25 जुलाई 2026
शनिवारेर चिट्ठी : मुझे मुआफ़ करना प्रिय!
मुझे मुआफ़ करना प्रिय! इतना भर कह देने से क्या होता है कि मन इस पूरे हफ़्ते खिन्न रहा। यह कहने से कि चीज़ें देखता-सुनता रहा और आँखें भीगती रहीं। कभी निराशा से तो कभी बिजली की तरह कौंध आती आशा से। यह
‘चिरई के जान जाई औ’ लइकन के खिलौना’
लगभग दो दिन बीत चुके हैं किसी किताब को उठाए या ध्यान से कुछ पढ़े हुए। कहीं मन ही नहीं लग रहा। वह तो बार-बार भावुक हुआ जाता है। कई बार रोने का मन करता है। संवेदना की कितनी ही लहरें शरीर के पूरे हिस्से
23 जून 2026
एक नीट अभ्यर्थी और उम्मीद का न्यूनतम बैलेंस
नीट की परीक्षा देने गए मेरे एक भाई के बाल बड़े थे। बाहर खड़े ज़िम्मेदारों ने उसके बालों में हाथ डालकर यह जाँच की कि कहीं उसमें कोई पुर्ज़ी तो नहीं है। मुझे इस सख़्ती पर ऐतबार भी आया और ग़ुस्सा भी। भरो
02 अप्रैल 2026
गद्य होती कविता, थकता हुआ कवि
जिस दौरान नवंबर बीत रहा था, उसी दौरान घर में एक नया जीवन उतर रहा था। मेरा मन हर घड़ी लगभग बैठा जाता था। लगभग घंटे दो घंटे बाद लगता—अब निकले प्राण कि तब निकले, लेकिन निकले अभी तक नहीं। अब यह कहने की को
‘मुक्तिबोध’ की परम अभिव्यक्ति ‘विद्रोही’
मुक्तिबोध का रहस्यमय व्यक्ति जो उनके परिपूर्ण का आविर्भाव है, वह रमाशंकर यादव ‘विद्रोही’ है। मुक्तिबोध के काव्य में बड़ी समस्या है—सेंसर की। वहाँ रचना-प्रक्रिया के तीसरे क्षण में ‘जड़ीभूत सौंदर्याभिरु
मुक्तिबोध का दुर्भाग्य
आज 11 सितंबर है—मुक्तिबोध के निधन की तारीख़। इस अर्थ में यह एक त्रासद दिवस है। यह दिन याद दिलाता है कि आधुनिक हिंदी कविता की सबसे प्रखर मेधा की मृत्यु कितनी आसामयिक और दुखद परिस्थिति में हुई। जैसा कि