साहित्य और संस्कृति की घड़ी
25 अगस्त 2026
‘हिन्दवी’ ने अपने प्रयोगधर्मी साहित्यिक प्रयत्नों के अंतर्गत वर्ष 2022 के सितंबर में ‘हिन्दवी कैंपस कविता’ की शुरुआत की थी। इस पहल का पहला आयोजन इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा
22 अगस्त 2026
प्रिय हिंदी-प्रेमियो, हम आपको सहर्ष यह सूचित कर रहे हैं कि ‘रेख़्ता फ़ाउंडेशन’ का उपक्रम ‘हिन्दवी’—हिंदी-साहित्य-संस्कृति-कला-संसार को समर्पित अपने वार्षिकोत्सव—‘हिन्दवी उत्सव’ के छठे संस्करण का आय
कविता और संगीत का संबंध केवल कविता को धुन में बाँध देने तक सीमित नहीं है। कविता में शब्दों की ध्वनि, लय, आरोह-अवरोह, विराम और गति पहले से ही एक तरह की संगीतात्मक संरचना बनाते हैं। शोध भी कविता के पाठ
तिग्मांशु धूलिया बॉलीवुड में जब पहचाने गए, जब चमके, उससे बहुत पहले से वह बड़े-बड़े प्रोजेक्ट्स में पर्दे के पीछे की बहुत भूमिकाओं में सक्रिय रहे। उनकी फ़िल्मोग्राफ़ी पर नज़र डालें तो हैरत होती है। उन
20 अगस्त 2026
मुझे चेतना पारीक याद रहती हैं। कैसी सहज उभरी शिष्टता में उनके लिए आदरसूचक ‘हैं’ लिख रहा हूँ। वह अलहदा और उतने ही मख़्सूस कवि ज्ञानेंद्रपति की चेतना पारीक हैं। जितना उन्हें जान पाता हूँ, वह कोई दूर खड
20 अगस्त 2026
गगन गिल हिंदी कविता का वह स्वर हैं, जिन्हें किसी एक वाद या विमर्श के दायरे में रखकर समझना संभव नहीं। अपनी ही सीमाओं को लगातार लाँघती उनकी कविता प्रचलित आलोचनात्मक मानकों से बाहर जाकर अपने लिए अर्थ और
19 अगस्त 2026
अधिमूल्यन से उत्पन्न बहुप्रशंसा और अतिव्याप्ति से उत्पन्न रुचिशीलता के इस समय में किसी के टेक्स्ट भर से आत्मीय होना, रचना और रचनाकार—दोनों के लिए—किसी पाठक को उदात्तता से भर देता है। देखने-सुनने-जानन
13 अगस्त 2026
28, 29 और 30 जुलाई 2026 को काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग में एक अलहदा संगोष्ठी हुई—‘नयी चाल की हिन्दी’। यह संगोष्ठी हिन्दी विभाग की जानी-पहचानी और अधिकांशतः उबाऊ संगोष्ठियों से अलग और काफ़
11 अगस्त 2026
‘हिन्दवी उत्सव’ के अंतर्गत रविवार, 23 अगस्त 2026 को उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र [NCZCC], प्रयागराज, उत्तर प्रदेश में आयोजित होने जा रही ‘ऑल इंडिया कैंपस कविता’ प्रतियोगिता अब अपने निर्णायक प
10 अगस्त 2026
हिंदी साहित्य की परंपरा में इलाहाबाद—अब प्रयागराज—का उल्लेख केवल एक शहर के रूप में करना उसके सांस्कृतिक महत्त्व को कम करना होगा। इलाहाबाद आधुनिक हिंदी साहित्य की उन निर्णायक जगहों में रहा है; जहाँ सा