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शनिवारेर चिट्ठी : चीज़ें और चीज़ें

चीज़ें 

पीतल फ़्रेम का पुराना आईना। लकड़ी की चरमराती कुर्सी। स्ट्राइप्ड कुशंस। रंग उड़ा हुआ फ़ारसी रग। हाथ से बुना मैक्रमे। दीवार पर टँगा पुराना नक़्शा। कुछ मोनोक्रोम फ़ोटोग्राफ़। कवि तादेऊष रूज़ेविच का फ़्रेम किया हुआ चित्र। सिनात्रा के सैंड्स कॉन्सर्ट का पोस्टर। हाथ से लिखी हुई कविता। सूखे फूलों का छोटा गुच्छा। पीतल की घंटी। मिट्टी की छोटी मूर्ति। पुरानी दीवार घड़ी। टेराकोटा का फूलदान। लकड़ी की फ़्लोर सेंटर टेबल। बेंत का स्टूल। घिसे चमड़े का फ़ुट स्टूल। रंगीन थ्रो। फ़र्श पर पड़ा मोटा मुलायम गद्दा। पुराना ट्रैवल ट्रंक। पीतल की ट्रे। ब्लैक-सिल्वर ऐश-ट्रे। काँच की सुराही। पुराना टाइपराइटर। रिकॉर्ड-प्लेयर। विनाइल रिकॉर्डों का ढेर। धूल खाया हुआ रेडियो। गिटार। बुकशेल्फ़। किताबों से भरी दो-तीन लकड़ी की पेटियाँ। पुराने पेपरबैक्स। अच्छे कवियों के प्रतिनिधि संग्रह। कला और स्मृति संबंधी पुस्तकें। पुरानी फ़िल्मी मैगज़ीन्स। डायरी और जर्नल। फ़ाउंटेन पेन। स्याही। दूर-शहर के पोस्टकार्ड। कुछ पुराने ख़त। सौ देशों के बुकमार्क्स। पेंसिलों से भरा डिब्बा। पीतल का पेपरवेट। सी-ग्रीन सिरेमिक ट्रे में रखे छोटे पत्थर। सीपियों का कटोरा। किसी प्रदर्शनी से लाया हुआ मुखौटा। तुम्हारी दी हुई पेंटिग्स। चोर बाज़ार से ख़रीदा हुआ टेबल लैम्प। पीली रोशनी वाला फ़्लोर लैम्प। पीतल की लालटेन। धूपदान-अगरबत्तीदान। सुगंधित कैंडल्स। दीवार से लटकता ड्रीमकैचर। बाँस की टोकरी। लकड़ी की पुरानी संदूक़ची। कपास लॉन्ड्री बास्केट। खुली वुडन रैक। पुराने स्कार्फ़। हाथ से कढ़े कपड़े। ब्लॉक-प्रिंट बेडस्प्रेड। सूती बेडशीट। रंगीन लिहाफ़। बेडसाइड स्टूल। छोटा बेडसाइड लैम्प। पुरानी अलार्म क्लॉक। ट्रिंकेट बॉक्स। ताँबे का पानी का लोटा। पीतल के गिलास। कॉफ़ी मग। अलग-अलग रंगों की प्लेटें। हाथ से बनी पॉटरी। मसालों से भरे काँच के जार। स्टील का चॉपिंग बोर्ड। बाँस की फ़्रूट बास्केट। ताँबे की केतली। फ़्लोर डाइनिंग टेबल। अलग-अलग पुराने दिनों की चार कुर्सियाँ। खिड़की पर लटकती बेलें। कैक्टस। टेराकोटा के गमले। यूक्लिप्टस की सूखी डालियाँ। सूखी घास का गुलदस्ता। पुराने जूते रखने की लकड़ी की पेटी। सात दिनों के सात टोट बैग्स। सात टी-शर्ट्स। दरवाज़े के पीछे टँगा घर में बना झोला। अलग-अलग आकार और रंगों की छोटी-छोटी बेकार... लेकिन सुंदर कई चीज़ें।

यह मेरी बेतरतीब कल्पनाओं में मेरे कमरे में उग आती चीज़ों की सूची है, प्रिय मंज! यह किसी आंतरिक चाहना की परिणति नहीं, बाहर का दृश्य-प्रभाव है। इन दिनों मैंने सजावटी कमरों की कितनी ही तस्वीरें देखी थीं। यह सूची संदेह उत्पन्न करती है कि मैं अपने चारों ओर चीज़ें नहीं, अपने ही होने के प्रमाण ढूँढ़ रहा हूँ। जबकि मैं तुमसे तुम्हारा होकर सच कहूँ तो मुझे चीज़ों का संग्रहण किसी प्रकार विस्मृति का व्यवस्थीकरण ही लगता है।

मेरे पूर्वग्रह से देखो तो क्या कोई पुरानी वस्तु किसी बीते हुए क्षण की स्मारक नहीं होती और कोई नई वस्तु भविष्य की किसी मृत्यु का अग्रिम शोक! हम चीज़ें जमाए रखते हैं कि समय के पास यह भ्रम बना रहे कि हम इतने भी ख़ाली नहीं हैं।  

और चीज़ें 

घिला-सुंगा-पीठा। खुरा। ग्यापा खाजी। पेहाक। अलीसा। गल्हो। अक्सोन। बाँस की कोंपलों की चटनी। चामथोंग। इरोम्बा। सिंग्जू। मोरोक मेटपा। चाक-हाओ खीर। बाइह। सानपियाउ। कोचाई। पुख्लेन। पुमालोई। पुतारो। मिनिल सोंग। दाइनेइहोंग। चाखुई। गुदोक। मोसदेंग सेरमा। हरबांग। मुई बोरोक। गुंद्रुक। किनेम्बा। सेल रोटी। छुरपी। चिटाउ-अरिसा-एंडुरी-मंडा पीठा। चंद्रकांति। मोचा घोंटो। धोकाड़ दालना। एँचोड़ेर दालना। पोस्तोर बोड़ा। शुक्तो। उन्नक्काय। पिंजाणत्तप्पम। वट्टयप्पम। कुट्टू करी। हलसिन काई कडुबु। मेन्त्य दोसै। मद्दूर वड़े। काई होळिगे। नीर दोसै। कम्मंगूळ। कुळि पणियारम। पिडि कोळुकट्टै। मोरकुळम्बु। वाळैप्पू उसिलि। गोंगूरा पच्चड़ी। पुनुकुलु। गुट्टु वंकाय। पेसरट्टु। बोब्बट्टु। झुणका। अळूची वडी। भरली वांगी। घावन। ऊंधियूँ। सेव टमेटा। रिंगण नो ओलो। मेथी ना गोटा। दूधपाक। खट्टा मीठा केर। गट्टे की खिचड़ी। राबड़ी। खींच। बाजरे की राब। उड्डमेथी। शिरवाळे। पातोळेयो। पेराद। फणसाची भाजी। नदरू यख़नी। दम ओलव। मोदुर पुलाव। गोग्जी राजमा। हाक। फरा। चीला। अंगाकर रोटी। देहरौरी। गुलगुला। महेर। घोंट... 

तुम्हारे लिए इतना कुछ पकाने या जुटाने की इच्छा में मेरी अपनी भूख बहुत कम है। मैं तो इतना भर चाहता था कि तुम्हारे दिन का कोई साधारण-सा हिस्सा मेरे हाथों से होकर गुज़रे और अखिल भारतीय व्यंजनों की यह अनूठी सूची तैयार हो गई। इन कुछ वर्षों दाल में तड़का मारते, मसालों की मात्रा का अनुमान लगाते, आँच कम-ज़्यादा करते हुए मैं तुम्हारे बारे में उन छोटी-छोटी बातों को जानने लगा जो किसी अन्य विध जानना कम संभव था। तुम्हें कितना नमक अच्छा लगता है, किस गंध से तुम्हें मैं याद आता हूँ, किस स्वाद पर तुम चुप हो जाती हो, किस चीज़ को देखकर तुम्हारा चेहरा बिना किसी प्रयत्न के खिल उठता है। प्रेम की एक कोमलता इस में भी है कि हम किसी दूसरे मनुष्य की छोटी-सी असुविधा के निवारण को भी अपने लिए महत्त्वपूर्ण मानने लगते हैं। संगी के लिए खाना बनाना साथ-साथ एक ऐसा घर बनाने की कल्पना है; जहाँ प्रेम किसी बड़ी बात की तरह नहीं, रोज़ की छोटी-छोटी आदतों की तरह मौजूद रहे।

क़ैनुन, गोगोचा, हानबोक चिमा, चोगोरी, फरादजी, तेरनो, हाउसा रिगा, कांतुंग, ताइसेक, चोक्टाव, क़िपाओ, चांगशान, बिंत अल-बेलेद, मलाया, सोम्ब्रेरो हुआस्टेको, पोलवेरा, हुइपिल, तेहुआना, तिलमा, रेबोज़ो, गामोचा, मेखेला-चादर, पोशाक-ए-तनबान, केनते रैप, डैशिकी, बूबू, काफ़्तान, लेसो, श्वेश्वे, इसिचोलो, रोंडावेल, उम्ब्हाको, तौब, ग़ुब्बा, हाइक, टुबेतेइका, कंसासी, बारो'त साया, बर्नूस, फानेला, पोंचो रुराल, चोला, लिक्रा, सायो, उलान, चूबी, कराकुली...

और फिर तुम्हारे लिए कपड़े चुनने की मेरी कल्पना में कपड़ों से अधिक तुम्हें देखने की मेरी इच्छा है। 

कुछ और चीज़ें 

दी वांड। मालिना। नाख़डेंकेन यूबर क्रिस्टा टी। मुतमासुंगेन यूबर याकोप। फ्रोस्ट। माइन नामे ज़ाइ गान्तेनबाइन। प्लास्च़। दी अन्सिश्टबारे ज़ाम्लुंग। दी डाइमेन। डेर गेहल्फ़े। ले ग्राँ मेओल्न। ला जलूज़ी। ला मोदिफ़िकास्यों। ले रिवाज़ दे सिएर्त। ले शियाँदाँ। ले राविस्माँ द लोल वी। स्तीन। ला बातार्द। ला प्रोमेसे दे ल’ओब। ले प्लेज़ीर द्य टेक्स्ट। ले देज़र्तेर। इल देज़ेर्तो देई तातारी। ल'इगुआना। दिचेरिया देल्ल’उन्तोरे। उना क्वेस्त्योने प्रिवाता। लेस्सिको फ़ामिल्यारे। ला लूना ए ई फ़ालो। इल कोंतेस्तो। अत्ते़सा सुल मारे। अगोस्तीनो। पास्तिक्चे। ला इन्वेन्सियोन दे मोरेल। ज़ामा। एल अस्तियेरो। लोस आदियोसेस। एल जुग़ेते राबियोसो। कार्तूचो। ला अमोर्ताहादा। लोस रियोस प्रोफुन्दोस। एल ओब्सेनो पाख़ारो दे ला नोचे। ला तियेंद्रा इन्दिफ़ेरेंसिया। आ पेद्रा दो रेइनो। लावूरा आर्काइका। क्रोनिका दा कासा असासिनादा। ओ रिलातो दे उम सेर्तो ओरिएन्ते। आ होरा दा एस्त्रेला। पार्दोएँ मेउ फ़िल्यो, पेर्दोआ। ओ साल दा तेरा। आ कासा दा कैबे़सा दे कावालो। चेवेंगुर। कोत्लोवान। मेल्की बेस। स्यानिन। ओचारोवान्नी स्त्रान्निक। दवोरेत। ज़ापिस्की इज़ पोद्पोल्या। बेद्नीए ल्यूदि। सक्लेप्य सिन्नेम। सैनातोरियम पॉड क्लेप्सीद्रों। निएनास्य्त्स्ये। इन्सात्याबिल्नोश्च। पोपियोली इ डायमांती। सोलारिस। प्रोसेस नास्तावाए। ओस्त्रिये स्लेदोवाने व्लाकी। वलेल्का स यारोमीरा। इंद्रज़िस्लाव। एस्तेर कोवी। अज़ एम्बेर ट्राजेदियाया। पार्हुज़ामोशोक। सतांतांगो। कुसामाकुरा। मोन। हिगान सुगी मादे। हाकाई। होहोक्यो। हाका मोरी। नेदारेमोनो। नामी नो तोउ। वेइचेंग। बाईलुयुआन। हुओझे। फ़ानशेन। शूशेंग। तीयेन मीमी। रिज़ाल फ़ी अश-शम्स। मूसिम अल-हिज़रा इला अश-शमाल। अस-सुल्तान अल-हाइर। अदास। अश-शम्स फ़ी यौम ग़ाइम। तुतुनामायानलार। गेसे यारिसी। बिर डेलिनिन हतिरात दफ़्तरी। डॉक्टर ग्लास। ब्रान्ड। ओ कप्तान मिख़ालिस। तो त्रितो स्तेफ़ानी। ला विदा ब्रेव। एल लुगार सिन लिमितेस। ला ओरा दे ला एस्ट्रेला...

किताबों की इस सूची के बनने में इन किताबों को पढ़ने की कल्पना शामिल नहीं है। कम से कम अभी नहीं। मैं बस चाहता हूँ कि वे मेरे पास हों, जैसे कुछ लोग हमारे जीवन में इसलिए नहीं आते कि हम उनसे मिलें, बल्कि इसलिए कि दुनिया में उनका होना हमें पर्याप्त लगता है। ये किताबें भी ऐसी ही उपस्थित-अनुपस्थित संगत होंगी। उनकी पीठें मेरी ओर रहेंगी और मैं उनके भीतर बसे जीवनों के बारे में सोचता रहूँगा। अनपढ़ी किताबों में एक पूरा भविष्य बचा रहता है—और भविष्य, पढ़े हुए अतीत से अधिक विशाल होता है। अभी मैं उन्हें जमा करता रहूँगा; इसलिए कि अपने भीतर की रिक्तता को वस्तुओं से भरना नहीं चाहता, बल्कि उसके चारों ओर कुछ संसार खड़े करना चाहता हूँ। 

फिर चीज़ें  

कनिमोझी। याझिनी। पूंगुझली। वेण्णिला। तेंद्रल। वेन्नेला। मौनिका। सिरिवेन्नेला। हरिणी। मयूरी। चैत्रा। हंसिका। निसर्गा। श्रावणी। निलावु। मालविका। मिझि। तुम्बी। निलीना। अमूल्या। अवंतिका। अनघा। अरुणिमा। ऐश्वर्या। इळमति। कावेरी। कार्तिका। कस्तूरी। कोकिला। माधवी। मल्लिका। मीनाक्षी। नीलांबरी। नित्यश्री। पद्मिनी। पावनी। रेवती। रोहिणी। शारदा। अदिति। अमलिका। अरुंधती। इंदुलेखा। ईशिता। केया। कुहू। केतकी। कादंबरी। चंद्रिमा। तिलोत्तमा। दोलन। निरुपमा। पल्लवी। माधवीलता। मृणालिनी। शिउली। सोहिनी। सुवर्णलता। हैमंती। ऊर्मिमाला। नाज़िश। माहिरा। गुलरुख़। नाज़नीन। माहताब। शगुफ़्ता। दिलआरा। मेहरनाज़। रुख़सार। फ़रहत। बेला। जूही। शेफाली। धानी। चाँदनी। रागिनी। सांझी। सुरमई। कोयली। मधुकरी। सोनझरी। मृणाल। मृण्मयी। शर्वरी। वैजयंती। रानू। उर्मिला। यामिनी। गौरी। सायली। कांचन। जुई। प्राजक्ता। पारिजात। मुक्ता। मंजिरी। अमृता। शैला। देवयानी। राधिका। चारुशीला। नंदिनी।

ये मेरे कमरे के पौधों के नाम होंगे और ये स्त्रियों के नाम हैं। तुम सुनो तो कहूँ कि इन स्त्रियों के नामों में पौधों की स्मृति है और पौधों में स्त्रियों की। मैं इन नामों को पुकारता नहीं; इनके सहारे अपने भीतर की उन जगहों तक जाता हूँ, जहाँ मैंने स्वयं को अलग-अलग नामों से छिपा रखा है। ये नाम मेरे लिए संबोधन नहीं, आत्मस्वीकृतियाँ हैं; मैं उन्हें लिखता हूँ कि अपने बारे में कुछ कह सकूँ, बिना यह स्वीकार किए कि मैं अपने बारे में कुछ कह रहा हूँ।

फिर कुछ और चीज़ें 

नींद। सु-जाग-क्षण। सु-नींद-क्षण। पानी। धूप। हवा। चलना। दौड़ना। व्यायाम। आसन। विश्राम। प्राणायाम। श्वास। ध्यान। मौन। धैर्य। अनुशासन। नियमितता। स्वच्छता। स्नान। दंत-सफ़ाई। धुलाई। धूप-सेवन। फल। सब्ज़ी। सलाद। अंकुरण। दाल। अनाज। मिलेट। मेवा। बीज। दही। छाछ। सूप। सत्त्व। प्रोटीन। रेशा। जलयोजन। संयम। अल्पाहार। सुपाच्य-भोजन। घर-भोजन। ताज़गी। विविधता। मिताहार। चबाना। सीढ़ियाँ। प्रकृति। बाग़वानी। मिट्टी। संगीत। पठन। लेखन। चित्रकारी। कविता। हँसी। मित्रता। संवाद। आत्मीयता। एकांत। प्रसन्नता। जिज्ञासा। सृजन। शौक़। यात्रा। कृतज्ञता। आत्म-संवाद। तनाव-मुक्ति। स्क्रीन-विराम। नेत्र-विराम। कार्य-विराम। मुद्रा-सुधार। गर्दन-व्यायाम। पीठ-व्यायाम। पाद-व्यायाम। सूर्य-नमस्कार। शरीर-जाँच। रक्तचाप-जाँच। दंत-जाँच। नेत्र-जाँच। टीकाकरण। चिकित्सकीय-सलाह। औषधि-संयम। धूम्रपान-विराम। मद्य-संयम। कैफ़ीन-संयम। चीनी-संयम। नमक-संयम। सकारात्मकता। आत्म-देखभाल। सहजता। जिद्दू। 

तन-मन को स्वस्थ रखने की यह शब्द-संकेत-सूची दरअस्ल जीवन को थोड़ा कम बिगाड़ने की सूची है। ठीक समय पर सोना, पर्याप्त पानी पीना, चलना, सजग साँस लेना, कम खाना, कुछ देर चुप रहना—इनमें कोई आध्यात्मिकता नहीं है। आध्यात्मिकता की ज़रूरत भी नहीं। मनुष्य का शरीर बहुत कुछ स्वयं जानता है, हमारी अधिकांश समझदारी उसे लगातार बाधित न करने में है। स्वास्थ्य कोई उपलब्धि नहीं, एक ऐसी साधारण स्थिति है जिसकी अनुपस्थिति में हमें उसके मूल्य का पता चलता है।


अंत में भी चीज़ें 

सलीक़ा। अनुशासन। समयपालन। विनम्रता। आत्मीयता। शालीनता। स्पष्टता। एकाग्रता। तल्लीनता। जिज्ञासा। धैर्य। संयम। तत्परता। विश्वसनीयता। ज़िम्मेदारी। ईमानदारी। सक्रियता। रचनात्मकता। कल्पनाशीलता। मौलिकता। सूझबूझ। विवेक। सहयोग। संवेदनशीलता। सहानुभूति। सद्भाव। सौजन्य। शिष्टाचार। आत्मविश्वास। सहजता। स्थिरता। गंभीरता। प्रसन्नता। उत्साह। ऊर्जा। कर्मठता। प्रतिबद्धता। निष्ठा। निरंतरता। स्वावलंबन। सावधानी। तैयारी। श्रवण। समझ। पठन। लेखन। अध्ययन। अधिगम। प्रश्न। चिंतन। मनन। परख। जाँच। संपादन। परिशुद्धता। सुव्यवस्था। प्राथमिकता। योजना। निष्पादन। समीक्षा। संवाद। अभिव्यक्ति। प्रस्तुति। तर्क। तथ्य। प्रमाण। संदर्भ। शोध। स्मृति। दृष्टि। अंतर्दृष्टि। निर्णय। पहल। नेतृत्व। भरोसा। सम्मान। उदारता। क्षमा। आत्मसंयम। आत्मसम्मान। मौन। विनोद। ताज़गी। स्फूर्ति। सादगी। सौंदर्य। गरिमा। उपस्थिति। संतुलन। शांति। दक्षता। प्रभावशीलता। सज्जनता। सौम्यता। लगन। निपुणता। पारदर्शिता। निष्पक्षता। आत्मालोचन। जिजीविषा।

इन दिनों दफ़्तर में मेरा जो आदमी बैठता है, उसे मैंने कभी चुना नहीं। वह किसी और के नाप की वर्दी है, जिसे मैं दो ऋतुओं से इस तरह पहनता आया कि अब उसी के आकार का हो गया हूँ; कंधे वहीं झुके हैं, जहाँ उसकी सिलाई झुकी थी। सुबह जब मैं उसमें दाख़िल होता हूँ तो ख़ुद को दरवाज़े पर छोड़ आता हूँ, जैसे कोई मेहमान जूते उतारता है और शाम को जब उन जूतों को उठाता हूँ तो वे कुछ और भारी लगते हैं। मैं उस आदमी के पीछे खड़ा रहता हूँ और उसे शब्द जोड़ते, फ़ाइलें बाँधते, ठीक समय पर सिर हिलाते देखता रहता हूँ, अपनी ही जगह को शीशे के बाहर से झाँकते किसी राहगीर की तरह। उसके दिनानुदिन का हर हिसाब ठीक रहने लगा है, उसकी उँगलियों ने अधिक भूलें नहीं की हैं। पर जब दिन के अंत में मैं अपना जोड़ लगाता हूँ तो हमेशा एक वाक्य कम पड़ता है और मैं जानता हूँ कि वह वाक्य किसी ने चुराया नहीं, वह वही है जो मैंने कभी ख़र्च ही नहीं किया। मैं उस वाक्य के सम्यक ख़र्च की चिंता में खिड़की के बाहर गिरते शब्द गिनता रहता हूँ।

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