा नहीं लगता होगा? गदहा हमेशा से