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बेला

साहित्य और संस्कृति की घड़ी

25 जुलाई 2026

‘शनिवारेर चिट्ठी : मुझे मुआफ़ करना प्रिय!’

‘शनिवारेर चिट्ठी : मुझे मुआफ़ करना प्रिय!’

मुझे मुआफ़ करना प्रिय! इतना भर कह देने से क्या होता है कि मन इस पूरे हफ़्ते खिन्न रहा। यह कहने से कि चीज़ें देखता-सुनता रहा और आँखें भीगती रहीं। कभी निराशा से तो कभी बिजली की तरह कौंध आती आशा से। यह

24 जुलाई 2026

अनशन की नैतिक शक्ति

अनशन की नैतिक शक्ति

आख़िरकार, इस देश की जनता कुछ जागी हुई-सी महसूस होती है। वह अराजनीतिकता का चोला उतारकर मूक से मुखर होती प्रतीत होती है। लेकिन जब हम कहते हैं कि इस देश की सरकार गूँगी, बहरी और अपने उत्तरदायित्व से भागन

24 जुलाई 2026

इस बार ऑल इंडिया कैंपस कविता ‘इलाहाबाद के पथ पर’

इस बार ऑल इंडिया कैंपस कविता ‘इलाहाबाद के पथ पर’

‘हिन्दवी’ ने अपने प्रयोगधर्मी साहित्यिक प्रयासों के अंतर्गत वर्ष 2022 के सितंबर में ‘हिन्दवी कैंपस कविता’ की शुरुआत की थी। इस पहल का पहला आयोजन इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा

23 जुलाई 2026

रज़ा स्मृति : सतपुड़ा, नर्मदा, बेमज़ा वक्ता

रज़ा स्मृति : सतपुड़ा, नर्मदा, बेमज़ा वक्ता

नर्मदा के किनारे, सतपुड़ा की तलहटी में बसे मंडला में हमारे पहुँचने के दिन से शायद ही कोई ऐसा दिन गुज़रा हो जब बारिश न हुई हो। लौटते-लौटते मुख्य पुल के बग़ल का ‘रपटा’, जिस पर कुछ दिन पहले तक स्थानीय लो

23 जुलाई 2026

अश्लील स्थितियों में फँसना

अश्लील स्थितियों में फँसना

उन दिनों मैं मौसी के घर रहकर बारहवीं की परीक्षा दे रही थी। मेरे साथ उसी गाँव की एक लड़की परीक्षा देने जाती थी। उस सुबह भी हम दोनों पेपर देने साथ जा रहे थे, जब रास्ते में उसकी नज़र सड़क के एक किनारे झ

22 जुलाई 2026

प्रयागराज-यात्रा : सुकून की तलाश में

प्रयागराज-यात्रा : सुकून की तलाश में

लोग कुंभ या माघ मेले में पुण्य की कामना लेकर प्रयागराज आते हैं, किंतु मुझे मेले में जाने पर न जाने क्यों ख़ुद को खो देने का भय लगता है। फिर अपने पापों का हिसाब भी भला कौन रखता है! सच तो यह है कि जब-ज

22 जुलाई 2026

पटना में अरुंधति रॉय

पटना में अरुंधति रॉय

बारिश की पहली फुहारों और सावन की आहट के बीच, 18 जुलाई 2026 की शाम पटना के सांस्कृतिक जीवन की एक उल्लेखनीय शाम बन गई। वर्षों से अपनी साहित्यिक और सांस्कृतिक सक्रियता के लिए पहचाना जाने वाला यह शहर पहल

21 जुलाई 2026

अलविदा हिंदू!

अलविदा हिंदू!

व्यक्ति जब पीछे मुड़कर अपनी ज़िंदगी को देखता है, तो बहुत-सी चीज़ें धुँधली दिखाई देने लगती हैं। जहाँ से चले थे और जहाँ आकर ठहरे हैं, उनके बीच की दूरी ही उस धुँधलाहट का कारण बनती है। कब 2023 से 2026

21 जुलाई 2026

धारावाहिक उपन्यास : जंकामंका गैंग : हिंदी का पहला आतंकवादी

धारावाहिक उपन्यास : जंकामंका गैंग : हिंदी का पहला आतंकवादी

गताध्याय से आगे... चार  यह सच तो यह कि जंकामंका युग से पहले हिंदी विभाग का डंका बजता था। रामकाव्य, जायसी, भारतीय उपन्यास आदि पर केंद्रित शानदार राष्ट्रीय संगोष्ठियाँ यादगार थीं। हर बार मशहूर सि

20 जुलाई 2026

इंडियन रेलवे : एक चलता-फिरता समाज

इंडियन रेलवे : एक चलता-फिरता समाज

दुनिया और ज़िंदगी को ठहरकर नहीं, घर से निकलकर ही देखा जा सकता है। ज़िंदगी को जानने और समझने के लिए ठहराव ज़रूरी है, लेकिन उम्मीद और नाउम्मीदी से भरी तमाम यात्राओं के बाद। हमारी ज़िंदगी ट्रेन जैसी रफ़