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बेला

साहित्य और संस्कृति की घड़ी

23 अगस्त 2025

‘एक स्त्री : माँ भी, पिता भी’

‘एक स्त्री : माँ भी, पिता भी’

पिता की अनुपस्थिति में पिता बनती एक स्त्री आज मैं अपने पिता के बारे में नहीं, अपने बच्चे के पिता के बारे में बात करना चाहती हूँ। घर में हम तीन बहनें थीं। सबसे बड़ी बहन को माँ बनने में बहुत कठिनाई ह

22 अगस्त 2025

वॉन गॉग ने कहा था : जानवरों का जीवन ही मेरा जीवन है

वॉन गॉग ने कहा था : जानवरों का जीवन ही मेरा जीवन है

प्रिय भाई, मुझे एहसास है कि माता-पिता स्वाभाविक रूप से (सोच-समझकर न सही) मेरे बारे में क्या सोचते हैं। वे मुझे घर में रखने से भी झिझकते हैं, जैसे कि मैं कोई बेढब कुत्ता हूँ; जो उनके घर में गंदे पं

22 अगस्त 2025

अब्दुल बिस्मिल्लाह के जन्मदिन पर राजकमल प्रकाशन ने मनाया ‘उपलक्ष्य 75’

अब्दुल बिस्मिल्लाह के जन्मदिन पर राजकमल प्रकाशन ने मनाया ‘उपलक्ष्य 75’

हिंदी कथा-संसार में हाशिए के लोगों की पीड़ा और जीवन-संघर्ष को शब्द देने वाले कथाकार अब्दुल बिस्मिल्लाह अपने जीवन के पचहत्तर बरस पूरे कर चुके हैं। उनकी रचनाएँ गाँव-समाज, बोली-बानी और साधारण मनुष्य के

21 अगस्त 2025

काग़ज़ी है पैरहन : इस्मत चुग़ताई के बनने की दास्तान

काग़ज़ी है पैरहन : इस्मत चुग़ताई के बनने की दास्तान

उर्दू गद्य साहित्य की बेहतरीन और बहुचर्चित हस्ताक्षर इस्मत चुग़ताई की आत्मकथा है—‘काग़ज़ी है पैरहन’। यह किताब इस्मत चुग़ताई की शुरूआती ज़िंदगी और उनकी निर्मिति की कहानी को बहुत रोचक अंदाज़ में बयाँ करती है

21 अगस्त 2025

दास्तान-ए-गुरुज्जीस-5 : क़यामत के दिन भी हमने वाइवा दिया!

दास्तान-ए-गुरुज्जीस-5 : क़यामत के दिन भी हमने वाइवा दिया!

चौथी कड़ी से आगे... हम अब वापस सिंहद्वार के भीतर थे! इस बार महाविद्यालय की जगह विभाग हिस्से आया था। बक़ौल मित्र—अब हम सिंहद्वार के भीतर हिंदी की कुछ भोजपुरी कक्षाओं का लाइव देखने के लिए सज्ज थे। त

20 अगस्त 2025

मुझे यूट्यूबर नहीं बनना, पर एक यूट्यूब-चैनल बनाया है : AmoebAI

मुझे यूट्यूबर नहीं बनना, पर एक यूट्यूब-चैनल बनाया है : AmoebAI

जिस वक़्त मुझे सबसे ज़्यादा जॉब सिक्योरिटी की ज़रूरत थी, सबसे ज़्यादा फ़ाइनेंशियल सिक्योरिटी की ज़रूरत थी, उस वक़्त मैंने सबसे ज़्यादा बचकाना काम किया। मैंने जॉब छोड़ दी, पर क्यों? और यह बात मैं आप लोगो

18 अगस्त 2025

‘रेख़्ता वो भाषा है जो इस्तेमाल से बनती है’

‘रेख़्ता वो भाषा है जो इस्तेमाल से बनती है’

सालों पहले देश के मूर्द्धन्य शिक्षाविद् कृष्ण कुमार की एक पुस्तक पढ़ी थी—‘विचार का डर’। वैचारिक निबंधों की इस पुस्तक में शिक्षा, समाज और बौद्धिक स्वतंत्रता के परस्पर संबंधों पर गंभीर चिंतन है। शिक्षा

17 अगस्त 2025

बिंदुघाटी : ‘सून मंदिर मोर...’ यह टीस अर्थ-बाधा से ही निकलती है

बिंदुघाटी : ‘सून मंदिर मोर...’ यह टीस अर्थ-बाधा से ही निकलती है

• विद्यापति तमाम अलंकरणों से विभूषित होने के साथ ही, तमाम विवादों का विषय भी रहे हैं। उनका प्रभाव और प्रसार है ही इतना बड़ा कि अपने समय से लेकर आज तक वे कई कला-विधाओं के माध्यम से जनमानस के बीच रहे है

16 अगस्त 2025

बिखरने के ठीक पहले

बिखरने के ठीक पहले

जो कभी था तुमने आज एक स्वप्न देखा। अब सपने पूरा करने जैसा तो मैं कुछ नहीं कर सकता, पर एक अधूरी इच्छा को ज़रूर गले लगा सकता हूँ। तुम प्रेम नहीं खोज रही थीं, जब मैं मिला; पर शायद जो तुमने मिलने के

15 अगस्त 2025

देश-प्रेम और पहले प्रेम के दरमियान

देश-प्रेम और पहले प्रेम के दरमियान

मैं एक कहानी कहना चाहता हूँ, लेकिन मुझे लगता है कि कथा-कहन के पैमानों पर यह सही बैठती नहीं है। फिर यह कहानी कैसे हुई—जब यह मानकों पर खरा नहीं उतरती तो। जो भी हो मैं कोशिश भरपूर करूँगा। मुझे पता है कि