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बेला

साहित्य और संस्कृति की घड़ी

13 जुलाई 2026

‘भारतीय बाबूतंत्र का सुख’

‘भारतीय बाबूतंत्र का सुख’

कुछ साल पहले सर्दियों में मैंने विंध्यदेश के खंडरों में भटकने का सिलसिला शुरू किया था—किया क्या था, बस हो गया था। यह भटकने का सिलसिला किसी अवसाद से मुक्त होने की कामना के अधीन या किसी शौक़ को संतुष्ट क

13 जुलाई 2026

‘धूप कोठरी के आइने में खड़ी’ : शमशेर की कविता पढ़ते हुए एक स्मृति-चित्र

‘धूप कोठरी के आइने में खड़ी’ : शमशेर की कविता पढ़ते हुए एक स्मृति-चित्र

बचपन से बड़े होने के स्कूली क्रम में कुछ नौ-दस साल की उम्र में बाजी (दादी) के घर में ऐसे अनुभवों से भरी गर्मियों की न जाने कितनी दुपहरें आती थीं। पुराना घर था। आगे के हिस्से में चार कमरे और एक बरामदे

12 जुलाई 2026

बिंदुघाटी 2.0 : मुझे पता है कि इस पोस्ट में आपकी दिलचस्पी है

बिंदुघाटी 2.0 : मुझे पता है कि इस पोस्ट में आपकी दिलचस्पी है

• कोई भी आंदोलन हर क़ीमत पर एक सामजिक-सांस्कृतिक अभिव्यक्ति भी है। इसमें बहुत से प्रशिक्षित या अनुभवी जन भी होते हैं और बहुत से नए-नए उत्साही जन भी। आंदोलन ब्रिटिश राज़ की ग़ुलामी से निकले एक देश के लिए

11 जुलाई 2026

शनिवारेर चिट्ठी  : एक दुनिया, दूसरी दुनिया

शनिवारेर चिट्ठी : एक दुनिया, दूसरी दुनिया

हेडर इतिहास यह आदत रखता है कि वह अपने आरंभों को पीछे मुड़कर पहचानता है। जब कोई युग वास्तव में जन्म ले रहा होता है, तब वह किसी उद्घोषणा के साथ नहीं आता। वह एक साधारण दिन की तरह आता है, इतना साधारण

10 जुलाई 2026

जगह-जगह 2.0 : कूड़े के पहाड़, ट्रैफ़िक जाम, मेट्रो से आगे की देल्ही

जगह-जगह 2.0 : कूड़े के पहाड़, ट्रैफ़िक जाम, मेट्रो से आगे की देल्ही

दिल्ली की तारीफ़, पिछली तारीफ़ों की याद है। इसका रोमांस, रोमांस का दोहराव है। आगे चलो तो पीछे पहुँचते हो, पीछे चलो तो कहीं नहीं। दिल्ली को बहुतों ने याद किया है, जो यहाँ रहते हैं वे भी इसे याद करते ह

10 जुलाई 2026

अलंकार मिश्रा का क्या है!?

अलंकार मिश्रा का क्या है!?

एक दुबला-पतला आदमी अलंकार मिश्रा! बीड़ी (या...) पीते हुए रील्स में दिखता है। गाँव-क़स्बे जैसा बैकग्राउंड, बिना माइक की आवाज़, मुँह से धुँआ निकल रहा है। वीडियो इंटरेस्टिंग लगता है। हम उस पर रुकते हैं।

10 जुलाई 2026

सतलुज : बहता हुआ इतिहास

सतलुज : बहता हुआ इतिहास

कुछ फ़िल्में शहीद होने के लिए ही बनती हैं। इस तरह देखें तो ‘सतलुज’ भी एक शहीद फ़िल्म है। यह फ़िल्म जब वर्ष 2023 में रिलीज़ के लिए तैयार हुई, तभी से विवादों में घिर गई। इस फ़िल्म का पहला शीर्षक ‘ग़ल्लू

09 जुलाई 2026

ई-रिक्शा : कहाँ जाओगे भाई सा’ब!

ई-रिक्शा : कहाँ जाओगे भाई सा’ब!

तीन का आँकड़ा क्या है?  तीन लोग हों, तो भी अर्थी ले जाई जा सकती है, बस एक तरफ़ थोड़ा झुकाव रहेगा। लोक-विश्वास देखें, तो तीन तिगाड़ा-काम बिगाड़ा। सुखी परिवार को भाषा को बिन परखे कहा जाए तो दो मिय

09 जुलाई 2026

कहानी : प्रेम और अपराध और दंड

कहानी : प्रेम और अपराध और दंड

इतनी बारिश!  इतनी बारिश कब हुई थी, याद नहीं आता। संभव है कभी हुई ही न हो... गाँव के दक्खिन की तरफ़ की बसावट जिसे कुछ लोग ‘हरिजन बस्ती’ भी कहते थे और उन कुछ में कुछ वे लोग थे जो एक मँझे हुए राजन

09 जुलाई 2026

मार्जान सतरापी : एक स्त्री और पैग़म्बर बनने का ख़्वाब

मार्जान सतरापी : एक स्त्री और पैग़म्बर बनने का ख़्वाब

एक बात हमेशा से खटकती रही है और शायद आने वाले समय में और भी खटकने लगे, आख़िर क्यों किसी लेखक को सर्वविदित होने के लिए अपनी मौत का इंतिज़ार करना पड़ता है? एक उभरते और शायद गुज़रते हुए साहित्यकार बता र

हिन्दवी उत्सव 2026

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